मीनाक्षी जैन राज्यसभा के लिए मनोनीत 

राममंदिर मुकदमे में दिया गया था उनकी पुस्तक का संदर्भ।

#pramodjoshiप्रमोद जोशी।

इतिहासकार डॉ मीनाक्षी जैन को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है। साहित्य, विज्ञान, कला और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत चार सदस्यों में डॉ जैन के अलावा उज्ज्वल देवराज निकम, सी. सदानंदन मास्टर और हर्ष वर्धन श्रृंगला शामिल हैं।
डॉ मीनाक्षी जैन दिल्ली विश्वविद्यालय के गार्गी कॉलेज में इतिहास की एसोसिएट प्रोफेसर रह चुकी हैं। उन्होंने भारतीय सभ्यता, धर्म और राजनीति से संबंधित कई पुस्तकें लिखी हैं। इस तथ्य का उल्लेख ज्यादा नहीं हुआ है कि वे  टाइम्स ऑफ इंडिया के पूर्व संपादक गिरिलाल जैन की पुत्री हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। सामाजिक आधार और जाति एवं राजनीति के बीच संबंधों पर उनका शोध प्रबंध 1991 में प्रकाशित हुआ था। इतिहास के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए 2020 में उन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया था। उनकी कुछ पाठ्य पुस्तकों को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।

डॉ जैन नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय और भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद की शासी परिषद की पूर्व सदस्य भी हैं। संप्रति वे भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद की वरिष्ठ अध्येता हैं। उनके शोध के क्षेत्रों में मध्यकालीन और प्रारंभिक आधुनिक भारत में सांस्कृतिक और धार्मिक विकास शामिल हैं।

डॉ जैन ने विभिन्न ऐतिहासिक विषयों पर व्यापक शोध किया है और मध्यकालीन एवं आधुनिक भारतीय इतिहास से संबंधित मुद्दों पर उनका व्यापक शोधकार्य है। उनकी ऐतिहासिक कृतियों में शामिल हैं, फ्लाइट ऑफ डेटीस एंड रिबर्थ ऑफ टेंपल्स (देवताओं की उड़ान और मंदिरों का पुनर्जन्म) (2019), द बैटल फॉर राम: केस ऑफ द टेंपल एट अयोध्या (राम के लिए युद्ध: अयोध्या में मंदिर का मामला) (2017), सती: इवेंजेलिकल बैप्टिस्ट्स मिशनरीज़ एंड चेंजिंग कॉलोनियल डिसकोर्स (सती: इंजीलवादी बैप्टिस्ट मिशनरी और बदलते औपनिवेशिक विमर्श (2016), राम एंड अयोध्या (राम और अयोध्या) (2013), पैरलल पाथवेज़: एसेज़ ऑन हिंदू-मुस्लिम रिलेशंस (1707-1857) (समानांतर रास्ते: हिंदू-मुस्लिम संबंधों पर निबंध) (1707-1857) (2010) और हिंदूज़ ऑफ हिंदुस्तान: अ सिविलिज़ेशनल जर्नी (हिंदुस्तान के हिंदू: एक सभ्यतागत यात्रा) (2023)।
2019 में अयोध्या विवाद पर चले सर्वोच्च न्यायालय के मुकदमे में उनकी पुस्तक का संदर्भ भी दिया गया था, जिसमें कहा गया है कि जन्मभूमि स्थल पर ऐतिहासिक रूप से राम मंदिर मौजूद था। उनका कहना है कि अंग्रेजों द्वारा इस स्थल को राम का जन्मस्थान मानने के बाद वामपंथी  इतिहासकारों ने ऐतिहासिक और सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की। जैन के अनुसार, 1989 से पहले के सभी साहित्यिक साक्ष्य, इस तथ्य की ओर इशारा करते थे। उन्होंने यह भी लिखा है कहा कि मुसलमानों का एक वर्ग चाहता था कि अयोध्या में राम मंदिर स्थल हिंदुओं को सौंप दिया जाए, लेकिन वामपंथी इतिहासकारों ने मुसलमानों को यह विश्वास दिलाकर विवाद को ज़िंदा रखा कि उनके पास राम मंदिर के ख़िलाफ़ एक मज़बूत तर्क है और उन्हें इसके लिए सबूत देने का वादा किया।

अपनी नवीनतम पुस्तक, “विश्वनाथ राइज़ एंड राइज़” (2024) में, जैन ने काशी के इतिहास के बारे में लिखा है। इस पुस्तक में, उन्होंने प्रारंभिक इस्लामी आक्रमणों से लेकर 1669 में काशी विश्वनाथ मंदिर के विध्वंस तक, सदियों के आक्रमणों और अपवित्रीकरण का विवरण दिया है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

“मोदी विरोध” से राष्ट्रवाद विरोधी खेमे में खड़ी होती कांग्रेस

‘हर घर तिरंगा’ का विरोध- ‘हर घर से अफजल निकलेगा’ का समर्थन।

#pradepsinghप्रदीप सिंह।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों से हर घर तिरंगा (#HarGharTiranga) फहराने की अपील की है। यह अभियान 13 से 15 अगस्त तक चलेगा। अब अपील प्रधानमंत्री मोदी ने की है तो जाहिर है कांग्रेस पार्टी को परिपाटी के अनुसार इसका विरोध करना था, तो वह कर भी रही है। कांग्रेस एक ऐसे दल का उदाहरण बन गई है, जिसे देखकर सीखा जा सकता है कि किसी राष्ट्रीय पार्टी को कैसा नहीं होना चाहिए। राष्ट्रवाद के विरोध को कांग्रेस ने अपनी रणनीति बना लिया है। वह हर उस संवैधानिक संस्था का विरोध करने को तैयार रहती है, जो उसकी इस रणनीति के रास्ते में आए। आजादी के अमृत महोत्सव (#AmritMahotsav) वर्ष में कांग्रेस ने विरोध के लिए हर घर तिरंगा अभियान को चुना है।

