13 फरवरी: विश्व रेडियो दिवस।
उनका उत्तर था: रेडियो ज्ञान बढाता है मनोरंजन करता है और सूचनाएं देता है। रेडियो के साथ-साथ आप अपने काम भी कर सकते हैं। रेडियो कभी समाप्त नहीं होगा।
रेडियो… आवाज़ों के माध्यम से दुनिया को जोड़ता है, कहानियों को जीवंत करता है और हर दिल तक अपनी अनूठी तरंगों से पहुँचता है।
रेडियो ने… चाहे खबरें हों, संगीत हो, ज्ञानवर्धक चर्चाएँ हों या मनोरंजन… हमेशा लोगों के जीवन में एक ख़ास जगह बनाई है। ये ना सिर्फ़ अतीत की ख़ूबसूरत यादें ताज़ा करता है, बल्कि आज भी डिजिटल युग में अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है।
रेडियो… एक अनमोल धरोहर, जो हमें यादों की गलियों में ले जाती है। चाहे वह भक्ति संगीत की सुकून भरी धुन हो, बॉलीवुड हिट्स की ऊर्जा, बिनाका गीत माला की आइकॉनिक होस्टिंग, या 90 के दशक का रोमांस… हर धुन हमें भावनाओं और यादों के उस सुनहरे दौर में वापस ले जाती है।
हर साल 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस मनाया जाता है ताकि लोगों के जीवन को आकार देने, सूचना फैलाने और दुनिया भर में संचार को बढ़ावा देने में रेडियो की शक्ति को पहचाना जा सके। 2011 में यूनेस्को द्वारा घोषित और 2012 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनाया गया, यह दिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बढ़ावा देने और दूरदराज के क्षेत्रों में अंतराल को पाटने में रेडियो की भूमिका पर प्रकाश डालता है। हर साल, एक विशिष्ट थीम समाज में रेडियो के विकसित होते महत्व पर केंद्रित होती है। वर्ल्ड रेडियो डे 2025 की थीम- रेडियो और जलवायु परिवर्तन।”
विश्व रेडियो दिवस को सार्थक, प्रासंगिक और यादगार बनाने के लिए हम इतना तो कर ही सकते हैं कि इस जादुई माध्यम का सम्मान करें और उन अनमोल यादों को संजोएं, जिन्हें रेडियो हमारे जीवन में बुनता आया है।
रेडियो… लोगों को जानकारी देने, प्रेरित करने और जोड़ने के लिए शाश्वत जीवनरेखा रहा है। इसमे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “मन की बात” भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। यह कार्यक्रम सिर्फ शब्दों का नहीं, बल्कि देशवासियों की सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा का संगम है। हर कहानी, हर विचार हमें जोड़ता है और आगे बढ़ने की ताकत देता है।
पूरे विश्व में तेजी के साथ बढ़ रही तकनीकी और बदलते नए नए प्लेटफार्मों के चलते रेडियो आज भी विश्व स्तर पर सबसे विश्वसनीय और व्यापक रूप से उपयोग का साधन है। रेडियो समाचार, शिक्षा, मनोरंजन का प्रमुख साधन है। इसके अलावा रेडियो विविध भाषाओं और संस्कृतियों वाले देश में, सामुदायिक रेडियो लोक संगीत और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने का भी एक सशक्त माध्यम है। रेडियो ने दुनिया भर के लोगों के जीवन को बदला है।
वर्तमान में, भारत में 481 सामुदायिक रेडियो स्टेशन कार्यरत हैं, और लगभग 200 अन्य विभिन्न चरणों में हैं। वर्ष 2014 में केवल 140 सामुदायिक रेडियो स्टेशन थे, लेकिन जनवरी 2024 तक यह संख्या बढ़कर 481 हो गई है। यह इस माध्यम की प्रभावशीलता और बढ़ती संभावनाओं को दर्शाता है।
विश्व रेडियो दिवस हमारे लिए एक अवसर है कि हम रेडियो के महत्व को फिर से याद करें, जो शिक्षा के प्रसार, समाज को जागरूक करने और लोगों के मनोरंजन का अद्वितीय माध्यम बना हुआ है। रेडियो ने सदियों से न केवल सूचना साझा की है, बल्कि एक सशक्त और प्रभावी मंच के रूप में लोगों को जोड़ने का काम किया है।
यह संचार का सबसे पुराना और सबसे विश्वसनीय साधन है, जो आज भी अपने सरलता, सुलभता और प्रभावशीलता के कारण लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बना हुआ है। चाहे वह गाँवों में रहने वाले लोग हों, या शहरों के लोग, रेडियो ने हमेशा हर व्यक्ति तक आवाज़ पहुंचाने का काम किया है।