अब फेक न्यूज फैलाने वालों की खैर नहीं है। हाल ही में लोकसभा में पेश नए विधेयक की वजह फर्जी खबरें फैलाने वालों के लिए कड़े प्रावधान तय किए गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में भारतीय न्याय संहिता विधेयक, 2023 पेश किया। प्रस्तावित विधेयक को समीक्षा के लिए स्थायी समिति को भेजा गया है। विधेयक की धारा 195 के तहत एक प्रावधान है जो भारत की संप्रभुता और सुरक्षा को खतरे में डालने वाली ‘फर्जी खबर या भ्रामक जानकारी’ फैलाने वालों से संबंधित है। ऐसा करने वालों को तीन साल तक की कैद की सजा दी जाएगी।विधेयक की धारा 195 (1) डी में लिखा है, “यदि कोई भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता या सुरक्षा को खतरे में डालने वाली झूठी या भ्रामक जानकारी बनाता है या प्रकाशित करता है, तो कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जाएगा।”
यह अनुभाग नए प्रस्तावित बिल के अध्याय 11 के तहत ‘सार्वजनिक शांति के खिलाफ अपराधों’ के तहत ‘राष्ट्रीय एकता के लिए प्रतिकूल आरोप, दावे’ विषय के तहत शामिल है। ‘राष्ट्रीय एकता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले आरोप, दावे’ से संबंधित प्रावधान भारतीय दंड संहिता की धारा 153बी के तहत थे।
गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लोकसभा में तीन विधेयक पेश किए जिनका उद्देश्य भारतीय नागरिकों को न्याय देना और संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों की रक्षा करना है। बिल पेश करते हुए अमित शाह ने कहा कि इन तीन नए कानूनों की आत्मा नागरिकों को संविधान द्वारा दिए गए सभी अधिकारों की रक्षा करना होगा।(एएमएपी)
अगले महीने होने जा रहे तीन दिवसीय जी-20 सम्मेलन को लेकर दिल्ली के सौंदर्यकर्ण का काम जोरों पर है। इसके लिए कई प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, लेकिन इन प्रोजेक्ट्स की फंडिंग कौन कर रहा है। इसे लेकर आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच बहस छिड़ गई है। आप का दावा है कि कुछ को छोड़कर बाकी सारे प्रोजेक्ट्स के लिए दिल्ली सरकार ने फंडिंग की है, जबकि बीजेपी का कहना है कि केंद्र के फंड से दिल्ली के सौंदर्यकरण के काम हो रहे हैं। बीजेपी ने तो आप को यहां तक चुनौती दी है कि अगर अरविंद केजरीवाल की सरकार ने पैसा खर्च किया है तो वह इसका सबूत पेश करें।दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना की निगरानी में राजधानी में सारे प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। इनमें पेड़ लगाना, दीवारों पर पेंटिंग, साइनेज और लाइट लगाना, तोड़-फोड़ और पुनर्निमाण जैसे कार्य शामिल हैं। यह बहस तब शुरू हई जब भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली इकाई के प्रमुख वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि दिल्ली में जी-20 सम्मेलन से संबंधित जो भी विकास कार्य दिल्ली सरकार और म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन कर रहे हैं, उसके लिए केंद्र सरकार फंड भेज रही है। सचदेवा ने कहा कि अगर केजरीवाल सरकार ने अपनी घोषित योजनाओं पर काम किया होता तो जी-20 से पहले दिल्ली के बड़े बाजार आज चमक रहे होते।
आप का बीजेपी पर आरोप
इस पर आम आदमी पार्टी ने भी पलटवार किया और कहा कि कुछ योजनाओं को छोड़कर बाकी सभी के लिए दिल्ली सरकार ने फंडिंग की है। आप ने कहा कि सिर्फ एनडीएमसी और एनएचएआई के प्रोजेक्ट्स के लिए केंद्र सरकार ने पैसा भेजा है। आम आदमी पार्टी ने बीजेपी पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कितनी आश्चर्य की बात है कि आप सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों को बीजेपी अपना बताकर क्रेडिट ले रही है। पार्टी ने कहा कि दिल्ली सरकार के पीडब्ल्यूडी विभाग ने पीडब्ल्यूडी सड़कों पर पैसा खर्च किया और एमसीडी सकड़ों के लिए एमसीडी ने फंडिंग की है। केंद्र सरकार की ओर से सिर्फ एनडीएमसी और एनएचएआई सड़कों के लिए फंडिंग की गई। आप ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस स्तर की राजनीति से देश का कोई भला होने वाला नहीं।
बीजेपी ने दी चुनौती
आप के इस बयान के बाद बहस और ज्यादा बढ़ गई और बीजेपी नेता वीरेंद्र सचदेवा ने चुनौती दी कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एक प्रोजेक्ट का नाम बताएं, जिसकी फंडिंग उन्होंने की है। उन्होंने यह भी कहा कि यह बहुत ही शर्मनाक है कि कैसे अरविंद केजरीवाल और उनके मंत्री केंद्र सरकार के कामों का क्रेडिट लेने की कोशिश कर रहे हैं।(एएमएपी)
