टीजीबीएल कंपनी 430 करोड़ करेगी खर्च, केंद्र की पहल ला रही है रंग
टीजीबीएल ने कचरे के सही उपयोग के लिए भाभा एटॉमिक रिसर्च इंस्टीट्यूट और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस बेंगलुरु से करार किया है। कंपनी इनकी सहायता से कचरे में बायोडिग्रेडेबल, नॉन-बायोडिग्रेडेबल और खतरनाक अपशिष्ट को अलग कर उनके उपयोग पर काम करेगी। ऑप्टिकल सेंसर के उपयोग से कचरे में से ग्रीन बिलियंस को अलग कर उसका भी उपयोग किया जाएगा। संयंत्र से निकलने वाले गीले कचरे का उपयोग ह्यूमिक-एसिड के साथ बायो फर्टिलाइजर के उत्पादन के लिए किया जाएगा, जो पारम्परिक बायो फर्टिलाइजर से बेहतर साबित होगा। यह कार्बन के उत्सर्जन को भी कम करने में सहायक बनेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने ग्रीन हाउस गैसों, विशेष रूप से कार्बन के उत्सर्जन में कटौती को सुनिश्चित करने वाले फैसलों को हाल में मंजूरी दी है। उन्होंने साल 2021 के स्वतंत्रता दिवस पर इस मिशन की घोषणा की थी। भारत का लक्ष्य 2030 तक प्रति वर्ष 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करना है। इस प्रोत्साहन योजना से इसके दाम को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही देश की साख भी बढ़ेगी। देश में ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 19 हजार 744 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी गई। राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन नाम की इस योजना से वर्ष 2070 तक शून्य उत्सर्जन के देश के लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद मिलेगी। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल में कहा था कि हाइड्रोजन भविष्य का ईंधन है और इसे नगर निगम के कचरे से प्राप्त किया जा सकता है।(एएमएपी)



