पिछड़ा वर्ग के आरक्षण में मुसलमानों की सेंध का रास्ता खोला

#pradepsinghप्रदीप सिंह
सोनिया गांधी,कांग्रेस की सबसे बड़ी नेता। वह एनएससी की चेयरमैन रहीं। पार्लियामेंट्री पार्टी की चेयरमैन अब भी हैं। लीडर अपोजिशन रहीं। एक समय डिफेक्टो प्राइम मिनिस्टर रहीं। मनमोहन सिंह तो मात्र कठपुतली थे,जिनकी डोर सोनिया गांधी के हाथ में थी। उन सोनिया गांधी ने इस देश के पिछड़ा वर्ग के साथ बहुत बड़ा खेल किया।
वैसे तो कांग्रेस हमेशा ही पिछड़ा वर्ग के खिलाफ रही है। जवाहरलाल नेहरू ने पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के लिए काका कालेकर कमेटी की जो रिपोर्ट थी,उसे लागू नहीं किया। इंदिरा गांधी ने उसको ठंडे बस्ते में डाल दिया। इसके बाद जब पिछड़ों को आरक्षण के लिए वीपी सिंह की सरकार मंडल कमीशन की सिफारिशों को लागू कर रही थी तो उस समय विपक्ष के नेता राजीव गांधी ने उसका विरोध किया। उन्होंने डेढ़ घंटे से ज्यादा समय तक भाषण देते हुए कहा कि यह बहुत खतरनाक है। इसके अलावा आपको एक राज्य मध्य प्रदेश का उदाहरण देता हूं। वहां पिछड़ा वर्ग की आबादी अच्छी खासी है। मध्य प्रदेश में पिछड़ा वर्ग के पांच मुख्यमंत्री हुए हैं और पांचों भारतीय जनता पार्टी से हुए हैं। कांग्रेस ने एक भी ऐसा मुख्यमंत्री नहीं बनाया,जो पिछड़ा वर्ग से आता हो। तो यह कांग्रेस का इतिहास है। अब जानिए पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के साथ जो खेल सोनिया गांधी ने किया?
मुस्लिम समाज में जो अशिक्षा है,गरीबी है,उनकी जो हालत है, उसको सुधारने के लिए क्या किया जाना चाहिए और यह स्थिति क्यों है,इस बारे में पता लगाने और सुझाव के लिए सच्चर कमेटी का गठन किया गया था। सच्चर कमेटी की रेकमेंडेशन थी कि मुस्लिम समाज की पिछड़ी जातियों को पिछड़ा वर्ग के आरक्षण में शामिल कर लिया जाए। अब आप देखिए इस्लाम और क्रिश्चियनिटी दोनों कहते हैं कि हमारे यहां कोई भेदभाव नहीं है और सब बराबर हैं। 1950 में संविधान बनाते समय आरक्षण की जो व्यवस्था की गई वह उन हिंदू जातियों के लिए थी,जो छुआछूत का शिकार थीं, शिक्षा के क्षेत्र में और आर्थिक रूप से पीछे रह गई थीं। उस समय कहा गया था कि केवल हिंदू समाज में ही छुआछूत और भेदभाव होता है, इसलिए उनको आरक्षण की जरूरत है। फिर सवाल आया कि हिंदू कौन? तो संविधान सभा की बहस में है जो मुसलमान नहीं है,जो ईसाई नहीं है,जो पारसी नहीं है,वह सब हिंदू हैं। यानी हिंदुओं के साथ सिख,बौद्ध,जैन को भी हिंदू माना गया। उसी आधार पर आरक्षण दिया गया।