किसी भी देश का राष्ट्रीय ध्वज उसके गौरव का प्रतीक होता है। कुछ ऐसे प्रतीक होते हैं, जो दलगत राजनीति से ऊपर होते हैं, पर कांग्रेस हर घर तिंरगा अभियान का भी विरोध करेगी, क्योंकि इसकी अपील प्रधानमंत्री मोदी ने की है। वह शायद यह भी भूल गई कि आजादी की लड़ाई राष्ट्रवाद के मुद्दे को केंद्र में रखकर लड़ी गई थी। विडंबना और कांग्रेस के पतन की पराकाष्ठा देखिए कि ‘हर घर तिरंगा’ का विरोध होगा, लेकिन ‘हर घर से अफजल निकलेगा’ का समर्थन होगा।

कांग्रेस: पल पल रंग ढंग बदलता किरदार

कांग्रेस पिछले 75 साल से पहले जनसंघ और फिर भाजपा से पूछती रही है कि आजादी के आंदोलन में उसका क्या योगदान रहा है? जब देश आजादी की लड़ाई लड़ रहा था तो उसमें उसकी क्या भूमिका थी? जो कांग्रेस को समझने लगे हैं, उन्हें पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश की प्रतिक्रिया पर कोई आश्चर्य नहीं होगा। जयराम ने इस अभियान को पाखंड कहा है। वह 2002 में हुए राष्ट्रीय ध्वज के नियमों में बदलाव का हवाला देकर भाजपा को कोस रहे हैं। इस संशोधन के जरिये राष्ट्रीय ध्वज के केवल खादी का होने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई थी, पर वह यह नहीं बताते कि दस साल तक मनमोहन सरकार ने इसे बदला क्यों नहीं? उन्होंने आरएसएस के कार्यालयों पर 52 साल तक तिरंगा न लहराने का मुद्दा तो उठाया, पर अभी एक साल पहले तक अपने पार्टी कार्यालय पर राष्ट्रीय ध्वज न लहराने वाली उन कम्युनिस्ट पार्टियों से सवाल नहीं किया, जो आज कांग्रेस की सबसे बड़ी सलाहकार हैं।

आखिर जो कांग्रेस आजादी की लड़ाई की विरासत का दावा करती है, वह हर घर तिरंगा अभियान का विरोध कैसे कर सकती है? प्रधानमंत्री मोदी ने हर घर तिरंगा फहराने की अपील 22 जुलाई को की। इसी दिन 1947 में संविधान सभा ने तिरंगे के मौजूदा स्वरूप को स्वीकार किया था। तिरंगे का मूल डिजाइन आंध्र के पिंगली वेंकैया ने पांच साल तक तीस देशों के झंडों का अध्ययन करने के बाद 1921 में तैयार किया था। उस समय इसमें ऊपर लाल रंग था और बीच में चरखा। संविधान सभा ने लाल की जगह केसरिया और बीच में चरखे की जगह चक्र रखा। कांग्रेस ने इतने वर्षों में कभी वेंकैया को याद नहीं किया। वेंकैया पर डाक टिकट जारी करने के लिए देश को मोदी का इंतजार करना पड़ा।

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आजादी की लड़ाई की विरासत…?

सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस ने आजादी की लड़ाई के तमाम नायकों की तरह आजादी की लड़ाई की विरासत का दावा भी छोड़ दिया है? वैसे कांग्रेस सिर्फ महात्मा गांधी को छोड़ने का साहस नहीं जुटा पाई। हालांकि उनके आदर्शों को तो उसने आजादी के बाद ही भुला दिया था। गांधी जी यदि लंबे समय तक जीवित रहते तो शायद उन्हें वही देखना पड़ता, जो लोकनायक जयप्रकाश नारायण को जनता पार्टी ने दिखाया। आखिर आजादी के अमृत महोत्सव को मनाने की कांग्रेस की योजना क्या है? क्या प्रवर्तन निदेशालय की जांच का विरोध उसका अमृत महोत्सव काल का सबसे बड़ा कार्यक्रम है? कांग्रेस ने कई महीने पहले एक देशव्यापी आंदोलन का कार्यक्रम बनाया था। उसके लिए दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता में एक समिति का भी गठन किया था। क्या आजादी के अमृत महोत्सव के लिए भी उसने कोई कार्यक्रम बनाया है? देश की सबसे पुरानी विपक्षी पार्टी के पास इस ऐतिहासिक वर्ष को मनाने का कोई कार्यक्रम क्यों नहीं है?

