आपका अखबार ब्यूरो।

विवेकानंद इंस्टिट्यूट ऑफ़ प्रोफेशनल स्टडीज, नई दिल्ली के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा आयोजित एवं भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के सहयोग से ‘हिन्दी पत्रकारिता के दो सौ वर्ष : आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के दौर में बदलते आयाम एवं चुनौतियां’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए प्रो. बलदेवभाई शर्मा ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता ने राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सामाजिक मुद्दों के प्रति जितनी गंभीरता हिन्दी पत्रकारिता एवं पत्रकारों में मिलती है, उतनी अंग्रेजी की पत्रकारिता में नहीं। हिन्दी पत्रकारिता की दशा और दिशा पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि तकनीकी बदलाव को हमें सकारात्मक रूप में लेना चाहिए, क्योंकि “विज्ञान एक अच्छा सेवक है, लेकिन एक बुरा मालिक”। उन्होंने भारतीय भाषाओं की पत्रकारिता को वास्तविक दिशा बताते हुए कहा कि इससे विचलन विनाश की ओर ले जा सकता है।

विशिष्ट अतिथि प्रो. रविप्रकाश टेकचन्दानी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता को केवल चुनौती के रूप में नहीं, बल्कि तकनीकी विकास के एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने फेक न्यूज़ के तेजी से प्रसार पर चिंता जताते हुए 22 आधिकारिक भारतीय भाषाओं के संतुलित विकास की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही, भारतीय मूल्यों पर आधारित “इंडियन एआई टूल” के विकास की बात भी कही। प्रो. वंदना पाण्डेय ने हिन्दी पत्रकारिता की ऐतिहासिक यात्रा को रेखांकित करते हुए विभाजन काल की रिपोर्टिंग के अध्ययन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि “कलम ही हमारी तलवार है।” उन्होंने यह भी कहा कि आलोचनाओं के बावजूद, हिन्दी पत्रकारिता का महत्व बना हुआ है और इसके इतिहास की अनदेखी भविष्य के विकास को प्रभावित कर सकती है।

 

वरिष्ठ पत्रकार प्रो. गोविन्द सिंह ने हिन्दी पत्रकारिता की ऐतिहासिक यात्रा पर प्रकाश डालते हुए स्वतंत्रता आन्दोलन में इसके योगदान को रेखांकित किया। शिक्षाविद् प्रो. राघवेन्द्र मिश्र ने बदलते परिवेश में हिन्दी पत्रकारिता की दिशा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि निश्चित रूप से हिन्दी पत्रकारिता के क्षेत्र में भी कई बदलाव हो रहे हैं, कुछ बदलाव तकनीकी के कारण, तो कुछ बदलाव बाजार के कारण, परन्तु यह आज भी आम आदमी की शरणस्थली है। दूरदर्शन के न्यूज़ एंकर अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि समाज में नकारात्मक एवं सकारात्मक दोनों ही कंटेंट हैं, एक अच्छे पत्रकार की दृष्टि निर्धारित करती है कि लोग किस प्रकार के समाचार से जुड़ेंगे एवं महत्त्व देंगे। डॉ. तुमुल कक्कड़ ने शोध आधारित पत्रकारिता पर बल दिया। प्रो. सिद्धार्थ मिश्र ने पत्रकारों के सामाजिक योगदान पर प्रकाश डाला।

विषय प्रवर्तन करते हुए प्रो. चारुलता सिंह ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य हिन्दी पत्रकारिता के ऐतिहासिक योगदान पर विमर्श प्रस्तुत करना है। इस अवसर पर डॉ. किंशुक पाठक, प्रो. वैशाली बिल्ला, डॉ. अमित चन्ना, डॉ. अनुराधा मिश्रा, डॉ. नेहा पाण्डेय आदि ने सक्रिय सहभागिता की। संगोष्ठी के पहले दिन कुल पांच सत्रों में हिन्दी पत्रकारिता की विकास यात्रा, हिन्दी पत्रकारिता का राष्ट्र निर्माण में योगदान, हिन्दी समाचार पत्रों एवं संपादकों की भूमिका, एआई एवं हिन्दी पत्रकारिता इत्यादि विषय पर देश के विभिन्न हिस्सों से शोधार्थियों ने ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से शोध पत्र प्रस्तुत किये।