कहते हैं कि एक तस्वीर हजार शब्दों के बराबर होती है लेकिन, कई मामलों में यह असफल प्रयासों की एक गंभीर याद बनकर ही रह जाती है। कांग्रेस पार्टी में भी यही हाल है। राहुल गांधी की ‘जादू की झप्पी’ पंजाब और राजस्थान में तो काम नहीं कर पाई लेकिन, क्या कर्नाटक में कमाल कर पाएगी? यह यक्ष प्रश्न है। सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि करीब 6 महीने बाद कर्नाटक में विधानसभा चुनाव होने हैं और प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार और नेता प्रतिपक्ष और पूर्व सीएम सिद्धारमैया के बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा है, जिसे सुधारना राहुल गांधी के लिए बड़ा टास्क है।
राजस्थान में चुनाव के ठीक बाद जब सचिन पायलट और अशोक गहलोत खेमे के बीच लड़ाई देखने को मिली तो राहुल गांधी नजर आए। उन्होंने अपनी ‘जादू की झप्पी’ के फॉर्मूले को अपनाने की कोशिश भी की लेकिन, काम नहीं आई। राजस्थान में अशोक गहलोत और पायलट के बीच कितनी कटुता है इसका सबूत हालिया घटनाक्रमों से पता लगता है। जब गहलोत कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने ही वाले थे और पायलट के पास सीएम की कुर्सी जाने वाली थी तो बवाल हो गया। गहलोत गुट के विधायकों ने इस्तीफे तक की धमकी दे दी। खुद गहलोत ने सोनिया गांधी से मिलकर पायलट को सीएम न बनाने की वकालत कर डाली।
पंजाब में तो हाल इससे बुरा हुआ है। चुनाव से पहले प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू और चरणजीत सिंह चन्नी के बीच सीएम कैंडिडेट को लेकर जंग तेज हो गई थी। राहुल गांधी को कई बार संभालने की कोशिश करनी पड़ी। आखिरकार चन्नी के सिर पर सीएम कैंडिडेट का ताज सजा। कांग्रेस खेमा बंट गया। नतीजन कांग्रेस पार्टी चुनाव में बुरी तरह हारी यहां तक कि चन्नी और सिद्धू अपनी सीट भी नहीं बचा पाए।
कर्नाटक में क्या होगा
अब कर्नाटक के बारे में बात करते हैं। यहां आगामी 6 महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके अतिरिक्त इस वक्त राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा भी इसी राज्य में है। 1,000 किलोमीटर की यात्रा पूरी करके राहुल गांधी समेत अन्य कांग्रेसी इस वक्त कर्नाटक में यात्रा को आगे बढ़ा रहे हैं। निसंदेह यहां कांग्रेस का संगठन मजबूत है, जिससे भाजपा के पसीने छूट सकते हैं। कांग्रेस के पास भ्रष्टाचार वह हथियार है जिसका इस्तेमाल वह भाजपा के खिलाफ करना चाहती है।
लेकिन, यहां भी एक पेंच है। देश की ग्रैंड ओल्ड पार्टी के इस राज्य में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार के बीच अंदरूनी कलह किसी से छिपी नहीं है। राहुल गांधी दोनों के बीच इस तथ्य से अवगत हैं। जानते हैं कि दोनों मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा रखते हैं।
अभी हाल ही में, राहुल गांधी ने यात्रा शुरू होने से पहले सिद्धारमैया के जन्मदिन पर राज्य का दौरा किया था और यह सुनिश्चित किया कि विवाद और प्रतिद्वंद्विता को समाप्त करने के लिए दोनों नेताओं ने एक साथ केक काटा। कांग्रेस के सोशल मीडिया हैंडल द्वारा एक और तस्वीर जारी की गई जिसमें दोनों नेताओं को मुस्कुराते हुए राहुल गांधी की ओर देखते हुए हाथ पकड़े हुए दिखाया गया है।
डीके शिवकुमार के प्रोमो ने बढाया पारा
लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इस तस्वीर के जारी होने के कुछ ही पल बाद शिवकुमार का एक प्रोमो सामने आया, जिसमें उन्हें कांग्रेस के मुख्य नेता के रूप में दिखाया गया। जिसके बाद सिद्धारमैया और शिवकुमार खेमे के बीच कलह बढ़ गया है। देखने वाली बात होगी कि क्या इसका असर कर्नाटक विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा?
जी-20 समारोह में राष्ट्राध्यक्षों के साथ पहुंचीं उनकी पत्नियों ने पूसा इंस्टिट्यूट परिसर का दौरा किया। इस दौरान ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की पत्नी अक्षता मूर्ति ने बासमती चावल और रागी को खासा पसंद किया। पूसा इंस्टिट्यूट में मेहमानों को खेती और उससे जुड़े प्रयोगों से रूबरू कराया गया। साथ ही महिला किसानों ने उन्हें मोटे अनाज के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।सुनक की पत्नी अक्षता मूर्ति, जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा की पत्नी योको किशिदा और विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा की पत्नी रितु बंगा जी-20 में आए नेताओं की पत्नियों के साथ शनिवार को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा पहुंचीं। विदेश मंत्री एस जयशंकर की पत्नी ने उनका स्वागत किया। पूसा के बहुउद्देश्यीय सभागार में मोटे अनाज की प्रदर्शनी लगाई गई थी। सुनक की पत्नी अक्षता मूर्ति ने बासमती चावल और रागी को खासा पसंद किया। उन्होंने बताया कि इनका प्रयोग वे ब्रिटेन में भी करती हैं। उन्होंने पूसा के विशेषज्ञों से बासमती और रागी के बारे में पूरी जानकारी ली।
ये राष्ट्र अध्यक्ष पहुंचे
