आपका अख़बार ब्यूरो।
रजत शर्मा की आवाज़, “आपकी अदालत में हमारे मेहमान हैं देश के सबसे लोकप्रिय धर्मुगुरु, सबसे पॉपुलर कथावाचक, समाज सुधारक, बहुत यंग एज में जिन्होंने पूरी दुनिया में ख्याति प्राप्त की। इन्हें दुनिया जानती है बागेश्वर सरकार के नाम से। मैं आमंत्रित कर रहा हूं पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को।
कार्यक्रम के बीच में वह धीरेन्द्र शास्त्री से कहते हैं- वहां ऑस्ट्रेलिया में आपने अंग्रेजी कैसी बोली इसका एक एग्जांपल मेरे पास है। वो मैं लोगों को दिखाना चाहता हूं।”
फिर वीडियो चलता है। बाघेश्वर धाम सरकार अपने विदेशी अनुयायियों को सम्बोधित कर रहे हैं- “थैंक यू योर फैमिली, योर बिजनेस, योर वर्क, योर रिलेटिव, ऑल पीपल्स आई प्रे इन लॉर्ड हनुमान एंड ब्लेस फॉर यू। थैंक यू सो मच।”
इस पर धीरेन्द्र शास्त्री हँसते हुए कहते हैं- “बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया। सही गई। सही गई। राइट हो गई।”

रजत शर्मा- “अरे गजब… ये कमाल की इंग्लिश बोली आपने।”
बागेश्वर धाम सरकार चिर परिचित अंदाज में हंसी बिखेरते हैं- “बस इतना ही समझ लो कि ये लास्ट चांस है।”
फिर गंभीर होकर बताते हैं: “यह एक हमारे जीवन में दुर्भाग्य रहा। बहुत से स्टूडेंट भी इस वीडियो को देखेंगे क्योंकि इसमें कोई संदेह नहीं कि ‘आपकी अदालत’ देश का सर्वोत्तम प्रोग्राम है। हमारे जीवन में एक- दुर्भाग्य तो नहीं कह सकते लेकिन- एक कमी रही। हमने सब कुछ जाना, पढ़ा… अध्यात्म को भी जितनी गुरु कृपा हुई सब कुछ… एक कमी यह रही कि हम अंग्रेजी नहीं पढ़ पाए। थोड़ा कई बार झिझक आती है। जैसे अभी लास्ट दिनों में हम न्यूजीलैंड गए तो वहां के प्रधानमंत्री हमको मिलने आए। बड़ी टेंशन थी और दो-तीन घंटे पहले प्रेशर था माइंड पे कि अब वो आएंगे तो हम क्या बोलेंगे? भारत में तो प्रधानमंत्री जी मिले थे तो हिंदी बोल देते। बढ़िया काम चल गया। अब यहां क्या बोलेंगे? अब उन्होंने तो अंग्रेजी ही ठोकी- “ओ वेलकम, वेलकम, वेलकम… बागेश्वर बाबा… वेलकम, वेलकम।”
तो हमने भी कहा- “थैंक यू, थैंक यू, थैंक यू, थैंक यू।” अब क्या बोल दें, हमें यही आती है। तो फिर हमने अंत में यही कहा कि “सॉरी आई कैन नॉट स्पीक इन इंग्लिश बट आई अंडरस्टैंड।”
वह कहते हैं: “हमारे जीवन में, हम यही कहेंगे जो हमने भूल की वो बाकी बच्चे ना करें। पढ़ना बहुत जरूरी है।”
धीरेन्द्र शास्त्री मानो अभिभावकों को सम्बोधित कर रहे हों- अपने बच्चों को आप कपड़े देना या ना देना- संपत्ति देना या ना देना- बच्चों को शिक्षा जरूर देना। आप बच्चों को शिक्षा दोगे तो भले ही आप बड़े घर में बेटी का विवाह ना करवा पाओ- अपने बालक को बड़ा मकान देकर के ना जा पाओ… यदि अपनी बेटी को और अपने बच्चों को शिक्षा देकर दे के जाओगे- अपनी बेटी और बच्चों को संस्कार दे के जाओगे- तो वो बिना मकान के भी अपनी शिक्षा के बल पर मकान भी बना लेंगे, दुकान भी बना लेंगे।”



