राजीव गांधी हत्याकांड के छह दोषियों को रिहा करने के 11 नवंबर के आदेश के खिलाफ केंद्र की पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट जल्द सुनवाई करेगा। आपराधिक मामला होने की वजह से प्रबल संभावना है कि इस याचिका को खुली अदालत में सुना जाएगा। सामान्यत समीक्षा याचिकाओं को सर्कुलेशन के जरिये जज चेंबर में सुनते हैं और बिना नोटिस के फैसला कर देते हैं।यह मामला खुली अदालत में आया तो पक्षों को नोटिस जारी किया जाएगा। सभी को सुनने के बाद कोर्ट फैसला लेगा। सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिकाओं की सफलता दर बहुत ही कम 0.1 फीसदी है। अनुच्छेद 137 तथा अनुच्छेद 145 के तहत सुप्रीम कोर्ट अपने द्वारा सुनाए गए फैसलों की समीक्षा करता है। वर्ष 1975 में दिए गए फैसले के अनुसार सुप्रीम कोर्ट तीन आधारों पर अपने फैसलों के खिलाफ समीक्षा याचिकाओं को स्वीकार करता है।

विचार योग्य नहीं

तमिलनाडु सरकार के एएजी अमित आनंद तिवारी ने कहा है कि केंद्र की यह समीक्षा याचिका विचार योग्य नहीं है। मामले में सुनवाई के दौरान केंद्र के वकील मौजूद ही नहीं थे और एक बार मामले को इस बात पर स्थगित भी किया गया था कि केंद्र के वकील कोर्ट में नहीं हैं। उन्हें नहीं लगता कि कोर्ट इस याचिका को स्वीकार करेगा।

क्या था आदेश

जस्टिस बीआर गवई व बीवी नागरत्ना की पीठ ने मई 2022 के आदेश के आलोक में राजीव गांधी हत्याकांड के छह दोषियों को रिहा करने का आदेश दिया था। मई के आदेश में तीन जजों की पीठ ने दोषी एजी पेरारीवलन को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत असाधारण शक्तियों का प्रयोग करते हुए रिहा करने का आदेश दे दिया था। कोर्ट ने कहा था राज्यपाल ने उनकी क्षमा याचिका पर फैसला लेने में ढाई वर्ष से ज्यादा समय गया है जिससे वह रिहाई का हकदार है। पेरारीवेलन के फैसले को आधार बनाते हुए दो जजों की पीठ ने 11 नवंबर शेष छह दोषियों को रिहाई का आदेश दे दिया।

केंद्र ने कहा- हमारा पक्ष सुने बिना दोषियों को छोड़ा गया

केंद्र सरकार ने पुनर्विचार याचिका में कहा- हमें अपना पक्ष रखने का पूरा मौका नहीं दिया गया। दोषियों ने केंद्र सरकार को याचिका में पार्टी नहीं बनाया। याचिकाकर्ताओं की इस गलती के कारण मामले की सुनवाई में भारत सरकार अपना पक्ष नहीं रख पाई। इससे नैचुरल जस्टिस के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ है। इसके अलावा रिहा किए गए दोषियों में 2 श्रीलंकाई नागरिक हैं। पिटीशन के मुताबिक देश के कानून के तहत दोषी ठहराए गए दूसरे देश के आतंकवादी को छूट देने का इंटरनेशनल इफेक्ट होगा। इसलिए यह मामला भारत सरकार के तहत आता है। लिहाजा, इतने गंभीर मामले में भारत सरकार का पक्ष जानना बेहद जरूरी था। इस मामले का असर देश के लॉ एंड ऑर्डर के साथ ही जस्टिस सिस्टम पर होता है।

कोर्ट ने देश की भावनाओं का ध्यान नहीं रखा : कांग्रेस

राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों की रिहाई पर कांग्रेस ने कहा था- ये मंजूर नहीं है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा था- सुप्रीम कोर्ट ने फैसला देते वक्त देश की भावनाओं को ध्यान में नहीं रखा। फैसला गलतियों से भरा हुआ है।

चुनावी रैली में हुई थी राजीव गांधी की हत्या

राजीव गांधी की 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में एक चुनावी रैली के दौरान लिट्टे की धनु नाम की एक आत्मघाती हमलावर ने हत्या कर दी थी। लिट्टे की महिला आतंकी धनु (तेनमोजि राजरत्नम) ने राजीव को फूलों का हार पहनाने के बाद उनके पैर छुए और झुकते हुए कमर पर बंधे विस्फोटकों में ब्लास्ट कर दिया। धमाका इतना जबर्दस्त था कि कई लोगों के चीथड़े उड़ गए। राजीव और हमलावर धनु समेत 16 लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि 45 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। (एएमएपी)