महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में उपज का सही दाम नहीं मिलने की स्थिति में जब किसान परिवारों ने शहरों की ओर पलायन शुरू किया तो ऐसी विपरीत परिस्थिति में केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुकीं पुणे की रीमा साठे इन किसानों के जीवन में नई रोशनी लेकर पहुंचीं। वह अपने मैन्युफैक्चरिंग और फूड सर्विस मार्केटिंग के अनुभव से किसानों की उपज डेढ़-दोगुने दामों पर खरीदने लगीं। अब इस क्षेत्र के किसानों को उपज का दोगुना भाव मिल रहा है।साठे बताती हैं कि आदिवासी और छोटी जोत के किसान करीब 120 तरह के पारंपरिक अनाज की उपज लेते हैं, जिनमें प्रोटीन की मात्रा बहुत ज्यादा है। यह किसान घर खर्च जितनी ही फसल उगाकर बाकी फसल बाजार में बहुत कम दामों पर बेच रहे थे। पारंपरिक अनाज में ज्वार, बाजरा, कद्दू, मक्का जैसी किस्मों पर सीमा ने शोध किए और पाया कि शहरों में रहने वालों को प्रोटीन युक्त अनाज नहीं मिलता है। इन अनाजों से पौष्टिक उत्पाद बनाकर शहरों में रहने वाले लोगों तक पहुंचाने के लिए उन्होंने प्रशिक्षण लिये और वैज्ञानिकों की मदद से अपना काम शुरू कर दिया। सीमा साठे ने हैप्पी रूट फूड्स एंड बारे ब्रेवरीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी बनाकर महाराष्ट्र के 15 हजार पुरुष और दो हजार महिलाओं को प्रशिक्षित किया। उन्हें सीख दी कि वे अपने पारंपरिक अनाजों को बाजार में सीधे ना बेचकर उसे प्रोसेसिंग करके बेचें, इससे उन्हें दोगुना लाभ मिलने लगा।

छोटी जोत के इन किसानों और ग्रामीण महिलाओं के लिए श्रेष्ठ काम करने को लेकर रीमा को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से नारी शक्ति अवार्ड से सम्मानित किया। उनको यह सम्मान तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने प्रदान किया। रीमा ने आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और मणिपुर में भी अपने काम को विस्तार दे दिया है।

रीमा साठे ने बताया कि अभी छह प्रकार के पौष्टिक खाद्य उत्पाद शुरू किये हैं, जिनमें कुकीज, क्रैकर्स, स्नैक्स शामिल हैं। इनकी खासियत यह है कि यह पारंपरिक अनाज से बनाए जा रहे हैं। यह पौष्टिक खाद्य सामग्री मशीन से नहीं बनाकर हाथ से तैयार की जा रही है। यही वजह है कि इनका स्वाद बाजार में उपलब्ध दूसरे प्रोडक्ट से अलग है। हाल ही में अहमदनगर में निर्मित महिला औद्योगिक सहकारी संस्था है, जिसकी ऑनर दो हजार ग्रामीण महिलाएं हैं। रीमा ने इन महिलाओं को भी खाद्य पदार्थ बनाने का प्रशिक्षण दिया है, साथ ही एक बेकरी यूनिट शुरू की है, जहां यह सभी महिलाएं उत्पाद बनाती हैं। (एएमएपी)