प्रदीप सिंह
मूरत संवारने में बिगड़ती चली गई,
पहले से हो गया है जहां और भी खराब।
रौशन हुए चिराग तो आंखें नहीं रही,
अंधों को रौशनी का गुमां और भी खराब।।
दुष्यंत कुमार के एक गजल की ये पंक्तियां राहुल गांधी पर बिल्कुल फिट बैठ रही है। उन्हें ठोक पीटकर हिंदू बनाने की कोशिश हो रही है। इस कोशिश का नतीजा यह हुआ है कि उनका हिंदू विरोधी चेहरा खुलकर लोगों के सामने आ गया है और वे लगातार इसको आगे बढ़ाते जा रहे हैं। हिंदू धर्म के बारे में जितनी बार जो बातें वह बोल रहे हैं उससे कई चीजें पता चलती हैं। एक, सनातन धर्म और सनातन संस्कृति का उन्हें रत्ती भर भी ज्ञान नहीं है। उसकी उन्हें कोई समझ नहीं है। उन्हें जो बताया जाता है उसको भी वह आत्मसात करके नहीं बोल पाते हैं। जैसा कहा जाता है सिर्फ उतना बोल लेते हैं। वह एक ऐसे व्यक्ति का प्रवचन लगता है जिसको उस विषय की कोई जानकारी न हो और वह उस पर विशेषज्ञ के रूप में बोलने की कोशिश करे, इसी तरह से नजर आ रहे हैं राहुल गांधी।
अब आप उनकी यात्रा देखिए, उनकी यात्रा में कौन लोग उनसे मिलने आए। शुरू कीजिए तमिलनाडु में जॉर्ज पोन्नियान से, अभी हाल ही में उनसे मिले हैं कमल हासन। जाने-पहचाने चेहरे जो घोषित रूप से हिंदू विरोधी हैं उनसे उनका संपर्क है। उनको अपनी भारत जोड़ो यात्रा में जोड़कर या तो उनको सम्मानित कर रहे हैं या खुद सम्मानित होना चाहते हैं ये तो कांग्रेस के लोग ही जानें लेकिन हिंदू धर्म का अपमान जरूर हो रहा है। कांग्रेस की सारी कोशिश यही है कि किसी तरह से राहुल गांधी को हिंदू के रूप में पेश कर दिया जाए। पहले जनेऊधारी हुए, फिर गोत्र बताना शुरू किया, उसके बाद कैलाश मानसरोवर चले गए अपने को शिवभक्त बताने के लिए, फिर राम भक्त हो गए, समय के साथ उनका स्वरूप बदलता रहता है। अगर वह अपनी पार्टी को, अपने को हिंदू समर्थक या हिंदूवादी बनाना चाहते हैं या हिंदू धर्म का रक्षक बताना चाहते हैं तो उनको बहुत से सवालों के जवाब देने पड़ेंगे। कांग्रेस के बारे में यह धारणा क्यों बन गई है कि वह हिंदू विरोधी पार्टी है?

इन वजहों से बनी हिंदू विरोधी छवि
शुरुआत बहुत पुरानी बात से नहीं करूंगा, गौ हत्या विरोधी आंदोलन से करूंगा। गौ हत्या के विरोध में साधु-संत संसद के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। उस समय कांग्रेस की सरकार थी और इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए गोली चलाई गई और लोग मारे गए। कितने साधु-संत मारे गए इसकी संख्या पर विवाद हो सकता है लेकिन गोली चली और साधु-संत मारे गए इस पर कोई विवाद नहीं है। उनकी मांग थी कि गौ हत्या पर प्रतिबंध लगाया जाए जो संविधान के डायरेक्टिव प्रिंसिपल्स में है। संविधान सम्मत मांग करने पर भी साधु-संतों पर गोली चलाई गई। उसके बाद कांग्रेस पार्टी ने अयोध्या में राम मंदिर का विरोध किया। कांग्रेस पार्टी हिंदू विरोधी है यह बात उसकी विरोधी भारतीय जनता पार्टी नहीं कह रही है, कांग्रेस के लोग ही कह रहे हैं। गांधी परिवार के सबसे करीबी एके एंटनी अपनी रिपोर्ट में 2014 के बाद कह चुके हैं और अभी कांग्रेस के स्थापना दिवस समारोह में भी उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को हिंदुओं से भी जुड़ना चाहिए, हिंदुओं को भी जोड़ना चाहिए। उन्होंने यह बयान बंद कमरे में नहीं बल्कि सार्वजनिक रूप से दिया है। कांग्रेस को इस छवि से निकालने के लिए अगर राहुल गांधी हिंदू बनने की कोशिश कर रहे हैं तो इसमें कोई ऐतराज नहीं है। कोई कुछ भी बनने की कोशिश करे उसका कोई विरोध नहीं होना चाहिए लेकिन उसकी