बीजिंग । चीन में लगातार शी जिनपिंग की परेशानी बढ़ रही है। एक बार फिर से लोग सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर हैं। ग्वांगझू शहर में रिटायर्ड लोगों ने सामाजिक सुरक्षा ब्यूरो के सामने विरोध प्रदर्शन किया। ये लोग अपनी पेंशन और मेडिकल इंश्योरेंस पेयमेंट कम किए जाने से नाराज हैं।एक स्वतंत्र पत्रकार जेनिफर जेंग ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर ट्वीट करके इस प्रदर्शन की जानकारी दी है। उन्होंने ट्वीट करके कहा, ‘ग्वांगझू में सामाजिक सुरक्षा ब्यूरो के सामने रियायर्ड लोगों ने प्रदर्शन किया। ये लोग उनकी पेंशन और चिकित्सा बीमा भुगतान कम किए जाने का विरोध कर रहे हैं।’ जेनिफर ने लिखा है कि चीन में स्थानीय सरकार अब वित्तीय समस्याओं का सामना कर रही है। जेंग के ट्विटर बायो के अनुसार, वह चीन और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के बारे में जानकारियां मुहैया कराते हैं।
वहीं, इससे पहले द स्ट्रेट्स टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि कोरोना की मार के चलते चीन का दक्षिणी वाणिज्यिक केंद्र ग्वांगझू काफी हद तक प्रभावित हुआ है। यहां के लोगों की आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ा है और इससे उबरने का रास्ता आसान नहीं दिखता है। दूसरी ओर बताया जा रहा है कि कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के मकसद से लगी पाबंदियों का पूरे चीन की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा है। इसे देखते हुए ही राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कुछ दिनों पहले कड़े महामारी प्रतिबंधों को अचानक से हटा लिया था। जिनपिंग के इस कदम को चीन की रुकी हुई अर्थव्यवस्था को फिर से मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, डाउनटाउन ग्वांगझू के लोगों पर कोविड-19 प्रतिबंधों और आर्थिक सुस्ती का गहरा असर पड़ा है। लोग और कंपनियां दोनों ही सावधानी से खर्च कर रही हैं। इससे पता चलता है कि इस हालत से बाहर निकलने अभी समय लगने वाला है। दूसरी ओर चीन के लोगों पर कोरोना महामारी का कितना घातक असर पड़ा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के अस्पतालों में पिछले 30 दिनों में लगभग 60 हजार लोगों की मौत हुई। बीजिंग की ओर से शनिवार को यह जानकारी WHO की उन आलोचनाओं के बाद दी गई है कि चीन महामारी की गंभीर स्थिति से संबंधित खबरों को दबा रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने शनिवार को कहा कि देश के अस्पतालों में 8 दिसंबर से 12 जनवरी तक कोविड-19 के कारण 59,938 लोगों की मौत हुई है। सांस संबंधी दिक्कत के कारण 5,503 और कोविड-19 के साथ अन्य बीमारियों के चलते 54,435 लोगों की मौत हुई है।
चीन में कोरोना वायरस मामले को लेकर एक हैरान करने वाली स्टडी वाली सामने आई है। पेकिंग यूनिवर्सिटी की ओर से किए गए अध्ययन में दावा किया गया है कि दो जनवरी तक चीन में करीब 900 मिलियन लोग कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं जो कि कुल आबादी का करीब 64 फीसदी हिस्सा है। यूनिवर्सिटी की स्टडी के मुताबिक चीन के गांसु प्रांत के 91 फीसदी लोग कोरोना संक्रमित हैं जबकि युन्नान और किन्हाई के क्रमश: 84 और 80 फीसदी लोग कोरोना से संक्रमित हैं।
यूनिवर्सिटी की यह स्टडी चीन के एक टॉप महामारी विज्ञानी के उस चेतावनी के बाद है जिसमें कहा गया था कि कोरोना के मामले अब ग्रामीण इलाकों में बढ़ेंगे और महामारी की यह लहर दो से तीन महीने तक रहने की उम्मीद है। चाइनीज सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के पूर्व प्रमुख जेंग गुआंग ने इसलिए यह चेतावनी दी क्योंकि लाखों चीनी लूनर न्यू ईयर से पहले अपने गृहनगर की यात्रा कर रहे हैं। (एएमएपी)
बीते दिनों गंगा नदी में गंगा विलास क्रूज (Ganga Vilas Cruise) उतारा गया। इस क्रूज को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Modi) ने वर्चुअली हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। दावा किया जा रहा है कि यह देश का सबसे बड़ा क्रूज है। इस बीच इस क्रूज से भी बड़ा क्रूज का निर्माण मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में होने जा रहा है। इस क्रूज का निर्माण खानूगांव में हो रहा है। खास बात यह है कि गंगा विलास क्रूज के रेस्टोरेंट में 40 लोगों के बैठने की व्यवस्था है, लेकिन मध्य प्रदेश के भोपाल में निर्माणाधीन क्रूज में 200 लोगों के बैठने की व्यवस्था रहेगी। अनुमान है कि इस क्रूज का निर्माण चार महीने में पूरा हो जाएगा।
बड़ा तालाब में जल्द ही विशालकाय क्रूज
जानकारी के अनुसार राजधानी भोपाल के बड़ा तालाब में जल्द ही विशालकाय क्रूज उतारा जाएगा। इस क्रूज के निर्माण में 18 लोगों की टीम लगी हुई है। बड़े तालाब के किनारे क्रूज के फैब्रिकेशन और असेंबलिंग का काम शुरू किया गया है। क्रूज के निर्माण में गुणवत्ता का खास ध्यान रखा जा रहा है। क्रूज में लगने वाले हर मैटेरियल की जांच इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (IRS) करेगा। आईआरएस से सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही मैटेरियल का इस्तेमाल किया जा रहा है।
गंगा विलास से इसलिए है बड़ा
गौरतलब है कि बीते दिनों गंगा नदी में उतारे गए गंगा विलास को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इसके साथ ही दावा किया जा रहा था कि यह देश का सबसे बड़ा क्रूज है। इस क्रूज के रेस्टोरेंट में 40 लोग बैठ सकेंगे, लेकिन अब मध्यप्रदेश के भोपाल में जिस क्रूज का निर्माण हो रहा है, उसकी खास बात यह है कि उसके रेस्टोरेंट में एक साथ 200 लोग बैठकर खाना खा सकेंगे। यह क्रूज 36।6 मीटर लंबा, 12 मीटर चौड़ा और 10 मीटर ऊंचा होगा। इसमें 20 सुइट होंगे, जिनमें 150 से 200 लोग एक साथ रुक सकेंगे।
