एक के बाद एक धक्कों से बढ़ रही बौखलाहट
प्रदीप सिंह।
कहते हैं कि आत्मश्लाघा व्यक्ति के विवेक को हर लेती है। विवेक खत्म हो जाता है तो व्यक्ति सही और गलत का फैसला नहीं कर पाता। वह हर समय अपनी प्रशंसा सुनना चाहता है। उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि प्रशंसा झूठी है या सही। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसी बीमारी से ग्रस्त हैं। उनको चाटुकार चाहिए और जब ऐसे लोग नहीं मिलते हैं तो वह खुद ही बताने लगते हैं कि मैं कितना महान हूं।
ट्रंप दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद से अब तक युद्ध रुकवाने को लेकर कितने ही झूठ बोल चुके हैं। हाल ही में उन्होंने स्टेट ऑफ द यूनियन भाषण दिया। आमतौर पर माना जाता है कि जब कोई राष्ट्राध्यक्ष इस तरह का भाषण देता है,जो संसद में होता है,तो झूठ नहीं सच ही बोलेगा। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप का इस बात से कोई लेना-देना नहीं है।

उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए फिर से मध्यस्थता और युद्ध रुकवाने की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उनसे आग्रह किया था कि अगर आप युद्ध नहीं रुकवाएंगे तो परमाणु युद्ध होगा और साढ़े तीन करोड़ लोग मारे जाएंगे। भारत पाकिस्तान पर न्यूक्लियर हमला करेगा। अब उनकी इस बात में दूर-दूर तक कोई सच्चाई हो ही नहीं सकती। भारत की नो फर्स्ट यूज़ की घोषित न्यूक्लियर पॉलिसी है और वह एक जिम्मेदार देश है। परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने वाला दुनिया का एकमात्र देश तो अमेरिका ही है। जापान आज तक उसके परमाणु हमले का दंश झेल रहा है। ट्रंप कह रहे हैं कि मैंने 200% टैरिफ की धमकी देकर परमाणु युद्ध रुकवाया जबकि हकीकत क्या है वह खुद भी जानते हैं। ऑपरेशन सिंदूर रुकवाने के लिए पाकिस्तान भारत के सामने गिड़गिड़ाया। तब भारत ऑपरेशन पॉज करने को तैयार हुआ। उसने ऑपरेशन सिंदूर रोका नहीं है। भारत ने यह बात अलग-अलग स्तरों पर कई बार स्पष्ट की है। भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऑपरेशन सिंदूर के समय ट्रेड की कोई बात ही नहीं थी। इसलिए ट्रंप का यह कहना कि मैंने धमकी दी कि युद्ध बंद करो नहीं तो मुझसे ट्रेड नहीं कर पाओगे। दोनों को पैसा चाहिए था इसलिए डर गए और युद्ध बंद कर दिया। अब इससे बड़ा झूठ और क्या हो सकता है? दरअसल यह ट्रंप का फ्रस्ट्रेशन है।
सत्ता में आने से पहले वह बड़े-बड़े दावे कर रहे थे कि 24 घंटे में रूस और यूक्रेन का युद्ध रुकवा दूंगा। उन्हें राष्ट्रपति बने डेढ़ साल हो गया है लेकिन रूस और यूक्रेन युद्ध अब भी चल रहा है। गाजा और इजराइल के बीच लड़ाई अब भी चल रही है। और अब तो युद्ध रुकवाने के दावे करने वाले डोनाल्ड ट्रंप खुद दूसरी बार ईरान पर हमले की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने वेनेजुएला के राष्ट्रपति का एक कमांडो ऑपरेशन में अपहरण करा लिया। तो ऐसे व्यक्ति की बात पर कौन भरोसा करेगा? दरअसल इस समय डोनाल्ड ट्रंप बहुत घायल हैं, इसलिए मान कर चलिए कि वह बड़े घातक हो सकते हैं। हाल ही में उन पर सबसे बड़ा हमला उन्हीं के देश के सुप्रीम कोर्ट ने किया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ट्रंप को राष्ट्रपति के रूप में टैरिफ लगाने का अधिकार है ही नहीं। संविधान के मुताबिक टैरिफ लगाने का अधिकार अमेरिका की संसद को है। इस फैसले के बाद ट्रंप लगातार सुप्रीम कोर्ट और उसके जजों के खिलाफ अनाप-शनाप बोल रहे हैं।

बौखलाए ट्रंप अब ईरान की घेराबंदी में जुटे हैं, लेकिन ईरान अभी तक किसी समझौते के लिए तैयार नहीं हुआ है। ट्रंप ईरान पर हमला तो कर सकते हैं और उसे बहुत बड़ा नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। लेकिन सवाल एक ही है कि क्या अमेरिकी अर्थव्यवस्था इससे होने वाले नुकसान को झेलने के लिए तैयार है? ट्रंप को भी यह समझ में आ रहा है, इसलिए उनका फ्रस्ट्रेशन और बढ़ रहा है। अगर वह हमला करते हैं तो अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा और नहीं करते हैं तो उन्होंने दुनिया में अपना जो भौकाल बनाया हुआ है,वह टूट जाएगा। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट और रूस ने उसे पहले ही तोड़ दिया है। आज जेलेंस्की तक उनकी सुनने को तैयार नहीं हैं। कनाडा, जो उनका पड़ोसी देश है और जिसके बारे में वह कहते हैं कि हमारे संसाधनों पर पल रहा है, भी आंखें दिखा रहा है। यूरोपियन यूनियन ने भी उनको धता बताकर भारत के साथ एफटीए कर लिया। तो डोनाल्ड ट्रंप को एक के बाद एक धक्के लग रहे हैं। उससे वे बुरी तरह हताश हैं। आज देश के अंदर और देश के बाहर उनको समर्थन देने वाला कोई नहीं है। इंग्लैंड जो हमेशा अमेरिका का साथ देता था,वह भी आज उससे दूर खड़ा है। चीन से दुश्मनी पहले से है। भारत को नाराज अलग से कर लिया है। ट्रंप के शासन के अभी ढाई साल बचे हुए हैं। इस दौरान वह दुनिया के लिए किस तरह की समस्या बनेंगे, इसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। उनके दिमाग की अस्थिरता पूरे विश्व को परेशान कर रही है और इसके रुकने के कोई संकेत नहीं मिल रहे। इसलिए कह रहा हूं ट्रंप घातक हो सकते हैं। ऐसा घातक व्यक्ति इस बात की परवाह नहीं करता कि नुकसान किसे होगा। वह आत्मघात भी करता है। ट्रंप उसी रास्ते पर चल रहे हैं।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)