समझ तो होनी चाहिए, उसकी जानकारी तो होनी चाहिए। भारत जोड़ो यात्रा में उन्होंने दो बातें कहीं हैं। एक बात उन्होंने कही कि जय श्री राम नहीं, जय सियाराम। जिसको सनातन धर्म-संस्कृति की बुनियादी समझ भी नहीं है वही इस तरह की बात कर सकता है। जय सियाराम और जय श्री राम में कोई फर्क नहीं है। श्री देवी स्वरूप के लिए है और जब हम श्री राम बोलते हैं तो इसका मतलब सीता और राम बोल रहे हैं। यह राहुल गांधी की समझ से परे है। उनको लगता है कि जय श्री राम का नारा बीजेपी ने लगाया है इसलिए यह गलत ही होगा, इसलिए इसका विरोध होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीजेपी जय सियाराम क्यों नहीं बोलती है। सवाल यह है कि बीजेपी जो नारा लगा रही है उससे आपको समस्या क्या है, उसमें गलत क्या है।
तपस्वी बनाम पुजारी
दूसरी बात उन्होंने कही कि यह देश पुजारियों का नहीं तपस्वियों का है। यह देश तपस्वियों है कि इसमें कोई शक नहीं है लेकिन पुजारियों ने हजार साल से आक्रमणकारियों से इस धर्म को अपनी जान देकर बचाने का प्रयास किया। ये भूल जाते हैं कि स्वामी विवेकानंद के गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस पुजारी ही थे। पुजारियों ने आक्रमणकारियों से अपने इष्ट देवताओं की मूर्तियों को बचाने के लिए अपनी जान दी है। वर्ष 1327 की घटना का जिक्र कर रहा हूं। श्रीरंगम मंदिर में जब कीमती आभूषण और हीरे-जवाहरात नहीं मिले तो ऊलूक खान ने एक दिन में 12 सौ पुजारियों की हत्या की। राहुल गांधी जब पुजारियों के खिलाफ जब बोलते हैं तो लगता है कि उनको भारत के संविधान की भी जानकारी नहीं है। भारत का संविधान कहता है कि पुजारी ही देवता का रक्षक है। जो इष्ट देवता स्थापित हैं, मूर्ति में जिनकी प्राण प्रतिष्ठा की गई है उनका रक्षक, उनका कानूनी अभिभावक पुजारी ही होता है। पुजारी के खिलाफ बोल कर आप हिंदू धर्म का रक्षक बनने की कोशिश करें, खुद को हिंदू बताने की कोशिश करें, तपस्वी और पुजारी को एक दूसरे के आमने-सामने खड़ा करने की कोशिश करें कि तपस्वी अच्छा होता है पुजारी बुरा होता है, इस तरह का तर्क वही दे सकता है जिसको हिंदू धर्म की कोई समझ न हो और वह समझना भी नहीं चाहता हो। उसको सिर्फ एक नैरेटिव खड़ा करना है, यह बताना है कि जो कुछ उसके विरोधी कर रहे हैं खासतौर से भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वह सब गलत है, हिंदू विरोधी है। हिंदुत्व क्या है, हिंदू धर्म क्या है यह हम जानते हैं। उनके सलाहकार उनको इस तरह की जानकारियां देते हैं। इस देश में जितने भी आक्रमणकारी आए उनके निशाने पर जब भी मंदिर आए तो सबसे पहले पुजारी निशाने पर आए। उन्होंने पुजारियों की हत्या की, उन पर अत्याचार किया और उसके बाद मंदिरों को लूटा, मूर्तियों को तोड़ा। पुजारियों ने जान दे दी लेकिन अपने इष्ट देवता को बचाने की कोशिश नहीं छोड़ी। औरंगजेब के लोगों ने जब काशी विश्वनाथ मंदिर पर हमला किया तो मंदिर के पुजारी शिवलिंग को लेकर कुएं में कूद गए कि हम मर जाएंगे लेकिन शिवलिंग बचा रहेगा। हिंदू धर्म की रक्षा में यह है पुजारियों का योगदान जिसके बारे में राहुल गांधी और उनके सलाहकारों को कुछ पता नहीं है। इसलिए मैंने शुरू में कहा कि मूरत संवारने में बिगड़ती चली गई।
छवि बदलने की कोशिश

