लोअर कोर्ट के फैसले को सत्य की जीत बताने वाले केजरीवाल हाईकोर्ट के नोटिस पर चुप।
प्रदीप सिंह।
चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात। यही हो रहा है अरविंद केजरीवाल और उनके साथियों के साथ। शराब घोटाले में अरविंद केजरीवाल,मनीष सिसोदिया सहित 23 आरोपी हैं। इन पर 2022 से मुकदमा चल रहा है। सीबीआई और ईडी इसकी जांच कर रही हैं। इस मामले में पिछले दिनों राउस एवेन्यू स्पेशल कोर्ट का फैसला आया,जिसमें सीबीआई के इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर के खिलाफ जैसी टिप्पणियां की गईं वैसी शायद ही किसी जजमेंट में की जाती हों। साथ ही पूरे केस को फर्जी बताते हुए कहा गया कि कोई एविडेंस नहीं है। फैसला आते ही सब लोग हैरान थे कि यह कैसे हो गया? इस फैसले के खिलाफ सॉलिसिटर जनरल ने हाईकोर्ट में रिवीजन पिटीशन फाइल करते हुए कहा, यह न्याय का स्थापित सिद्धांत है कि जो गवाहियां और अप्रूवर हैं,उनकी सत्यता की जांच ट्रायल के समय पर तय की जाती हैं। यह भारत के न्यायिक इतिहास की अद्भुत घटना है जिसमें ट्रायल से पहले ही आरोपियों को बरी कर दिया गया।
इस फैसले ने क्रिमिनल लॉ को सिर के बल खड़ा कर दिया है। इसके बाद हाईकोर्ट ने तुरंत स्पेशल कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी और सीबीआई के इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर के खिलाफ जो टिप्पणियां की गई थीं, उनको निकालने का आदेश दिया।
अब इस मामले में हाईकोर्ट जो कह रहा है और राउस एवेन्यू स्पेशल कोर्ट का जो फैसला आया है,दोनों में जमीन आसमान का अंतर है। तो जाहिर है कि कोई एक तो गलत है। हाईकोर्ट के मुताबिक राउस एवेन्यू स्पेशल कोर्ट के जज ने जो निर्णय दिया वह गलत है। सवाल यह है कि एक प्रतिष्ठित, ईमानदार इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर की इज्जत को सरेआम धूल में मिला दिया गया, उसके लिए जवाबदेह कौन होगा? हाईकोर्ट में 16 मार्च को रिवीजन पिटीशन पर सुनवाई होनी है। उसके बाद अंतिम फैसला आएगा। लेकिन राजनीति देखिए। जैसे ही राउस एवेन्यू कोर्ट का फैसला आया था अरविंद केजरीवाल और उनके साथियों ने दिवाली मनानी शुरू कर दी। अरविंद केजरीवाल कैमरे के सामने आए और रोने लगे। बोले कि अरविंद केजरीवाल कट्टर ईमानदार है। मुझे कट्टर बेईमान साबित किया गया था। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद केजरीवाल क्या कहेंगे? हाईकोर्ट ने तो स्पेशल कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। यानी अरविंद केजरीवाल और उनके साथी फिर से कट्टर बेईमान हो गए। तो अरविंद केजरीवाल यह खेल कब तक खेलेंगे?

जब लोअर कोर्ट का फैसला आया था तभी मैंने कहा था कि जनता अदालत के फैसलों से प्रभावित नहीं होती है। वह अपने आधार पर फैसला करती है। बोफोर्स के मामले पर अदालत का फैसला आने से पहले ही जनता ने फैसला कर लिया था। कांग्रेस पार्टी और राजीव गांधी को दोषी मान लिया था। उसका असर कांग्रेस की राजनीति पर आज तक है। अरविंद केजरीवाल को भी 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 के विधानसभा चुनाव में जनता सबक सिखा चुकी है। लोकसभा चुनाव के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि दिल्ली की सातों सीटें मुझे जिता दीजिए तो मुझे जेल नहीं जाना पड़ेगा। दिल्ली की जनता ने एक भी सीट नहीं जिताई। अरविंद केजरीवाल फिर जेल पहुंच गए। यही नाटक उन्होंने विधानसभा चुनाव में किया। विधानसभा चुनाव में चुनाव प्रचार के लिए उनको बेल मिल गई। अपने देश में न्याय व्यवस्था अजीब-अजीब तरह से काम करती है। उनको चुनाव प्रचार के लिए जमानत दी गई थी लेकिन अभी तक वह जमानत कैंसिल नहीं हुई है। उनको वापस जेल नहीं भेजा गया है। अब कानून इस बारे में क्या कहता है मुझे नहीं मालूम, लेकिन एक आम आदमी की तरह यह सोचकर आश्चर्य होता है कि जिस व्यक्ति को अदालत के आदेश से ही जेल भेजा गया, उसको चुनाव प्रचार करने के लिए छूट क्यों दी जानी चाहिए। आप याद कीजिए इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी के दौरान जॉर्ज फर्नांडिस पर बड़ौदा डायनामाइट कांड का केस चलाया था। जॉर्ज फर्नांडिस 1977 का लोकसभा चुनाव जेल से लड़े थे और उनको चुनाव प्रचार करने के लिए जमानत नहीं मिली थी। वह जेल से लड़कर चुनाव जीते थे। दूसरी ओर केजरीवाल ने जमानत पर जेल से बाहर आकर चुनाव प्रचार किया। रोते रहे। पूरी पार्टी इनके रोने में शामिल हुई। लेकिन नतीजा क्या हुआ? दिल्ली की जनता ने उखाड़ कर फेंक दिया। दिल्ली की जनता ने अरविंद केजरीवाल को बड़ा सीधा संदेश दिया कि नाटक करना बंद करो। हमने मान लिया है कि तुम कट्टर ईमानदार नहीं, घोटालेबाज हो।

एक जज ने मुकदमा चलाए बिना आपको बरी कर दिया। भारत के न्यायिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया कि बिना मुकदमे के भी कोई आरोपी बरी हो सकता है। और अरविंद केजरीवाल उसकी डंका पीटने लगे कि देखिए अदालत ने कह दिया कि मैं कट्टर ईमानदार हूं। तो अब बताइए हाईकोर्ट ने जो कहा, उसके बाद आप क्या समझ रहे हैं? यानी आप फिर से कट्टर बेईमान हो गए हैं। अब अरविंद केजरीवाल कहीं मीडिया के सामने दिखाई नहीं दे रहे हैं। अब कोई अदालत क्या फैसला देती है, इससे जनता पर कोई असर नहीं पड़ने वाला। उसने मान लिया है कि जिनको भ्रष्टाचारी बताकर आप सत्ता में आए थे भ्रष्टाचार में आप उनसे भी आगे निकल चुके हैं।
अरविंद केजरीवाल के लिए आने वाला समय बहुत कठिन होने वाला है। जो लोग समझ रहे हैं कि चुनाव में हार,मुख्यमंत्री पद का जाना और शीश महल का छूट जाना ही उनके लिए सजा है तो वे गलतफहमी में हैं। शराब घोटाले में सीबीआई ने जो चार्जशीट पेश की है। उसमें जो आरोप लगाए हैं और जो सबूत पेश किए हैं अगर अदालत में वे सही पाए गए तो अरविंद केजरीवाल की हमेशा के लिए राजनीति से विदाई हो जाएगी और संभव है कि उनकी पार्टी पर भी प्रतिबंध लग जाए। लेकिन इसके लिए जल्दबाजी करने के बजाय अदालत के फैसले का इंतजार करना चाहिए।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)



