वर्ष 2022-23 में औद्योगिक गतिविधियां कहीं अधिक बेहतर हुई हैं
वर्ल्ड बैंक की कारोबारी सुगमता की बात करें तो भारत इसमें भी लगातार सुधार कर रहा है। इस मामले में वर्ष 2020 में भारत की रैकिंग 63 रही थी। सबसे बड़ी बात यह है कि तब भारत ने चीन को भी पीछे छोड़ दिया था। लेकिन वर्ष 2020-21 के दौरान जब कोविड-19 वैश्विक महामारी फैली और इसके प्रभाव को कम करने के लिए सरकार को देश भर में उद्योगों को बंद करना पड़ा तो औद्योगिक उत्पादन में गिरावट आई और (-) 8.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। हालांकि उसके बाद भारत के उद्योगों में लगातार तेजी से सुधार दर्ज किया गया। अप्रैल से सितंबर 2022 की अवधि में आईआईपी की कुल वृद्धि दर 7.0 प्रतिशत दर्ज की गई। वर्ष 2021-22 के दौरान कुल औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में 11.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं वर्ष 2022-23 में औद्योगिक गतिविधियां कहीं अधिक बेहतर हुई।

पीएलआई स्कीम से जुड़ी योजनाओं के लिए करीब दो लाख करोड़ रुपए का प्रावधान
पीएलआई स्कीम से जुड़ी तमाम योजनाओं के लिए भारत सरकार की ओर से दो लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। प्रोडक्शन का औसतन पांच प्रतिशत इंसेंटिव के रूप में दिया गया है। यानि सिर्फ पीएलआई स्कीम के द्वारा ही आने वाले पांच साल में 520 बिलियन डॉलर का प्रोडक्शन भारत में होने का अनुमान है। इसके अलावा जिन सेक्टर के लिए पीएलआई योजना बनाई गई है, उन सेक्टर में अभी जितनी वर्क फोर्स काम कर रही है, वो करीब-करीब दोगुनी हो जाएगी। इससे इंडस्ट्रीज को तो प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट में लाभ होगा ही साथ ही देश में आय बढ़ने से जो डिमांड बढ़ेगी, उसका भी लाभ होगा, यानि दोगुना फायदा। वहीं इस स्कीम का एक व्यापक असर देश की MSME सेक्टर पर होने वाला है।
विश्व का मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की ओर बढ़ रहा देश
इससे देश विश्व का मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। पीएलआई स्कीम से देश के उत्पादकों में ऐसे उत्साह आया कि ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग रिस्क इंडेक्स- 2021 में भारत दूसरे स्थान पर पहुंच गया। तब चीन भी इस रैंकिंग में दूसरे स्थान पर रहा था। वहीं 2023 में भारत का मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट 13 महीने के उच्चतम स्तर 57.8 पर पहुंच गया है। इससे स्पष्ट होता है कि देश विनिर्माण क्षेत्र में लगातार सुधार कर रहा है। उल्लेखनीय है कि मैन्युफैक्चरिंग अर्थव्यवस्था के हर सेगमेंट को ट्रांसफॉर्म करती है। मैन्युफैक्चरिंग बढ़ने से एक नया इकोसिस्टम क्रिएट होता है जिससे लघु उद्योग को खासतौर से एमएसएमई के लिए कई नए अवसर सामने आते हैं।
निर्यात बना रहा है नए रिकॉर्ड
पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों और नीतियों से देश का निर्यात पहले से अधिक बढ़ गया है। केवल इतना ही नहीं देश का निर्यात अब नए रिकॉर्ड भी बना रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार में हुए लगातार सुधारों से इसका पता लगाया जा सकता है। 2018-19 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 411.9 बिलियन डॉलर था जो 2019-20 में 477.8 बिलियन डॉलर हो गया। वहीं वित्त वर्ष 2020-21 में यह 577 बिलियन डॉलर पर जा पहुंचा। इसके पश्चात वित्त वर्ष 2021-22 में विदेशी मुद्रा भंडार 633.6 बिलियन डॉलर हो गया। इस वृद्धि की आर्थिक समीक्षा यही दर्शाती है कि भारत के निर्यात में लगातार बढ़ोतरी हुई है जिससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी तेजी से बढ़ रहा है।