राहुल गांधी की छवि बदलने की जो कोशिश कर रहे हैं, जो उनको हिंदू धर्म से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, उनको बड़ा हिंदू बताने की कोशिश कर रहे हैं उनको यह समझ में नहीं आ रहा है कि यह सब जो उनसे करवा रहे हैं यह सब हिंदू धर्म के खिलाफ है। पुजारियों के बारे में जो यह सोच है यह औपनिवेशिक सोच है। यह उन लोगों की सोच है जो हिंदू धर्म से लोगों का धर्म परिवर्तन कराते थे, चाहे ईसाई मिशनरी हों चाहे इस्लाम को मानने वाले। उनके निशाने पर जो पहला व्यक्ति होता था वह पुजारी होता था। उनको लगता था कि सबसे बड़ी बाधा यही है। राहुल गांधी को कोई बताए कि पुजारी विलेन नहीं है, हिंदू धर्म का विरोधी नहीं है। पुजारी इस धर्म के रक्षकों की सबसे अगली पंक्ति में खड़ा है। तो हो यह रहा है कि हिंदू बनने के चक्कर में उनका हिंदू विरोधी चेहरा सामने आता जा रहा है और खुद को हास्यास्पद बनाते जा रहे हैं। तभी वह कौरवों और पांडवों का उदाहरण दे रहे हैं कि पांडवों ने क्या नोटबंदी लागू की थी, जीएसटी लागू की थी। अरे भाई, आप कुछ समझदारी की तो बात कीजिए। कोई पलटकर इसी कुतर्क के आधार पर यह पूछे कि क्या पांडवों ने नसबंदी की थी, इमरजेंसी लागू की थी, साढ़े तीन हजार सिखों की हत्या करवाई थी तो क्या जवाब होगा आपके पास। जीएसटी, नोटबंदी या सरकार के दूसरे फैसलों से कौरवों-पांडवों का क्या मतलब है। इस तरह का उदाहरण वही दे सकता है जिसको भारतीय संस्कृति-सभ्यता की समझ नहीं है, जिसको महाभारत-रामायण की समझ नहीं है।
हिंदू विरोधी एजेंडा
उन्होंने एक बात और कही कि बीजेपी के लोग हर-हर महादेव नहीं बोल सकते। अब आप सोचिए कि इस बात को इस देश में कोई मान सकता है क्या, बीजेपी का बड़ा से बड़ा विरोधी भी मान सकता है क्या? नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में ज्योतिर्लिंगों के पुनरुद्धार का जो कार्यक्रम चला है वह आज तक इतिहास में नहीं हुआ। केदारनाथ धाम का जिस तरह से पुनरुद्धार हुआ, काशी विश्वनाथ धाम का जो पुनर्विकास हुआ, इसके अलावा महाकाल का जो पुनर्निर्माण हुआ यह सब मोदी के कार्यकाल में हुआ है। राहुल गांधी यह साबित करने की कोशिश करें कि वह मोदी से बड़े शिव भक्त हैं तो कौन मानने को तैयार होगा। शिव भक्ति का कौन सा स्वरूप उन्होंने देखा है। वह कहते हैं कि जाइए भगवान शिव को पढ़िए, उन्होंने कभी कहा कि जाइए अल्लाह के बारे में पढ़िए, जाइए जीसस क्राइस्ट के बारे में पढ़िए। क्यों सारे उदाहरण हिंदू धर्म से देते हैं, क्यों और मजहब-पंथ से उदाहरण नहीं देते हैं। इस एजेंडे को समझिए, दरअसल यह इनका हिंदू विरोधी एजेंडा है। यह वही माइंडसेट है जो अंग्रेजों का, मुगलों का, मुस्लिम शासकों का था कि हमला वहां करो जहां सबसे ज्यादा चोट पहुंचे। आजादी के बाद से कांग्रेस लगातार अयोध्या में राम मंदिर का विरोध करती रही है। यह अलग बात है कि राजनीतिक दबाव में उसने शिलान्यास करवाया, राजनीतिक दबाव में उसका फायदा उठाने के लिए ताला खुलवाया लेकिन राम मंदिर न बने इसके लिए हर संभव प्रयास कांग्रेस पार्टी ने किया लेकिन कामयाब नहीं हुए। वह पार्टी अगर आज दावा करने की कोशिश करे कि वह सबसे बड़ी हिंदू समर्थक है, हिंदुओं की रक्षक है तो कौन विश्वास करेगा।
अच्छा होगा कि राहुल गांधी के सलाहकार यह नकली कोशिश बंद कर दें। वह जितना इस मूरत को संवारने की कोशिश कर रहे हैं उतनी वह बिगड़ती जा रही है, उनका हिंदू विरोधी चेहरा खुलकर लोगों के सामने आता जा रहा है। वह जिस तरह से हिंदू धर्म का मजाक उड़ा रहे हैं उससे हिंदू धर्म में आस्था रखने वालों को चोट पहुंच रही है। यह बात कांग्रेस पार्टी की समझ में नहीं आ रही है। दरअसल, ऐसा करके कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं। यह बात जब तक उनकी और उनकी पार्टी की समझ में आएगी तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।


