अरशद मदनी को लग रहा घर वापसी हुई तो कैसे पूरा होगा डेमोग्राफी बदलने का मंसूबा।

#pradepsinghप्रदीप सिंह।
अरशद मदनी, नाम आपने सुना होगा। वह जमीयते उलेमा-ए हिंद के अध्यक्ष और दारुल उलूम देवबंद के प्रिंसिपल हैं। इसके अलावा भी उनकी एक पहचाान है। वह कट्टरवादी नेता हैं,जो हिंदू-मुसलमान में हर समय झगड़ा कराना चाहता है। अब वह फिर हिंसा की चुनौती दे रहे हैं। कह रहे हैं कि गली-गली में खून बहेगा। यह वही भाषा है, जो जिन्ना के समय में मुस्लिम लीग बोलती थी। इनका भी इरादा वही है। ये चाहते हैं कि देश का एक और विभाजन हो।

अरशद मदनी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत की एक बात से भड़के हुए हैं। भागवत हाल ही में लखनऊ प्रवास पर थे। वहां उन्होंने एक प्रश्न के जवाब में कहा कि भारत में जो मुसलमान और ईसाई हैं,वे अरब, तुर्क और यूरोप से नहीं आए। वे यहीं के हैं और हिंदू से मुसलमान या ईसाई बने हैं। उनकी घर वापसी की जरूरत है। यह अभियान तेज किया जाना चाहिए और जब उनकी घर वापसी हो तो उनका समाज में सम्मान होना चाहिए। अब अरशद मदनी ने इसको किस रूप में देखा? उन्होंने कहा कि आरएसएस, बीजेपी और केंद्र सरकार देश के 20 करोड़ मुसलमानों और 6 करोड़ ईसाइयों को हिंदू बनाना चाहती है। अब पहली बात तो मदनी को यह पता ही नहीं है कि सनातन धर्म का 10,000 साल से ज्यादा पुराना इतिहास है और एक भी उदाहरण नहीं है जब सनातन समाज ने किसी दूसरे मजहब के व्यक्ति को अपने धर्म में शामिल करने की कोशिश की हो। वह अपने धर्म के लोगों के जागरण का काम करता है। उनको सनातन की विशेषता बताता है कि क्यों 1000 साल की गुलामी भी उसे खत्म नहीं कर पाई? लेकिन अरशद मदनी को खतरा नजर आ रहा है, क्यों? क्योंकि मुसलमान और ईसाई इस देश में बड़ी तेजी से डेमोग्राफी चेंज करने का अभियान चला रहे हैं। मदनी को लगा कि उनकी जो डेमोग्राफिक चेंज की नीति है,घर वापसी का अभियान उस पर चोट है। इसीलिए वह देश में खून-खराबे की धमकी दे रहे हैं। इससे पता चलता है कि जो मानसिकता भारत के विभाजन के लिए जिम्मेदार थी, वह मुसलमानों में अब भी बनी हुई है। दारुल उलूम देवबंद का प्रिंसिपल जिस तरह की भाषा बोल रहा है,उससे पता चलता है कि दारुल उलूम देवबंद में क्या पढ़ाया जाता होगा।

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अरशद मदनी ने एक और बात का इशारा किया कि भागवत के बयान पर सरकार चुप है, कुछ कर नहीं रही है। मैं उनकी आधी बात को सही मानता हूं। सरकार को भागवत के बयान पर कुछ करने की जरूरत नहीं है क्योंकि उन्होंने कानून के विरोध में कोई बात नहीं कही है। उन्होंने सामाजिक स्तर पर जो हुआ है और जो हो सकता है, उसकी बात की है। हां,अरशद मदनी के खिलाफ सरकार कोई कारवाई नहीं कर रही है, यह चिंता की बात है। अगर भारत को तोड़ने वाली शक्तियों को इसी तरह से फ्री हैंड दिया गया तो आप मानकर चलिए कि भारत का दूसरा विभाजन बहुत दूर नहीं है। दुनिया भर में मालूम है कि इस्लाम और क्रिश्चियनिटी दोनों विस्तारवादी मजहब है। ये धर्म परिवर्तन से ही अपनी ताकत बढ़ाते हैं। औरंगजेब की वह नीति याद रखिए जब उसने हिंदुओं के सामने तीन विकल्प रखे थे। पहला,धर्म परिवर्तन कर इस्लाम मजहब को स्वीकार कर लो। दूसरा, अगर यह मंजूर नहीं है तो जजिया (ज्यादा टैक्स) दो ताकि आर्थिक रूप से तुम्हारे लिए सर्वाइव करना मुश्किल हो जाए और तीसरा, अगर ये दोनों मंजूर नहीं हैं तो फिर हमारी तलवारें तुम्हारी गर्दन पर चलने के लिए तैयार हैं। ऐसे धर्म को शांति का धर्म कहने वाला कोई दिमागी दिवालियेपन का शिकार ही हो सकता है। इस्लाम के कारण दुनिया में कहीं भी, किसी भी देश में शांति नहीं आई। जो इस्लामिक देश हैं, वहां शांति नहीं है। कभी शिया सुन्नी तो कभी उनके जो इदारे हैं, उनके नाम पर वहां कत्लेआम होता है। लेकिन हमारे देश में ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जो इस्लाम को शांति का धर्म बताते हैं। मुसलमान दिन में पांच बार नमाज पढ़ता है और नमाज में कहता है कि अल्लाह के अलावा और कोई नहीं है। यानी वह आपके सनातन धर्म के अस्तित्व को ही स्वीकार नहीं करता। उनका मानना है कि जो मूर्ति पूजक हैं, उनको जीने का अधिकार नहीं है। यह दुनिया की किस फिलॉसफी के हिसाब से शांति की भाषा है। लेकिन मैं इसके लिए मुसलमानों को दोषी नहीं ठहराता। मैं इसके लिए उन सेकुलर हिंदुओं को दोषी ठहराता हूं, जिनके अंदर न तो स्वयं बोध है, न इतिहास बोध है और न ही शत्रु बोध है। उनको पता ही नहीं है कि उनका वैचारिक दुश्मन कौन है और अगर आप यह वैचारिक लड़ाई नहीं लड़ेंगे तो एक दिन आपको भौतिक रूप से यानी शारीरिक रूप से यह लड़ाई लड़नी पड़ेगी। उसके अलावा आपके पास कोई विकल्प नहीं है। आप शुतुरमुर्ग की तरह रेत में गर्दन घुसाकर यह नहीं सोच सकते कि तूफान आएगा और गुजर जाएगा। सूडो सेकुलर यही सोचते हैं कि ऐसा कुछ नहीं होगा। हिंदुओं में आपको कई लोग ऐसा कहते मिल जाएंगे कि क्या हो जाएगा अगर इस्लाम आ जाएगा, हम मुसलमान बन जाएंगे। उन मूर्खों को यह पता नहीं है कि फिर चॉइस आपकी नहीं होगी। फिर मुसलमान तय करेगा कि आपको जिंदा रखना है या नहीं। मुसलमान बनने या न बनने का सवाल तो उसके बाद में आएगा। मुसलमान आप तब बनेंगे जब आप जिंदा रहेंगे।