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के एक अधिकारी के अनुसार, हुमायूं का मकबरा देखने के लिए अब तक अर्जेंटीना और बेल्जियम के राष्ट्राध्यक्ष, यूरोपियन यूनियन के प्रतिनिधि, नीदरलैंड के मेहमान आ चुके हैं। बेल्जियम के राष्ट्राध्यक्ष ने लोधी गार्डन जाकर वहां स्थित स्मारकों के बारे में भी जाना। यूरोपियन यूनियन के प्रतिनिधि सफदरजंग मकबरा भी घूमने गए।
महिला किसानों से मिलीं मेहमान
महिला प्रतिनिधिमंडल के स्वागत के लिए मोटे अनाज से एक बड़ी रंगोली बनाई गई थी। इसे सभी ने सराहा गया। प्रदर्शनी में मोटे अनाज से जुड़े स्टार्टअप और देश में काम कर रहे किसान उत्पादक संगठनों के उत्पाद को प्रदर्शित किया गया। विदेशी मेहमान एक घंटे से ज्यादा समय तक परिसर में रहे। मध्य प्रदेश की आदिवासी किसान लहरीबाई समेत 20 महिला किसानों से उन्होंने मुलाकात की। 11 राज्यों से आईं ये महिलाएं मोटे अनाज की खेती करती हैं। महिला किसानों ने मेहमानों को मोटे अनाज की खेती के बारे में बताया।
पहली पसंद बना हुमायूं का मकबरा
अतिथियों की पसंद हुमायूं का मकबरा रहा। अर्जेंटीना सहित कई दूसरे देश के राष्ट्राध्यक्ष हुमायूं के मकबरे का दीदार कर चुके हैं। शनिवार दोपहर दो बजे तुर्किये की प्रथम महिला एमीन एर्डोगन मकबरे के दीदार के लिए पहुंचीं। यहां उन्होंने करीब आधा घंटा बिताया। इससे पहले वह दोपहर 12 बजे कुतुबमीनार घूमने पहुंचीं। गेंदे के फूल की माला और पारंपरिक पगड़ी पहनाकर उनका स्वागत किया गया। कुतुबमीनार परिसर में वह लगभग एक घंटे तक रहीं।
फूलों की खेती को सराहा
आईएआरआई के निदेशक एके सिंह ने बताया कि प्रदर्शनी में मिलेट के अलावा डेयरी, मत्स्य पालन और फूलों की खेती को शामिल किया गया था। इनके बारे में विदेशी मेहमानों को बताया गया। प्रदर्शनी में फूलों की खेती को भी सराहा गया।(एएमएपी)
स्व सहायता समूह की महिलाओं ने गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने का काम किया शुरू।
कोरोना काल के बाद वर्ष 2022 की दिवाली बड़ी धूमधाम से मनाई जा रही है। बाजारों में मंहगाई के बावजूद भीड़ है और लोगों ने इसबार अपने घरों में लिपाई -पुताई भी की है। पुताई के लिए बड़ी मात्रा में गोबर वाला पेंट उपयोग में लाया जा रहा है ,जो दीवारों को ठंडा रखता है और कीमत भी रासायनिक पेंट की तुलना में बेहद कम है। यही नहीं रायपुर की नगर निगम की आलीशान ईमारत भी इस गोबर पेंट से जगमगा रही है।रायपुर जिले के ग्राम जरवाय के गौठान में गोवर्धन स्व सहायता समूह की महिलाओं ने गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने का काम शुरू किया हैं। गौठान में बने प्राकृतिक पेंट की मांग भी मार्केट में बनी हुई है।हीरापुर-जरवाय स्व सहायता समूह की महिलायें अब तक 3 हजार लीटर से अधिक गोबर पेंट बेच चुकीं हैं।यही नहीं रायपुर की नगर निगम की आलीशान ईमारत भी इस गोबर पेंट से जगमगा रही है।
उल्लेखनीय है कि नितिन गडकरी ने बीते 12 जनवरी, 2021 को खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग की तरफ से तैयार गोबर से बना प्राकृतिक पेंट लॉन्च किया था।अब वे देश के हर एक गांव में इस इकोफ्रेंडली पेंट की फैक्ट्री खोलना चाह रहे हैं।गोबर से पेंट बनाने वाली एक फैक्ट्री खोलने में लगभग 15 लाख रुपए का खर्च आ रहा है। यह पेंट पूरी तरह से इकोफ्रेंडली है। इसके साथ ही यह देश का ऐसा पहला ऐसा पेंट है, जो विष-रहित होने के साथ फफूंद-रोधी, जीवाणु-रोधी गुणों वाला है।
भारतीय मानक ब्यूरो के अनुसार, ये पेंट गाय के गोबर से जरूर बनता है लेकिन ये पूरी तरह से गंधहीन है। फिलहाल यह पेंट दो रूपों में उपलब्ध है – डिस्टेंपर और प्लास्टिक इम्यूलेशन पेंट के रूप में मार्केट में आया है।
ज्ञात हो कि गोबर से पेंट बनाने का एमओयू छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग और नेशनल पेपर इंस्टीट्यूट जयपुर, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग, सूक्ष्म ,लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली के बीच हुआ है।इसके तहत प्रथम चरण में राज्य के 75 चयनित गौठान में प्राकृतिक पेंट निर्माण की इकाई स्थापित की जा रही है।
छत्तीसगढ़ के गौठानों में स्व-सहायता समूह की महिलाएं और निजी संस्था गोबर से पेंट बना रही है, जो कि बिल्कुल बाजार में बिकने वाले अन्य पेंट की तरह दिखता है।रायपुर के जरवाय इलाके में गोबर से पेंट बनाने का काम हो रहा है। यहां गौठान में गोबर से इसे तैयार किया जा रहा है। इसे प्राकृतिक पेंट तथा अष्टलाभ भी कहा गया है।जरवाय गौठान की स्व सहायता समूह की अध्यक्ष धनेश्वरी रात्रे के अनुसार समूह में 22 महिलाएं ने पेंट बनाने की शुरुआत अप्रैल 2022 से की है । गोबर से पेंट बनाने के लिए महिलाओं ने जिला प्रशासन की मदद से ट्रेनिंग ली। गोबर से निर्मित पेंट आधा लीटर, एक, चार, और दस लीटर के डिब्बों में मिल रहा है । गोबर से निर्मित पेंट प्राकृतिक पदार्थों से मिलकर बनता है । इसलिए इसे प्राकृतिक पेंट भी कहते है। केमिकल युक्त पेंट की कीमत 350 रुपये प्रति लीटर से शुरू होती है। गोबर वाला पेंट 150 रुपये से शुरू है। यह पेंट एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल है साथ ही घर के दीवारों को गर्मी में गर्म होने से भी बचाता है।