क्रूज की ये है खासियत
राजधानी भोपाल में जिस क्रूज का निर्माण हो रहा है, उसकी खास बात यह है कि क्रूज के बेसमेंट के ऊपर तीन फ्लोर होंगे। फर्स्ट फ्लोर पर बैंक्वेट हॉल, डांस स्पेस और आठ सुइट होंगे। सेकंड फ्लोर पर 12 सुइट होंगे। क्रूज का ऑपरेटिंग केबिन थर्ड फ्लोर पर रहेगा, जिसमें 12 लोग रह सकेंगे। क्रूज का स्ट्रक्चर माइल्ड स्टील का होगा। बीच में 8 मिमी और बॉडी में 6 मिमी मोटी एमएस प्लेट लगी रहेगी। इसका सेंटर ऐसे डिजाइन किया जा रहा है, जिससे पानी की लहरों के बीच क्रूज में बैठे लोगों को झटके न लगें। बता दें कि जैसे ही इस क्रूज की जानकारी राजधानी वासियों को लगी, लोग इस क्रूज की सवारी करने को काफी उत्सुक दिख रहे हैं। (एएमएपी)
सोशल मीडिया पर अब अरविंद केजरीवाल के नेतृत्ववाली आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार के कथित दवा घोटाले की गूंज से राजनीतिक तापमान चढ़ा हुआ है। इस संबंध में भारतीय जनता पार्टी के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने करीब सात घंटे पहले और दिल्ली के स्थानीय मुद्दों को लेकर सक्रिय अन्य राजनीतिक पार्टी ‘लोकसेना हिंद’ के अध्यक्ष डॉ. मुनीश रायजादा ने एक्स हैंडल पर टिप्पणी की है। डॉ. रायजादा ने तो केजरीवाल पर गंभीर तंज कसा है।
भारतीय जनता पार्टी के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर एक चैनल के समाचार फुटेज का वीडियो अपलोड किया है। उन्होंने विस्मयकारी चिह्न लगाते हुए लिखा है, ‘शराब घोटाले के बाद अब अरविंद केजरीवाल की एएपी का दवाई घोटाला!’ सनद रहे मालवीय ने एएपी को अंग्रेजी के कैपिटल लेटर में लिखा है। इसके अलावा अन्ना आंदोलन की लड़ाई में हिस्सा ले चुके डॉ. मुनीश रायजादा ने भी अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा है। वह लंबे समय तक आम आदमी पार्टी के ‘बड़े’ सहयोगी रहे हैं।
फिलहाल वह अब अपनी राजनीतिक पार्टी ‘लोकसेना हिंद’ के जरिये दिल्ली के बुनियादी मुद्दे जोरशोर से उठा रहे हैं। लोकसेना हिंद के अध्यक्ष डॉ. मुनीश रायजादा ने भी एक्स पर एक न्यूज चैनल के समाचार की वीडियो छवि को अपलोड कर लिखा है- ‘और कितने घोटाले करोंगे फर्जीवाल?’। यही नहीं रायजादा की पार्टी ने एक्स पर जनता से सवाल पूछा है,’ एक के बाद एक घोटाले करने वाले अरविंद केजरीवाल को क्या अब इस्तीफा दे देना चाहिए?।’ ‘लोकसेना हिंद’ की इस पोस्ट को डॉ. रायजादा ने अपने एक्स हैंडल पर री-पोस्ट किया है।
उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी सरकार के कथित शराब घोटाले में दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और राज्यसभा सदस्य संजय सिंह सलाखों के पीछे हैं। मनी लॉन्ड्रिंग के केस में अन्य पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन भी गिरफ्तार हो चुके हैं। कथित शराब घोटाले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ईडी के समन जारी हुए हैं। केजरीवाल इनको अवैध बताते हुए वापस लेने की मांग कर चुके हैं। इस बीच दिल्ली के उप राज्यपाल ने दवा घोटाले की जांच सीबीआई से कराने के आदेश दिए हैं। (एएमएपी)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता दुनियाभर में किसी से छिपी हुई नहीं है। ब्रिटेन के सांसद ने पीएम मोदी की जमकर प्रशंसा की है। लॉर्ड करण बिलिमोरिया ने पीएम मोदी को दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोगों में से एक बताया है। उन्होंने दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था, भारत के साथ ब्रिटेन के संबंधों के महत्व के बारे में बात करते हुए यह बात कही। ब्रिटेन के सांसद लॉर्ड करण बिलिमोरिया ने ब्रिटेन और भारत के बीच संबंधों के महत्व पर संसद की बहस के दौरान कहा, ”…नरेंद्र मोदी, एक लड़के के रूप में, गुजरात के एक रेलवे स्टेशन पर अपने पिता की चाय की दुकान पर चाय बेचा करते थे। आज, वह भारत के प्रधानमंत्री के रूप में इस दुनिया पर सबसे शक्तिशाली लोगों में से एक हैं।”उन्होंने आगे कहा, “‘आज भारत के पास जी-20 की अध्यक्षता है। आज भारत के पास अगले 25 वर्षों में 32 बिलियन अमेरिकी डॉलर की जीडीपी के साथ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का विजन है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ स्टेशन से निकल चुकी है। यह अब दुनिया की सबसे तेज ट्रेन है। यूके को आने वाले दशकों में भारत का सबसे करीबी और भरोसेमंद दोस्त और साझेदार होना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि भारत अब ब्रिटेन को पीछे छोड़ चुका है और दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और 1.4 अरब लोगों के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था भी है।
लॉर्ड करण बिलिमोरिया ने आगे कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार समझौता काफी उन्नत है। उन्होंने कहा कि भारत यूके का 12वां व्यापारिक भागीदार है और जोर देकर कहा कि यह पर्याप्त नहीं है।” सांसद ने आगे कहा कि 75 साल के लोकतंत्र के साथ, यह एक युवा देश है। पिछले वित्तीय वर्ष में इसकी वृद्धि दर 8.7 प्रतिशत थी, और इसने 100 से अधिक यूनिकॉर्न के साथ योगदान दिया है। यह अक्षय ऊर्जा और सौर ऊर्जा का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक भी है। हर पहलू में, भारत ताकत से और ताकत की ओर बढ़ रहा है, जिसमें महामारी के दौरान भी शामिल है, जब इसने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साथ ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका के साथ अरबों वैक्सीन का प्रोडक्शन किया था।”