देश में तेजी से बढ़ रहा है पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का निर्यात
भारत में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का निर्यात भी बढ़ रहा है। भारत में रिफाइनरी की मदद से विदेशों से लाया गया कच्चा तेल रिफाइन करने के बाद दूसरे देशों में निर्यात किया जाता है। इन रिफाइन प्रोडक्ट्स के निर्यात से भारत को लाभ कमाने के बेहतर अवसर मिल रहे हैं। भारत द्वारा निर्यात किए जाने वाले वस्तुओं में दूसरे नंबर पर रिफाइन किए गए पेट्रोलियम उत्पाद ही हैं।
भारतीय इंडस्ट्री को मिल रहा लाभ ही लाभ
मार्च 2020 में पीएलआई योजना की शुरुआत के बाद से घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा तो मिला ही है साथ ही साथ आयात बिलों में भी बड़ी कटौती हुई है। दरअसल, अब देश में ऐसी तमाम प्रोडक्ट्स का निर्माण भी हो रहा है जिन्हें पहले बाहर से आयात किया जा रहा था। इनमें से कई उत्पाद तो एमएसएमई सेक्टर की कंपनियां कर रही हैं। इससे कंपनियों को फायदा मिल रहा है। वहीं पीएलआई योजना से घरेलू इकाइयों में निर्मित उत्पादों की बिक्री में वृद्धि पर भी कंपनियों को प्रोत्साहन मिल रहा है।

युवाओं को रोजगार के नए अवसर बने
पीएलआई योजना आज भारत में इकाइयों को स्थापित करने के लिए विदेशी कंपनियों को भी आमंत्रित कर रही है। हमारी दवाइयां, वैक्सीन, गाड़ियां, फोन आदि हमारे देश में ही बनें इस दिशा में पीएलआई स्कीम बड़ा कदम माना जा रहा है। कोरोना काल के दौरान भी इस सेक्टर में बीते साल 35 हजार करोड़ रुपए का प्रोडक्शन हुआ। यही नहीं, कोरोना के इस कालखंड में भी इस सेक्टर में करीब-करीब 1300 करोड़ रुपए का नया इंवेस्ट हुआ। इससे हजारों नई जॉब्स इस सेक्टर में तैयार हुई हैं। जाहिर है सरकार मेड इन इंडिया के जरिए प्रोडक्शन को बढ़ाने पर जोर दे रही है।
ये है पीएलआई योजना
दरअसल, भारत को आत्मनिर्भर बनाने, मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं और निर्यात को बढ़ाने के लिए के लिए केंद्रीय बजट 2021- 22 में पीएलआई योजना की घोषणा हुई थी। सरकार ने घरेलू उत्पादन को बढ़ाने और आयात को कम करने के लिए 13 प्रमुख क्षेत्रों के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाएं लागू की है। इसका उद्देश्य घरेलू कंपनियों को देश में उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसमें सरकार भारत में बने प्रोडक्ट की बिक्री के आधार पर इंसेंटिव देती है। इसमें ऑटोमोबाइल, ऑटो कंपोनेंट्स, फार्मा, फूड प्रोडक्ट्स और सोलर पीवी मॉड्यूल्स आदि शामिल है।
भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना
उल्लेखनीय है कि पीएलआई स्कीम की बदौलत भारत निर्यात के नए रिकॉर्ड बना रहा है। इसके साथ-साथ देश की युवा शक्ति के लिए रोजगार सृजन के दिशा में भी तेजी आई है। PLI स्कीम का नतीजा रहा था जब बीते वर्ष के अंत में भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना था। उस समय ये खबर सुनकर प्रत्येक देशवासी का सीना गर्व से चौड़ा हो गया था। वाकई यूके जैसे विकसित देश को पछाड़कर आगे निकलना कोई आसान बात नहीं थी। मगर PLI योजना ने जिस तरीके से देश को नई दिशा दी है वह काबिल-ए-तारीफ है। (एएमएपी)



