सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि यदि आरक्षित श्रेणी का कोई उम्मीदवार सामान्य श्रेणी के कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करता है, तो उसे अनारक्षित (जनरल) श्रेणी की रिक्त सीट पर नियुक्त किए जाने का अधिकार होगा। 

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’लाइव लॉ’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस एम.एम. सुंदरश और जस्टिस एस.सी. शर्मा की खंडपीठ ने कहा, “अब यह विधि का स्थापित सिद्धांत है कि आरक्षित श्रेणी से संबंधित वह उम्मीदवार, जिसने सामान्य श्रेणी के कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त किए हैं, उसे खुली/अनारक्षित रिक्त सीट के विरुद्ध चयनित माना जाएगा।”

यह मामला एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) में जूनियर असिस्टेंट (फायर सर्विस) पदों पर नियुक्ति से संबंधित था। कुल 245 पद अधिसूचित किए गए थे, जिनमें से 122 अनारक्षित, 78 ओबीसी, 22 अनुसूचित जाति, 23 अनुसूचित जनजाति और 1 बैकलॉग पद था। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 185 उम्मीदवार योग्य पाए गए, जिनमें से 158 को नियुक्ति दी गई और 27 को प्रतीक्षा सूची में रखा गया।

प्रतिवादी संख्या-1 सभी चरणों में सफल रहा, लेकिन अंतिम चयन सूची में उसका नाम नहीं आया। जानकारी मांगने पर उसे बताया गया कि 122 उम्मीदवार अनारक्षित श्रेणी में, 10 ओबीसी, 22 एससी और 4 एसटी श्रेणी में चयनित किए गए हैं। प्रतिवादी संख्या-1 अनारक्षित श्रेणी में चयन से वंचित उम्मीदवारों की सूची में 10वें स्थान पर था और उसकी मेरिट रैंक 132 थी।

हाईकोर्ट का निर्णय: प्रतिवादी ने हाई कोर्ट का रुख किया, जहाँ एकल न्यायाधीश ने उसके पक्ष में फैसला देते हुए माना कि आरक्षण नीति का सही ढंग से पालन नहीं हुआ है और AAI को 1997 के DoPT कार्यालय ज्ञापन के अनुसार सूची पुनः व्यवस्थित करने का निर्देश दिया।

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डिवीजन बेंच ने भी इस निर्णय को बरकरार रखा, हालांकि उसने संपूर्ण चयन प्रक्रिया को निरस्त करने से इंकार किया और प्रतिवादी संख्या-1 की नियुक्ति का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट का दृष्टिकोण: AAI की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट बनाम रजत यादव मामले का हवाला देते हुए कहा कि आरक्षित श्रेणी का अधिक अंक पाने वाला उम्मीदवार सामान्य श्रेणी की सीट पर समायोजित किया जा सकता है, बशर्ते उसे कोई विशेष रियायत या छूट न दी गई हो।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आरक्षण रोस्टर का उपयोग चयन प्रक्रिया के दौरान नहीं, बल्कि चयन के बाद कैडर में पदों की स्थिति तय करने के लिए किया जाता है। हाई कोर्ट ने DoPT कार्यालय ज्ञापन को सही परिप्रेक्ष्य में नहीं देखा और इस पहलू पर विचार नहीं किया कि अनारक्षित पदों को केवल मेरिट के आधार पर भरा गया था।

अंतिम आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के दोनों निर्णयों को निरस्त कर दिया और प्रतिवादी संख्या-1 या किसी अन्य अनारक्षित श्रेणी के उम्मीदवार को नियुक्ति देने का कोई निर्देश जारी करने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि AAI द्वारा आरक्षित श्रेणी के उच्च मेरिट वाले उम्मीदवारों को अनारक्षित सूची में स्थानांतरित करना कानूनी और उचित था।