सोनिया गांधी जब कांग्रेस अध्यक्ष,एनएससी की चेयरमैन, पार्लियामेंट्री पार्टी के चेयरमैन और एक तरह से देश की डिफेक्टो प्राइम मिनिस्टर थीं,उस समय पिछड़ा वर्ग को दिए गए 27% आरक्षण में खेल करते हुए सच्चर कमेटी की सिफारिशों के आधार पर कई मुस्लिम जातियों को भी इसमें शामिल कर दिया गया। याद रखिए देश में धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं है। इस्लाम और क्रिश्चियनिटी कहते हैं कि हमारे यहां कोई जाति व्यवस्था नहीं है। लेकिन जैसे ही आरक्षण की बात आई तो इस्लाम और क्रिश्चियनिटी दोनों में जाति आ गईं। आज देश का हर प्रदेश ये कर रहा है। पिछड़ा वर्ग के आरक्षण में मुसलमानों की सेंध लग चुकी है। जिस सेंध का रास्ता खोला सोनिया गांधी ने खोला।
सोनिया गांधी ने जो किया, उसका सबसे ज्यादा नुकसान किसको हो रहा है? पिछड़ा वर्ग को। उनका जो हिस्सा है 27% का उसमें अब एक अनुमान है कि मुसलमानों की 70% से ज्यादा आबादी पिछड़ा वर्ग के नाम पर शामिल हो गई है और आरक्षण का लाभ उठा रही है। आज हालत यह है कि मुसलमान माइनॉरिटी का लाभ भी उठा रहे हैं और पिछड़ा वर्ग के आरक्षण का भी। ऐसा कैसे हो सकता है? या तो फिर आप अपने को माइनॉरिटी कहना बंद कीजिए। जो लोग कन्वर्ट हो गए,ईसाई बन गए,मुसलमान बन गए उनको भी आरक्षण मिलना चाहिए। और यह काम देश में बहुत तेजी से हो रहा है। खासतौर से ईसाई मजहब में। क्रिप्टो क्रिश्चियन की एक तरह से बाढ़ आ रही है, लेकिन पिछड़ा वर्ग के लोग कान में तेल डालकर सो रहे हैं। सनातन के लोग कंबल ओढ़कर सो रहे हैं। किसी को इस बात की चिंता ही नहीं है कि इसका विरोध होना चाहिए।

अभी इलाहाबाद हाईकोर्ट का जजमेंट आया है कि अगर आपने धर्म परिवर्तन कर लिया है,चाहे जिस जाति के हो, अगर उसको आरक्षण का अधिकार है तो आरक्षण का अधिकार खत्म हो जाएगा। मुसलमानों को जो पिछड़ा वर्ग में आरक्षण दिया जा रहा है और यह मांग हो रही है कि जो एससी-एसटी समाज के लोग क्रिश्चियन या मुसलमान बन गए हैं, उनको भी आरक्षण मिले, यह दरअसल डेमोग्राफी चेंज करने का बहुत बड़ा षड्यंत्र है। जिसके बारे में इस देश में कोई चर्चा भी करने को शायद तैयार नहीं है। इस ओर लोगों का ध्यान भी नहीं है कि कैसे हमारी जड़ों में तेजाब डाला जा रहा है। आखिर पिछड़ा वर्ग के आरक्षण में मुसलमान और ईसाइयों को आरक्षण क्यों मिले? वे किसका हिस्सा खा रहे हैं? वे हिंदू पिछड़ा वर्ग का ही हिस्सा खा रहे हैं। और जिस तरह से वे अपनी आबादी बढ़ा रहे हैं,डेमोग्राफी चेंज कर रहे हैं, एक समय आएगा कि पिछड़ा वर्ग में हिंदू माइनॉरिटी में जा सकता है। तो मैं मानता हूं कि यह सोनिया गांधी का हिंदुओं की संख्या घटाने और संवैधानिक छत्रछाया में धर्म परिवर्तन को बढ़ावा देने का मास्टर कार्ड था। अब आरक्षण मिल रहा है तो आप यह नहीं कह सकते कि ये संविधान विरोधी कदम है। लेकिन संविधान ने तो ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की कि आप धर्म परिवर्तन कर लेंगे फिर भी आप उस वर्ग के बने रहेंगे। लेकिन ऐसा हो रहा है और धड़ल्ले से हो रहा है। आज राज्य सरकारों में होड़ मची हुई है कि मुसलमानों की ज्यादा से ज्यादा जातियों को पिछड़ा वर्ग में शामिल करा दिया जाए। कर्नाटक और पश्चिम बंगाल उनमें सबसे आगे हैं। ममता बनर्जी ने तो इतनी अति कर दी कि कोर्ट को रोकना पड़ा। उन्होंने लगभग पूरी मुस्लिम आबादी को पश्चिम बंगाल के पिछड़ा वर्ग में शामिल करा दिया और पिछड़ा वर्ग की ओर से,सनातनियों की ओर से कोई विरोध नहीं हुआ। कोई प्रदर्शन नहीं हुआ। कोई लेख नहीं लिखा गया। कोई वीडियो नहीं बना। सबने चुपचाप इस स्थिति को स्वीकार कर लिया। मैं मानता हूं कि इसका पुरजोर विरोध होना चाहिए। सरकार को भी सोचना चाहिए कि यह व्यवस्था चलाकर वह क्या हासिल करना चाहती है। हमारे संविधान निर्माताओं की तो यह मंशा नहीं थी। धर्मांतरण और डेमोग्राफिक चेंज को रोकना है तो इसके बारे में जागृति पैदा करनी पड़ेगी। वरना हमारे देखते-देखते देश की जनसांख्यिकी बदल जाएगी और हम कुछ नहीं कर पाएंगे।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं आपका अखबार के संपादक हैं)