इसे बनाने के लिए गोबर को पहले मशीन में पानी के साथ अच्छे से मिलाया जाता है ।फिर इस मिले हुए घोल से गोबर के फाइबर और तरल को डी-वाटरिंग मशीन के मदद से अलग किया जाता है। इस लिक्विड को 100 डिग्री में गरम कर के उसका अर्क बनता है जिसे पेंट के बेस की तरह इस्तेमाल किया जाता है। जिसके बाद इसे प्रोसेस कर पेंट तैयार होता है। कुदरती कलर्स मिलाए जाते हैं। इसमें कार्बोक्सी मिथाइल सेल्यूलोज (सीएससी) होता है। सौ किलो गोबर से लगभग 10 किलो सूखा सीएमसी तैयार होता है। कुल निर्मित पेंट में 30 प्रतिशत मात्रा सीएमसी की होती है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ग्रामीण महिलाओं को रोजगार का जरिया देने और उनकी आय बढ़ाने के लिए सभी स्कूलों में रंगाई-पोताई गोबर से बने पेंट से करने के निर्देश दिये हैं।अब स्कूलों की पुताई में इसका इस्तेमाल हो रहा है।
भारत में इस साल निपाह वायरस का खतरा मंडरा रहा है। जिसके कि आरंभिक संकेत केरल राज्य से मिले हैं। यहां के कोझिकोड में निपाह वायरस से दो लोगों की मौत की पुष्टि होने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार के दिन एक विशेषज्ञों की टीम केरल भेजी है । जहां एक व्यक्ति की मौत 11 सितंबर को हुई, वहीं दूसरे की मौत 30 अगस्त को हुई है । इसके अलावा जिस व्यक्ति की 11 सितंबर को मृत्यु हुई है, उसका नौ वर्षीय बच्चा और 24 वर्षीय रिश्तेदार भी निपाह वायरस से संक्रमित पाए गए है। यह खतरा आज सिर्फ केरल राज्य पर नहीं है, यदि इसे समय रहते नहीं रोका गया तो पूरे देश के सामने कोरोना जैसा महासंकट खड़ा हो जाएगा।केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने इसके संबंध में ताजा अपडेट दिया है। उन्होंने बताया है कि पांच नमूने परीक्षण के लिए पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में भेजे गए थे। पांच में से तीन पॉजिटिव थे, जिनमें मरने वाला व्यक्ति भी शामिल है। इसके आधार पर राज्य मंत्री ने कहा कि 30 अगस्त को जिस पहले व्यक्ति की मौत हुई, वह भी वायरस से पॉजिटिव होगा। स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज का कहना है कि नौ साल के लड़के समेत दो और लोग निपाह वायरस से संक्रमित हैं।
“हम गहनता से संपर्क का पता लगा रहे हैं – उच्च जोखिम वाले संपर्क, कम जोखिम वाले संपर्क। हम सकारात्मक परीक्षण करने वाले लोगों के संपर्क में आए हर व्यक्ति का पता लगाएंगे।” कोझिकोड में दो मौतों के बाद केरल स्वास्थ्य विभाग ने भी अलर्ट जारी किया था। कोझिकोड में पिछले दो निपाह वायरस का प्रकोप देखा गया है, एक 2018 में और दूसरा 2021 में। 2018 में पहले प्रकोप के दौरान, कुल 23 मामलों की पहचान की गई थी, जिसमें 17 लोग इस ज़ूनोटिक वायरस के शिकार थे।
क्या है निपाह वायरस
निपाह वायरस संक्रमण विभिन्न तरीकों से प्रकट हो सकता है, जिसमें स्पर्शोन्मुख (सबक्लिनिकल) मामलों से लेकर संक्रमित लोगों में तीव्र श्वसन बीमारी और घातक एन्सेफलाइटिस तक शामिल है। क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक निपाह वायरस, एक जानलेवा वायरस है, जो जानवरों से इंसानों में फैलता है। यही वजह है कि इसे जूनोटिक वायरस भी कहा जाता है। यह मुख्य रूप से फ्रूट बेट्स से फैलता है, जिसे उड़ने वाली लोमड़ी के नाम से भी जाता है। हालांकि, चमगादड़ के अलावा यह वायरस सूअर, बकरी, घोड़े, कुत्ते या बिल्ली जैसे अन्य जानवरों के जरिए भी फैल सकता है। यह वायरस आमतौर पर किसी संक्रमित जानवर के शारीरिक तरल पदार्थ जैसे खून, मल, पेशाब या लार के संपर्क में आने से फैलता है।
अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
मनुष्यों में निपाह वायरस का संक्रमण कई प्रकार की नैदानिक प्रस्तुतियों का कारण बनता है, जिसमें स्पर्शोन्मुख संक्रमण (सबक्लिनिकल) से लेकर तीव्र श्वसन संक्रमण और घातक एन्सेफलाइटिस शामिल हैं। इस मामले में मृत्यु दर 40% से 75% अनुमानित है। महामारी विज्ञान निगरानी और नैदानिक प्रबंधन के लिए स्थानीय क्षमताओं के आधार पर यह दर प्रकोप के अनुसार भिन्न हो सकती है।
लोगों या जानवरों के लिए कोई इलाज या टीका उपलब्ध नहीं है। मनुष्यों के लिए प्राथमिक उपचार सहायक देखभाल है। प्राथमिकता वाली बीमारियों की डब्ल्यूएसओ आर एंड डी ब्लूप्रिंट सूची वार्षिक समीक्षा से संकेत मिलता है कि निपाह वायरस के लिए त्वरित अनुसंधान और विकास की तत्काल आवश्यकता है। यह जानवरों की एक विस्तृत श्रृंखला को संक्रमित करता है और लोगों में गंभीर बीमारी और मृत्यु का कारण बनता है, जिससे यह सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता का विषय बन जाता है।
