नए खुले मोर्चे से मुश्किल में पड़ा भारत कब दखल देगा।
प्रदीप सिंह।
पड़ोसी देश बांग्लादेश में बहुत कुछ चल रहा है। हिंदुओं का जिस तरह से नरसंहार हो रहा है। मंदिर तोड़े जा रहे हैं। जिस तरह से जिहादी तत्व सरकार के संरक्षण में काम कर रहे हैं। मैं आज उसकी बात नहीं कर रहा हूं। आज बात बांग्लादेश की दो बेगमों के राजनीतिक युद्ध की। दोनों का राजनीतिक जीवन लगभग एक समय शुरू हुआ। उनमें से एक बेगम खालिदा जिया का मंगलवार को निधन हो गया। अविभाजित भारत में 1945 में उनका जन्म हुआ था और महज 15 साल की उम्र में उनका निकाह जियाउर रहमान से हो गया था। जियाउर रहमान की 1980 में हत्या कर दी गई। दूसरी ओर शेख हसीना वाजिद शेख मुजीब उर रहमान की बेटी हैं। शेख मुजीब के पूरे परिवार को मार दिया गया था। शेख हसीना और उनकी छोटी बहन दोनों उस समय लंदन में थीं इसलिए उनकी जान बच गई। 1975 से 1981 तक शेख हसीना को भारत ने शरण दी। 1981 में वह अमेरिका चली गईं। वहां से वह बांग्लादेश लौटना चाहती थीं लेकिन तत्कालीन सरकार ने परमिशन नहीं दी। इसके बाद शेख हसीना लंदन चली गईं। बाद में पश्चिमी देशों के दबाव में शेख हसीना की बांग्लादेश में वापसी हो गई और उन्होंने अपने पिता की पार्टी आवामी लीग का जिम्मा संभाल लिया। इसी के साथ बांग्लादेश की दोनों महिला नेता एक-दूसरे की प्रतिस्पर्धी बन गईं।
जियाउर रहमान की मौत के बाद खालिदा जिया उनकी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की अध्यक्ष हो गईं। वे दो बार 1991 से 1996 और 2001 से 2006 तक बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं। 2006 से 2008 तक दो साल बांग्लादेश में सैन्य शासन रहा। उस सैन्य शासन के खिलाफ इन दोनों ने सिर्फ एक बार हाथ मिलाया। इस बीच बांग्लादेश में शेख हसीना की हत्या के तीन प्रयास हुए,लेकिन 2009 में जब वह सत्ता में लौटीं तो 2024 तक जब तक उनका तख्ता पलट नहीं हुआ,वे देश की प्रधानमंत्री रहीं। तख्तापलट के बाद उनको शरण के लिए भारत आना पड़ा। इस समय वे भारत में हैं। सत्ता में रहने के दौरान उन्होंने बेगम खालिदा जिया से भरपूर बदला लिया। भ्रष्टाचार के आरोप में दोनों ने एक दूसरे को जेल भेजा। शेख हसीना के शासन में जब बेगम खालिदा जिया जेल में थीं तो उनके सामने प्रस्ताव रखा गया कि उन्हें रिहा कर दिया जाएगा बशर्ते वे देश छोड़कर चली जाएं लेकिन खालिदा जिया ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।

इस बीच खालिदा जिया के छोटे बेटे की मौत हो गई। शेख हसीना ने उस समय संबंध सुधारने की कोशिश की। मातम पुर्सी के लिए हसीना उनके घर गईं लेकिन उनको मिलने नहीं दिया गया। फिर दोनों की मुलाकात कभी हुई नहीं। अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार पलट दी गई। मोहम्मद यूनुस जो अमेरिका की कठपुतली है,वह इस समय शासन में है। पूरा बांग्लादेश इस समय जिहादी तत्वों के हाथ में है। पाकिस्तान की आईएसआई और पाकिस्तान की आर्मी के निर्देशन में बांग्लादेश चल रहा है। भारत के खिलाफ षड्यंत्र में बांग्लादेश और मोहम्मद यूनुस पूरी तरह से शामिल हैं। दोनों हर संभव कोशिश