कांग्रेस राज्यसभा में विपक्ष के नए नेता पर ऊहापोह की स्थिति में हैं। पार्टी में एक तबका ‘एक व्यक्ति एक पद’ का फॉर्मूला लागू करते हुए राज्यसभा में नए नेता को यह जिम्मेदारी देना चाहता है। दूसरा तबका चाहता है कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे इस पद पर बने रहें, क्योंकि उनकी जगह बेहतर विकल्प नहीं है।अध्यक्ष पद के लिए नामांकन के बाद खड़गे ने तत्कालीन पार्टी प्रमुख और संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी को राज्यसभा में विपक्ष के नेता पद से इस्तीफा भेज दिया था। लेकिन, इस्तीफा राज्यसभा सचिवालय को नहीं भेजा गया और खड़गे अभी भी इस पद पर हैं। संसद का शीतकालीन सत्र सात दिसंबर से 29 दिसंबर तक चलेगा।

रेस में कौन-कौन?

राज्यसभा में विपक्ष के नेता पद के लिए वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम और दिग्विजय सिंह सहित कई नाम दौड़ में शामिल है। दिग्विजय ने कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने का भी ऐलान किया था पर खड़गे का नाम आने के बाद उन्होंने इरादा बदल दिया। दिग्विजय भारत जोड़ो यात्रा के संयोजक हैं और वह लगातार राहुल गांधी के साथ पदयात्रा कर रहे हैं।

दिग्विजय सिंह की दावेदारी

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पी चिदंबरम का ताल्लुक दक्षिण भारत से हैं। पार्टी को ऐसा नेता चाहिए जो हिंदी में बात रख सके। दिग्विजय इस पर खरे उतरते हैं। लेकिन, पदयात्रा के चलते शीत सत्र के दौरान पूरा वक्त नहीं दे पाएंगे। इसलिए, खड़गे को ही इस पद पर बने रहने दिया जाना चाहिए।

खड़गे की खासियत

खड़गे 2014 से 2019 तक लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता भी रहे। ऐसे में दोनों सदनों में विपक्षी दलों के नेताओं के साथ उनके अच्छे रिश्ते हैं। हिंदी भाषी राज्यों के साथ दक्षिण के राज्यों के नेताओं से बेहतर तालमेल है। कर्नाटक में अगले साल चुनाव हैं। इसलिए, वह पद पर बने रह सकते हैं।

उत्‍तर भारत के कांग्रेस नेता को मिलना चाहिए ये पद

दरअसल नए नेता के लिए पी. चिदम्बरम, जयराम रमेश, के सी वेणुगोपाल जैसे दक्षिण भारतीय सांसदों के नाम आगे आने से उत्तर भारत के नेता मसलन दिग्विजय सिंह,राजीव शुक्ला और प्रमोद तिवारी ये पद किसी उत्तर भारतीय को देने की मांग कर रहे हैं। हालांकि खुलकर अभी कोई मांग नहीं की गई है लेकिन इन नेताओं के करीबी तर्क देते हैं की कांग्रेस संगठन के सर्वोच्च पद पर कर्नाटक के खरगे हैं, उसके बाद दूसरे सबसे महत्वपूर्ण पद संगठन महासचिव के पद पर केरल के वेणुगोपाल है,ये दोनों दक्षिण भारत से आते हैं। यही नहीं राहुल गांधी भी केरल से सांसद हैं। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर पश्चिम बंगाल से हैं। मतलब बड़े पदों पर दक्षिण भारत के लोग ज्यादा हैं इसलिए उत्तर भारत के नेताओं को तरजीह देनी चाहिए ताकि पार्टी वहां मजबूत हो सके। (एएमएपी)