डॉ. मयंक चतुर्वेदी

इस्‍लाम में मूर्ति पूजा (बुत परस्‍ती) को हराम माना गया है। जिस कुरान के हवाले से कहा जाता है कि जो अल्‍लाह को नहीं मानते उन्‍हें काफिर कहते हैं । मूर्तिपूजा को लेकर कुरान सूरा दो आयत 193 साफ कहती है कि उनके विरूद्ध तब तक लड़ते रहो जब तक मूर्तिपूजा खत्म न हो जाए। इसके अलावा सूरा छब्‍बीस आयत चौरानवे में लिखा है सभी मूर्तिपूजकों को अल्लाह औंधे मुँह नर्क की आग में डालकर जला देगा। कुरान सूरा नौ आयत अट्ठाईस कहती है ‘हे इमान् वालों (मुसलमानों) मुशरिक (मूर्ती पूजक) नापाक हैं।’ कुरान मजीद, सूरा नौ आयत पांच कहती है, जब पवित्र महीने बीत जाए तो वह जहाँ मिले उन्हें पकड़ो और उन्हें घेरो।…क्योंकि मूर्तियों को पूजने वाले नापाक (अपवित्र) हैं। । काफिर यानी गैर-मुस्लिम तुम्हारे खुले दुश्मन हैं और उन ‘काफिरों’ से लड़ो जो तुम्हारे आस पास हैं। (कुरान सूरा नौ, आयत 123)।  इस तरह की पवित्र! कुरान में अनेक आयते हैं, जिनका सीधा उल्‍लेख (अभिव्‍यक्‍ति की स्‍वतंत्रता की सीमा के चलते यहां करना संभव तक नहीं है ।

वस्‍तुत: इसी प्रकार से इस्लाम में चित्रों की मनाही का ज़िक्र हदीस (सहीह अल-बुखारी) में मिलता है।  इसके अनुसार एक बार हजरत मुहम्मद यात्रा से घर लौटे तो अपनी पत्नी आयशा के कमरे पर एक पर्दा देखा जिस पर चित्र बने थे।   इसे देख उन्होंने गुस्से में कहा – अशहदु अल-नासा अज़ाब अल-यौम अल-कियामा अल-मुस्सविरून (क़यामत के दिन तस्वीर बनाने वालों को सबसे सख्त सजा मिलेगी)।

सेकुलरिज्म के नाम पर हो रहा है सब कुछ

तब इन तथ्‍यों के आधार पर यदि मूर्ति पूजा की समीक्षा करें; उस स्‍थ‍िति में क्या निष्‍कर्ष निकलेगा ? स्‍वभाविक है यही कि मूर्तिपूजक नापाक हैं, क्‍योंकि कुरान में लिखा है मुशरिक (मूर्तिपूजक)  काफिर हैं । अब ऐसे मूर्ति पूजक और मूर्ति में ही अपने आराध्‍य से प्रेरणा लेने वाले, अपने दुख-सुख को उस मूर्ति के साथ बांटनेवाले, अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने पर भण्‍डारा, पाठ-पूजन, अनुष्‍ठान, दान, दक्षिणा देकर अपार हर्ष और आनन्‍द अनुभूत करनेवाले सनातनी हिन्‍दू समाज के किसी भी श्रेष्‍ठ धाम में यदि सेकुलरिज्म के नाम पर आबिद, अयूब, यूसुफ को नियुक्‍त कर दिया जाए, जिनका कि इस विधि में कोई आस्‍था एवं विश्‍वास ही न हो तब उस स्‍थ‍िति में क्‍या किया जाना चाहिए?

जब सती का हार गिरा यहां तो प्रकट हुईं मां शारदा

दरअसल, मध्‍य प्रदेश में पवित्र नगरी मैहर सतना जिला में है  और यहां स्थित मां शारदा देवी का मंदिर 555 फिट ऊँचे त्रिकूट पर्वत पर स्थित है। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि सती के अंग जहां-जहां पर गिरे थे, वहां-वहां पर एक शक्तिपीठ स्थापित हो गया, ऐसे ही 51 शक्तिपीठों में एक मां शारदा का पावन धाम सतना जिले के मैहर में त्रिकूट पर्वत की ऊंची चोटी पर स्‍थापित हुआ, क्‍योंकि यहां सती का हार गिरा था। अब जिनकी मां सती में आस्‍था नहीं, शारदा मां में आस्‍था नहीं वे यदि कर्मचारी बन मंदिर परिसर में अंदर-बाहर होंगे तो विवाद तो पैदा होगा ही ।

