#pradepsinghप्रदीप सिंह।
दिल्ली में ग्लोबल एआई इंपैक्ट समिट हुआ और इस समिट में भारत की बड़ी प्रशंसा हुई। भारत के बारे में कहा गया कि एआई के मामले में अमेरिका और चीन के बाद वह तीसरा उभरता हुआ देश है। इस समिट को लेकर समाजवादी पार्टी से दो प्रतिक्रियाएं आईं। एक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की, जो मेरी नजर में बहुत समझदारी की थी। उन्होंने कहा कि एआई ऐसा होना चाहिए, जो सबके फायदे के लिए हो। लेकिन उनका सारा किया धरा उनके चाचा प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने डुबो दिया। हालांकि रामगोपाल यादव किस विश्वविद्यालय से प्रोफेसर हैं, किसी को नहीं मालूम। वह अज्ञात विश्वविद्यालय है, जिसके वह प्रोफेसर हैं।
Ram Gopal Yadav demanded for re-election
रामगोपाल यादव का पार्टी और परिवार में बड़ा सम्मान है। राजनीतिक चतुराई में उनके बराबर उनके परिवार और पार्टी में कोई नहीं है। अब बताइए ऐसा नेता कहां मिलेगा, जो पार्टी में पिता और पुत्र को आमने-सामने खड़ा कर दे। उन्होंने अखिलेश यादव को उनके पिता मुलायम सिंह यादव के खिलाफ खड़ा कर दिया। उन्होंने 2017 में मुलायम सिंह यादव को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से हटवा दिया। पार्टी के सम्मेलन में अपमानित करवाया। हालांकि समाजवादी पार्टी के जो पुराने कार्यकर्ता और बुजुर्ग नेता थे,उनको यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आई कि बेटा अपने उस पिता से ऐसा व्यवहार करे,जिसने सबसे बड़ी जीत मिलने के बाद गद्दी बेटे को सौंप दी। मुलायम सिंह यादव ने 2012 में सपा को 224 सीटें जिताई थीं जबकि चाचा की रणनीति पर चलकर अखिलेश यादव 47 सीटों पर आ गए। लेकिन प्रोफेसर रामगोपाल यादव का राजनीतिक चातुर्य देखिए कि अब भी पार्टी में उनका पद और कद दोनों बरकरार है। वह भावुकता में नहीं पड़ते। शिवपाल यादव भावुकता में पड़ गए और उन्होंने भाई का साथ दिया तो न तीन के रहे न तेरह में रहे। शिवपाल पार्टी में हैं लेकिन सिर्फ शोभा की वस्तु हैं। लेकिन प्रोफेसर साहब को देखिए पहले भाई की मदद से राज्यसभा में जाते रहे। अब भतीजे की मदद से राज्यसभा में जाते हैं। चुनाव कभी नहीं जीते। तो ऐसे प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने एआई के बारे में कहा कि अगले 10 साल में एआई ऐसा करेगा कि सारे युवा सड़क पर होंगे। किसी के पास नौकरी नहीं होगी। अब यह कहने की हिम्मत तो एआई का बड़े से बड़ा एक्सपर्ट, दुनिया से बड़े से बड़ा अर्थशास्त्री या भविष्यवक्ता भी नहीं कर सकता, लेकिन प्रोफेसर साहब तो कुछ भी बोल सकते हैं। उनको लगा कि उनके सामने उनके छात्र खड़े हैं, जो कोई सवाल नहीं करेंगे। ऐसे व्यक्ति को तो मेरा मानना है कि भारत रत्न मिलना चाहिए। भारत सरकार को चाहिए कि उनकी प्रतिभा का इस्तेमाल करें।
Mulayam Singh Yadav, Samajwadi Party founder, passes away - The Hindu