सबसे पहले मिला था यहां
निपाह वायरस पहली बार 1999 में मलेशिया में सुअर पालकों के बीच फैलने के दौरान पहचाना गया था। मलेशिया में पहली बार पहचाने गए प्रकोप के दौरान, जिसने सिंगापुर को भी प्रभावित किया, अधिकांश मानव संक्रमण बीमार सूअरों या उनके दूषित ऊतकों के सीधे संपर्क के परिणामस्वरूप हुए। ऐसा माना जाता है कि संचरण सूअरों के स्राव के असुरक्षित संपर्क या किसी बीमार जानवर के ऊतकों के असुरक्षित संपर्क के माध्यम से हुआ है।
इसे 2001 में बांग्लादेश में भी मान्यता दी गई थी, और तब से उस देश में लगभग वार्षिक प्रकोप के रूप में यह होता आ रहा है। पूर्वी भारत में भी समय-समय पर इस बीमारी की पहचान की गई है। बांग्लादेश और भारत के प्रकोपों में, संक्रमित फल चमगादड़ों के मूत्र या लार से दूषित फल या फल उत्पादों (जैसे कच्चे खजूर का रस) का सेवन संक्रमण का सबसे संभावित स्रोत था। इसी तरह से अन्य क्षेत्रों में संक्रमण का खतरा हो सकता है, क्योंकि कंबोडिया, घाना, इंडोनेशिया, मेडागास्कर, फिलीपींस, थाईलैंड सहित कई देशों में ज्ञात प्राकृतिक जलाशय (टेरोपस चमगादड़ प्रजाति) और कई अन्य चमगादड़ प्रजातियों में वायरस के प्रमाण पाए गए हैं।
भारत में 2001 के दौरान सिलीगुड़ी में पाया गया
बांग्लादेश और भारत में बाद के प्रकोप के दौरान, निपाह वायरस लोगों के स्राव और उत्सर्जन के निकट संपर्क के माध्यम से सीधे मानव से मानव में फैल गया। 2001 में सिलीगुड़ी, भारत में, स्वास्थ्य देखभाल सेटिंग के भीतर भी वायरस का संचरण दर्ज किया गया था, जहां 75% मामले अस्पताल के कर्मचारियों या आगंतुकों के बीच हुए थे। 2001 से 2008 तक, बांग्लादेश में दर्ज किए गए लगभग आधे मामले संक्रमित रोगियों की देखभाल के माध्यम से मानव-से-मानव संचरण के कारण थे।
इसके संकेत और लक्षण
मानव संक्रमण स्पर्शोन्मुख संक्रमण से लेकर तीव्र श्वसन संक्रमण (हल्का, गंभीर) और घातक एन्सेफलाइटिस तक होता है। संक्रमित लोगों में शुरू में बुखार, सिरदर्द, मायलगिया (मांसपेशियों में दर्द), उल्टी और गले में खराश जैसे लक्षण विकसित होते हैं। इसके बाद चक्कर आना, उनींदापन, परिवर्तित चेतना और न्यूरोलॉजिकल संकेत हो सकते हैं जो तीव्र एन्सेफलाइटिस का संकेत देते हैं। कुछ लोगों को तीव्र श्वसन संकट सहित असामान्य निमोनिया और गंभीर श्वसन समस्याओं का भी अनुभव हो सकता है। गंभीर मामलों में एन्सेफलाइटिस और दौरे पड़ते हैं, जो 24 से 48 घंटों के भीतर कोमा में चले जाते हैं।
ऐसा माना जाता है कि ऊष्मायन अवधि (संक्रमण से लक्षणों की शुरुआत तक का अंतराल) 4 से 14 दिनों तक होती है। हालाँकि, 45 दिनों तक की ऊष्मायन अवधि बताई गई है। तीव्र एन्सेफलाइटिस से बचे अधिकांश लोग पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं, लेकिन जीवित बचे लोगों में दीर्घकालिक तंत्रिका संबंधी स्थितियों की सूचना मिली है। लगभग 20% रोगियों में दौरे विकार और व्यक्तित्व परिवर्तन जैसे अवशिष्ट न्यूरोलॉजिकल परिणाम बचे हैं। ठीक होने वाले लोगों की एक छोटी संख्या बाद में दोबारा शुरू हो जाती है या विलंबित शुरुआत वाले एन्सेफलाइटिस से पीड़ित हो जाती है। इस मामले की मृत्यु दर 40% से 75% अनुमानित है। महामारी विज्ञान निगरानी और नैदानिक प्रबंधन के लिए स्थानीय क्षमताओं के आधार पर यह दर प्रकोप के अनुसार भिन्न हो सकती है।
ऐसे बच सकते हैं निपाह वायरस संक्रमण से
वर्तमान में निपाह वायरस संक्रमण के लिए विशिष्ट कोई दवा या टीका नहीं है, हालांकि डब्ल्यूएचओ के अनुसंधान और विकास ब्लूप्रिंट सिस्टम ने निपाह को प्राथमिकता वाली बीमारी के रूप में पहचाना है। गंभीर श्वसन और तंत्रिका संबंधी जटिलताओं के इलाज के लिए गहन सहायक देखभाल की सिफारिश इसमें ये करता है।
वर्तमान में, निपाह वायरस के खिलाफ कोई टीका उपलब्ध नहीं है। 1999 में सुअर फार्मों में निपाह के प्रकोप के दौरान प्राप्त अनुभव के आधार पर, उचित डिटर्जेंट के साथ सुअर फार्मों की नियमित और पूरी तरह से सफाई और कीटाणुशोधन संक्रमण को रोकने में प्रभावी हो सकता है। यदि प्रकोप का संदेह हो, तो पशु परिसर को तुरंत अलग कर दिया जाना चाहिए। संक्रमित जानवरों को मारना – शवों को दफनाने या जलाने की कड़ी निगरानी के साथ – लोगों में संचरण के जोखिम को कम करने के लिए आवश्यक हो सकता है। संक्रमित खेतों से दूसरे क्षेत्रों में जानवरों की आवाजाही को प्रतिबंधित या प्रतिबंधित करने से बीमारी के प्रसार को कम किया जा सकता है।
