अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस पर कसा तंज, बोले- इनकी ‘बांटो और राज करो’ की रणनीति

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण अनुराग सिंह ठाकुर ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कांग्रेस जब भी हारती है तब ‘बांटो और राज करो’ की रणनीति अपनाने की कोशिश करती है। शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश में विकसित भारत संकल्प यात्रा के कार्यक्रमों में शामिल होने पहुंचे अनुराग ठाकुर ने संवाददाताओं से बातचीत में आईएनडीआई गठबंधन पर कटाक्ष करते हुए कहा, “ये लोग आपस में ही न्याय नहीं कर पा रहे हैं। सीटों के ऊपर तालमेल नहीं बैठ पा रहा है। उनके अधिकतर नेता गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप में या तो बेल पर हैं या तो जेल में हैं। ये क्या न्याय दिलाएंगे?”उन्होंने कहा कि कांग्रेस कभी जातीय जनगणना की बात करती है, कभी क्षेत्रवाद की बात करती है लेकिन कभी भी विकास के मुद्दे पर नहीं बोलती। देश को आगे बढ़ाने वाली चर्चा से कांग्रेस सदैव दूर भागती है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनाव में आकांक्षी जिलों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का शानदार प्रदर्शन यह दर्शाता है कि लोग विकास को वोट देते हैं। कांग्रेस ने वर्षों तक लोगों के साथ अन्याय किया। उन्हें गरीबी में धकेला, आगे नहीं आने दिया। उसके मुकाबले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के 13.5 करोड़ से ज्यादा लोगों को मात्र 5 वर्षों में गरीबी रेखा से बाहर निकाला गया है।

अनुराग ठाकुर ने कहा कि यह पहली बार है जब किसी प्रधानमंत्री ने देश के अंतिम जन के घर- द्वार तक केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को ले जाने का कार्य किया है। अभी तक विभिन्न राज्यों में लाखों लोगों को इस यात्रा के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ मिल चुका है। इससे लगातार जागरूकता बढ़ रही है और लोगों को लाभ मिल रहा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस यात्रा से देश के कोने-कोने में लोगों को सरकारी योजनाओं से अवगत कराया जा रहा है। जो लोग वंचित रह गए थे, वे सभी अपने फॉर्म भरे जा रहे हैं, जिससे उन्हें अनेक योजनाओं का लाभ मिल रहा है।

बनारस से रांची का सफर बनेगा आसान, पीएम मोदी 30 को करेंगे वंदे भारत ट्रेन की शुरूआत

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य देश समक्ष रखा है, जिसमें हर भारतवासी पूरे मनोयोग से अपना योगदान सुनिश्चित कर रहा है। हम 2047 से पहले भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाएंगे। मोदी की गारंटी की गाड़ी 2 लाख 69 हजार पंचायतों में जाकर लोगों को भारत सरकार की योजनाओं की जानकारी और लाभ सुनिश्चित कर रही हैं। ये यात्रा विश्वास और संकल्प कराएगी कि विकसित भारत बनाने में प्रत्येक भारतवासी का योगदान होगा। युवा, किसान, महिला, गरीब, उद्यमी, प्रत्येक वर्ग मिलकर विकसित भारत बनाएगा। ये नया भारत है जो ना रुकेगा ना थमेगा।(एएमएपी)

तितलियों को आकर्षित कर रही पुणे की आबोहवा

बाग- बगीचों के फूलों पर डेढ़ सौ प्रजातियों की तितलियां बिखेर रहीं अपना रंग।

महाराष्ट्र के पुणे क्षेत्र की आबोहवा ने प्रकृति में विचरण करने वाली डेढ़ सौ से अधिक प्रजातियों की तितलियों को आकर्षित कर रखा है। इनमें कई प्रजातियां ऐसी भी हैं जो घने जंगलों में ही पाई जाती हैं। इन्हें अब यहां के बाग-बगीचों में खिलने वाले फूलों पर आसानी से देखा जा सकता है। पर्यावरण प्रेमियों के लिए यह किसी आश्चर्य से कम नहीं है।पर्यावरणविद प्रोफेसर जयंत देशपांडे ने तो बाकायदा अपने घर की छत पर तितलियों के लिए बड़ा बगीचा तक बना रखा है और इनके जरिए वे शोध भी कर रहे हैं। नगर निगम की जानकारी के अनुसार शहर के विभिन्न भागों में तितलियों की 150 से अधिक प्रजातियां पाई गई हैं, जो यहां खिलने वाले फूलों पर अपना रंग बिखेर रही हैं। इनका फोटोग्राफिक रिकॉर्ड भी संजोया गया है।

