सेना के शौर्य पर पृथ्वीराज चव्हाण ने उठाए सवाल, कांग्रेस चुप।
प्रदीप सिंह।
देश में कोई ऐसा नेता जिसे गंभीर और ईमानदार समझा जाता रहा हो, वह अगर मंदबुद्धि की तरह और देश के विरोध में बोलने लगे तो उसका क्या किया जाए? ऐसे नेता से किस तरह निपटा जाए। मैं बात कर रहा हूं महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण की। उन्होंने मंगलवार को बयान दिया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पहले ही दिन हम लड़ाई हार चुके थे। उन्होंने तीन एयरबेस सिरसा,ग्वालियर और भटिंडा का नाम लेते हुए कहा कि यहां से हमारा कोई फाइटर जेट उड़ ही नहीं पाया। अगर उड़ता तो पाकिस्तान उसे गिरा देता। हमारी पूरी वायुसेना जमीन पर खड़ी रह गई। हैरत तो यह है कि पृथ्वीराज चव्हाण अपने इस बयान से पीछे हटने और माफी मांगने को भी तैयार नहीं हैं।

अब कोई पृथ्वीराज चव्हाण से पूछे कि अगर भारत की पूरी वायुसेना जमीन पर ही रह गई तो पाकिस्तान के 11 एयरबेस किसने नष्ट किए। क्या वे कांग्रेस पार्टी के बयानों से नष्ट हो गए। भारतीय सेना ने पाकिस्तान के एयरबेस नष्ट करने का सिर्फ दावा नहीं किया है बल्कि पूरी दुनिया को उसकी सेटेलाइट इमेज भी दिखाई है। अपने एयरबेस नष्ट होने का प्रमाण तो खुद पाकिस्तान ने भी दिया। उसने इनकी मरम्मत के लिए इंटरनेशनल टेंडर निकाला है। पृथ्वीराज चव्हाण को शायद पता ही नहीं है कि भारत के पास केवल ये तीन एयरबेस नहीं हैं और भी एयरबेस हैं भारत जहां से पाकिस्तान पर हमला करने की स्थिति में है। भारत के हमले से पाकिस्तान के डीजीएमओ को गिड़गिड़ाना पड़ा कि आप रुक जाइए। तब ऑपरेशन सिंदूर को भारत ने रोका। तो हमारी वायु सेना उड़ नहीं पाई। जेट हमारे गिर गए और युद्ध विराम के लिए पाकिस्तान गिड़गिड़ाने लगा। इस तरह का कुतर्क केवल कांग्रेस का ही कोई नेता कर सकता है।
पृथ्वीराज चव्हाण ने भारतीय सेना के बारे में जिस तरह का बयान दिया है वैसा तो कोई घोर भारत विरोधी पाकिस्तानी भी नहीं दे सकता। उनको समझदार नेता माना जाता था। लेकिन होता क्या है कि कांग्रेसियों को सत्ता में रहने की आदत पड़ गई है। सत्ता से बाहर होते ही वे पानी से बाहर आई मछली की तरह तड़पने लगते हैं। 2014 से कांग्रेस लगातार केंद्र में सत्ता से बाहर है। महाराष्ट्र में ढाई साल के लिए उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में सरकार जरूर बनी, लेकिन कांग्रेस की उसमें कोई बड़ी भूमिका नहीं थी। 2024 के विधानसभा चुनाव में जिस तरह का नतीजा आया है उससे कांग्रेसियों को समझ में आ गया है कम से कम महाराष्ट्र की सत्ता में उनके आने की संभावना दूर-दूर तक नहीं है। तो पृथ्वीराज चव्हाण की अगली पीढ़ी भी सत्ता में आने वाली नहीं है। 2024 में वे महाराष्ट्र के कराड़ विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े थे। चुनाव से पहले उन्होंने सार्वजनिक रूप से बयान दिया था कि मैं मुख्यमंत्री रह चुका हूं। महाराष्ट्र में अगर गठबंधन की सरकार बनेगी तो मैं ही मुख्यमंत्री बनूंगा। लेकिन जब नतीजा आया तो वे 40 हजार वोटो से चुनाव हार गए। इससे आप अंदाजा लगा लीजिए कि जनता के बीच में उनकी क्या हैसियत है। जब उन्हें कुछ नहीं मिला तो सेना पर हमले शुरू कर दिए। हैरत की बात तो यह है कि पृथ्वीराज चव्हाण ने अपने कुतर्क के लिए दिन भी विजय दिवस 16 दिसंबर का चुना। जिस दिन भारत ने पाकिस्तान के दो टुकड़े किए थे। जब उनसे पूछा गया कि उनकी जानकारी का आधार क्या है? तो वह बताने को तैयार नहीं हुए। वे यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि यह युद्ध मिसाइलों से हुआ। तो यह 12 लाख की सेना किस काम की है? हमें इसकी कोई जरूरत नहीं है। इसको किसी और काम में लगाइए। पृथ्वीराज चव्हाण को यह पता ही नहीं है कि 2020 से लद्दाख में हमारी सेनाएं चीन की सेना के आमने-सामने खड़ी हैं। चीन के सामने अगर हम झुके नहीं तो इसलिए कि हमारी सेना वहां तैनात है। ये सैनिक उसी 12 लाख में से हैं, जिनको वह खत्म करने या हटाने की बात कर रहे हैं।

पृथ्वीराज चव्हाण ने जिस तरह का बयान दिया है, अगर उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया तो इस तरह की प्रवृत्ति बढ़ती जाएगी। उनसे पूछा जाना चाहिए कि आपको यह सूचना कहां से मिली? क्योंकि इस तरह की सूचना तो देने में पाकिस्तान भी हिचकिचाएगा। दुनिया के किसी स्ट्रेटजिक एक्सपर्ट ने इस तरह की बात नहीं कही है। सबने एक स्वर से कहा है कि आपरेशन सिंदूर भारत की बहुत बड़ी जीत है। पृथ्वीराज चव्हाण के साथ किस तरह का व्यवहार हो,इसके लिए कानून में अगर कोई प्रावधान नहीं है तो किया जाना चाहिए। देश की सार्वभौमिकता,एकता, अखंडता के खिलाफ बोलने वालों के साथ नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। उन पर मुकदमा दर्ज होना ही चाहिए। आप मान कर चलिए कि पाकिस्तान में उनका यह बयान खूब जोर शोर से दिखाया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के राजनयिक इस बयान को बढ़ा चढ़ाकर बताएंगे। अफसोस की बात है कि जो पार्टी इस देश में 5-6 दशक तक राज कर चुकी हो। जो आज भी 1971 और 1965 की जीत का दावा करती हो,वह पार्टी सेना के बारे में इस तरह की अपमानजनक टिप्पणी के विरोध में बोलती तक नहीं है। यह कांग्रेस पार्टी के पतन की पराकाष्ठा है। पृथ्वीराज चव्हाण अगर कहते हैं कि 12 लाख सैनिकों की जरूरत नहीं है तो इस देश को कांग्रेस जैसी पार्टी की क्या जरूरत है?
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक और ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)



