
विचार योग्य नहीं
तमिलनाडु सरकार के एएजी अमित आनंद तिवारी ने कहा है कि केंद्र की यह समीक्षा याचिका विचार योग्य नहीं है। मामले में सुनवाई के दौरान केंद्र के वकील मौजूद ही नहीं थे और एक बार मामले को इस बात पर स्थगित भी किया गया था कि केंद्र के वकील कोर्ट में नहीं हैं। उन्हें नहीं लगता कि कोर्ट इस याचिका को स्वीकार करेगा।
क्या था आदेश
जस्टिस बीआर गवई व बीवी नागरत्ना की पीठ ने मई 2022 के आदेश के आलोक में राजीव गांधी हत्याकांड के छह दोषियों को रिहा करने का आदेश दिया था। मई के आदेश में तीन जजों की पीठ ने दोषी एजी पेरारीवलन को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत असाधारण शक्तियों का प्रयोग करते हुए रिहा करने का आदेश दे दिया था। कोर्ट ने कहा था राज्यपाल ने उनकी क्षमा याचिका पर फैसला लेने में ढाई वर्ष से ज्यादा समय गया है जिससे वह रिहाई का हकदार है। पेरारीवेलन के फैसले को आधार बनाते हुए दो जजों की पीठ ने 11 नवंबर शेष छह दोषियों को रिहाई का आदेश दे दिया।
केंद्र ने कहा- हमारा पक्ष सुने बिना दोषियों को छोड़ा गया
केंद्र सरकार ने पुनर्विचार याचिका में कहा- हमें अपना पक्ष रखने का पूरा मौका नहीं दिया गया। दोषियों ने केंद्र सरकार को याचिका में पार्टी नहीं बनाया। याचिकाकर्ताओं की इस गलती के कारण मामले की सुनवाई में भारत सरकार अपना पक्ष नहीं रख पाई। इससे नैचुरल जस्टिस के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ है। इसके अलावा रिहा किए गए दोषियों में 2 श्रीलंकाई नागरिक हैं। पिटीशन के मुताबिक देश के कानून के तहत दोषी ठहराए गए दूसरे देश के आतंकवादी को छूट देने का इंटरनेशनल इफेक्ट होगा। इसलिए यह मामला भारत सरकार के तहत आता है। लिहाजा, इतने गंभीर मामले में भारत सरकार का पक्ष जानना बेहद जरूरी था। इस मामले का असर देश के लॉ एंड ऑर्डर के साथ ही जस्टिस सिस्टम पर होता है।




