समस्या पुरानी, कम नहीं हो रही परेशानी
एक अधिकारी ने कहा, सुरक्षा बलों में यह समस्या पुरानी हो गई है। कई रिपोर्ट और सिफारिशों के बाद भी स्थिति में बहुत बदलाव नहीं आया है। हालांकि, जवानों के कल्याण के लिए कई कदम उठाए गए हैं। लेकिन समय पर प्रोन्नति नहीं मिलने, लंबे समय तक कठोर तैनाती, करियर की चिंता, स्वास्थ्य संबंधी वजह या पारिवारिक कारणों से जवान वीआरएस या इस्तीफा देने जैसा कदम उठाते हैं।
जवानों की संख्या कम होने से दबाव
नाम नहीं छापने की शर्त पर कमांडेंट स्तर के एक अधिकारी ने कहा कि जवानों की कम संख्या की वजह से सौ दिन छुट्टी दे पाना संभव नहीं हो पाता। साथ ही रोटेशन नीति का भी कठोरता से पालन नहीं हो रहा। निचले स्तर पर प्रोन्नति की रफ्तार भी अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। हालांकि, पहले की तुलना में स्थिति बेहतर हुई है। पहले एक ही पोस्ट पर सालों तक नौकरी के बाद भी प्रमोशन संभव नहीं हो पाता था।

आत्महत्या भी समस्या
वर्ष 2018 से वर्ष 2022 के दौरान 654 जवानों की आत्महत्या का मामला सामने आया। सीआरपीएफ में 230 और बीएसएफ में 174 मौत हुई है। असम राइफल्स में 43 मौत हुई। मालूम हो कि गृह मंत्रालय ने संसद में एक सवाल के जवाब में कहा था कि एक टास्क फोर्स गठित की गई है। यह आत्महत्या रोकने के लिए उपचारात्मक कदमों का सुझाव देगी। रिपोर्ट तैयार की जा रही है। वहीं, तनाव कम करने के लिए योग, मनोवैज्ञानिक परामर्श सत्र सहित कई कदम उठाए गए हैं। बीएसएफ के पूर्व एडीजी पीके मिश्रा ने कहा कि समस्या और इलाज सबको पता है लेकिन जरूरत इस बात की है कि जमीनी स्तर पर सुधार लागू हों और अफसरों को भी इस बाबत जागरूक किया जाए कि वे कल्याण के कदम नीचे तक पहुंचाएं।
संसदीय समिति ने स्थिति पर काबू के लिए ये सुझाव दिए
1. समिति की रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि जवानों की तैनाती में रोटेशन पॉलिसी का पालन किया जाना चाहिए। जिससे जवान ज्यादा समय तक कठोर पोस्टिंग पर न रहें।
2. नौकरी छोड़ने वाले जवानों की वजह तलाशने के लिए सर्वे कराए जाएं।
3. कारणों का पता लगा उचित कदम उठाने की खातिर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति या इस्तीफे का विकल्प चुनने वाले जवानों का एग्जिट इंटरव्यू हो।
सुधार के लिए बलों में ये कदम उठाए जा रहे
2. प्रोन्नति का बैकलॉग खत्म करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।
3. जवानों की समस्या हल करने के लिए आंतरिक स्तर पर तंत्र भी बनाए गए हैं। इनका असर आने वाले दिनों में दिख सकता है।(एएमएपी)