कांग्रेस किस कदर अपनी विरासत की जड़ों और आम जन की भावनाओं से कट चुकी है, इसका शायद उसे आभास भी नहीं है। हालत यह है कि कम्युनिस्ट पार्टी, जो पाकिस्तान बनाने के मुद्दे पर अंग्रेजों के साथ थी और जो 1962 के भारत-चीन युद्ध के समय चीनी कामरेडों के साथ थी, उसे भी समझ में आ रहा है कि मोदी ने जिस अभियान की शुरुआत की है, उसमें चुपचाप शामिल हो जाने में ही भलाई है। सीताराम येचुरी ने घोषणा की है कि माकपा हर घर तिरंगे का अपना कार्यक्रम चलाएगी। केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन ने आदेश जारी किया है कि प्रदेश में हर घर पर तिरंगा फहराया जाएगा।

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जुबानी जमा खर्च

जयराम रमेश औपचारिक रूप से कांग्रेस और अनौपचारिक रूप से नेहरू गांधी परिवार के प्रवक्ता हैं। उन्हें साल 2002 में राष्ट्रीय ध्वज बनने के नियमों में हुए बदलाव से खादी को होने वाले नुकसान का दर्द है। सवाल है कि कांग्रेस ने जुबानी जमा खर्च के अलावा खादी के लिए किया क्या है? मोदी राज के दौरान खादी ग्रामोद्योग देश में उपभोक्ता वस्तुओं की सबसे बड़ी कंपनी बन गई है- हिंदुस्तान यूनिलीवर से भी बड़ी। इस अभियान के लिए भी सबसे ज्यादा झंडे खादी के ही खरीदे जा रहे हैं। तो कांग्रेस पहले अपनी प्राथमिकता तय कर ले। उसकी प्राथमिकता तिरंगा है या अफजल गुरु और टुकड़े-टुकड़े गैंग।

सवाल है कि बार-बार ऐसा क्यों होता है कि कांग्रेस राष्ट्रवाद और उसके प्रतीकों पर विरोधी खेमे में खड़ी नजर आती है? उसके पास मोदी सरकार के हर काम के विरोध का भोथरा हथियार तो है, पर जवाब में कोई वैकल्पिक विचार नहीं है। इसलिए आम लोगों को वह एक शिकायती और सदैव रोने वाले बच्चे जैसी नजर आती है। उसकी मुश्किल यह है कि वह बच्चा नहीं है और कोई बालिग बच्चे जैसा व्यवहार करे तो उसके बारे में लोग क्या सोचते कहते हैं, बताने की जरूरत नहीं है। कांग्रेस जिस हालत में पहुंच गई है, उसमें उसका सर्जरी से भी इलाज संभव नहीं रह गया है। ऐसी ही अवस्था को लाइलाज कहते हैं।

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं वरिष्ठ स्तंभकार हैं। आलेख ‘दैनिक जागरण’ से साभार)


लैंड फॉर जॉब मामले में लालू समेत परिवार की बढ़ेगी परेशानी, चार अक्टूबर को पेशी के आदेश

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राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव समेत उनके परिवारजनों की परेशानियां बढ़ने वाली है। दरअसल, लैंड फॉर जॉब घोटाला में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी एवं पूर्व सीएम राबड़ी देवी, बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपियों को समन जारी किया है। सीबीआई की चार्जशीट पर सुनवाई करते हुए शुक्रवार को कोर्ट ने सभी 17 आरोपियों को 4 अक्टूबर को पेश होने का आदेश दिया है।केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई रेलवे में कथित घोटाले की जांच कर रही है। एजेंसी ने बीते 3 जुलाई को इस केस में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की थी, जिसमें तेजस्वी यादव को भी आरोपी बनाया था। कोर्ट ने शुक्रवार को इस चार्जशीट पर संज्ञान लिया और तेजस्वी समेत सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 4 तारीख को होगी। अदालत ने कहा कि सभी आरोपी इस दिन मौजूद रहें।

यह है मामला


यह मामला साल 2004 से 2009 के बीच का है जब लालू यादव यूपीए कार्यकाल में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उस वक्त रेलवे में नियमों को ताक पर रखकर कई लोगों को नौकरियां दी गई थीं। इसके बदले में लालू परिवार के सदस्यों के नाम पर बेशकीमती जमीनें लिखवाई गईं। लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़े देवी, बड़ी बेटी मीसा भारती समेत अन्य आरोपी फिलहाल इस मामले में जमानत पर है। सीबीआई के साथ ईडी भी इस कथित घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच कर रही है।

बढ़ सकती है तेजस्वी की मुश्किलें

तेजस्वी का पहले इस मामले में नाम नहीं था। सीबीआई ने पिछले साल जो चार्जशीट दाखिल की थी, उसमें लालू-राबड़ी एवं अन्य पर आरोप लगाए गए थे। हालांकि, जब इस मामले की जांच आगे बढ़ी, तो तेजस्वी के दिल्ली की न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में एक कीमती बंगले की जानकारी सामने आई। इसका नौकरी के बदले जमीन घोटाले से लिंक निकला। इसके बाद सीबीआई ने सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर कर तेजस्वी यादव को भी इस केस में आरोपी बनाया है। अगली पेशी में अगर कोर्ट उनकी गिरफ्तारी का आदेश देता है, तो तेजस्वी को तुरंत जमानत लेनी होगी। नहीं तो उन्हें जेल भी जाना पड़ सकता है।(एएमएपी)

इमरान और शरीफ सरकार में नहीं बनी बात, ठुकराई मांग

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इमरान ने एक कॉमन फ्रैंड के माध्यम से बातचीत की थी पेशकश।

