मोदी आखिर कब डिसाइसिव होकर उठाएंगे कड़ा कदम।

#pradepsinghप्रदीप सिंह।

राहुल गांधी की पूरी राजनीति झूठ पर टिकी है। हमेशा की तरह एक बार फिर उनका झूठ पकड़ा गया है। संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जब से चर्चा शुरू हुई है तब से राहुल गांधी पूर्व सेना अध्यक्ष जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब को लेकर दावा कर रहे हैं कि उसमें यह लिखा हुआ है और वह संसद में उसको पढ़कर सुनाना चाहते थे। स्पीकर ने उनको नियमों का हवाला देते हुए कहा कि अगर आप किसी डॉक्यूमेंट,किताब या मैगजीन को कोट करते हैं तो आपको उसे ऑथेंटिकेट करना पड़ता है। उसकी कॉपी सदन के पटल पर रखनी पड़ती है। लेकिन राहुल गांधी ने इस किताब को ऑथेंटिकेट नहीं किया। वह उसके बिना ही उसको पढ़ना चाहते थे। सवाल यह है कि क्या नेता प्रतिपक्ष ऐसा दृष्टांत पेश करेगा, जो संसदीय नियमों की धज्जियां उड़ाता हो। स्पीकर की रूलिंग को न मानना बहुत बड़ी अनुशासनहीनता है। उनके खिलाफ अगर एक्शन लिया जाता है तो वह एक नजीर बनेगा कि दूसरे सदस्य ऐसा काम करने की हिम्मत न करें।

जब भी चीन का मामला आता है तो राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी बहुत संवेदनशील हो जाते हैं। चाहे आर्थिक मामला हो,सैन्य मामला या राजनीतिक मामला हो,उनको हर हाल में दिखाना होता है कि चीन हमसे बहुत सुपीरियर है और भारत एवं भारत का राष्ट्रीय नेतृत्व यानी प्रधानमंत्री घटिया हैं। राहुल का सबसे ताजा झूठ वह था, जो उन्होंने मंगलवार को बोला। उन्होंने मीडिया को जनरल नरवणे का एक ट्वीट दिखाया,जिसमें कहा गया था कि मेरी किताब अमेजन पर उपलब्ध होने वाली है। किसी भी लेखक की किताब आए तो पब्लिशर अपनी ओर से घोषणा करता है कि फलां तारीख को किताब आने वाली है, आप अगर उसकी प्रति सुरक्षित कराना चाहते हैं तो प्री बुकिंग करा सकते हैं। कुल मिलाकर यह मामला प्री बुकिंग का था। राहुल ने कहा कि जनरल नरवणे यह कह रहे हैं और पब्लिशर कह रहा है कि किताब छपी नहीं तो दोनों में से कोई एक तो झूठ बोल रहा है इसलिए मैं जनरल नरवणे की बात पर विश्वास करूंगा। इसके बाद ही जनरल नरवणे का बयान आ गया और उन्होंने कहा कि जो पब्लिशर कह रहा है वही सही है और मैं पब्लिशर की बात से पूरी तरह सहमत हूं।

मतलब साफ है कि किताब छपी नहीं है, यह बात पब्लिशर कह रहा है और यही बात लेखक कह रहा है। लेकिन राहुल गांधी किताब की एक प्रति लेकर दावा रहे हैं कि किताब छप गई। अब पता नहीं वह सिर्फ कवर या सचमुच की किताब है। वह यह भी बताने को तैयार नहीं हैं कि यह किताब उन्हें कहां से मिली। अब एक ऐसी पुस्तक जो अभी तक छपी नहीं है और जिसमें ऑफिशियल सीक्रेट्स हैं, आर्मी के ऑपरेशनल डिटेल्स हैं, उनको सार्वजनिक करना ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत आता है। इसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है। अब मुझे मालूम नहीं कि पुलिस राहुल गांधी के खिलाफ कोई कारवाई करेगी कि नहीं? मेरा तो मानना है कि इसकी जांच सीबीआई से होनी चाहिए कि राहुल गांधी के पास और उस पत्रिका जिसमें दावा किया गया कि पुस्तक के अंश है, उसको कहां से मिला? किसने दिया?

पब्लिशर और लेखक दोनों किताब के न छपने की बात बोल रहे हैं जबकि राहुल गांधी उनसे उलट बात बोल रहे हैं तो साफ है कि राहुल गांधी झूठ बोल रहे हैं। लेकिन राहुल गांधी के लिए यह कोई नई बात नहीं है। राफेल सौदे पर उन्होंने कितने झूठ बोले सबको पता है। अंत में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को भी लपेट लिया था कि सुप्रीम कोर्ट ने मेरी बात मान ली है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया और कहा कि आपको लिखित और अनकंडीशनल माफी मांगनी पड़ेगी और उन्होंने माफी मांगी। इसी तरह पेगासस और हिंडनबर्ग के मुद्दे पर भी वह लगातार झूठ बोलते रहे। भारत की इकॉनमी को लेकर उन्होंने ट्रंप की नकल करते हुए कि भारत की इकॉनमी डेड है। जबकि उसी डेड इकॉनमी से पूरी दुनिया व्यापार करने के लिए आतुर है। यूरोपियन यूनियन, जिसके 27 देश सदस्य हैं, से हमारा एफटीए हो चुका है। अमेरिका से ट्रेड डील पर हस्ताक्षर होने वाले हैं।

