दलित वोट हथियाने के लिए सपा-कांग्रेस ने साधा मायावती पर निशाना।
प्रदीप सिंह।
उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव होने तो फरवरी-मार्च 2027 में हैं, लेकिन चुनावी बिसात अभी से बिछना शुरू हो गई है। 2014 के बाद बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती पहली बार राजनीतिक रूप से सक्रिय होती हुई दिखाई दे रही हैं। उन्होंने घोषणा कर दी है कि उनकी पार्टी किसी के साथ गठबंधन नहीं करेंगी और अकेले लड़ेगी। मायावती को दिल्ली में टाइप-8 बंगला अलॉट हुआ है। उसको लेकर उन पर निशाना साधा जा रहा है कि वे बीजेपी से मिली हुई हैं और चुनाव में बीजेपी की मदद करना चाहती हैं। यह नैरेटिव चलाने वाले सपा और कांग्रेस हैं। इस पर मायावती ने 1995 के लखनऊ गेस्ट हाउस कांड की याद दिलाते हुए स्पष्टीकरण दिया कि मेरी जान को खतरा है और सुरक्षा कारणों से उनको टाइप-8 बंगला मिला है।
लुटियंस दिल्ली में सबसे बड़ा बंगला टाइप-8 होता है, जो ज्यादातर कैबिनेट मिनिस्टर्स को मिलता है। जो टाइप-8 बंगला मायावती को देने का विरोध कर रहे हैं जरा उनका अतीत भी जान लें। प्रियंका वाड्रा शादी के बाद लोधी रोड के बंगले में शिफ्ट हो गई थीं। वह उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने दिया था। प्रियंका वाड्रा उस समय न तो पार्टी की पदाधिकारी थीं, न किसी सरकारी और न ही किसी संवैधानिक पद पर थीं। उनको एसपीजी सुरक्षा मिली हुई थी, केवल इस कारण उनको लोधी रोड पर बंगला अलॉट हो गया और वे उसमें सालों रहीं। उस समय किसी ने यह सवाल नहीं किया कि कांग्रेस पार्टी की क्या भाजपा से मिलीभगत है। राजीव गांधी को 1989 में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर 10 जनपथ का बंगला अलॉट हुआ था। उनकी हत्या हो गई और सोनिया गांधी 1999 में पहली बार सांसद बनीं। तब तक उनको किस हैसियत से वह बंगला मिला हुआ था? तब भी किसी ने सवाल नहीं उठाया कि टाइप-8 बंगले में वह कैसे रह रही हैं। लेकिन मायावती पर सवाल उठाया जा रहा है क्योंकि वह सॉफ्ट टारगेट हैं। वे दलित समाज से आती हैं इसलिए निशाने पर हैं। सपा और कांग्रेस की रणनीति उनको कमजोर करके दलित वर्ग का वोट हथियाने की है इसीलिए उन पर निशाना साध रहे हैं। वैसे भी मायावती उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। देश की सही मायने में जो तीसरी राष्ट्रीय पार्टी है बहुजन समाज पार्टी उसकी सर्वेसर्वा हैं। इस नाते भी उनका एंटाइटलमेंट था। अगर 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव न होता तो यह मुद्दा कतई न बनाया जाता। 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस को कुछ दलित वोट मिले थे अब वे इसे कंसोलिडेट करना चाहते हैं। मायावती अगर सक्रिय होती हैं और गंभीरता से चुनाव लड़ती है तो यकीन मानिये दलित खासतौर से जाटव वोट कांग्रेस और सपा से छिटक जाएगा। यही डर सपा और कांग्रेस को सता रहा है और इसी वजह से मायावती पर हमला बोला गया है।

उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव और 27 में जो चुनाव होने जा रहा है,दोनों की परिस्थितियों में भी बहुत अंतर आ चुका है। 2022 में नैरेटिव बनाया गया कि समाजवादी पार्टी आ रही है। कहा गया कि भाजपा में ही ऐसे लोग हैं, जो योगी को हटाना चाहते हैं। 22 में समाजवादी पार्टी का रालोद और ओम प्रकाश राजभर की पार्टी से गठबंधन था। यानी पश्चिमी और पूर्वी यूपी में उसके साथ दो जनाधार वाले साथी थे। इसी कारण सपा 100 सीटों से ऊपर पहुंच सकी। अब 2027 के चुनाव में ये दोनों सपा के साथ नहीं हैं। बल्कि ये दोनों भाजपा के साथ हैं। चुनावी समीकरणों में यह बहुत बड़ा परिवर्तन है। हिंदू विरोध कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का कॉमन एजेंडा है। मुस्लिम वोटों को लेकर सपा और कांग्रेस एक दूसरे को शक की नजर से देखते हैं। खासतौर से अखिलेश यादव ज्यादा डरे हुए रहते हैं कि मुस्लिम वोट कांग्रेस के पास न चला जाए और इसीलिए उन्होंने कांग्रेस से गठबंधन किया हुआ है। वरना इस गठबंधन का कोई कारण नहीं है।