प्रोफेसर देशपांडे के अनुसार जंगलों में पाई जाने वाली तितली प्रजाति कॉमन मैप पिछले साल शहर में कई इलाकों में देखने को मिली थी, जिसका फोटोग्राफिक रिकॉर्ड भी मौजूद है। तितलियां बहुत अच्छी संकेतक प्रजाति हैं क्योंकि ये वनस्पति पर निर्भर होती हैं। हर एक तितली प्रजाति विशिष्ट लार्वा होस्ट प्लांट्स पर निर्भर है। सबसे खास बात है कि एक तितली कैटरपिलर भूखा रह लेगा, यहां तक की मर जाएगा, लेकिन अन्य पौधों की प्रजातियों को कभी नहीं खाएगा।

प्रोफेसर देशपांडे ने बताया जब तितली एडल्ट हो जाती है तो वो एक बहुत अच्छी वनस्पति विज्ञानी मानी जाती है। एडल्ट तितली हमेशा लार्वा होस्ट प्लांट्स पर ही अंडे देती है। अगर उसपर भी नहीं तो पौधे के आसपास ही अंडा देती है। वे कहते हैं तितलियों की अच्छी विविधता, आसपास की वनस्पतियों में बहुत अच्छी विविधता का संकेत देती है। (एएमएपी)

रक्षा बजट में इस साल फिर हुआ इजाफा, रेलवे क्षेत्र के लिए भी हुए कई बड़े एलान

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को देश का बजट पेश किया। इसमें रक्षा क्षेत्र के लिए होने वाले खर्चों का भी ब्योरा दिया गया है। बजट दस्तावेजों के मुताबिक, इस साल रक्षा बजट 5.94 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है, जो कि 2022-23 के 5.25 लाख करोड़ रुपये के बजट से 12.95 फीसदी ज्यादा है। यानी एक बार फिर रक्षा बजट में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

हथियारों, विमानों, सैन्य साजोसामान के लिए कितना बजट?

बजट में पूंजीगत व्यय के लिए कुल 1.62 लाख करोड़ रुपये अलग रखे गए हैं। इनमें नए हथियार, विमान, युद्धपोत और अन्य सैन्य साजोसामान की खरीद शामिल है। गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2022-23 में, पूंजी परिव्यय के लिए बजटीय आवंटन 1.52 लाख करोड़ रुपये था, लेकिन संशोधित अनुमान के अनुसार व्यय 1.50 लाख करोड़ रुपये था।

वेतन-भुगतान के लिए कितना बजट आवंटित?

अगले वित्त वर्ष के बजट दस्तावेजों के अनुसार, राजस्व व्यय के लिए 2,70,120 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है जिनमें वेतन भुगतान और प्रतिष्ठानों के रखरखाव पर होने वाले खर्च शामिल हैं। वित्त वर्ष 2022-23 में राजस्व व्यय के लिए बजटीय आवंटन 2,39,000 करोड़ रुपये था। 2023-24 के बजट में, रक्षा मंत्रालय (सिविल) के लिए पूंजीगत परिव्यय 8,774 करोड़ रुपये आंका गया है, जबकि पूंजीगत परिव्यय के तहत 13,837 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है।

रक्षा पेंशन के लिए अलग से 1,38,205 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। पेंशन परिव्यय सहित कुल राजस्व व्यय 4,22,162 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। बजट दस्तावेजों के अनुसार, रक्षा बजट का कुल आकार 5,93,537.64 करोड़ रुपये है।

रेलवे में निजीकरण को दिया जाएगा बढ़ावा, सुविधाओं पर खर्च होंगे 2.40 लाख करोड़

अन्य सेक्टर की तरह बजट में रेलवे क्षेत्र के लिए भी कई अहम एलान किए गए। वित्त मंत्री ने भाषण में कहा कि बजट में रेलवे के लिए 2.40 लाख करोड़ रुपए के पूंजीगत परिव्यय का प्रावधान किया गया है। अब तक का यह सर्वाधिक परिव्यय, वित्त वर्ष 2013-14 में किए गए परिव्यय का लगभग नौ गुना है।

बजट में रेलवे सेक्टर में निजी भागेदारी बढ़ाने की बात कही गई है। इसके जरिए रेलवे के तहत सड़कों, शहरी बुनियादी ढांचे और बिजली जैसे ढांचागत विकास में मदद मिलेगी। वहीं रेलवे सेक्टर के लिए 2.40 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। सरकार आने वाले समय में वंदे भारत और हाइड्रोजन ट्रेन जैसी कई ट्रेनों के संचालन में खर्च करेगी। यात्री सुविधाओं के लिए भी खर्च किए जाने का प्रावधान किया गया है।

 ये हैं रेलवे सेक्टर के लिए अहम घोषणाएं
– रेलवे सेक्टर में 2.4 लाख करोड़ खर्च होंगे
-रेलवे में निजी क्षेत्र की भागेदारी होगी
-रेलवे की पटरियों के नवीकरण में 17297 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे
-रेलवे सुरक्षा निधि में 45000 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए जाएंगे (एएमएपी)