बेहतर होता राहुल सदन में केंद्रीय बजट और ट्रेड डील पर खामी निकालते। विपक्ष का यह संसदीय जनतांत्रिक अधिकार है। लेकिन राहुल गांधी को उन अधिकारों से कोई मतलब नहीं है। वह चीन को बेहतर दिखाने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। वह बताना चाहते हैं कि चीन ने हमको दबा दिया या हम कमजोर पड़ गए और इन तथ्यों के जरिए वह बताना चाहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अनडिसाइसिव है। राहुल का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फैसला लेने के बजाय अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए सारा मामला जनरल नरवणे पर डाल दिया। जबकि जो उचित लगे वह करो कहकर मोदी ने सेना को फ्री हैंड दिया था।

वैसे भी दोनों ओर से हथियार चलते तो जो ग्राउंड पर कमांडर है, वही फैसला लेता और यही गलवान एवं डोकलाम के समय हुआ था। ऑपरेशन सिंदूर के  दौरान भी कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी का फैसला था कि आर्मी, वायुसेना और नौसेना को फ्री हैंड दिया जाएगा। आतंकवादियों के ठिकाने ध्वस्त करने के बाद जब पाकिस्तान ने पलट कर हमला करने की कोशिश की तो आर्मी चीफ प्रधानमंत्री या रक्षा मंत्री के पास नहीं गए कि अब क्या करें?भारतीय सेना ने पाकिस्तान के 13 में से 11 एयरबेस नष्ट कर दिए और उसे घुटनों पर ला दिया। भारत ने अपना लक्ष्य हासिल कर लिया  तो उसके बाद ऑपरेशन को रोक दिया। भले ही ट्रंप दावा करते रहे हों कि उन्होंने युद्ध रुकवा दिया।

अब राहुल गांधी जो कर रहे हैं, उसकी गंभीरता को समझिए। वह भारत की बढ़ती हुई आर्थिक और सैन्य शक्ति, जिसका डंका पूरी दुनिया में बज रहा है, उसकी छवि धूमिल करना चाहते हैं। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जो रुतबा पूरी दुनिया में है, उसको धूमिल करना चाहते हैं। इस देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ज्यादा डिसाइसिव कोई प्राइम मिनिस्टर नहीं हुआ है। और अगर राहुल गांधी को तब भी लगता है कि वह इनडिसाइसिव हैं तो इसका मतलब यह है कि वह चाहते हैं कि प्रधानमंत्री और ज्यादा डिसाइसिव हों। तो प्रधानमंत्री और ज्यादा डिसाइसिव केवल चीन या पाकिस्तान से झड़प की स्थिति होगी,उसी में तो रहेंगे नहीं। फिर वह राजनीतिक रूप से भी रहेंगे और अगर वे ऐसा करेंगे तो राहुल गांधी के लिए केवल एक ही जगह बचेगी,जेल।

कांग्रेस के साथ अन्य विपक्षी दल कितने एकजुट हैं उसे लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ दिए गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस से समझा जा सकता है। इस पर 120 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष के कुल सदस्यों की संख्या 232 है यानी 112 विपक्षी सांसदों ने इस प्रस्ताव के समर्थन में अपने हस्ताक्षर नहीं किए हैं। जैसे-जैसे कांग्रेस और खासतौर से राहुल गांधी की हताशा बढ़ रही है, जैसे-जैसे उनकी उम्मीद खत्म हो रही है कि कभी लौट कर सत्ता में आ सकते हैं, वैसे-वैसे उनका व्यवहार अनुशासन की हर सीमा को तोड़ रहा है। राहुल के लिए संसद और संसदीय नियमों का कोई मतलब नहीं है। ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट का उल्लंघन अगर नेता प्रतिपक्ष कर रहा है तो आप समझिए कि मामला कितना गंभीर है।

कायदे से तो यह मामला दर्ज होने के बाद राहुल गांधी की गिरफ्तारी होनी चाहिए थी। जो किताब छपी नहीं,अगर उससे राहुल गांधी उदाहरण दे रहे हैं  तो सवाल है कि वह कौन सी किताब है। वह सचमुच जनरल नरवणे की है या इनकी कपोल कल्पित। राहुल गांधी अपने ही बनाए झूठ के चक्र में फंस चुके हैं। अगर सरकार वाकई डिसाइसिव होगी और संसदीय जनतंत्र,डेमोक्रेसी एवं इस देश की प्रतिष्ठा को बचाना चाहती है तो वह राहुल गांधी के खिलाफ जितने भी कानून के प्रावधान हैं, उन सबके तहत एक्शन जरूर लेगी।

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)