चूंकि निपाह वायरस के प्रकोप में सूअर और/या फल चमगादड़ शामिल हैं, इसलिए पशु स्वास्थ्य/वन्यजीव निगरानी प्रणाली स्थापित करना, वन हेल्थ दृष्टिकोण का उपयोग करके, निपाह मामलों का पता लगाने के लिए पशु चिकित्सा और मानव सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रदान करना आवश्यक है।
बीमार जानवरों या उनके ऊतकों को संभालते समय, और वध करने और मारने की प्रक्रिया के दौरान दस्ताने और अन्य सुरक्षात्मक कपड़े पहनने चाहिए। जहां तक संभव हो लोगों को संक्रमित सूअरों के संपर्क में आने से बचना चाहिए। स्थानिक क्षेत्रों में, नए सुअर फार्म स्थापित करते समय, क्षेत्र में फल वाले चमगादड़ों की उपस्थिति पर विचार किया जाना चाहिए और सामान्य तौर पर, जब संभव हो तो सुअर के चारे और सुअर शेड को चमगादड़ों से बचाया जाना चाहिए।(एएमएपी)
केजरीवाल ने की नोटों पर लक्ष्मी-गणेश की फोटो लगाने की मांग।
कांग्रेस ने दिया आंबेडकर की तस्वींर लगाने का सुझाव।
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की ओर से नोट पर लक्ष्मी और गणेश की तस्वीर की मांग किए जाने के बाद इस पर सियासत तेज हो गई है। अब इसमें कांग्रेस की भी एंट्री हो गई है। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने केजरीवाल को जवाब देते हुए पूछा है कि नए सीरीज के नोटों पर आंबेडकर की तस्वीर क्यों ना हो? उन्होंने सुझाव दिया कि नोट पर एक तरफ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीर हो तो दूसरी तरफ संविधान निर्माता बाबा साहब भीम राव आंबेडकर की तस्वीर होनी चाहिए।मनीष तिवारी ने अरविंद केजरीवाल की ओर से नोट पर ‘लक्ष्मी गणेश’ की तस्वीर की मांग किए जाने की न्यूज को शेयर करते हुए पहले तो आम आदमी पार्टी के संयोजक से सवाल किया और फिर सुझाव दिया। मनीष तिवारी ने ट्वीट किया, ”नए सीरीज के नोटों पर डॉ. बाबा साहब आंबेडकर की तस्वीर क्यों ना हो? एक तरफ महान महात्मा गांधी और दूसरी तरफ डॉ. आंबेडकर। अहिंसा, संविधानवाद और समतावाद एक का अद्वितीय साथ जो आधुनिक भारतीय प्रतिभा को प्रदर्शित करेंगे।”
गौरतलब है कि आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को केंद्र सरकार और पीएम मोदी से मांग की कि नए नोटों पर लक्ष्मी और गणेश की तस्वीर लगाई जाए। उन्होंने भरोसा जताया कि ऐसा करने से भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ेगी और डॉलर के मुकाबले रुपए की गिरावट थम जाएगी। इंडोनेशिया का उदाहरण देते हुए केजरीवाल की ओर से दिए गए इस सुझाव पर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने पलटवार किया। दोनों दलों ने कहा कि गुजरात चुनाव की वजह से केजरीवाल हिंदुत्व कार्ड खेलने की कोशिश कर रहे हैं।(एएमएपी)
महात्मा गांधी धर्म परिवर्तन के सख्त खिलाफ थे। जब जवाहरलाल नेहरू की बेटी इन्दिरा नेहरू की शादी एक पारसी युवक फिरोज से होने को थी, तब इस विवाह के विरुद्ध कई लोगों ने महात्मा गांधी को पत्र लिखे। इन लोगों ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि महात्मा गांधी को नेहरू परिवार के बहुत निकट समझा जाता था। इतने लोगों के ढेर सारे पत्रों का जवाब देना महात्मा गांधी के लिए संभव नहीं था, तो उन्होंने इस अन्तर्जातीय विवाह के विषय पर एक लेख लिखा, जोकि हरिजन सेवक (हिन्दी साप्ताहिक) और हरिजन (अंग्रेजी साप्ताहिक) के 8 मार्च 1942 के अंक में प्रकाशित हुआ। हरिजन सेवक में यह लेख ‘कुमारी इन्दिरा नेहरू की सगाई’ शीर्षक से प्रकशित हुआ। प्रस्तुत है महात्मा गांधी का हरिजन सेवक में छपा लेख:
कुमारी इन्दिरा नेहरू की सगाई
श्री फिरोज गांधी के साथ कुमारी इन्दिरा नेहरू की सगाई के सवाल को लेकर इधर मेरे पास ढेरों पत्र आये हैं। कई पत्र क्रोध और गाली से भरे हैं और कुछ में दलीलें देने की कोशिश की गई हैं। एक भी पत्र ऐसा नहीं है, जिसमें श्री फीरोज गांधी की अपनी योग्यता के बारे में कोई शिकायत हो। पत्र-लेखकों की दृष्टि में उनका एकमात्र अपराध यही है कि वह पारसी हैं। मैं हमेशा से इस बात का घोर विरोधी रहा हूं कि स्त्री-पुरुष सिर्फ व्याह के लिए अपना धर्म बदलें। मेरा यह विरोध आज भी कायम है। धर्म कोई चादर या दुपट्टा नहीं, कि जब चाहा, ओढ़ लिया, जब चाहा उतार दिया। इस व्याह में धर्म बदलने की कोई बात ही नहीं है। श्री फीरोज का नेहरू-परिवार के साथ बरसों पुराना घरोपा है; स्व० श्रीमती कमला नेहरू की बीमारी में श्री फीरोज ने अर्से तक उनकी तीमारदारी की थी। और इसीलिए कमलाजी के मन में फीरोज के लिए आत्मीय का-सा भाव था। युरोप में कुमारी इन्दिरा की बीमारी के वक्त भी इनकी बड़ी मदद रही थी। यहां से दोनों में मित्रता पैदा हुई। यह मित्रता संयमवाली थी। इसमें से आपसी चाह पैदा हुई। मगर दोनों में से किसी ने यह नहीं चाहा कि वे पण्डित जवाहरलाल की सम्मति और आशीर्वाद के बिना व्याह कर लें। जब जवाहरलाल जी को विश्वास हो गया कि इस आकर्षण की तह में स्थिरता