
भारत में नई है प्रक्रिया
सीएचआईएस में एक स्वस्थ व्यक्ति को जानबूझकर रोगजनकों के संपर्क में लाया जाता है। यानी सामान्य भाषा में कहें तो व्यक्ति पर जीवित विषाणु का प्रयोग किया जाता है, ताकि मनुष्यों में संक्रामक रोगों के रोगजनक, संचरण, रोकथाम और उपचार की समझ को बढ़ावा दिया जा सके। भारत में अभी यह प्रक्रिया काफी नई है। हालांकि, दुनिया के कई देश इस मॉडल पर डेंगू, मलेरिया, जीका वायरस जैसी संक्रामक बीमारियों को लेकर खोज कर रहे हैं।
अभी तक दो बार अध्ययन
हाल ही में केंद्र सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने नियंत्रित मानव संक्रमण मॉडल का उपयोग करके नए इन्फ्लूएंजा टीके विकसित करने का प्रस्ताव दिया है। इससे पहले, हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक कंपनी ने टाइफाइड का टीका विकसित करने के लिए इस मॉडल का उपयोग किया है।
संस्थान में होगा अध्ययन
मसौदे में शामिल नए नियमों के अनुसार, जरूरी है कि इस तरह का अध्ययन केवल किसी संस्थान में ही होना चाहिए। जहां भी यह अध्ययन होगा वहां एक उच्च स्तरीय प्रयोगशाला और अस्पताल होना जरूरी है। जिन वैज्ञानिक या शोधकर्ताओं को क्लीनिकल ट्रायल का अनुभव होगा, उन्हीं को इसकी अनुमति दी जाएगी।(एएमएपी)








