आरोपित जयेश पुजारी उर्फ शाकिर का कबूलनामा।
पीएफआई पर प्रतिबंध लगने के बाद शाकिर को लगने लगा कि यदि पीएफआई प्रतिबंधित हो सकती है तो संघ पर भी प्रतिबंध लगना चाहिए। वहीं केंद्रीय मंत्री गडकरी के संघ के बेहद करीबी होने की वजह से शाकिर उनसे बेहद नफरत करने लगा। इसी के चलते उसने बेलगाव कारागार से गडकरी के कार्यालय को फोन कर धमकाया था। शाकिर ने जेल में रहते हुए बम बनाने का प्रशिक्षण लिया। कर्नाटक की जेल में उसे 24 घंटे मोबाइल और इंटरनेट सुविधा उपलब्ध थी। शाकिर को जेल में सारी सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए अज्ञात लोगों ने एक वर्ष में 18 लाख रुपये खर्च किए। जयेश पुजारी जब बेंगलुरु जेल में था तब 2014 में वह पीएफआई के नेशनल एग्जिक्यूटिव कौंसिल सचिव मुहम्मद अफसर पाशा के संपर्क में आया। मुहम्मद पाशा के इशारे पर जयेश उर्फ शाकिर ने गडकरी को धमकाया था। खास बात यह है कि मुहम्मद पाशा 2003 में बांग्लादेश के ढाका में हुए विस्फोट में संलिप्त था। पाशा प्रतिबंधित एलटीटीई के भी संपर्क में था। शाकिर 2014 से 2018 के दौरान पीएफआई के टी. नासिर उर्फ कैप्टन और फारूख के संपर्क में था। इन्हीं दोनों ने जयेश को बम बनाने की ट्रेनिंग दी थी।
बतौर शाकिर मुहम्मद पाशा के मोबाइल में एक खास तरह का सॉफ्टवेयर था। इसके चलते यह लोग जब भी जेल से किसी को फोन लगाते थे उनकी काल ट्रेस नहीं होती थी। इसकी वजह से जयेश ने जेल से पाकिस्तान, सूडान, नाइजीरिया और पोलैंड में फोन करने के बावजूद उसकी काल ट्रेस नहीं होती थी। शाकिर ने विदेशों में किसे और क्यों फोन किए, इसकी जानकारी अब तक सामने नहीं आ सकी है। अब एनआईए इस मामले की जांच कर रही है। नतीजतन आने वाले दिनों में कुछ और चौंकाने वाली बातें सामने आने की उम्मीद है।(एएमएपी)



