जनरल की किताब को लेकर विवाद के तीन किरदार
प्रदीप सिंह।
पूर्व सेना अध्यक्ष जनरल नरवणे की किताब को लेकर जो विवाद शुरू हुआ है, उसको अगर आप मानेंगे कि खत्म हो गया है तो ऐसा नहीं है। जो लोकसभा में और उसके बाहर हुआ,राहुल गांधी और उनके साथी जो कर रहे हैं,मेरा मानना है कि यह सतह है। सतह के नीचे बहुत कुछ है, जिसका पता लगाया जाना जरूरी है। इस पूरे प्रकरण में मेरा मानना है कि तीन व्यक्ति या संगठन संदेह के घेरे में हैं। पहला जनरल नरवणे, दूसरा प्रकाशक पेंग्विन रैंडम हाउस और तीसरे राहुल गांधी।
वैसे तो हमारे देश में, और मैं अपने को भी उसमें शामिल करता हूं, हम सैन्य अधिकारियों, यहां तक कि सिपाही का भी बहुत सम्मान करते हैं। उनकी राष्ट्रभक्ति पर कभी सवाल नहीं उठाते। तो इसलिए मैं ये सवाल करके जनरल नरवणे के चरित्र पर कोई सवाल नहीं उठा रहा हूं। मैं उनको संदेह के घेरे में रख रहा हूं और उसकी वजह है। तथ्यों से आप नहीं भाग सकते। आप इस षड्यंत्र की गहराई पर विचार कीजिए और मुझे लगता है कि दिल्ली पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के बाद इसका अहसास हो गया तभी अब इसमें क्रिमिनल कांस्परेसी की धारा भी जोड़ दी गई है। राहुल गांधी ने जनरल नरवणे का 2023 का एक ट्वीट दिखाया था कि उनकी पुस्तक प्री पब्लिकेशन बुकिंग के लिए तैयार है। ज्यादातर लोगों को मालूम होगा कि कोई किताब छपने जाती है तो बाजार में आने से पहले उसकी तीन-चार पांच प्रतियां छपती हैं, जो प्रकाशक लेखक और कुछ और लोगों को भेजता है। तो संभव है कि राहुल जो किताब दिखा रहे थे वह प्री पब्लिकेशन कॉपी हो।

लेकिन, सवाल दूसरा है। प्रकाशक ने प्री पब्लिकेशन बुक की कॉपी को रिलीज क्यों किया? यह किताब और इसके कंटेंट दो ही लोग रिलीज कर सकते थे- या तो पब्लिशर, या लेखक। राहुल गांधी को इन्हीं दो माध्यमों से मिल सकती थी। यह कोई सामान्य किताब नहीं थी और दावा किया जा रहा है कि उसमें आर्मी के ऑपरेशनल डिटेल्स बताए गए हैं। अब आर्मी के जनरल से आप यह अपेक्षा तो नहीं करते कि वे आर्मी के ऑपरेशन डिटेल्स को सार्वजनिक करेंगे। दूसरी बात जनरल नरवणे ने प्री पब्लिकेशन के लिए किताब तैयार है, यह ट्वीट जब किया तब भी उनको मालूम था और आज भी मालूम है कि डिफेंस मिनिस्ट्री से किताब को क्लीयरेंस नहीं मिली है। जनरल नरवणे को यह भी पता होगा कि चीन और भारत युद्ध पर तीन किताबें हैं जिनको आज तक मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस से क्लीयरेंस नहीं मिल पाई है। सवाल यह है कि तब उनकी किताब कैसे आ गई? इसका जवाब तो जनरल नरवणे और पब्लिशर को देना ही होगा। पब्लिशर और जनरल नरवणे दोनों ने इस मामले में अपना मुंह तब खोला जब एफआईआर दर्ज हो गई। संसद में जब भारी हंगामा हो रहा था और संसद चल नहीं पा रह थी उस समय पब्लिशर और जनरल नरवणे दोनों ने चुप्पी साध रखी थी। इसके पीछे उद्देश्य क्या था? एफआईआर के बाद भी नरवणे यह नहीं बता रहे हैं कि अपनी कथित किताब के जरिए उन्होंने आर्मी के ऑपरेशनल डिटेल सार्वजनिक करने की कोशिश क्यों की।
मैं जनरल नरवणे की इंटीग्रिटी पर सवाल नहीं उठा रहा हूं। मैं उनकी चुप्पी पर सवाल उठा रहा हूं। मेरी नजर में उनकी पहली गलती यह है कि अगर कोई बातचीत हुई थी और वह सच है तो अपनी किताब में उसे लिखना नहीं चाहिए था। दूसरी बात जब इस पर विवाद शुरू हुआ तो उनको सामने आकर स्पष्टीकरण देना चाहिए था कि उन्होंने अगर सचमुच किताब में ये लिखा है तो क्यों लिखा? उसके पीछे उनकी मंशा क्या थी और किताब अभी छपी नहीं है, ये भी बताना चाहिए था। उनको प्रकाशक के पीछे नहीं छिपना चाहिए था क्योंकि अल्टीमेटली जिम्मेदारी तो जनरल नरवणे की है, जिन्होंने किताब लिखी है। प्रकाशक भी इतने दिनों तक चुप क्यों रहा? 2023 में जब जनरल नरवणे ने पोस्ट किया तब भी प्रकाशक को पता था कि डिफेंस मिनिस्ट्री की क्लीयरेंस नहीं मिली है उसके बिना ऐसी किताब छापी ही नहीं जा सकती। तो उसने प्री पब्लिकेशन कॉपी क्यों छापी? जनरल नरवणे को चाहिए था कि पहले किताब की जो मैनुस्क्रिप्ट है वह डिफेंस मिनिस्ट्री को भेजते। डिफेंस मिनिस्ट्री बताती कि यह हिस्सा निकाल दीजिए बाकी जाने दीजिए। अब उन्होंने डिफेंस मिनिस्ट्री को भेजा कि नहीं, इसके बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं है।
