अफीम और गांजा की खेती और उग्रवाद-नक्सवाद के लिए हमेशा चर्चा में रहा खूंटी जिला कृषि, महिला सशक्तीकरण, कृषि और बागवानी के जरिए लगातार अपनी अलग पहचान बना रहा है। जिन खेतों में कभी अफीम की खेती लहलहाती थी, वे इलाके इन दिनों गेंदा फूल की सुगंध से महक रहे हैं।

जिले के चार प्रखंडों खूंटी, तोरपा, अड़की और मुरहू में गेंदा फूल की खेती किसानों ने की है। धनतेरस, दीपावली, काली पूजा, सोहराई और छठ महापर्व के अलावा ईसाई समुदाय द्वारा मनाये जाने वाले कब्र पर्व और क्रिसमस के दौरान गेंदा फूल और फूलमाला की बाजार में काफी मांग रहती है। इसको देखते हुए किसानों ने इस वर्ष लगभग दो सौ एकड़ में गेंदा फूल की खेती की है। खास बात है कि गेंदा फूल की खेती में सबसे अधिक योगदान महिला किसानों का है।

सरकारी योजनाओं की कार्यकारी एजेंसी झारखंड लाइविलीहुड प्रोमोशन सोसायटी (जेएसएलपीएस) और स्वयंसेवी संस्था प्रदान के सहयोग से महिला मंडलों की सखी दीदियों द्वारा गेंदा फूल की खेती की जा रही है। तोरपा प्रखंड के दियांकेल गांव में फूलों की खेती करने वाली रोशनी टोपनो और रश्मी टोपनो ने कहा कि जेएसएलपीएस और प्रदान द्वारा उन्हें गेंदा फूल की खेती के तरीके बताये गये और पौधे उपलब्ध कराये गये।

जेएसएलपीएस के एक कर्मचारी ने कहा कि जिले में लगभग पांच सौ एकड़ में दो लाख पौधे लगाये गये हैं। इस साल लगभग साढ़े तीन सौ महिला किसान गेंदा फूल की खेती से जुड़ी हैं। उम्मीद जतायी जाती है कि इस वर्ष गेंदा फूल का खूंटी जिले में 40 लाख रुपये से अधिक कारोबार होगा। जिले के हेठगोवा, बाघमा, कोड़ाकेल, साड़ी गांव, इंदीपीड़ी, सेनेगुटू, तारो, सिलादोन, दुलमी, डाड़ीगुटू, जोरको, कोंया, तोड़ांग, तिरला, सारिदकेल, दियांकेल, सहित कई क्षेत्रों में गेंदाफूल की खेती की गयी है।

तीन महीने में तैयार होती है फसल

इस पेशे से जुड़ी आरती देवी बताती हैं कि गेंदा फूल को तैयार होने में तीन महीने का समय लगाता है। प्रायः जुलाई महीने में जब बारिश शुरू होती है, उस समय खेतों में पौधे लगाये जाते हैं और अक्टूबर तक फसल तैयार हो जाती है। बताया गया कि दस डिसमिल खेत में गेंदा फूल लगाने की लागत लगभग पांच से छह सौ रुपये आती है। एक बार लगाये गये पौधों से आठ बार तक फूल प्राप्त किया जा सकता है।

आरती देवी ने कहा कि यदि मांग अच्छी रही, तो दस डिसमिल खेत से 30 से 35 हजार रुपये का मुनाफा हो जाता है। डांड़ भूमि को गेंदा फूल की खेती को सबसे उपयुक्त माना जाता है। आरती देवी ने कहा कि इस वर्ष बारिश की अनिश्चितता के कारण जिले में गेंदा फूल की कम उपज हाने की संभावना है।

कम समय में अधिक आमदनी का माध्यम: कृषि पदाधिकारी

जिले में हो रही गेंदा फूल की खेती के संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी संतोष लकड़ा ने कहा कि गेंदा फूल की खेती कम समय में अधिक आमदनी प्राप्त करने का अच्छा माध्यम है। कर्रा प्रखंड के किसानों को भी इसकी खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन भी गेंदा फूल की खेती को बढ़ावा दे रहा है। (एएमएपी)