तापमान माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक जाने पर भी तालाबों से मिलेगा पीने का पानी।
सेना ने अब तक पूर्वी लद्दाख में तैनात सैनिकों के लिए 22 हजार अतिरिक्त आवास बनाए।
इंजीनियर इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने बताया कि दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) जैसे अग्रिम स्थानों पर सैनिकों ने इस साल कड़ाके की ठंड में भी तालाबों के ताजे पानी का इस्तेमाल किया। डीबीओ लद्दाख में सबसे ठंडे और सबसे आगे के स्थानों में से एक है, जहां अत्यधिक ठंड पड़ती है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक सर्दियों में सतह के स्तर पर पानी जम जाता है, लेकिन नीचे यह तरल रूप में रहता है। इन क्षेत्रों में तापमान शून्य से 40 डिग्री नीचे जाने पर सैनिकों को ताजा पानी और भोजन उपलब्ध कराना चुनौती बन जाता है।

कोर ऑफ इंजीनियर्स ने सैनिकों को चीन सीमा के पास अग्रिम स्थानों पर रहने में मदद करने और वहां रहने की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए व्यापक कार्य किया है। लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल ने कहा कि सेना ने अब तक पूर्वी लद्दाख में सैनिकों के लिए 22 हजार अतिरिक्त आवास बनाए हैं। इन्हें इस तरह से बनाया गया है कि इमारतों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक उठाया जा सके और जरूरत के अनुसार विशिष्ट क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जा सके। इसके अलावा टैंकों, तोपों और पैदल सेना के लड़ाकू वाहनों के लिए बड़ी संख्या में आवास भी बनाए हैं ताकि बख्तरबंद कोर बहुत ठंडी परिस्थितियों में भी उन्हें संचालित कर सकें।
भारतीय सेना एलएसी पर सैनिकों को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करने के लिए मॉड्यूलर, 3डी-मुद्रित अगली पीढ़ी के बंकरों का निर्माण करेगी। यह संरचना केवल 100 मीटर की दूरी से टी-90 टैंक से सीधे हिट का सामना करने के लिए काफी मजबूत होगी। 3डी प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग करने का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक बंकर के निर्माण से जुड़ी लागत और समय को कम करना है। सेना के अधिकारियों के अनुसार एक बंकर की कुछ ही घंटों में 3डी प्रिंटिंग की जा सकती है। इनके अगले साल से चालू होने की संभावना है। (एएमएपी)