जनरल साहब की चुप्पी, प्रकाशक की चुप्पी और राहुल गांधी का लगातार झूठ बोलना, मैं इन सब मुद्दों को फिलहाल गौण मानता हूं। मेरी नजर में मुख्य मुद्दा यह है कि यह मामला इसी समय क्यों उठाया गया? किताब की प्री पब्लिकेशन बुकिंग को लेकर जनरल नरवणे का पोस्ट 2023 का है। हम आज 2026 में हैं। सवाल है कि उस समय यह मामला क्यों नहीं उठा? अगर प्री पब्लिकेशन में कुछ कॉपियां छप गई थीं तो जाहिर है कि वो कंटेंट पहले से उपलब्ध था। उस समय कांग्रेस पार्टी या राहुल गांधी ने उस मुद्दे को क्यों नहीं उठाया? अब आप समझिए कि षड्यंत्र कहां है। हमारी यूरोपियन यूनियन से डील साइन हो गई है। उसके अलावा इंग्लैंड और कई अन्य देशों से भी एफटीए हुआ है। और सबसे बड़ी बात अमेरिका से ट्रेड डील का फ्रेमवर्क तैयार हो गया। इसकी घोषणा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1 फरवरी की रात में की और 4 फरवरी को राहुल गांधी यह मुद्दा उठाते हैं। ऐसा सिर्फ इसलिए होता है क्योंकि राहुल गांधी को किसी और का दिया हुआ एजेंडा लागू कराना था। इस पर विवाद पैदा करना था। आप किस समय अपने देश की टॉप लीडरशिप पर हमला कर रहे हैं, जब दुनिया में उसका डंका बज रहा है। भारत अमेरिका की ट्रेड डील कोई सामान्य डील नहीं है। यह नरेंद्र मोदी के अंदर जो इस्पात है, उसको दिखाता है। कोई नेता ऐसा नहीं है जिसने इतना धैर्य दिखाया हो और अपने स्टैंड से एक रत्ती पीछे न हटा हो। इस डील का पूरे देश में स्वागत हो रहा है। अब आप ट्रैक कीजिए जब-जब भारत की दृष्टि से कुछ अच्छा होने वाला होता है तब-तब राहुल गांधी इस तरह का मुद्दा उठाते हैं। ये योजनाबद्ध ढंग से एक बड़ा षड्यंत्र है, जिसका पर्दाफाश होना बहुत जरूरी है। यह देश की सुरक्षा का मामला है। कोई पूर्व जनरल हो,कोई पब्लिशर हो या कोई लीडर अपोजिशन हो, इन सबसे ऊपर है देश। राष्ट्र पर इनमें से किसी को तरजीह नहीं दी जा सकती।

राहुल गांधी जो कुछ कर रहे हैं, वह जानबूझकर कर रहे हैं और एक विदेशी पब्लिकेशन हाउस उस खेल को आगे बढ़ा रहा है। अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लीडरशिप को लेकर सवाल उठाने थे तो 2023 में ही क्यों नहीं उठाए गए? क्यों इंतजार किया गया? ऐसे समय क्यों उठाया जब भारत की प्रतिष्ठा पूरी दुनिया में बढ़ रही है। सारी दुनिया के देश खासतौर से ग्लोबल साउथ के देश देख रहे हैं कि भारत किस तरह से अपनी बात पर अड़ा रहा। अमेरिका को झुकना पड़ा। तो जब भारत के लिए कुछ अच्छा हो रहा हो उसी समय राहुल गांधी ऐसे मुद्दे लेकर क्यों आते हैं? और इस बार राहुल गांधी अकेले नहीं है। संदेह के घेरे में और दो हैं। पब्लिशर और खुद जनरल नरवणे। अब जांच हो रही तो राहुल को बताना पड़ेगा कि उनको किताब कहां से मिली। मेरा मानना है कि राहुल गांधी से पूछताछ में खासतौर से अगर कस्टोडियल इंटेरोगेशन होगा तो सच्चाई सामने आएगी। आप राहुल गांधी को देश की प्रतिष्ठा,उसकी एकता,अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा से इस तरह खिलवाड़ नहीं करने दे सकते। समय आ गया है कि राहुल गांधी को यह बताया जाए कि वह जो कर रहे हैं,वह देश विरोधी है और उसकी सजा उनको भुगतनी पड़ेगी।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)