है, तो उन्होंने अपनी स्वीकृति दे दी। लोग जानते हैं कि नेहरू परिवार के साथ मेरा कितना घना सम्बन्ध है। मैंने दोनों से बातचीत की। अगर यह सगाई स्वीकार न की जाती, तो वह क्रूरता होती। जैसे-जैसे समय बीतता जायगा, इस तरह के विवाह बढ़ेंगे, और उनसे समाज को फायदा ही होगा। फिलहाल तो हममें आपसी सहिष्णुता का माद्दा भी पैदा नहीं हुआ है। लेकिन जब सहिष्णुता बढ़कर सर्वधर्म-समभाव में बदल जायगी, तो ऐसे विवाह स्वागत-योग्य माने जायंगे। आनेवाले समाज की नवरचना में जो धर्म संकुचित रहेगा और बुद्धि की कसौटी पर खरा नहीं उतरेगा, वह टिक न सकेगा। क्योंकि उस नवनिर्माण में हरएक चीज का मूल्य नये ढंग से ही कूता जायगा। मनुष्य की कीमत उसके चरित्र के कारण होगी; धन, पदवी या कुल के कारण नहीं। मेरी कल्पना का हिन्दूधर्म, मात्र एक संकुचित सम्प्रदाय नहीं। वह तो एक महान् और सतत विकास का प्रतीक है, और काल की तरह ही सनातन है। उसमें जरथुस्त्र, मूसा, ईसा, मुहम्मद, नानक और ऐसे दूसरे कई धर्म-संस्थापकों के उपदेशों का समावेश हो जाता है। उसकी व्याख्या इस प्रकार है-
विद्वद्भिः सेवितः सर्भिनित्यमद्वेषरागिभिः
हृदयेनाभ्यनुज्ञातो यो धर्मस्तं निबोधत॥
अर्थात् जिस धर्म को राम-द्वेषहीन, ज्ञानी सन्तों ने अपनाया है, और जिसे हमारा हृदय और बुद्धि भी स्वीकार करती है, वही सद्धर्म है।
अगर धर्म ऐसा न रहा, तो वह बच नहीं सकेगा। मैं अपने पत्र लेखकों को अलग-अलग जवाब नहीं दे सका हूं, इसके लिए वे मुझे क्षमा करें। मैं उनसे निवेदन करता हूं कि वे गुस्सा छोड़ें और इस व्याह को अपने आशीर्वाद दें। मुझे मिले हुए पत्रों से अज्ञान, असहिष्णुता और अरुचि के भाव टपकते हैं, उनमें एक प्रकार की ऐसी अस्पृश्यता है, जिसे कोई ठीक नाम देना मुश्किल है, लेकिन इसीलिए वह भयंकर भी है।
महात्मा गांधी का उपर्युक्त लेख हरिजन (अंग्रेजी साप्ताहिक) में इस प्रकार प्रकाशित हुआ:
INDIRA NEHRU’S ENGAGEMENT
I have received several angry and abusive letters and some professing to reason about Indira’s engagement with Feroz Gandhi. Not a single correspondent has anything against Feroz Gandhi as a man. His only crime in their estimation is that he happens to be a Parsi. I have been, and I am still, as strong an opponent of either party changing religion for the sake of marriage. Religion is not a garment to be caste off at will. In the present case there is no question of change of religion. Feroz Gandhi has been for years an inmate of the Nehru family. He nursed Kamala Nehru in her sickness. He was like a son to her. During Indira’s illness in Europe he was of great help to her. A natural intimacy grew up between them. The friendship has been perfectly honourable. It has ripened into mutual attraction. But neither party would think of marrying without the consent and blessing of Jawaharlal Nehru. This was given only after he was satisfied that the attraction had a solid basis. The public know my connection with the Nehrus. I had also talks with both the parties. It would have been cruelty to refuse consent to this engagement. As time advances such unions are bound to multiply with benefit to society. At present we have not even reached the stage of mutual toleration, but as toleration grows into mutual respect for religions such unions will be welcomed. No religion which is narrow and which cannot satisfy the test of reason will survive the coming reconstruction of society in which the values will have changed and character, not possession of wealth, title or birth, will be the sole test of merit. The Hinduism of my conception is no narrow creed. It is a grand evolutionary process as ancient as time, and embraces the teachings of Zoroaster, Moses, Christ, Mohammed, Nanak and other prophets that I could name. It is thus defined :
विद्वद्भिः सेवितः सर्भिनित्यमद्वेषरागिभिः
हृदयेनाभ्यनुज्ञातो यो धर्मस्तं निबोधत॥
Know that to be (true) religion which the wise and the good and those who are ever free from passion and hate follow and which appeals to the heart. If it is not that, it will perish. My correspondents will pardon me for not acknowledging their letters. I invite them to shed their wrath and bless the forthcoming marriage. Their letters betray ignorance, intolerance and prejudice—a species of untouchability, dangerous because not easily to be so classified.