यूपी में पिछले कुछ सालों में दलित वोटों की प्रेफरेंस में बदलाव आया है। 2014 से जो सोशल इंजीनियरिंग अमित शाह ने की, उसके कारण दलित वोटों का एक बड़ा वर्ग भाजपा से जुड़ा। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में उस वर्ग से काफी बड़ी संख्या में लोग भाजपा को छोड़कर कांग्रेस और सपा गठबंधन के साथ चले गए और उसका बड़ा कारण विपक्ष का यह नैरेटिव बनाना था कि भाजपा को अगर 400 सीटें मिल गईं तो वह आरक्षण खत्म कर देगी। लेकिन अब वह मुद्दा खत्म हो चुका है। बल्कि अब तो सवर्णों की नाराजगी यह है कि भाजपा आरक्षण पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान है। यह काठ की हांडी अब दोबारा तो चढ़ने वाली नहीं है।

2027 में जब राज्य में चुनाव होगा तो योगी आदित्यनाथ 10 साल लगातार मुख्यमंत्री रह चुके होंगे और उनके शासन में जो परिवर्तन हुआ है,उसका फायदा भी जरूर भाजपा को होगा। आप चाहे कानून व्यवस्था की बात कर लें, बिजली सप्लाई की बात कर लें, गन्ना किसानों के भुगतान की बात कर लें,एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, शिक्षा कोई भी क्षेत्र देख लें बड़ा परिवर्तन नजर आता है। सबसे बड़ी बात डबल इंजन की सरकार विकास भी और विरासत भी के रास्ते पर चल रही है। 500 साल के संघर्ष के बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर बन गया। राम मंदिर बनने के बाद उत्तर प्रदेश ही नहीं, पूरे देश की इकॉनमी में अयोध्या का योगदान बढ़ रहा है। आईआईएम लखनऊ की एक स्टडी के मुताबिक 2024-25 में करीब 25 करोड़ दर्शनार्थी अयोध्या आए। दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक और मजहबी सेंटर माने जाने वाले वेटिकन और मक्का से कहीं ज्यादा। वेटिकन में इसी दौरान करीब 90 लाख जबकि मक्का में लगभग दो करोड़ लोग गए। तो आप इससे समझिए कि दुनिया का सबसे बड़ा आध्यात्मिक धार्मिक केंद्र अयोध्या बन गया है। यह इसी 10 साल में हुआ है। जो लोग सवाल उठाते थे कि क्या मंदिर बनने से रोजगार मिल जाएगा और लोगों की आर्थिक स्थिति सुधर जाएगी,यह उनके मुंह पर बहुत बड़ा तमाचा है। वे शायद सनातन संस्कृति को भूल गए कि हमारी सामाजिक,आर्थिक व्यवस्था हमारे मंदिरों और नदियों के इर्दगिर्द चलती थी। वह दौर फिर से लौट कर आ रहा है। इसी साल उत्तर प्रदेश में दो बड़े प्रोजेक्ट्स जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जो एशिया का सबसे बड़ा है और गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन होना है। इसके बाद उत्तर प्रदेश देश का ऐसा राज्य बन जाएगा, जहां सबसे ज्यादा एक्सप्रेसवे हैं। तो यूपी में एक तरफ विकास का यह मॉडल है और दूसरी तरफ माफिया का मॉडल। इन दोनों के बीच संघर्ष होना है। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि होने क्या वाला है।

आज पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अवैध बूचड़खाने बंद हो चुके हैं। उसकी वजह से पशुओं की चोरी और अवैध कटान रुक गई है। माफिया का आर्थिक साम्राज्य खत्म हो चुका है। इसके सामने समाजवादी पार्टी के पास क्या मॉडल है? पीडीए। उनको लगता है कि हिंदुओं को जाति में बांटेंगे तभी हमारा फायदा होगा। 2024 में यह फायदा वह देख भी चुके हैं। लेकिन मेरा मानना है कि अगर वह इस मुगालते में हैं तो उनको 2027 में बहुत बड़ा धक्का लगेगा। कांग्रेस पार्टी तो वैसे भी यूपी में कहीं नहीं है। अखिलेश यादव की राजनीति प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए चल रही है। जमीन पर उनकी राजनीति कहीं नहीं है। उनका एक कोर वोट बैंक है मुस्लिम-यादव। लेकिन इस बार मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगने की आशंका है। अगर असदुद्दीन ओवैसी चुनाव मैदान में उतरते हैं और बहुजन समाज पार्टी मजबूती से लड़ती है तो आप मानकर चलिए कि 2022 में मुस्लिम समाज का जितना वोट समाजवादी पार्टी को मिला था, उतना 2027 में नहीं मिलेगा। इसलिए आप देखिए सनातन धर्म पर हमले तेज हो गए हैं। हिंदू समाज को बांटने की कोशिश हो रही है। कभी ब्राह्मण-ठाकुर तो कभी अगड़ा-पिछड़ा में दरार डालने तो कभी दलितों को हिंदू समाज से अलग करने की कोशिश हो रही है। लेकिन मेरा मानना है कि 10 साल में जो परिवर्तन हुआ है, वह उत्तर प्रदेश की जनता देख रही है। वह किसी के झांसे में आने वाली नहीं है।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)



