अमित गौड़।
आज का दिन दिल्ली के इतिहास में काला दिवस के तौर पर वैसे ही व्याप्त है। 20 फरवरी 2020 वही दिन था, जब डोनाल्ड ट्रंप के भारत आगमन पर दिल्ली दंगे की पटकथा की शुरुवात हुई थी। हालांकि रणनीति बहुत पहले तैयार हो गई थी और उस समय मोहरा बनाया गया था मुस्लिम महिलाएं जो बुर्के में हथियार छुपा कर साजिश को अंजाम देने में लगी थीं दंगाइयों के साथ। आज 6 साल बाद वही तारीख… बस साल बदल गया। भारत में युवाओं के लिए #AISummit2026 का आयोजन किया गया और कई विदेशी डेलीगेट्स इसमें सम्मिलित हुए। फ्रांस के राष्ट्रपति ने भारत की तारीफ की। मगर कांग्रेस की ओछी राजनीति संसद से #Summit तक पहुंच गई। PM is Compromised के नारे के साथ छिपाकर लाई गई उल्टी टीशर्ट पहन कर जिस तरह की हरकत कांग्रेस के आतंकी मानसिकता वाले तथाकथित युवा नेताओं ने किया वो देश के साथ गद्दारी है।

अगर आपको प्रोटेस्ट करना है तो करो मगर विश्व पटल पर देश के अपमान करने का अधिकार किसने दिया और जो राहुल गांधी हर मुद्दे पर गले में तख्ती टांग कर नारे लगाने लगाता है, वो आज क्यों है चुप। कांग्रेस इसकी जिम्मेदारी लेने से डर गई है क्या? क्योंकि ऐसा तो है नहीं ये रातोरात प्लानिंग ही हो। ये वही तस्वीर है जो राहुल गांधी लेकर संसद में चिल्ला रहे थे और उसे टीशर्ट पर प्रिंट करवाकर प्लानिंग के साथ किसे किसे जाना है इसकी तैयारी के साथ इस ओछी हरकत को अंजाम दिया गया है । हालांकि कांग्रेसी उत्पातियों को पब्लिक ने जमकर कूटा होता, मगर पुलिस ने बचा लिया। नहीं तो पूरी कांग्रेस का मुंह काला हो गया होता।

सरकार को ऐसी हरकत के लिए सख्त सजा का प्रावधान कर उन्हें सबक सिखाना चाहिए ताकि #freedomofspeech का दुरुपयोग करने के पहले कोई सोचे । कांग्रेस की मंशा आखिर यही है कि किसी तरह सत्ता में आएं पर इसके लिए देश के युवाओं की बलि चढ़ाना सही है क्या?