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तो अरशद मदनी उसी की चेतावनी दे रहा है कि जो हिंदू मुसलमान बन गए हैं अगर वे वापस हिंदू धर्म में लौटते हैं तो देश को दंगे, मारकाट और खूनी संघर्ष के लिए तैयार रहना चाहिए। सबसे बड़ा सवाल है कि अगर इस्लाम और क्रिश्चियनिटी शांतिप्रिय धर्म हैं तो फिर ये दूसरे धर्म के लोगों के धर्मांतरण का अभियान क्यों चलाते हैं? उस पर पैसा क्यों खर्च करते हैं? धमकी और लालच क्यों देते हैं? अजमेर शरीफ में जिस मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह है,उसने अकेले 90 लाख हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराया। जितने मुगल शासक रहे हैं उन्होंने हिंदुओं का जो धर्मांतरण कराया, जो हत्या-बलात्कार किए, जो मंदिर तोड़े, उसका पूरा लेखाजोखा लिख रखा है। टीपू सुल्तान ने कितने हजार पुजारियों का वध कराया, इसका आपको लेखाजोखा चाहिए तो आप मैसूर के संग्रहालय में चले जाइए। वहां टीपू सुल्तान के हाथ से लिखा हुआ ओरिजिनल डॉक्यूमेंट मौजूद है। मुगलों के दौर में यह तक हुआ कि हत्या करने के बाद जो पार्थिव शरीर था, उसका धर्मांतरण कराया गया। तो इस्लाम ने इस देश में यह सब किया है और यह अरशद मदनी फिर से धमकी दे रहा है कि हमने भी अपनी मां का दूध पिया है,गलियों में खून बहेगा। अरे, तुमने भारत मां का दूध पिया है। इस भारत की धरती ने तुमको पाला पोसा है। भारत के अलावा 57 इस्लामी देश हैं,जरा किसी देश में शरण लेकर दिखा दो। सऊदी अरब के लोग तो तुम्हें मुसलमान भी नहीं मानते। सऊदी क्राउन प्रिंस ने तो यहां तक कहा है कि भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश के जो मुसलमान हैं,वे कनवर्टेड हिंदू हैं। लेकिन इस देश के मुसलमानों की लीडरशिप पर हिंसा का नशा सवार है। उनको लगता है कि यह औरंगजेब, बाबर, हुमायूं का समय है और वह वही कर सकते हैं जो उन लोगों ने किया।

अरशद मदनी किसी गलतफहमी में न रहें। वह इस तरह की भाषा इसलिए बोल पा रहे हैं क्योंकि इस देश के सनातनी बर्दाश्त कर रहे हैं। इस देश की अदालत और इस देश की सरकार उन्हें बोलने की छूट दे रही है। वरना अरशद मदनी जैसे लोगों की जगह अगर और कहीं नहीं तो जेल है। ऐसे व्यक्ति को खुला छोड़ना, खतरे को न्योता देने जैसा है। अब समय आ गया है कि ऐसे लोगों को यह महसूस कराया जाए कि यह औरंगजेब या बाबर का काल नहीं है। वह समय चला गया। 800 साल जिन मुसलमानों व मुगलों ने राज किया, आज उनके वंशज भीख मांगते हैं और जिनको लूटा,जिनको बर्बाद किया,जिनकी हत्या की,आज उनका शासन है। आज वे पूरी दुनिया के लिए रोल मॉडल बने हुए हैं। अयोध्या में शानदार राम मंदिर का बनना इस बात की घोषणा है कि सनातन धर्म को कोई दबा नहीं सकता।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)