यह लेख हरिजन बन्धु (गुजराती साप्ताहिक) में भी प्रकाशित हुआ था। इन तीनों – हिन्दी, अंग्रेजी और गुजराती- पत्रिकाओं के संस्थापक महात्मा गांधी ही थे और इनका प्रकाशन हरिजन सेवक संघ द्वारा किया जाता था।
फिलीपींस में नलगा तूफान ने भारी तबाही मचाई है। लोगों के आशियाने उजड़ गए हैं। 60 से ज्यादा लोग लापता हैं। 3 लाख 70 हजार लोग इससे प्रभावित हुए है। इस समय फिलीपींस के प्रांत मागुइंडानाओ के कुसॉन्ग गांव में जहां तक नजर ले जा सकते हैं, सिर्फ और सिर्फ बर्बादी दिखेगी। लगातार हो रही बारिश की वजह से इलाके में बाढ़ आ गई और लोगों के जीवन पर बन आई। लापता 60 लोग का कोई पता नहीं चल पाया है। 50 लोगों की जान चली गई।दक्षिणी मागुइंदानाओ प्रांत में कम से कम 42 लोग मारे गए। करीब 370,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं और लगभग 170,000 लोगों को इलाके को खाली करा कर निकाला गया है। पूरे इलाके में रेड अलर्ट जारी किया गया है। नलगा इस साल फिलीपींस में आने वाला 16वां चक्रवात है। इसकी तबाही भी बहुत ज्यादा है। नलगा तूफान में हवाओं की रफ्तार 160 किमी प्रति घंटा तक है।
फिलीपींस विश्व स्तर पर सबसे अधिक डिजास्टर प्रोन देशों में से एक है, जिसका मुख्य कारण पैसिफिक रिंग ऑफ फायर और पैसिफिक टाइफून बेल्ट में स्थित होना है। औसतन, फिलीपींस में सालाना 20 तूफान आते हैं, जिनमें से कुछ तीव्र और विनाशकारी होते हैं।
बाढ़ और भूस्खलन ने हाल किया बेहाल
सरकार की आपदा-प्रतिक्रिया एजेंसी ने कहा कि ट्रॉपिकल स्टॉर्म नलगा से 5 अन्य लोगों की मौत हो गई, जो शनिवार तड़के पूर्वी प्रांत केमरीन सुर में पहुंचा था लेकिन तूफान का अब तक का सबसे खराब असर भारी बारिश रहा है। जिस कारण कई जगह बाढ़ और भूस्खलन हुआ। भूस्खलन ने एक आदिवासी गांव कुसियोंग में 60 से अधिक लोगों के साथ दर्जनों घरों को अपनी चपेट में ले लिया।
कुसियांग में शुक्रवार को बचावकर्मियों ने 11 शव निकाले, जिनमें ज्यादातर बच्चे थे। मंत्री नागुइब सिनारिम्बो ने कहा कि वहां पर खोज और बचाव कार्य को तेज करने के लिए सेना, पुलिस और स्वयंसेवकों सहित भारी उपकरणों को तैनात किया गया है। (एएमएपी)
जनता दल (सेक्यूलर) यानी जेडीएस के कर्नाटक के उपाध्यक्ष सैयद शफीउल्ला साहेब ने पार्टी से अपना नाता तोड़ने का फैसला किया है। शफीउल्ला ने कर्नाटक अध्यक्ष को लिखे अपने इस्तीफ में कहा कि उन्होंने जेडीएस और भाजपा के साथ गठबंधन के कारण खुद को पार्टी से अलग कर लिया है। गौरतलब है, जेडीएस ने कुछ दिनों पहले एलान किया था कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा से हाथ मिलाएगी।
इस्तीफे में शफीउल्ला ने क्या कहा?
शफीउल्ला ने जद (एस) कर्नाटक अध्यक्ष को लिखे अपने इस्तीफे में कहा, “मैं यह बताना चाहूंगा कि मैंने समाज और समुदाय की सेवा करने के लिए कड़ी मेहनत की है और पार्टी की सेवा की है, क्योंकि हमारी पार्टी धर्मनिरपेक्ष साख पर विश्वास करती है और उस पर कायम है। पर अब जब हमारे नेता कुमार स्वामी ने बीजेपी के साथ हाथ मिलाया है तो मैंने खुद को पार्टी से बाहर रहने का विकल्प चुना है।” वहीं दूसरी ओर कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि शफीउल्ला के अलावा जनता दल (सेक्युलर) के अध्यक्ष शिवमोग्गा, एम श्रीकांत और यूटी आयशा फरजाना समेत कई अन्य नेताओं ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।
दो दिन पहले ही जेडीएस ने किया गठबंधन का ऐलान
बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा की जनता दल (सेक्युलर) ने शुक्रवार को कर्नाटक में भाजपा के साथ गठबंधन की घोषणा की और 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले औपचारिक रूप से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने का ऐलान भी किया। जद (एस) नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा प्रमुख जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद यह घोषणा की।
2019 के चुनाव में कांग्रेस के साथ किया गठबंधन
जेडी (एस) ने 2019 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था। हालांकि, इस चुनाव में दोनों को हार का सामना करना पड़ा था। भाजपा ने तब कर्नाटक की 28 में से 25 सीटें जीती थीं। इसके अलावा भाजपा समर्थित एक निर्दलीय उम्मीदवार ने मांड्या निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की थी। (एएमएपी)