जब किसी ने नहीं सुनी तब लगाई गई धर्मस्व मंत्री उषा ठाकुर के यहां गुहार

अनेक बार विश्‍व हिन्‍दू परिषद एवं हिन्‍दू जागरण मंच के द्वारा कहे जाने के बाद भी जब पिछले कई सालों में स्‍थानीय प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई तब गुहार लगाई गई मध्‍य प्रदेश की संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व मंत्री उषा ठाकुर के यहां । उन्‍होंने इसे गंभीरता से लिया और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग ने सतना जिले में प्रसिद्ध मैहर माता मंदिर समिति से मुस्लिम कर्मचारियों को हटाने के आदेश जारी किए।

पहले तो प्रशासन ने मंत्री की कार्रवाई को भी नजरअंदाज कर दिया, अब ये हुआ

यह पत्र 17 जनवरी 2023 को लिखा गया और देखते ही देखते तीन माह निकल गए लेकिन सरकार में मंत्री के निर्देश पर अमल करने को लेकर आज तक स्‍थानीय प्रशासन ने जब कोई गंभीरता नहीं दिखाई तब फिर विश्‍व हिन्‍दू परिषद(विहिप) सक्रिय हुई और एक बार फिर इस बारे में मंत्री उषा ठाकुर को बताया गया और कहा गया कि जिनकी मूर्ति पूजा में आस्‍था ही नहीं उन्‍हें पूजा की व्‍यवस्‍था से बाहर का रास्‍ता दिखाने के लिए विनय करते हैं । इसके बाद अब धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग फिर एक्‍शन में है और सतना कलेक्‍टर पूरे मामले को लेकर परीक्षण कराए जाने की बात कह रहे हैं।

धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग ने मुस्लिम कर्मचारियों को हटाने के आदेश दिए

राज्‍य के धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग ने सतना जिले में प्रसिद्ध मैहर माता मंदिर समिति से मुस्लिम कर्मचारियों को हटाने के आदेश दिए हैं। साथ ही नगर में मांस और मदिरा की बिक्री भी बंद करने को लेकर फिर से सतना कलेक्टर को पत्र भेजा है। इस पत्र में गत सत्रह जनवरी को भेजे आदेश का जिक्र किया गया है कि मैहर नगरी में मांस-मदिरा की ब्रिकी बंद कराने और शारदा मंदिर समिति से मुस्लिम कर्मचारियों को हटाने का आदेश दिया गया था। उप सचिव पुष्पा कुलेश ने तीन दिन में प्रतिवेदन भेजने को कहा है। सतना कलेक्टर को संबोधित करते हुए लिखा गया है कि 17 जनवरी को इस संबंध में तत्काल परीक्षण कर रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन वह अभी तक अपेक्षित ही है।

सरकार अविलम्‍ब मंदिरों के प्रबंधन से ऐसे लोगों को बाहर करे – विनोद बंसल, राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता विहिप

विश्‍व हिन्‍दू परिषद (विहिप) के राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता विनोद बंसल का कहते हैं कि जिनकी आस्‍था मंदिर, पूजा-पाठ में है ही नहीं, उनका मंदिरों में क्‍या काम? विहिप मांग करती है कि सरकार अविलम्‍ब मंदिरों के प्रबंधन से ऐसे लोगों को बाहर करे, सिर्फ उन्‍हें ही बाहर न करें, बल्‍कि सरकारों को ही मंदिर प्रबंधन से बाहर हो जाना चाहिए । मंदिरों का अधिग्रहण ही सरकारों का हिन्‍दू विरोधी कम्‍युनल एजेण्‍डा का परिचायक है।