पाकिस्तान की सियासत में आया भूचाल शांत होता नहीं दिख रहा। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पूर्व पीएम इमरान खान के बीच बात नहीं बनी है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि डीजीआईएसआई ने उन्हें (इमरान) विश्वास में लेकर प्रेस कांफ्रेंस की। इमरान खान ने एक कॉमन फ्रैंड के माध्यम से बातचीत की पेशकश की थी।

उन्होंने कहा कि इमरान खान दो मामलों पर बातचीत करना चाहते थे। एक तो नए सेना प्रमुख की नियुक्ति और दूसरा जल्दी चुनाव की तारीख पर। पीएम शहबाज ने इन मुद्दों पर बातचीत करने से इनकार कर दिया और चार्टर ऑफ डेमोक्रेसी और चार्टर ऑफ इकोनॉमी पर बातचीत शुरू करने की कोशिश की।

सरकार और पूर्व पीएम में नहीं बनी बात

इसके अलावा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने नए सेना प्रमुख के चयन पर बातचीत के लिए इमरान खान के प्रस्ताव पर सहमत होने से इनकार कर दिया। इमरान खान की ओर से कहा गया कि लाहौर में मेरे एमटीजी के बारे में अफवाहें फैलाने वालों के लिए, हमारे लौटने का कारण यह था कि लाहौर करीब था और हमने रात में नहीं जाने का फैसला किया था। 6 महीने से मेरी एक ही मांग है कि जल्दी निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव की तारीख दी जाए। अगर वार्ता होनी है तो बस यही मांग होगी।

पीटीआई निकाल रही है मार्च

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने जल्द चुनाव की मांग को लेकर शुक्रवार (28 अक्टूबर) को अपना लॉन्ग मार्च शुरू किया था। लाहौर स्थित लिबर्टी चौक पर इमरान खान के सैकड़ों समर्थकों के जुटने के बाद शुक्रवार को पाकिस्तान में तनाव भी देखने को मिला था। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ये मार्च इसलिए निकाल रहे हैं ताकि सरकार पर दबाव बने और वह जल्दी आम चुनावों की तारीखोंं का ऐलान कर दे। पीटीआई प्रमुख इमरान खान की चार नवंबर को इस्लामाबाद पहुंचने की योजना है।

उनकी पार्टी ने इस विरोध को हकीकी आजादी मार्च नाम दिया है जिसका अर्थ है देश की असल आजादी के लिए मार्च। इसके पहले इमरान खान ने एक वीडियो संदेश में कहा था कि विरोध निजी या राजनीतिक हित के लिए नहीं है, बल्कि इसका मकसद देश को असल में आजादी दिलाना है।

इस्लामाबाद पुलिस ने उठाया ये कदम

पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने लॉन्ग मार्च को लेकर इमरान खान से बातचीत के लिए 9 सदस्यों वाली समिति बनाई थी। इसी बीच इस्लामाबाद पुलिस ने शनिवार को बड़ा कदम उठाते हुए होटलों और अतिथि गृहों को पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की अगुवाई वाली रैली में हिस्सा लेने वाले उनके समर्थकों को ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराने से रोक दिया। (एएमएपी)

चक्रवाती तूफान से भीगा चेन्नई, कई राज्‍यों में हो सकती है भारी बारिश

चक्रवाती तूफान मिचौंग का असर दिखना शुरू हो गया है। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई और इसके आसपास के जिलों में सोमवार को भारी बारिश हो रही है। लगातार बरसात के कारण शहर के निचले व रिहायशी इलाकों में पानी भर गया है। नगर निगम के कर्मचारी इलाके में भरे पानी को निकालने की कोशिश में जुटे हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने आज के लिए तमिलनाडु में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मंगलवार को यह तूफान और उग्र होते हुए आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम से टकराएगा। यहां 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना है। विभाग के अनुसार तमिलनाडु के चेन्नई सहित कई तटीय इलाकों में इस वक्त भारी बारिश के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

कई ट्रेनें रद्द

ज्ञात हो कि चेन्नई के अलावा चेंगलपेट, कांचीपुरम और तिरुवल्लूर जिलों में रविवार देर रात से भारी बारिश जारी है। इसे देखते हुए सोमवार को सार्वजनिक अवकाश की घोषणा कर दी गई है। चेन्नई के ईस्ट कोस्ट रोड पर एक निर्माणाधीन दीवार ढह गई। इस हादसे में 2 लोगों की मौत हुई है। तमिलनाडु में भारी बारिश के कारण कई ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं और तटीय क्षेत्रों में धारा 144 लागू की गई है। सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में स्कूलों को भी बंद रखा गया है। चेन्नई में सुबह से ही भारी बारिश हो रही है।

कई राज्यों में भारी बारिश की संभावना

मौसम विभाग के अनुसार तूफान मिचौंग के 5 दिसंबर को आंध्र प्रदेश के समुद्र तट से टकराने की संभावना है। चक्रवाती तूफान 3 दिसंबर को रात साढ़े 11 बजे पुडुचेरी से करीब 210 किमी पूर्व-उत्तरपूर्व, चेन्नई से 150 किमी पूर्व-दक्षिणपूर्व और बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम में केंद्रित है। इसके मंगलवार की दोपहर उत्तर-उत्तर पश्चिम की ओर बढ़ने, गतिशील होने और आंध्र प्रदेश के नेल्लोर व मछलीपट्टनम के समुद्र तट से टकराने की संभावना है। इस चक्रवात के कारण ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं का खतरा बना हुआ है।

