गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव अब कुछ दिनों में ही शुरू होने वाला है। सभी सियासी दल ज़मीन आसमान एक कर के चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं।  गुजरात में 182 सीटों पर चुनाव 2 चरणों में होने वाले हैं। पहले चरण की वोटिंग 1 दिसंबर और दूसरे चरण की वोटिंग 5 दिसंबर को होने वाली है। राज्य के नतीजे 8 दिसंबर को आएंगे। चुनाव के दौरान कई नेता अपनी पार्टी छोड़ दूसरी पार्टी का दामन थाम लेते हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोहनसिंह राठवा ने भी अपना सफर पार्टी के साथ खत्म कर के बीजेपी का दामन थाम लिया। वे लगातार 10 टर्म तक विधायक रह चुके है और उनका नाम रिकॉर्ड लिस्ट में है।गुजरात में करीब 62 विधायक ऐसे हैं जिन्होंने तीन या उससे ज्यादा बार चुनाव में लगातार जीत हासिल की है। इनमें से एक विधायक 10 बार, तीन विधायक सात बार, पांच विधायक छह बार चुने जा चुके हैं। 18 विधायक ने पांच बार विजय प्राप्त की तो वहीं पंद्रह विधायकों ने चार बार और बीस  विधायक तीन बार जीते हैं। लगातार जीतने वाले कुल सदस्यों में बीजेपी के 41, कांग्रेस के 20 और 1 बीटीपी के नेता हैं।

बीटीपी के नेता छोटूभाई वसावा सात बार विधायक चुने जा चुके हैं, लेकिन इस बार वह चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। असल में इन ताकतवर नेताओं के सामने किसी नए  प्रत्याशी को उनके खिलाफ खड़ा करना काफी चुनौती भरा हो सकता है।

1998 से 2017 के बीच विधानसभा की 46 ऐसी सीटें हैं जहां 24 साल से जीतने वाली पार्टी नहीं बदली है। जहां एक तरफ बीजेपी के पास ऐसी 31 सीटें हैं तो वहीं कांग्रेस  के पास 14 सीटें हैं वही बीटीपी के पास छोटा उदेपुर की एक सीट है। जहा एक तरफ कांग्रेस की ये सीटें आदिवासी और ग्रामीण इलाक़ों की हैं तो वहीं बीजेपी की 31 सीटें अहमदाबाद, वडोदरा, राजकोट, सूरत जैसे शहरी क्षेत्र की हैं।

छह या इससे ज्यादा बार जीत चुके है चुनाव

मोहनसिंह राठवा : राठवा केवल एक बार ही चुनाव हारे हैं। लम्बे समय तक विधायक पद पर रहने वाले नेता हैं। इनको जनता ने दस बार विधायक के रूप में चुना है। जेतपुर से इन्होंने 1972-2007 तक चुनाव लड़ा। 2012-2017 में छोटा उदेपुर से चुनाव लड़ा और जीता। राठवा कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर 1995 से 2017 तक चुनाव लड़े थे।

योगेश पटेल: पटेल ने गुजरात विधानसभा चुनाव सात बार लड़ा और विजय प्राप्त हुई। इन्होंने अपना सियासी सफर साल 1990 में जनता दल से की और अब बीजेपी के नेता हैं। पटेल ने 1990-2007 तक वडोदरा की रावपुरा सीट के बाद 2012-17 से मांजलपुर से चुनाव लड़ा था।

नीतिन पटेल : नीतिन छह बार विधायक रह चुके हैं। 1990 से 2017 तक पटेल ने बीजेपी के नेता के तौर पर चुनाव लड़ा था। वह 1990 से 2007 तक कडी सीट और 2012 से 2017 तक मेहसाणा सीट से चुनाव लड़ा था।

पबुभा माणेक:  माणेक सात बार विधायक रह चुके हैं। 1990 से 2017 तक वे द्वारका से विधायक बनते आ रहे हैं। 1990-98 तक निर्दलीय, 2022 कांग्रेस फिर 2007-2017 तक बीजेपी से चुनाव लड़ चुके हैं।

केशुभाई नकरानी : नकरानी बीजेपी से छह बार चुनाव में प्रत्याशी रह चुके हैं और विधायक बने हैं। इन्होंने 1995 से 2007 तक सीहोर से चुनाव लड़ा और जीता था। 2012 और 2017 गारियाधार सीट से चुनाव लड़ा था।

छोटूभाई वसावा : वसावा सात बार विधायक रह चुके हैं। वह केवल 1985 में हारे थे। 1990 और 1998  में जनता दल, 1995 में निर्दलीय, 2002-12 में जद (यू) और 2017 में बीटीपी से विधायक रह चुके हैं। इस साल वह चुनाव नहीं लड़ने वाले हैं।

पूंजाभाई वंश : ऊना से 6 बार विधायक। वंश केवल 2007 में ही चुनाव हारे थे। जनता दल से 1990 में, 1995-2017 तक उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था।

मधुभाई श्रीवास्तव: लगातार 6 बार विधायक चुने गए। मधुभाई ने 1985-90 का चुनाव हारा था। इन्होंने बड़ौदा सिटी की सीट से चुनाव लड़ा था। अभी लगातार वाघोडिया से चुनाव लड़ रहे है।

निरंजन पटेल : पटेल पेटलाद सीट से छह बार विधायक रह चुके हैं। साल 2002 में निरंजन चुनाव हार गए थे। 1990 में जनता दल के उम्मीदवार, उसके बाद 1995 से 2017 तक कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। (एएमएपी)