लॉर्ड करण बिलिमोरिया ने बताया कि भारत और यूके को मुक्त व्यापार समझौते को जल्दी से पूरा करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, ”ब्रिटेन-भारत मुक्त व्यापार समझौता काफी उन्नत है। हालांकि इस समय हमारा व्यापार 29.6 बिलियन पाउंड का है, भारत यूके का केवल 12वां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। यह पर्याप्त नहीं है। मुझे यकीन है कि मंत्री इस बात से सहमत होंगे कि हमें एफटीए को जल्द-से-जल्द पूरा करना चाहिए, लेकिन हड़बड़ी में नहीं, इसे जितना संभव हो उतना व्यापक होना चाहिए।” (एएमएपी)
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को वित्तीय वर्ष 2023-24 का बजट पेश करेंगी। चूंकि 2024 में लोकसभा चुनाव होने हैं ऐसे में यह मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट होगा। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि लंबे समय से अपरिवर्तित आयकर स्लैब पर वित्त मंत्री इस बार के बजट में कोई बड़ी घोषणा करेंगी। वित्त मंत्री सीतारमण टैक्स स्लैब में संशोधन कर भारतीय करदाताओं को राहत देंगी इस बात की अटकलें लग रही हैं। बाजार के जानकार मानते हैं कि इस बार के बजट में इक्विटी निवेश पर एलटीसीजी कर और रियल एस्टेट क्षेत्र की मांगों पर भी विचार करते हुए बजट में बड़ी घोषणाएं हो सकती हैं।
नौ साल से आयकर स्लैब में नहीं हुआ कोई बदलाव
सरकार ने पिछले 9 वर्षों में आयकर स्लैब में कोई परिवर्तन नहीं किया है। पिछली बार साल 2014 में आयकर छूट की सीमा को बढ़ाया था। यह परिवर्तन नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के पहले बजट में किया गया था। अब साल 2023 में मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करने वाली हैं, ऐसे में देश का नौकरीपेशा से लेकर व्यापारी वर्ग सभी वित्त मंत्री से बड़ी घोषणा की उम्मीद कर रही हैं।
2014 की तुलना में लोगों का खर्च बढ़ा, आमदनी बढ़ी पर आयकर का दायरा वही रहा
बढ़ती महंगाई के कारण बीते कई वर्षों में लोगों का खर्चा कई गुना बढ़ गया है। लिविंग कॉस्ट (Living Cost) में तो बढ़ोतरी हुई है पर सरकार ने आमदनी पर लगने वाले कर में बीते नौ वर्षों में कोई रियायत नहीं दी है। ऐसे में करदाता नए टैक्स सिस्टम के तहत 2.5 लाख की आयकर छूट की सीमा को बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने की उम्मीद कर रहे हैं। फिलहाल लोगों को 2.5 से पांच लाख तक की सैलरी पर पांच फीसदी और पांच से 7.5 लाख पर 20 फीसदी टैक्स देना पड़ता है।
क्या 80C के तहत मिलने वाली छूट की सीमा बढ़ाई जाएगी?
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80C के तहत हर साल करदाताओ को अपने निवेश पर 1.5 लाख रुपये की छूट मिलती है। टैक्सपेयर्स इस लिमिट को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। अगर बजट में सरकार इसपर फैसला लेती है, तो टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत मिलेगी। PPF, ELSS, NSC, NPS, बैंक FD जैसे सेविंग स्कम्स पर इसी 80C के तहत करदाताओं को राहत मिलती है।
2014-15 में 80C के तहत छूट की सीमा 1 लाख से बढ़ाकर 1.5 लाख की गई थी
आखिरी बार साल 2014 में सरकार ने टैक्स फ्री इनकम और सेक्शन 80C की लिमिट बढ़ाई थी। पिछली बार वित्त वर्ष 2014-15 में इस सीमा को एक लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये किया गया था। उसके बाद से इसकी सीमा नहीं बदली गई है। उम्मीद है कि 2024 के आम चुनावों के पहले सरकार कार 80C की लिमिट बढ़ाकर करदाताओं को खुश कर सकती है।
आईसीएआई ने सरकार को 80C की लिमिट बढ़ाने का दिया है सुझाव
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया ने अपने प्री-बजट मेमोरेंडम 2023 में सुझाव दिया है कि आयकर अधिनियम 1961 की धारा 80सी के तहत कर कटौती की सीमा बजट 2023 में मौजूदा 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये किया जाना चाहिए। आईसीएआई ने कहा कि धारा 80सी की कटौती सीमा में बढ़ोतरी जनता को बड़े पैमाने पर बचत के अवसर प्रदान करेगी।
स्टैंडर्ड डिडक्शन में इजाफा पर क्या फैसला लेगी सरकार?
आयकर की धारा 16 (ia) के तहत नौकरीपेशा वर्ग को 50,000 रुपये की स्टैंडर्ड डिडक्शन की सुविधा दी जाती है। नौकरीपेशा वर्ग के लोग इसमें बढ़त की उम्मीद कर रहे हैं। जानकार मानते हैं कि सरकार स्टैंडर्ड डिडक्शन सीमा को 50,000 से बढ़ाकर 75,000 रुपये करने का फैसला ले सकती है। फिनफ्लुएंसर और बीमा क्षेत्र के जानकार संत कुमार दास के अनुसार स्टैंडर्ड डिडक्शन पर सरकार बड़ा फैसला ले सकती है। 2023 में इसे बढ़ाकर 1 लाख रुपये सालाना करने की उम्मीद की जा सकती है। केंद्र सरकार ने आयकर पर मिलने वाले स्टैंडर्ड डिडक्शन में आखिरी बदलाव वर्ष 2019-20 में किया था। 1 फरवरी 2019 के बजट में वित्त मंत्री ने स्टैंडर्ड डिडक्शन के तहत मिलने वाली छूट को 40 हजार से बढ़ाकर 50 हजार करने का फैसला किया था। वर्ष 2020 और 2021 के बजट में इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया। इसके अलावे जानकारों के मुताबिक सरकार पीपीएफ पर भी 2023 के बजट में बड़ा एलान कर सकती है।
एलटीसीजी पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण क्या फैसला लेंगी?