विहिप के राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता बंसल मांग करते हैं कि जिन अधिकारियों ने इस प्रकार की नियुक्‍तियां की है, सरकार उन पर भी कठोर कार्रवाई सुनिश्‍चित करे। यदि सरकारों को लगता है कि इन मुस्लिम कर्मचारी आबिद, अयूब और यूसुफ खान जैसों को रखना है तो वह इनका परावर्तन कराए, क्‍योंकि बिना आस्‍था के इनका हिन्‍दू समाज के बीच उनके मंदिरों और श्रद्धा केंद्रों में कोई काम नहीं है, बिना श्रद्धा भाव के इन्‍हें हिन्‍दू समाज कभी स्‍वीकार्य नहीं करेगा।

इस तरह चली थी बिना हिन्‍दू आस्‍था वालों को बाहर करने की मुहिम

विहिप के तत्‍कालीन समय 2021 में जिला मैहर अध्‍यक्ष महेन्‍द्र कुमार द्विवेदी जो वर्तमान में महाकौशल प्रांत गौसेवा प्रमुख हैं, ने बताया कि हम इस बात की मांग पिछले कई सालों से कर रहे हैं कि मां शारदा में जिनकी आस्‍था नहीं है, ऐसे लोगों को मंदिर परिसर में आने की भी अनुमति नहीं होनी चाहिए। यह शक्‍ति पीठ है, जिन्‍हें शक्‍ति की आराधना करनी है वे ही यहां के शासन-प्रशासन और परिसर में आएं-जाएं। इसके लिए उनके समेत विहिप जिला मंत्री राजनारायण सिंह और जिला संयोजक महेश तिवारी समेत पूरे संगठन ने ऐसे लोगों को मंदिर परिसर से बाहर का रास्‍ता दिखाने के लिए मुहिम चलाई थी, लेकिन आज तक भी वे लोग बाहर नहीं किए गए, तब से लगातार प्रदेश में विभागीय मंत्री एवं अन्‍य प्रशासनिक अधिकारियों को इस संबंध में कार्रवाई करने को लिखा जा रहा है। अब यदि धार्मिक न्यास और धर्मस्व मंत्री उषा ठाकुर जी ने इस मामले को गंभीरता से लिया है तो निश्‍चित ही वे साधुवाद की पात्र हैं।

सलीम समुदाय के लोग यहां हिन्दू नाम से दुकानें भी चला रहे

इसके साथ ही मामले को लेकर विश्व हिन्दू परिषद महाकौशल प्रांत जिला मैहर के संयोजक भानु प्रताप सिंह भी पिछले दो साल से विभाग की मंत्री को ज्ञापन देकर मैहर नगर पालिका एरिया से मांस मदिरा की दुकान हटाने और मुस्लिम कर्मचारी हटाने की मांग कर रहे थे। इनके द्वारा यह भी कहा गया था कि सलीम समुदाय के लोग यहां हिन्दू नाम से दुकानें चलित कर रहे हैं। हालांकि भोपाल से कलेक्‍टर के नाम पत्र आने के बाद से यहां हड़कंप की स्थिति बन गई है।

नए आदेश के स्वागत में विहिप ने की मां शारदा की महाआरती करने की घोषणा

बजरंग दल के जिला संयोजक महेश तिवारी भोपाल से आए धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग के इस नए आदेश पर अपनी खुशी नहीं रोक पाते हैं। वे कहते हैं कि हम वर्षों से यह मांग करते आ रहे हैं, जिस पर लगता है अब अमल होने की बारीआई है। उन्‍होंने बताया कि शारदा देवी मंदिर प्रशासन समिति से  मुस्लिम कर्मचारियों को हटाने की मांग से संबंधित पत्र विश्व-हिंदू परिषद सतना द्वारा मंत्री महोदया को दिया गया था, जिसे उन्‍होंने गंभीरता से लिया है। विहिप और बजरंग दल ने  इस आदेश का स्वागत करते हुए माता शारदा की महाआरती किए जाने की घोषणा कर दी है।

कलेक्‍टर का कहना है

इस मामले में सतना कलेक्टर अनुराग वर्मा का कहना है कि मंत्री उषा ठाकुर का पत्र प्राप्त हुआ है। उसके संबंध में परीक्षण कराया जाएगा और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विश्व-हिंदू परिषद सतना ने संस्कृति मंत्री को पत्र लिखकर अपनी मांगें रखी थीं, जिस पर विभाग ने आदेश जारी किया है।(एएमएपी)