पुडुचेरी के तटीय इलाकों धारा 144 लागू

पुडुचेरी जिला प्रशासन ने तो पुडुचेरी के समुद्री तट के पास वाले इलाकों में IPC की धारा 144 लागू कर दी है। साथ ही तटीय इलाकों में लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। यह पाबंदी 3 दिसंबर को शाम 7 बजे से 5 दिसंबर को सुबह 6 बजे तक लागू रहेगी। पुडुचेरी के जिला मजिस्ट्रेट ने इसे लेकर एक सर्कुलर जारी किया है। इसमें कहा गया, ‘पुडुचेरी के समुद्र तट के करीब तटीय क्षेत्रों पर सभी व्यक्तियों की आवाजाही रोक लगाई गई है। 3/12/2023 को 19:00 बजे से 5 तारीख को 6:00 बजे तक यह प्रतिबंधित लागू रहेगा।’

ओडिशा के 5 जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट

तूफान के चलते दक्षिणी ओडिशा के ज्यादातर हिस्सों और तटीय इलाके में भारी बारिश की संभावना है। राज्य के पांच जिलों (मलकानगिरी, कोरापुट, रायगड़ा, गजपति और गंजम) को अलर्ट पर रखा गया है। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है जहां आज 7 सेमी से 11 सेमी तक बरसात हो सकती है। वहीं, राज्य सरकार के निर्देश पर आंध्र प्रदेश में सभी स्कूल आज बंद हैं।

तेलंगाना में कांग्रेस का बढ़‍त दिलाने वाला कौन हैं रेवंत रेड्डी, जिनकी हो रही है चर्चा

पीएम मोदी ने की आंध्र के सीएम से बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिचौंग से निपटने की तैयारियों का जायजा लेने के लिए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी से बात की और उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि राज्य को हरसंभव मदद दी जाए। उन्होंने कहा, ‘मैं तमिलनाडु, पुडुचेरी, ओडिशा और विशेष रूप से आंध्र प्रदेश में भाजपा कार्यकर्ताओं से राहत व बचाव कार्यों में शामिल होने और स्थानीय प्रशासन की मदद करने का आग्रह करता हूं।’(एएमएपी)

देश में टीबी से ज्‍यादा कई गंभीर फंगस बीमारियों से ग्रस्‍त है लोग : रिसर्च

भारत में 5.7 करोड़ से ज्यादा भारतीय गंभीर फंगस बीमारियों से प्रभावित हैं। इनमें से 10 फीसदी घातक फंगस संक्रमण का शिकार हो सकते हैं। यह जानकारी 400 से ज्यादा प्रकाशित शोध लेखों की समीक्षा करने पर सामने आई है। भारत में फंगस रोग आम तौर पर होता है लेकिन यह साफ नहीं है कि यह किस स्तर तक है और इसका कितना प्रसार है। विभिन्न फंगस संक्रमणों के आवृत्ति या दबाव को बताने वाली यह पहली समीक्षा है।दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्‍स), पश्चिम बंगाल के कल्याणी स्थित एम्स, चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर के साथ-साथ ब्रिटेन के मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के शोधार्थियों ने अंदाज़ा लगाया है कि 57,250,826 (5.7 करोड़ से ज्यादा) या भारत की आबादी का 4.4 फीसदी हिस्सा प्रभावित हो सकता है।

लेख के प्रमुख लेखक और दिल्ली एम्स से जुड़े अनिमेश रे ने कहा, ‘फंगस रोग से कुल दबाव बहुत बड़ा है लेकिन स्वीकार नहीं किया गया है।’ रे ने कहा, ‘तपेदिक (टीबी) से भारत में हर साल 30 लाख से कम लोग प्रभावित होते हैं जबकि फंगस बीमारियों से प्रभावित लोगों की संख्या इससे कई गुना ज्यादा है।’

रिसर्चरों ने बताया कि फेफड़ों और साइनस के फंगस संक्रमण मौत का बड़ा कारण बनते हैं और इससे ढाई लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। मैनचेस्टर विश्वविद्यालय और ग्लोबल एक्शन फॉर फंगल डीसीज़ के प्रोफेसर ने कहा कि भारत में फंगस रोग लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बना हुआ है। (एएमएपी)

पहले किसी को विश्वास नहीं था कि अयोध्या में राम मंदिर बनेगा : अमित शाह

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और विकास विरोधाभासी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पहले किसी को भी विश्वास नहीं था कि अयोध्या में भगवान श्रीराम के जन्मस्थान पर मंदिर का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण पर सवाल खड़ा करने वालों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले किसी को विश्वास नहीं था कि अयोध्या में राम मंदिर बन सकता है। शाह ने राम मंदिर निर्माण पर प्रश्न करने वालों को भी 22 जनवरी को अयोध्या में मिठाई खाने का निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और विकास विरोधाभासी नहीं है। हमारी विरासत ही आधुनिक विकास की कुंजी है। हमने अपनी सांस्कृतिक विरासत को अपनाया है और दुनिया भर ने इसको उचित श्रेय दिया है।