आर्थिक जानकारों के अनुसार बजट 2023-24 के बजट में दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) कर को और तर्कसंगत बनाया जा सकता है। वर्तमान में एक वर्ष से अधिक समय के लिए रखे गए शेयरों पर 10% टैक्स लगता है। एलटीसीजी कर को वर्ष 2005 में बंद कर दिया गया था, लेकिन 2018 में भाजपा सरकार ने इसे फिर लागू कर दिया। सूत्रों ने कहा, समझा जाता है कि वित्त मंत्रालय एलटीसीजी कर ढांचे को तर्कसंगत बनाकर और मुद्रास्फीति समायोजित पूंजीगत लाभ की गणना के लिए आधार वर्ष को संशोधित करके समान परिसंपत्ति वर्गों के बीच समानता सुनिश्चित करने पर विचार कर रहा है। (एएमएपी)
स्वाधीनता और स्वाभिमान के संघर्ष में असंख्य बलिदान हुये हैं। इतिहास की पुस्तकों में उनका विवरण नगण्य मिलता है । ऐसा ही बलिदान तिलपत में वीर गोकुल सिंह जाट का हुआ । यह बलिदान साधारण नहीं था । बंदी बनाकर ऐसी क्रूरतम मौत दी गई कि उसे पढ़कर आज भी रोंगटे खड़े होते हैं। बादशाह औरंगजेब की सेना ने गांव के गाँव उजाड़ दिये, सामूहिक नरसंहार किया । और उन्हीं को छोड़ा गया जिन्होंने मतान्तरण स्वीकार कर लिया था ।
यह तिलपत इन दिनों हरियाणा प्राँत के अंतर्गत फरीदाबाद जिले में आता है । पर मुगल काल में यह क्षेत्र मथुरा के अंतर्गत आता था और पूरे क्षेत्र के शासन का केन्द्र भी । गोकुल सिंह के पूर्वज कभी इस क्षेत्र के शासक हुआ करते थे । पर समय बदला रियासत समाप्त हो गई और मुगलों के अंतर्गत जागीरदार हो गये । यह समझौता परिस्थियों का था । मन के समर्पण का नहीं। समय पर कर चुकाकर और भेंट भेजकर किलेदार अपनी प्रजा को संरक्षण देते रहे लेकिन औरंगजेब के काल में यह संतुलन बिगड़ गया । औरंगजेब ने सभी मंदिरों और मूर्तियों को ध्वस्त करने का आदेश दिया और मतान्तरण का अभियान चलाया । इसके लिये जजिया कर भी बढ़ा दिया । बसूली के नाम पर मुगल सेना ने आतंक पैदा करना शुरु कर दिया । चूँकि यह टैक्स केवल हिन्दुओं पर लगता था । टैक्स और बसूली की सख्ती से बचने केलिये लोग मतान्तरण करने लगे । जो मतान्तरण कर लेते थे उन्हें छूट मिल जाती थी । वर्ष 1669 में फसल खराब हुई । जमीदारों ने रियायत माँगी। जो नहीं मिली । तब वीर गोकुलसिंह ने सेना एकत्र की और जजिया देने से इंकार कर दिया ।
गोकुल सिंह ने बादशाह को स्पष्ट संदेश भेजा कि जजिया कम किया जाय और फसल अच्छी आने तक बसूली रोकी जाय । लेकिन बात नहीं बनी । उल्टे इसे विद्रोह माना गया और क्रुद्ध होकर औरंगजेब ने सेना भेजी । फौजदार हसन अली के नेतृत्व में मुगल फौज मथुरा पहुँची । वीर गोकुल सिंह जाट ने सामना किया । यह युद्ध 10 मई 1669 को मथुरा से छह मील दूर हुआ । यह क्षेत्र अब राया विकास खंड के अंतर्गत सिहोरा नाम से जाना जाता है । गोकुलसिंह और उनके सैनिक भारी पड़े। मुगल सेना को पीछे हटना पड़ा। इससे उत्साहित होकर वीर गोकुल सिंह ने स्वयं को स्वतंत्र घोषित कर दिया । और तिलपत पर अपना ध्वज फहरा दिया । इस बीच मुगल दरबार से समर्पण के प्रस्ताव भेजे गये । मुगलों की ओर से समझौते का अंतिम संदेश लेकर फौजदार शफ शिकन खाँ गये और गोकुलसिंह से पूर्ण समर्पण करके माफी मांगने को कहा। लेकिन बात नहीं बनी । अंत में 28 नवम्बर 1669 औरंगजेब स्वयं एक बड़ी सेना और तोपखाने के साथ तिलपत रवाना हुआ । औरंगजेब ने मथुरा पहुँचकर अपना कैंप किया । और तिलपत को घेरने के लिये सेना भेजी । युद्ध आरंभ हुआ । यह दूसरा युद्ध 4 दिसम्बर 1669 को तिलपत से 20 मील पर आरंभ हुआ। यह युद्ध केवल तीन दिन चल पाया ।
मुगलों के पास सेना अधिक थी दूसरा उनके पास तोपखाना था । मुगलों के तोपखाने ने सब तहस नहस कर दिया था । वीर गोकुलसिंह के नेतृत्व में युद्ध कर रहे सैनिकों की संख्या केवल सात हजार थी इसमें कोई तीन हजार सैनिक किले में तैनात थे और अन्य मैदान में युद्ध के लिये आये थे । जिनकी की संख्या चार हजार के आसपास थी फिर भी इस सेना ने वीरता से सामना किया । लेकिन यह वीरता तोपखाने के सामने बेबस हो गई। सेना का भारी विनाश हुआ । तब गोकुलसिंह सिंह की सेना पीछे हटी और तिलपत गढ़ी की सुरक्षा में लग गई। लेकिन यहां भी तोपों सब कुछ नष्ट कर दिया । गढ़ी की दीवारें ध्वस्त हो गई। गोकुल सिंह और उनके चाचा उदय सिंह सहित वहाँ जितने लोग थे सभी बंदी बना लिये गये । सभी बंदियों को मथुरा लाया गया और औरंगजेब के सामने पेश किया गया ।
औरंगजेब ने सबको मतान्तरण कराने का आदेश दिया । लेकिन गोकुलसिंह और उनके चाचा किसी भी प्रकार तैयार नहीं हुये तब उन्हें जंजीरों में बाँधकर बाहर चबूतरे पर लाया गया । वह एक जनवरी 1670 का दिन था । इनके सामने वे सभी लोग जमा किये गये जो तिलपत के युद्ध में बंदी बनाए गए थे । इसमें सैनिकों के साथ स्त्री पुरुष और बच्चे भी थे । सबके सामने गोकुलसिंह और उनके चाचा उदय सिंह के शरीर में तलवारें चुभोई गईं। एक एक अंग काटा गया । यह क्रूर कृत्य इसलिये किया गया ताकि लोग डर कर मतान्तरण कर लें। गोकुलसिंह को क्रूरतम मौत देकर सैनिकों ने जीवित उदय सिंह की खाल खींची । इसके बाद अन्य बंदियों का भी इसी प्रकार कत्लेआम हुआ । केवल उन्हीं को जीवित छोड़ा गया जिन्होंने मतान्तरण स्वीकार कर लिया था ।