यादव परिवार किस तरह से राजनीति करता है,जरा इसे भी समझिए। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के केस में मुलायम सिंह यादव और उनके परिवार के सदस्य जेल जाते, लेकिन उन्होंने अपने सबसे बड़े राजनीतिक दुश्मन भाजपा से अंदर खाने हाथ मिला लिया। उस केस का क्या हुआ, किसी को नहीं मालूम। सीबीआई एक बार केस करती है, एक बार कहती है कोई दम नहीं है। फिर केस रीओपेन होता है, लेकिन किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है। लोकसभा का 2019 का दृश्य भी आपको याद होगा जब मुलायम सिंह यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक तरह से आशीर्वाद दिया कि आप फिर से सत्ता में आ रहे हैं। उस समय कम से कम उत्तर प्रदेश में लड़ाई तो बीजेपी और सपा के बीच में ही थी और सपा ने बसपा से गठबंधन भी कर लिया था। माना जा रहा था कि भाजपा के लिए यह चुनाव बहुत ही कठिन है। फिर भी मुलायम अपने सबसे बड़े राजनीतिक दुश्मन को आशीर्वाद दे रहे थे। उसका प्रतिफल भी उन्हें मिला। परिवार का कोई व्यक्ति जेल नहीं गया। इसी तरह 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रोफेसर रामगोपाल यादव का बेटा फिरोजाबाद से चुनाव लड़ा। उनसे जले-भुने बैठे शिवपाल यादव भी वहां चुनाव लड़ने चले गए और एक तरह से उन्होंने भाजपा की मदद कर दी। भाजपा जीत गई और प्रोफेसर साहब का बेटा लोकसभा नहीं पहुंच पाया। इसके बाद प्रोफेसर साहब ने तय किया कि अब रणनीति बदलनी पड़ेगी। आपको शायद यह सुनकर आश्चर्य हो कि 2024 के लोकसभा चुनाव से एक साल पहले ही भाजपा का उम्मीदवार फिरोजाबाद से कौन होगा, यह तय हो चुका था और तय कराया प्रोफेसर साहब ने। नतीजा यह हुआ कि उनका बेटा फिर से लोकसभा में पहुंच गया। तो ऊपर से लड़ाई करो, अंदर से हाथ मिलाते रहो, यही इस परिवार की राजनीति है।
लखनऊ में विक्रमादित्य मार्ग ऐसी जगह है, जो सबसे पॉश इलाका है। इस विक्रमादित्य मार्ग पर लाइन से कई बंगले हैं,जो यादव परिवार की संपत्ति हैं। यह परिवार कोई व्यापार नहीं करता। इनकी कोई फैक्ट्री नहीं चलती। लेकिन इतनी संपत्ति कहां से आई, यह कोई नहीं पूछता है। जिनको पूछना चाहिए, उनसे इन्होंने हाथ मिला रखा है,वे भी नहीं पूछेंगे। आप देखिए जिस मुलायम सिंह यादव ने कार सेवकों पर गोली चलवाई उस व्यक्ति को भाजपा सरकार ने पद्म विभूषण दिया। तो राजनीति में यह जो नूरा कुश्ती चलती है, उसकी वजह से जनता इस नतीजे पर पहुंचती है कि सब मिले हुए हैं। किसी पार्टी में कोई फर्क नहीं है। बाहर आप सुनते होंगे कि अखिलेश यादव,शिवपाल यादव और रामगोपाल यादव भाजपा के खिलाफ कैसे बोलते हैं? मुझे समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर तरस आता है, क्या उनको दिखाई नहीं देता कि हम विरोध भी कर रहे हैं और अंदर-अंदर समर्थन भी कर रहे हैं।
तो एआई पर प्रोफेसर साहब के बयान से मुझे उन छात्रों पर अफसोस होता है, जिनको इन्होंने पढ़ाया है। अगर उनका ज्ञान यह है कि 10 साल में एआई देश के सारे युवाओं को बेरोजगार कर देगा तो आप समझिए जो उनसे पढ़कर आगे बढ़े हैं, उनकी सोच नई टेक्नोलॉजी और बदलती दुनिया के बारे में क्या होगी? यह राजनीतिक विरोध का मामला नहीं है। यह देश का मामला है। जब आप देश के बारे में बात कर रहे हैं तो आपको सामान्य ज्ञान होना चाहिए कि एआई क्या है? लेकिन अगर आपको बिना अर्जित किए हुए ज्ञान बांटना है तो आप कुछ भी बोल सकते हैं और अज्ञात विश्वविद्यालय के प्रोफेसर को तो सारी छूट है। ऐसे प्रोफेसर साहब के ज्ञान को नमन करना चाहिए।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)