पिछले 10 सालों में हुए देश में जबरदस्त बदलाव

केंद्रीय मंत्री शाह शुक्रवार को दिल्ली के बुराड़ी मैदान में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के 69वें राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। अमित शाह ने एबीवीपी कार्यकर्ताओं से कहा कि इस देश का स्वर्णिम भविष्य आपका इंतजार कर रहा है। पिछले 10 सालों में देश में जबरदस्त बदलाव हुए हैं। ‘घोटालों’ की जगह अब हमारे पास नई-नई ‘योजनाएं’ हैं। ‘तुष्टीकरण, परिवारवाद और जातिवाद की राजनीति’ के बजाय अब हमारे पास ‘प्रदर्शन की राजनीति’ है। उन्होंने कहा कि भारत का समय आ गया है। हर समस्या के समाधान के लिए आज विश्व भारत की ओर आशा के साथ देख रहा है। आप सभी युवाओं की जिम्मेदारी है कि ये जो परिवर्तन आया है, इस परिवर्तन को सातत्यपूर्ण बनाते हुए हमारी कल्पना के भारत की रचना आपको करनी है।

मैं एबीपीपी का ऑर्गेनिक प्रॉडक्ट हूं

शाह ने एबीवीपी से अपने जुड़ाव का जिक्र करते हुए कहा, “मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि मैं एबीपीपी का ऑर्गेनिक प्रॉडक्ट हूं।” उन्होंने कहा कि वह आज यहां राष्ट्रीय अधिवेशन के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर गौरव महसूस कर रहे हैं। शाह ने कहा, “ये अनुभव वही व्यक्ति कर सकता है, जिसकी शुरुआत राजकोट अधिवेशन में पंडाल के अंत में बैठकर हुई है और वो आज मुख्य अतिथि बनकर यहां खड़ा है।”

एबीवीपी की देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका

उन्होंने एबीवीपी को शिक्षा व्यवस्था का सबसे बड़ा संगठन बताते हुए कहा कि यह न केवल शिक्षा प्रणाली की खामियों को दूर करने का प्रयास करता है, बल्कि अपने छात्रों के चरित्र निर्माण में भी मदद करता है। उन्होंने कहा कि एबीवीपी ने अपनी स्थापना के बाद से देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। चाहे भाषा आंदोलन हो, शिक्षा आंदोलन हो या संस्कृति का संरक्षण एबीवीपी हमेशा सबसे आगे रही है।

विद्यार्थी परिषद के छात्र हर क्षेत्र में बढ़ रहे आगे

उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद के छात्र देश के हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं, चाहे वह शिक्षा हो, मीडिया हो या राजनीति। विद्यार्थी परिषद ने वर्षों से अपने छात्रों की हर छोटी-बड़ी समस्याओं को उठाया है। मेरे आगमन पर, ‘कश्मीर हो या गुवाहाटी, अपना देश अपनी मिट्टी’ की गूंज थी! (चाहे कश्मीर हो या गुवाहाटी, यह हमारा देश है, यह हमारी धरती है!) चिंता न करें, मैं आपको विश्वास दिलाता हूं, कश्मीर हमारा है! उत्तर-पूर्व हमारा है!

भाजपा की जीत कार्यकर्ताओं की मेहनत का नतीजा- मोदी

आने वाले 25 वर्षों में भारत बनेगा विश्व गुरु

गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संकल्प लिया है कि आने वाले 25 वर्षों में भारत विश्व गुरु बनेगा। उन्होंने कहा कि अमृत महोत्सव और अमृतकाल का जो संकल्प नरेन्द्र मोदी जी ने देश के सामने रखा है, वो आपके लिए है क्योंकि इसे देखने के लिए आप सभी होंगे। जब आजादी के 100 वर्ष पूरे हों, तब उस आजादी के लिए बलिदान देने वाली सभी हुतात्माओं की कल्पना का भारत बनाने की जिम्मेदारी विद्यार्थी परिषद जैसे संगठन की है, मेरे सामने जो विराट युवाशक्ति बैठी है उसकी है। उन्होंने कहा कि युवाशक्ति किसी भी देश की रीढ़ की हड्डी होती है और युवाशक्ति ही देश एवं समाज को शिखर पर ले जाने का काम करती है। भारत में ढेर सारे युवाओं ने युग परिवर्तन किया है। आपको तो रास्ता तलाशने की भी जरूरत नहीं है, 75 वर्षों में विद्यार्थी परिषद की पीढ़ियों ने ज्ञान, शील, एकता का जो रास्ता बनाकर रखा है, उसी रास्ते पर आपको चलना है। आपको सिर्फ संकल्प लेने की आवश्यकता है।(एएमएपी)

शुद्ध-शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने पर सभी करें फोकस :गुटेरेस

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संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक में एकत्र हुए नेताओं से समय के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों के समाधान के लिए तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया। उन्‍होंने कहा है कि आर्थिक संकट से लेकर युद्ध और महामारी तक, दुनिया के सामने कई गंभीर खतरों पर ध्यान देते हुए उन्होंने कहा, हम श्रेणी पांच के तूफान की नजर में हैं। जलवायु परिवर्तन पर उन्होंने विश्व के नेताओं से शुद्ध-शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने के लिए विश्वसनीय और पारदर्शी परिवर्तन योजनाओं को आगे बढ़ाने और वर्ष के अंत से पहले अपनी योजनाओं को प्रस्तुत करने का आह्वान किया।उन्होंने कहा, शुद्ध शून्य में परिवर्तन वास्तविक उत्सर्जन में कटौती पर आधारित होना चाहिए- और कार्बन क्रेडिट और छाया बाजारों पर अनिवार्य रूप से निर्भर नहीं होना चाहिए। यही कारण है कि हमने (संयुक्त राष्ट्र) नेट-जीरो उत्सर्जन प्रतिबद्धताओं पर विशेषज्ञ समूह बनाया है। उन्होंने व्यवसायों से विश्वसनीय, जवाबदेह नेट-जीरो प्रतिज्ञाओं के लिए समूह के दिशानिर्देशों का पालन करने का आग्रह किया। 1970 के दशक में तंबाकू उद्योग के समानांतर चित्रण करते हुए- जहां कंपनियों को खतरनाक स्वास्थ्य प्रभावों के बारे में पता था- उन्होंने कहा कि बिग ऑयल को ग्रह पर जीवाश्म ईंधन के हानिकारक प्रभाव के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