मुगल काल के इतिहास के विवरण में इस घटना को विद्रोह लिखा है । लेकिन राजस्थान के सम्मानित एवं पुरस्कृत कविवर श्री बलवीर सिंह ‘करुण’ ने इस विषय पर “समरवीर गोकुला” नाम से एक प्रबंध काव्य की रचना की है । इस ओजस्वी रचना ने गोकुलसिंह सिंह के उपेक्षित बलिदान को जीवंत कर दिया । यह काव्य लोक जीवन में बहुत ऊर्जा और आदर से गाया और सुना जाता है ।
बाद के दिनों में तिलहत युद्ध पर शोध भी हुये । इतिहास के शोध और प्रबंध काव्य दोनों में युद्ध, प्रताड़ना और बलिदान का वर्णन तो समान है लेकिन युद्ध में सैनिकों की संख्या और बलिदान के स्थान का अंतर है । इतिहासकार सर जदुनाथ और उपेन्द्रनाथ शर्मा का मानना है कि निर्णायक युद्ध 4 दिसम्बर 1669 से आरंभ हुआ और “गोकुला और उदयसिंह सहित सभी बंदियों को मथुरा से आगरा लाया गया था। उनका बलिदान आगरा कोतवाली के चबूतरे पर हुआ। इतिहासकारों के अनुसार जिन लोगों को मतान्तरण के बाद जीवित छोड़ा गया उनमें गोकुलसिंह परिवार के स्त्री बच्चे भी थे ।
एक अन्य इतिहासकार कानूनगो का विचार है कि “किसानों ने पहले लम्बे समय तक तक धीरतापूर्वक अपनी बात बादशाह तक पहुँचाई थी । कर माफी की शर्त मतान्तरण थी । जो किसानों को स्वीकार्य नहीं थी । गोकुलसिंह के नेतृत्व यह संघर्ष सैनिकों के साथ किसानों का भी था। यह भी माना जाता है कि युद्ध से पहले अनेक सैनिक अपने परिवार की महिलाओं को मार कर युद्ध में पहुँचे थे । तिलहत एक छोटी सी जागीर थी, सैनिकों की संख्या भी कम थी पर यह युद्ध भीषण था । इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि औरंगजेब को स्वयं तोपखाना लेकर आना पड़ा और तोपखाने के साथ युद्ध तीन दिन चला ।(एएमएपी)
हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज के एफपीओ की नैया पार लग गई। सोमवार को अबू धाबी स्थित इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी ने कहा था कि वह एक सहायक कंपनी के जरिए एफपीओ में 40 करोड़ डॉलर का निवेश करेगी। इसने समूह की कंपनियों में पहले ही लगभग 2 बिलियन डॉलर का निवेश किया है।ईटी के मुताबिक इसके लिए अडानी ने अबू धाबी, दोहा और रियाद के लिए कई उड़ानें भरीं थीं। उनके साथ सीएफओ सिंह और अडानी ग्रीन एनर्जी के कार्यकारी निदेशक, भतीजे सागर अडानी भी थे। रणनीतिक गठजोड़ के बीज पिछली गर्मियों में बोए गए थे, लेकिन यह वास्तव में इस सप्ताह फला-फूला, जब हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद अडानी के शेयर गिर गए।
पहले दो दिन ठंडा रिस्पॉन्स
पहले दो दिन एफपीओ को बहुत ही ठंडा रिस्पॉन्स मिला था। लेकिन, आखिरी दिन जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। एफपीओ को पूरा सब्सक्राइब किया गया है। आंकड़ों के मुताबिक, 20,000 करोड़ रुपये के एफपीओ को मंगलवार को बिक्री के आखिरी दिन गैर-खुदरा निवेशकों का जबरदस्त समर्थन मिला है। बीएसई के आंकड़ों के मुताबिक गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) ने उनके लिए रिजर्व 96.16 लाख शेयरों के मुकाबले तीन गुना से अधिक शेयरों के लिए बोलियां लगाईं। पात्र संस्थागत खरीदारों (QIB) के लिए आरक्षित 1.26 करोड़ शेयरों को लगभग पूरा सब्सक्राइब किया। हालांकि, रिटेल निवेशकों और कंपनी के कर्मचारियों की एफपीओ के प्रति उदासीनता देखने को मिली।
इन दिग्गजों ने पार लगाई नैया
अडानी की गिरती साख को बचाने में सबसे पहले आईएचसी आई। यह कंपनी संयुक्त अरब अमीरात के शाही परिवार से जुड़ी कंपनी है। राष्ट्रपति के भाई शेख ताहनून बिन जायेद अल नाहयान इसे चला रहे हैं। संकट के समय आईएचसी ही आगे आई और एक ही बार में 3200 करोड़ रुपये निवेश का ऐलान दिया। इसके लिए अडानी और उनकी टीम द्वारा IHC के चेयरमैन शेख तहनून बिन जायद अल-नाहयान और मुख्य कार्यकारी सैयद बसर शुएब को फोन किया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 3 साल पहले तक इस कंपनी में केवल 40 लोग काम कर रहे थे। IHC के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सैयद बसर शुएब ने कहा, “हम लंबी अवधि के दृष्टिकोण और अपने शेयरधारकों के लिए अतिरिक्त मूल्य से विकास की प्रबल संभावना देखते हैं। अडानी ग्रुप में हमारी रुचि की वजह अडानी एंटरप्राइजेज की आर्थिक सेहत को लेकर हमारा विश्वास है।” इसके बाद एईएल के शेयरों में दिन में 2.5% की तेजी देखी गई, हालांकि अभी भी पेशकश के लिए निर्धारित 3,112 रुपये के न्यूनतम मूल्य से कम है और 24 जनवरी को स्टॉक के बंद होने से लगभग 15% नीचे है। अब कतर, बहरीन और यूके के छोटे बिजनेस ग्रुप भी भी गैर-संस्थागत श्रेणी में स्टॉक का समर्थन करने के लिए आए। बता दें कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी अडानी की सबसे शुरुआती भागीदार थी – 2019 में उन्होंने निवेश किया था।
कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी अडानी की सबसे शुरुआती भागीदार थी। 2019 में उन्होंने 450 मिलियन डॉलर अडानी इलेक्ट्रिसिटी मुंबई लिमिटेड का निवेश किया, जिसे अनिल अंबानी से अधिग्रहित किया गया था। अडानी के सपोर्ट में दिल्ली के एक उद्योगपति, तीन गुजराती फार्मा अरबपति और मुंबई स्थित स्टील शामिल हैं । तीन स्वतंत्र स्रोतों के अनुसार, दिल्ली के उद्योगपति, जिन्होंने अक्षय ऊर्जा संयुक्त उद्यम में अपनी हिस्सेदारी पहले अडानी ग्रीन को बेची थी, उन्होंने 1,000-1,200 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है, जो सबसे बड़ा हिस्सा है। मंगलवार को अडानी ग्रुप के इस एफपीओ में भारत और दुबई स्थित कुछ फैमिली ऑफिसों से 9000 करोड़ रुपये का निवेश किया गया।(एएमएपी)
ऐतिहासिक और पौराणिक साक्ष्यों के परिप्रेक्ष्य में भगवान श्रीराम का महाकौशल प्रांत से गहरा संबंध रहा है। भू वैज्ञानिक दृष्टि से महाकौशल प्रांत सर्वाधिक प्राचीनतम गोंडवाना लैंड भू संहति का भू भाग है। भौगोलिक दृष्टि से समय-समय पर इसकी सीमाएं परिवर्तित होती रही हैं। कौशल प्रदेश का क्षेत्रफल बहुत विस्तृत था। यह उत्तरी कौशल और दक्षिणी कौशल में सुविस्तीर्ण था । इसमें वर्तमान मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा और महाराष्ट्र में विदर्भ क्षेत्र का एक भाग भी सम्मिलित था।कौशल की उत्तरी सीमा के दक्षिण में एक पवित्र क्षेत्र अमरकंटक था, जिसमें एक भाग मेकल था। वायु पुराण, मत्स्य पुराण में इसका उल्लेख है। वायु पुराण में मेकल को पंच कौशल में से एक के रुप में वर्णित किया गया है। जो यह स्पष्ट करता है कि किसी समय मेकल क्षेत्र कौशल के शासकों के अधीन था। त्रेता युग में महान इक्ष्वाकु के पुत्र दंडक का राज्य मध्य प्रदेश के दक्षिण के क्षेत्र में था, जो आगे चलकर दंडकारण्य के नाम से जाना गया।कालांतर में यह प्रदेश कौशल प्रदेश के अंतर्गत हो गया जिसे दक्षिण कौशल के नाम से जाना गया, यही प्रदेश अब महाकौशल प्रांत हैं वर्तमान में 21 जिले हैं परंतु पहले छत्तीसगढ़, बघेलखंड, बुंदेलखंड मध्य प्रांत और विदर्भ तक विस्तार था। वस्तुतः भगवान श्री राम की वरिष्ठ पुत्र लव को उत्तर कौशल और कुश को दक्षिण कौशल प्राप्त हुआ था। श्रीराम की माँ कौशल्या जन्म दक्षिण कौशल अंतर्गत रायपुर के चंदखुरी ग्राम में हुआ था उनकी माता का नाम अमृतप्रभा और पिता का नाम सुकौशल था। अतः दक्षिण कौशल श्रीराम का ननिहाल है।
गौरतलब है कि रामायण की रचना का सूत्रपात भी तमसा नदी के किनारे महर्षि वाल्मीकि ने किया था। रामायण का अरण्यकांड भगवान् श्रीराम के महाकौशल प्रांत में 12 वर्ष व्यतीत करने का साक्षी है। इस कालावधि उन्होंने समूचे महाकौशल प्रांत का भ्रमण किया, ऋषि – मुनियों से मिले तथा आसुरी शक्तियों मुक्त किया, जिसके चरण चिन्ह आज भी विद्यमान हैं।भगवान श्रीराम ने सर्वाधिक समय महाकोशल प्रांत में ही बिताया, लगभग साढ़े ग्यारह वर्ष चित्रकूट (सतना) में बिताया। यहीं श्री राम अत्रि ऋषि से मिले और रामवन में रुके।ओरछा, पन्ना, शहडोल, जबलपुर और बालाघाट तक पदचिन्ह मिलते हैं। रामायण और पुराणों के संदर्भ से प्रमाण मिलते हैं, कि सुतीक्ष्ण आश्रम से श्री राम जाबालि ऋषि से मिलने जबलपुर पधारे। उन्होंने शिवलिंग बनाकर नर्मदा के जल से जलाभिषेक किया। वह स्थान वर्तमान में गुप्तेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है, इसे रामेश्वर उप लिंग कहा जाता है।
यह उल्लेखनीय है कि तमसा (टौंस) नदी के किनारे महर्षि भारद्वाज और महर्षि वाल्मीकि आए थे। यहीं जब क्रौंच वध हुआ तो महर्षि वाल्मीकि शोकाकुल हो गए और उनके मुख से एक श्लोक उद्भूत हुआ कि “मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः । यत्क्रौंचमिथुनादेकमवधी: काममोहितम् ।। यही श्लोक रामायण की रचना का सूत्र बना और महर्षि वाल्मीकि आदि कवि के रुप में प्रतिष्ठित हुए।
श्री राम महर्षि जाबालि को मनाने जिलहरी घाट, जबलपुर स्थित आश्रम में आए थे। जबलपुर में गौरी घाट में शक्ति पूजा की तथा गुप्तेश्वर में उपलिंग रामेश्वरम की स्थापना कर वैष्णव और शैवों को समरसता का पाठ पढ़ाया और लंका से लौटते अपने पूर्वजों की भांति तर्पण भी किया था।शहपुरा के पास स्थित रामघाट और बालाघाट में स्थित रामपायली में भगवान् श्री राम के पद चिन्ह अंकित हैं।