कर रहे हैं कि भारत के खिलाफ एक नया मोर्चा खोला जाए। भारत ने बांग्लादेश बनवाने में सबसे निर्णायक भूमिका निभाई थी। कई हजार हमारे सैनिक मारे गए। लेकिन शेख मुजीब उर रहमान की हत्या के बाद धीरे-धीरे बांग्लादेश के लोगों का मन बदलने लगा। आज स्थिति ये है कि बांग्लादेश के लोगों के लिए खासतौर से वहां जो जिहादी तत्व हैं, उनके लिए भारत से बड़ा दुश्मन उनका कोई नहीं है। शेख हसीना को प्रो इंडिया माना जाता था। हालांकि खालिदा जिया के शासन के दौरान भी भारत ने संबंध बेहतर करने की कोशिश की। पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी बांग्लादेश की यात्रा पर गए। खालिदा जिया से मिले थे लेकिन जिया ने कहा कि आप लोगों की सहानुभूति तो हमेशा शेख हसीना के साथ रहेगी। तब दोनों देशों के संबंध उतने अच्छे नहीं हुए जितने शेख हसीना के समय थे।

अब स्थिति यह हो गई है कि शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और खालिदा जिया का बेटा तारिक रहमान लौट कर बांग्लादेश आ गया है। उसके बांग्लादेश लौट कर आने के कुछ ही दिन बाद खालिदा जिया की मौत हो गई। फरवरी में वहां चुनाव होने वाले हैं। तारिक रहमान ने भी अपना नॉमिनेशन किया है। बांग्लादेश में इस समय एक ही मेन स्ट्रीम पार्टी बची है बीएनपी। माना जा रहा है कि तारिक रहमान अब बीएनपी के अध्यक्ष हो जाएंगे। बांग्लादेश में जो जिहादी तत्व हैं,वे आजादी के आंदोलन के सारे प्रतीकों को मिटा देना चाहते हैं। तारिक रहमान एक नेशनलिस्ट बांग्लादेशी का स्टैंड लेना चाहते हैं। इसीलिए वह फ्रीडम स्ट्रगल में मारे गए लोगों की याद में बने वॉर मेमोरियल गए। खालिदा जिया की मौत से बांग्लादेश में जो दो महिला नेताओं की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा चलती थी,उसकी कहानी खत्म हो गई है। चूंकि शेख हसीना की पार्टी पर प्रतिबंध लग गया है तो जाहिर है कि उनकी भी राजनीति एक तरह से खत्म हो गई है। शेख हसीना के खिलाफ मुकदमा चलाया गया और उनको फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। बांग्लादेश की सरकार चाहती है कि भारत शेख हसीना को सौंप दे लेकिन भारत ने मना कर दिया है।
अब बांग्लादेश में एक नई राजनीति शुरू होगी। देखना है कि क्या जिहादी तत्व और पाकिस्तानी बीएनपी को जीतने देते हैं। क्योंकि इस चुनाव को वही प्रभावित करेंगे। पहले तो इस बात में ही शंका है कि फरवरी में क्या सचमुच चुनाव होंगे। माना जा रहा है कि चुनाव टलवाने के लिए वहां हिंसा कराई जा रही है। मोहम्मद यूनुस आंख पर पट्टी बांधे बैठा है। हिंदुओं के खिलाफ जितनी हिंसा की घटनाएं हो रही हैं, वह कहता है कि भारत का मीडिया उसे बढ़ा चढ़ाकर पेश करता है। अगर चुनाव हुए और बीएनपी जीतती है तो मान कर चलिए कि तारिक रहमान प्रधानमंत्री होंगे। उसके बाद उनका तख्ता पलट करने की भी पूरी कोशिश होगी। कितने समय तक वे सत्ता में बने रह पाएंगे, यह कहना मुश्किल है। तो बांग्लादेश में अराजकता,हिंसा,तख्तापलट,षड्यंत्
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक और ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)