गुटेरेस ने कहा कि दुनिया जिन गंभीर खतरों का सामना कर रही है, उनमें से एक सबसे खतरनाक है जिसे उन्होंने ग्रेट फ्रैक्चर करार दिया है, जिसे उन्होंने दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं, अमेरिका और चीन के अलग होने की संज्ञा दी – विवर्तनिक दरार जो व्यापार नियमों के दो अलग-अलग सेट, दो प्रमुख मुद्राएं, दो इंटरनेट और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर दो परस्पर विरोधी रणनीतियां बनाएगी।

उन्होंने कहा, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था को दो ब्लॉकों में विभाजित करने से वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में 1.4 ट्रिलियन डॉलर की कमी आ सकती है। यह आखिरी चीज है जिसकी हमें जरूरत है। यह देखते हुए कि अमेरिका-चीन संबंध मानवाधिकारों और क्षेत्रीय सुरक्षा के सवालों से तनावपूर्ण हैं। गुटेरेस ने कहा कि फिर भी यह संभव है और वास्तव में आवश्यक भी। दोनों देशों के लिए जलवायु, व्यापार और प्रौद्योगिकी पर सार्थक जुड़ाव है, ताकि अर्थव्यवस्थाओं को अलग करने या भविष्य के टकराव की संभावना से बचा जा सके।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि नैतिक रूप से दिवालिया वित्तीय प्रणाली प्रणालीगत असमानताओं को बढ़ा रही है। उन्होंने एक नई ऋण संरचना का आह्वानन किया जो विकासशील देशों को सतत विकास में निवेश करने में सक्षम बनाने के लिए तरलता, ऋण राहत और दीर्घकालिक ऋण प्रदान करेगी। विकासशील देशों को गरीबी और भुखमरी को कम करने और सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए वित्त तक पहुंच की आवश्यकता है।

वहीं, उनका कहना यह भी रहा है कि  बहुपक्षीय विकास बैंकों को भी अपना व्यवसाय मॉडल बदलना चाहिए। अपने स्वयं के संचालन से परे, उन्हें विकासशील देशों की ओर निजी वित्त को व्यवस्थित रूप से निर्देशित करने, गारंटी प्रदान करने और पहले जोखिम लेने वाले होने पर ध्यान देना चाहिए। विकासशील देशों में बड़े पैमाने पर पूंजी के प्रवाह के लिए परिस्थितियों के निर्माण के बिना, कोई भविष्य नहीं है।  (एएमएपी)

इमरान : ‘भीख का कटोरा’ लेकर घूम रहे पीएम शहबाज शरीफ

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पाकिस्तान के अपदस्थ प्रधानमंत्री इमरान खान ने खुद मौजूदा पीएम शहबाज शरीफ के ‘भीख का कटोरा’ लेकर घूमने की पुष्टि कर दी है। उन्होंने रविवार को कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भीख का कटोरा लेकर दुनिया भर के विभिन्न देशों की यात्रा कर रहे हैं, लेकिन उनमें से कोई भी उन्हें एक पैसा नहीं दे रहा है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के अध्यक्ष खान ने एक समाचार चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘देखिए, इस आयातित सरकार ने पाकिस्तान के साथ क्या किया है।’

इमरान खान ने प्रधानमंत्री की हाल की विदेश यात्राओं पर टिप्पणी करते हुए कहा, ‘शहबाज शरीफ भीख का कटोरा लेकर विभिन्न देशों की यात्रा कर रहे हैं, लेकिन उनमें से कोई भी उन्हें एक पैसा नहीं दे रहा है। शरीफ भारत से बातचीत के लिए भीख मांग रहे हैं, लेकिन नई दिल्ली उनसे पहले आतंकवाद को खत्म करने के लिए कह रही है।’ दरअसल, खान ने यूएई के मीडिया संगठन को प्रधानमंत्री के हालिया इंटरव्यू का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने भारत के साथ बातचीत की इच्छा जाहिर की थी। शरीफ के बयान पर टिप्पणी करते हुए भारत ने कहा था कि वह हमेशा पाकिस्तान के साथ सामान्य पड़ोसी का संबंध चाहता है, लेकिन ऐसे संबंधों के लिए आतंक और हिंसा से मुक्त माहौल होना चाहिए।