उल्लेखनीय है कि अयोध्या के महान् राजा दशरथ ने सुचारु रुप से शासन संचालन के लिए विद्वान ऋषि मुनियों का एक मार्गदर्शक मंडल बनाया था जिसमें महर्षि वशिष्ठ के उपरांत महर्षि जाबालि का स्थान था। दुर्देव से प्रभु श्रीराम को वनवास मिला परंतु भरत को राजगद्दी स्वीकार न थी, अतः उन्होंने महर्षि जाबालि को श्रीराम को मनाने के लिए भेजा। महर्षि जाबालि ने नास्तिक न होते हुए भी नास्तिकों के मत का अवलम्बन करते हुए श्रीराम को अयोध्या लौटने तथा राज्य करने के लिए प्रेरित किया। अयोध्या काण्ड के 108 वें सर्ग के तीसरे, चौथे और सोलहवें श्लोक सहित कुल 18 श्लोक हैं जिसमें महर्षि जाबालि ने श्रीराम नास्तिक दर्शन के आलोक में अयोध्या लौटने की पुरजोर कोशिश की है परंतु श्री राम ने 109 वें सर्ग में महर्षि जाबालि के तत्कालीन नास्तिक मत का खंड करके आस्तिक मत की स्थापना की । ग्लानि से भरे महर्षि जाबालि ने श्री राम से कहा कि हे रघुनंदन! इस समय ऐसा अवसर आ गया था, जिससे धीरे-धीरे मैंने नास्तिकों की सी बातें कह डालीं। श्रीराम! मैंने जो यह बात कहीं, इसमें मेरा उद्देश्य यही था कि किसी तरह आपको सहमत करके अयोध्या लौटने को तैयार कर लूँ। तदुपरांत महर्षि जाबालि पश्चाताप के लिए श्री राम को बिना बताए तप के लिए अपने आश्रम जबलपुर चले आए तब रघुनंदन भी उनको मनाने के लिए निकल पड़े।
इस दौरान भगवान राम, सीता और लक्ष्मण महर्षि सुतीक्ष्ण के आश्रम पहुंचे थे। यह आश्रम वर्तमान में सतना के जैतवारा स्टेशन के पास पूर्व दिशा में 4-5 किमी दूर है। पश्चाताप के लिए महर्षि जाबालि जिलहरी घाट स्थित अपने आश्रम में तपस्या में लीन हो गए। भगवान् श्रीराम महर्षि जाबालि को मनाने चित्रकूट से नर्मदा तट जबलपुर पहुंच गए। उस दौरान महर्षि जाबालि ध्यान में, तब भगवान श्रीराम ने महर्षि जाबालि का ध्यान भंग नहीं किया।
भगवान् श्रीराम ने नर्मदा तट पर एक माह का गुप्तवास भी किया था। इस दौरान प्रभु श्रीराम ने बालू से शिवलिंग बनाकर अपने आराध्य शिव का पूजन किया था। जिसे गुप्तेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। इसे रामेश्वरम का उपलिंग भी कहा जाता है।शिव पुराण स्कंद पुराण, नर्मदा पुराण, मत्स्य पुराण, और वाल्मीकि रामायण में इसके प्रमाण मिलते हैं।
हाकौशल ही वह प्रदेश है जहां भांजों के चरण स्पर्श करने की परंपरा है। यहाँ भांजों को मामा के पैर छूने से मना किया जाता है। इसका कारण यह है कि तत्समय महाकौशल प्रदेश में छत्तीसगढ़ सम्मिलित था और प्रभु श्रीराम का यह ननिहाल है इसलिए भगवान राम वनवास के दौरान यहाँ पहुंचे थे तो लोगों ने चरण वंदन कर प्रभु का स्वागत किया था।
गुप्तेश्वर रामेश्वरम उपलिंग, पीठाधीश्वर स्वामी डॉ. मुकुंददास महाराज पुराणों के आधार पर बताते हैं कि वनवास के समय भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण महर्षि जाबालि को ढूंढते हुए नर्मदा के उत्तर तट पहुंचे थे। यहाँ वे महर्षि को प्रसन्न करने और आशीर्वाद लेने के लिए आए थे। उस समय भगवान् श्रीराम ने अपने प्रिय आराध्य शिव की पूजा हेतु गुप्तेश्वर में शिवलिंग की स्थापना की थी।
यह कितना परम सौभाग्य है कि हिंदू संवत्सर पिंगल, गज केसरी योग, नवपंचम राजयोग एवं बुधादित्य योग के साथ चल रहा है, इन अद्भुत संयोगों के साथ अयोध्या जी में घट घट वासी प्रभु रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा, पौष शुक्ल पक्ष द्वादशी विक्रम संवत 2080 तदनुसार 22 जनवरी 2024 को होगी। तब प्रभु श्रीराम के लिए भोग उनके ननिहाल छत्तीसगढ़ से भेजे गए सुगंधित चावल से तैयार होगा।
बर्गर-पिज्जा, चाउमीन समेत अन्य जंक फूड की लत की वजह से युवा आंत के कैंसर की चपेट में आ रहे हैं। अमूमन 50-60 साल की उम्र में होने वाला आंत का कैंसर अब 30 की उम्र के युवाओं को चपेट में ले रहा है। यह खुलासा दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (DSCI) के हालिया अध्ययन में हुआ है। इंस्टीट्यूट ने अध्ययन 2018 व 2019 के 215 आंत के कैंसर के मरीजों पर किया था। तुलनात्मक रूप से पुरुषों में ज्यादा होने वाले इस तरह के कैंसर के करीब 60 फीसदी मरीज 50 साल से कम उम्र के थे। इनमें से अधिकतर की उम्र 30-40 साल के बीच की है।अध्ययन के मुताबिक, अमूमन देखा गया कि फाइबर युक्त आहार की कमी व अन्य कारणों से कम उम्र के युवाओं में आंत के कैंसर देखने को मिल रहा है। यह सामान्य बात नहीं है। पश्चिमी देशों में तो पुरुषों में औसत उम्र 68 और महिलाओं में 72 की उम्र में आंत का कैंसर पाया जाता है, जबकि अध्ययन में यह 30 की उम्र में भी मिल रहा है।
दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के ऑन्कोलॉजी की विभाग प्रमुख डॉ. प्रज्ञा शुक्ला बताती हैं कि कम उम्र में यह कैंसर होने पर इलाज प्रभावी नहीं होता। मरीज की ठीक होने की दर बेहद खराब रहती है। इस कैंसर के कारण मरीजों की मृत्यु दर भी अधिक होती है।
गाइडलाइन में बदलाव करें सरकार
डॉ. शुक्ला ने कहा कि कहा कि स्क्रीनिंग का उद्देश्य कैंसर की जल्द पहचान कर इलाज करना होता है, लेकिन देश में ज्यादा उम्र में बड़ी आंत के कैंसर की स्क्रीनिंग होती है। यदि कम उम्र के लोगों में बड़ी आंत के कैंसर का मिल भी जाता है तो इलाज का असर काफी खराब मिला है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह स्क्रीनिंग की गाइडलाइन में बदलाव करें। हमारा मानना है कि सरकार को 40 की उम्र से ही इसकी स्क्रीनिंग शुरू करनी चाहिए।
युवाओं के कैंसर में होता है म्यूटेशन
