भारत अपना 74वां गणतंत्र दिवस इस 26 जनवरी को मनाने जा रहा है। इस बार का गणतंत्र दिवस कुछ खास होगा। देश में सीमा सुरक्षा बल का पहला ऊंट सवार महिला दस्ता आगामी गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार पुरूष ऊंट दस्ते के साथ राजपथ की परेड में हिस्सा लेगा। इस बीएसएफ वूमेन कैमल कॉन्टीजेन्ट को राजस्थान फ्रंटियर के ट्रेनिंग सेंटर और बीकानेर सेक्टर ने तैयार किया है। यह दुनिया का पहला महिला ऊंट सवार दस्ता है।महिला ऊंट सवार दस्ते की ड्रेस डिजाइन भी अद्भुत और खास तरह की है। इसे खासतौर पर विख्यात डिजाइनर राघवेंद्र राठौड़ ने तैयार किया है। बीएसएफ का यह महिला ऊंट सवार दस्ता आकर्षक और ग्लोरियस राजसी पोशाक के साथ पहली बार आगामी 26 जनवरी गणतंत्र दिवस को नई दिल्ली में होने वाली परेड में हिस्सा लेगा।

बीएसएफ की महिला पर्सनल होंगी तैनात

इस महिला ऊंट दस्ते में 20 से ज्यादा बीएसएफ की महिला पर्सनल सवार होंगी। गौरतलब है कि इस महिला ऊंट दस्ते ने हाल ही में पहली बार अमृतसर में हुई बीएसएफ की रेजिंग डे परेड में भी हिस्सा लिया था। इन दिनों राजपथ में इसकी कॉन्टीजेन्ट पुरुषों की कॉन्टीजेन्ट के साथ मिलकर रिहर्सल कर रही है।

 

राजस्थान के इतिहास और सांस्कृतिक तत्वों को वर्दी में किया शामिल

डिजाइनर राघवेंद्र राठौर की बनाई गई महिला प्रहारियों की वर्दी भारत के कई कीमती शिल्प रूपों का प्रतिनिधित्व करती है, जो देश के विभिन्न हिस्सों में तैयार की जाती हैं। इन्हें राघवेंद्र राठौर जोधपुर स्टूडियो में इन-हाउस असेंबल किया जाता है।

बीएसएफ कैमल कॉन्टिजेंट ब्रांड के लिए महिला प्रहारियों की वर्दी के डिजाइन में राजस्थान के इतिहास के प्राचीन और सांस्कृतिक तत्वों को शामिल किया गया है। बीएसएफ महिलाओं के लिए पोशाक बनाते करते समय, कार्यक्षमता के साथ-साथ राष्ट्रीय बलों की वर्दी पहनने का विशेषाधिकार और सम्मान झलकता है। यह जोधपुरी बंद गला स्टाइल के साथ बेहतरीन नजारा पेश कर रहा है।

कपड़े को 400 साल पुरानी डंका तकनीक में बनाया गया

बनारस के विभिन्न ट्रिम्स के लिए हाथ से तैयार किए गए जरदोजी के काम की बनावट वाले कपड़े को 400 साल पुरानी डंका तकनीक में बनाया गया है। वर्दी को आकर्षक पाघ पगड़ी के साथ स्टाइल किया गया है। एक पगड़ी, जो राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र के विरासत पाघ से प्रेरित है। पाघ राजस्थान के लोगों के सांस्कृतिक पहनावे का एक अनिवार्य तत्व है। मेवाड़ में यह पहना और बांधा जाता है और यह किसी की प्रतिष्ठा और सम्मान का प्रतीक है।

1976 से शुरू हुआ सिलसिला आज भी चल रहा है

गौरतलब हैं कि राजस्थान और गुजरात के रेतीले धोरे के साथ विषम भौगोलिक परिस्थितियों में बीएसएफ के जवानों का ऊंट एक अभिन्न साथी हैं। बीएसएफ का सुप्रसिद्ध ऊंट दस्ता हर वर्ष दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड तथा बीएसएफ की स्थापना दिवस परेड पर अपनी मनमोहक प्रस्तुति देता है। यह सिलसिला 1976 से शुरू हुआ था, जो आज भी चल रहा है।

खास मेहमान होंगे रिक्शा, ठेले और दूध वाले

इस बार गणतंत्र दिवस पर आने वाले मेहमान भी खास होंगे। गणतंत्र दिवस पर सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट और कर्तव्य पथ पर काम करने वाले वर्कर, रिक्शा वाले, दूध वाले और ठेले वाले स्पेशल एक हजार मेहमानों की सूची में शामिल किए गए हैं। इस मामले पर रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि जिन लोगों को गणतंत्र दिवस समारोह देखने का मौका नहीं मिलता, उनके लिए विशेष प्रयास किया गया है। इस साल फिर से सभी क्षेत्रों के लोगों को कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस समारोह में आमंत्रित किया गया है। इनमें एक हजार विशेष व्यक्ति शामिल होंगे जिसमें सेंट्रल विस्टा परियोजना के वर्कर, कर्तव्य पथ के रखरखाव वाले वर्कर, सब्जी विक्रेता, रिक्शा चालक, छोटी किराना दुकान के मालिक, दूध वाले और स्कूल बैंड प्रतियोगिता फाइनलिस्ट की आठ टीमें शामिल होंगी।

ये लोग भी होंगे शामिल

इन लोगों के अलावा, इस बार के गणतंत्र दिवस पर मेहमानों की सूची में आदिवासी समुदायों के लोग, दिव्यांगजन, वीर गाथा विजेताओं को भी शामिल किया गया है। इसके साथ ही मिस्र और जापानी प्रतिनिधिमंडल, इंटरपोल यंग ग्लोबल पुलिस लीडर्स प्रोग्राम के प्रतिभागी, दिल्ली सरकार के स्कूलों के बच्चे और अन्य लोगों को भी गणतंत्र दिवस परेड में आमंत्रित किया गया है। पिछले साल, ऑटोरिक्शा चालक, निर्माण श्रमिक, सफाई कर्मचारी और फ्रंटलाइन कर्मचारी सूची में थे।

कोरोना की वजह से विजिटर्स की संख्या में आई कमी

रक्षा मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि कोविड पाबंदियों के कारण इस साल आगंतुकों की संख्या में काफी कमी आई है। विजिटर्स की सुरक्षा के लिए, केवल दो टीके लगाने वाले को शामिल होने की अनुमति दी गई है और बाड़ों में मेहमानों से 6 फीट की दूरी बनाए रखने, मास्क पहनने और अन्य कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने का अनुरोध किया गया है। इसके अलावा, दिल्ली पुलिस ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किया है। (एएमएपी)