मेरी हत्या कोशिश के पीछे थे ये लोग…

पूर्व पीएम खान की यह टिप्पणी शरीफ की संयुक्त अरब अमीरात की 2 दिवसीय यात्रा के कुछ सप्ताह बाद आई है, जिस दौरान खाड़ी अमीरात 2 अरब डॉलर का मौजूदा ऋण देने और एक अरब डॉलर का अतिरिक्त ऋण देने पर सहमत हुआ था। इससे तेजी से घट रहे विदेशी मुद्रा भंडार के बीच आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान को आर्थिक संकट से निपटने में मदद मिल सकती है। 70 वर्षीय खान ने आगे कहा कि उन्हें 100 प्रतिशत यकीन है कि शहबाज शरीफ, गृह मंत्री राणा सनाउल्लाह और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ‘आईएसआई काउंटर इंटेलिजेंस विंग’ के प्रमुख मेजर-जनरल फैसल नसीर उनकी हत्या के प्रयास के पीछे थे।

ऊपर वाले की इच्छा थी कि मैं बच गया

इमरान ने कहा, ‘अब मुझे 100 प्रतिशत यकीन हो गया है कि शहबाज और अन्य 2 जिनका नाम मैंने प्राथमिकी में लिया था, जो दर्ज नहीं की जा सकी थी, ने मुझे मारने की साजिश रची थी। यह एक सटीक साजिश थी, क्योंकि तीन प्रशिक्षित निशानेबाजों को मेरी हत्या करने के लिए भेजा गया था। लेकिन यह ऊपर वाले की इच्छा थी कि मैं बच गया।’ मालूम हो कि खान को पिछले साल 3 नवंबर को पंजाब प्रांत (लाहौर से करीब 150 किलोमीटर दूर) के वजीराबाद इलाके में उनकी पार्टी की रैली के दौरान तीन गोलियां लगी थीं।

सेना को राजनीति से रहना होगा दूर

यह पूछे जाने पर कि क्या सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा की सेवानिवृत्ति के बाद सैन्य प्रतिष्ठान तटस्थ हो गए, इस पर खान ने कहा, ‘नहीं, सैन्य प्रतिष्ठान अब भी तटस्थ नहीं है।’ खान ने सैन्य प्रतिष्ठान से पिछली गलतियों से सीखने और राजनीति से दूर रहने को कहा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, ‘अगर सेना राजनीति में दखल देना जारी रखती है और स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव नहीं होते हैं, तो देश में अव्यवस्था और अराजकता होगी। इसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी।’ (एएमएपी)

 

अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस पर कसा तंज, बोले- इनकी ‘बांटो और राज करो’ की रणनीति

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण अनुराग सिंह ठाकुर ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कांग्रेस जब भी हारती है तब ‘बांटो और राज करो’ की रणनीति अपनाने की कोशिश करती है। शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश में विकसित भारत संकल्प यात्रा के कार्यक्रमों में शामिल होने पहुंचे अनुराग ठाकुर ने संवाददाताओं से बातचीत में आईएनडीआई गठबंधन पर कटाक्ष करते हुए कहा, “ये लोग आपस में ही न्याय नहीं कर पा रहे हैं। सीटों के ऊपर तालमेल नहीं बैठ पा रहा है। उनके अधिकतर नेता गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप में या तो बेल पर हैं या तो जेल में हैं। ये क्या न्याय दिलाएंगे?”उन्होंने कहा कि कांग्रेस कभी जातीय जनगणना की बात करती है, कभी क्षेत्रवाद की बात करती है लेकिन कभी भी विकास के मुद्दे पर नहीं बोलती। देश को आगे बढ़ाने वाली चर्चा से कांग्रेस सदैव दूर भागती है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनाव में आकांक्षी जिलों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का शानदार प्रदर्शन यह दर्शाता है कि लोग विकास को वोट देते हैं। कांग्रेस ने वर्षों तक लोगों के साथ अन्याय किया। उन्हें गरीबी में धकेला, आगे नहीं आने दिया। उसके मुकाबले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के 13.5 करोड़ से ज्यादा लोगों को मात्र 5 वर्षों में गरीबी रेखा से बाहर निकाला गया है।

अनुराग ठाकुर ने कहा कि यह पहली बार है जब किसी प्रधानमंत्री ने देश के अंतिम जन के घर- द्वार तक केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को ले जाने का कार्य किया है। अभी तक विभिन्न राज्यों में लाखों लोगों को इस यात्रा के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ मिल चुका है। इससे लगातार जागरूकता बढ़ रही है और लोगों को लाभ मिल रहा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस यात्रा से देश के कोने-कोने में लोगों को सरकारी योजनाओं से अवगत कराया जा रहा है। जो लोग वंचित रह गए थे, वे सभी अपने फॉर्म भरे जा रहे हैं, जिससे उन्हें अनेक योजनाओं का लाभ मिल रहा है।

बनारस से रांची का सफर बनेगा आसान, पीएम मोदी 30 को करेंगे वंदे भारत ट्रेन की शुरूआत

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य देश समक्ष रखा है, जिसमें हर भारतवासी पूरे मनोयोग से अपना योगदान सुनिश्चित कर रहा है। हम 2047 से पहले भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाएंगे। मोदी की गारंटी की गाड़ी 2 लाख 69 हजार पंचायतों में जाकर लोगों को भारत सरकार की योजनाओं की जानकारी और लाभ सुनिश्चित कर रही हैं। ये यात्रा विश्वास और संकल्प कराएगी कि विकसित भारत बनाने में प्रत्येक भारतवासी का योगदान होगा। युवा, किसान, महिला, गरीब, उद्यमी, प्रत्येक वर्ग मिलकर विकसित भारत बनाएगा। ये नया भारत है जो ना रुकेगा ना थमेगा।(एएमएपी)