डॉ. शुक्ला ने कहा कि युवाओं में आंत का कैंसर काफी आक्रामक होता है। इन में पाए जाने वाले कैंसर में म्यूटेशन होते हैं। ऐसे में हमें देखना होगा कि युवाओं में होने वाले म्यूटेशन कौन सा है। इन पर बड़े स्तर पर अध्ययन करने की जरूरत है। जो म्यूटेशन पाया जाएगा, उस का लक्षित उपचार करना होगा। इसके पकड़ के लिए मॉल्युकुलर टेस्टिंग ज्यादा करनी होगी।
किन में होता है ज्यादा
तले-भुने भोजन का सेवन
पिज्जा, बर्गर, जंक फूड
तंबाकू-शराब का सेवन
बचाव के लिए क्या खाएं
फाइबरयुक्त आहार
मोटा अनाज
चोकर युक्त आटा
आसानी से पचने होने वाले खाद्य उत्पाद
क्या हैं लक्षण
वजन कम होना
बिना कुछ किए छह माह में 10 फीसदी से ज्यादा वजन कम होना
लक्ष्मण घाट से लेकर गुप्तार घाट होते हुए निर्मली कुंड तक 10.2 किमी में लगेगी 470 सोलर स्ट्रीट लाइट्स
प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या अब सूर्य की ही आभा से नव्य-भव्य स्वरूप को प्राप्त करने के साथ ही वैश्विक कीर्तिमान स्थापित करने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रही है। अयोध्या को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुसार जिस सोलर सिटी के मॉडल के तौर पर प्रोजेक्ट किया जा रहा है, उसका जल्द ही गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी उल्लेख होने वाला है।
योगी के दिशा-निर्देशन में बनी विशिष्ट कार्ययोजना को क्रियान्वित करते हुए उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपीनेडा) जल्द ही ‘दुनिया की सबसे बड़ी सोलर पावर्ड स्ट्रीट लाइट्स लाइन’ परियोजना को पूर्ण करके वैश्विक कीर्तिमान स्थापित करने की दिशा में तेजी से प्रयास कर रहा है। इस परियोजना के तहत 10.15 किमी के स्ट्रेच में 470 सोलर पावर्ड स्ट्रीट लाइट्स लगाकर यूपीनेडा अयोध्या की गौरवगाथा में एक नया अध्याय जोड़ने जा रही है। फिलहाल, करीब 70 प्रतिशत कार्यों को पूर्ण कर लिया गया है और 22 जनवरी से पहले ही निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करके वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम कर लिया जाएगा।
जल्द ही गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में फिर से अयोध्या का नाम होगा दर्ज
अयोध्या का नाम यूं तो दीपोत्सव को लेकर पहले ही गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है, मगर अब अयोध्या में सौर ऊर्जा के जरिए भी वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की तैयारी योगी सरकार ने कर ली है। इस संबंध में यूपीनेडा के परियोजना अधिकारी (अयोध्या) प्रवीण नाथ पाण्डेय ने बताया कि 22 जनवरी के पहले ही अयोध्या में लक्ष्मण घाट से लेकर गुप्तार घाट होते हुए निर्मली कुंड तक 10.2 किमी के स्ट्रेच में 470 सोलर स्ट्रीट लाइट्स लगाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज किया जाएगा। 70 प्रतिशत कार्य पूर्ण कर लिया गया है और शेष 30 प्रतिशत कार्य भी जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत लक्ष्मण घाट से गुप्तार घाट तक 310 सोलर लाइट्स को इम्पैनल्ड करके रोलआउट कर दिया गया है। जबकि गुप्तारघाट से लेकर निर्मली कुंड तक 1.85 किमी के स्ट्रेच में 160 सोलर पावर्ड स्ट्रीट लाइटों को लगाने का कार्य जारी है। यह सभी सोलर पावर्ड स्ट्रीट लाइटें एलईडी बेस्ड हैं जो कि 4.4 वॉट पावर पर कार्य करती हैं तथा स्मार्ट टेक्नोलॉजी युक्त हैं। इनके इंस्टॉलेशन के जरिए लक्ष्मण घाट से लेकर निर्मली कुंड तक 10.2 किमी का स्ट्रेच दूधिया रोशनी से जगमगा उठेगा।
सऊदी अरब के मलहम का टूटेगा रिकॉर्ड
योगी सरकार द्वारा सौर ऊर्जा चालित परियोजना के जरिए जिस विश्व रिकॉर्ड को तोड़ने की प्रक्रिया के तहत कार्य जारी है वह फिलहाल सऊदी अरब के मलहम के नाम दर्ज है। यहां वर्ष 2021 में ‘लॉन्गेस्ट लाइन ऑफ द सोलर पावर्ड स्ट्रीट लाइट्स’ के तौर पर गिनीज बुक में रिकॉर्ड कायम किया गया था। मलहम में 9.7 किमी स्ट्रेच में 468 सोलर पावर्ड लाइटें लगाकर वैश्विक कीर्तिमान स्थापित किया गया था, जबकि अब योगी सरकार के विजन अनुसार अयोध्या में 10.2 किमी स्ट्रेच में 470 सोलर पावर्ड लाइटें लगाकर इस रिकॉर्ड को ध्वस्त किया जाएगा।
नया रिकॉर्ड बनाने पर फोकस
वर्ष 2023 में दीपावली के वक्त सरयू घाटों पर दीपोत्सव में अवध विश्वविद्यालय के 25000 वॉलेंटियरों ने मिलकर 22.23 लाख दीपक जलाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह बनाई थी। ऐसे में, 22 जनवरी को जब प्रभु रामलला का श्रीविग्रह भव्य रामजन्मभूमि मंदिर में सुशोभित होगा तो एक बार फिर सूर्यवंश की गौरवगाथा को नया प्रतिमान देते हुए सोलर पावर्ड स्ट्रीट्स लाइट्स की सबसे लंबी श्रृंखला को अयोध्या में संचालित करके इस उपलब्धि को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अंकित किया जाएगा। इस विषय में स्थानीय प्रशासन व यूपीनेडा के अधिकारियों व गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के पदाधिकारियों के बीच भी संवाद की प्रक्रिया निरंतर जारी है।(एएमएपी)