वेंकट रमन का विज्ञान के क्षेत्र में रहा महान योगदान

(28 फरवरी पर विशेष)

देश-दुनिया के इतिहास में 28 फरवरी की तारीख तमाम अहम वजह से दर्ज है। इस तारीख ने विज्ञान को ‘रमन प्रभाव’ के रूप में बड़ा उपहार दिया है। 28 फरवरी को देश में इस उपलब्धि के लिए राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है। इस साल विज्ञान दिवस की थीम है-‘सतत भविष्य के लिए विज्ञान।’ यह दिवस मशहूर भौतिक विज्ञानी चंद्रशेखर वेंकट रमन को समर्पित है। उन्होंने 28 फरवरी,1928 को ‘रमन प्रभाव’ की खोज की थी। उन्हें इस महत्वपूर्ण खोज के लिए साल 1930 में नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। उनकी यह खोज आज भी दुनिया भर की लैब्स में इस्तेमाल की जाती है। राष्ट्रीय विज्ञान और तकनीकी संचार परिषद ने साल 1986 में भारत सरकार से 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस घोषित करने का आग्रह किया था। सरकार से अनुमति मिलने के बाद 1987 में पहली बार राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया गया।

इसे कहते हैं रमन प्रभाव

रमन प्रभाव बताता है कि जब प्रकाश किसी पारदर्शी पदार्थ से गुजरता है तो उस दौरान प्रकाश की तरंग दैर्ध्य (वेवलेंथ) में बदलाव दिखता है। यानी जब प्रकाश की एक तरंग एक द्रव्य से निकलती है तो इस प्रकाश तरंग का कुछ भाग एक ऐसी दिशा में फैल जाता है जो कि आने वाली प्रकाश तरंग की दिशा से अलग है।

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ऐसे हुई रमन प्रभाव की खोज

सीवी रमन साल 1921 में जहाज से ब्रिटेन जा रहे थे। जहाज की डेक से उन्होंने पानी के सुंदर नीले रंग को देखा। इसके बाद उनके मन में ये सवाल उठा कि आसमान और पानी का रंग नीला क्यों होता है। उसी साल वे भारत वापस आने लगे तो अपने साथ कुछ उपकरण भी लाए। रमन ने उपकरणों के जरिए समुद्र और आकाश पर रिसर्च की। उन्होंने पाया कि समुद्र भी सूर्य के प्रकाश को विभाजित करता है, जिससे समुद्र के पानी का रंग नीला दिखाई देता है। अपनी लैब में वापस आकर रमन और उनके छात्रों ने प्रकाश के बिखरने और कई रंगों में बंटने की प्रकृति पर शोध किया। उन्होंने ठोस, द्रव्य और गैस में प्रकाश के विभाजन पर शोध जारी रखी। इस शोध के परिणाम को ही रमन प्रभाव कहते हैं।  (एएमएपी)

देवभूमि उत्तराखंड को इस्लामिक राज्य बनाने का चल रहा षड्यंत्र : यतीन्द्रानंद

श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े के वरिष्ठ महामण्डलेश्वर स्वामी यतीन्द्रानंद गिरि महाराज ने देवभूमि में सरकारी जमीनों पर बन रही अवैध मजारों पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे देवभूमि की गरिमा के विरूद्ध बताया। उन्होंने कहा कि मीडिया में यह दिखाया जा रहा है कि किस प्रकार हजारों की संख्या में अवैध मजार बना दी गई हैं। सभी मजारें वन, सिंचाई, रेलवे, पीडब्ल्यूडी, ग्राम सभा, नगर पंचायत की भूमि पर बन चुकी हैं।स्वामी यतीन्द्रानंद गिरि महाराज ने कहाकि उत्तराखंड में दो प्रकार के जिहाद चल रहे हैं, एक मजार जिहाद तथा दूसरा भूमि जिहाद। उत्तराखंड की भूमि पर कब्जा कर बड़ी संख्या में रोहिंग्या, बांग्लादेशी मुसलमान और उत्तराखंड से लगते आस-पास के जनपदों के मुसलमान षड्यंत्र के तहत उत्तराखंड राज्य में प्रवेश कर रहे हैं।

कहाकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस संबंध में हमारी वार्ता हुई है। उन्होंने इसका संज्ञान लिया है और हजारों मजारों को चिन्हित कराया है, जो अवैध हैं। उनको तुड़वाया भी जा रहा है। अभी भी हजारों की संख्या में गांव, देहात, सड़कों के किनारे रेलवे व नदियों के किनारे न जाने कहां-कहां अवैध मजारे बनी हैं, इन सभी को हटाया जाना जरूरी है। उन्होंने कहाकि उत्तराखंड देव भूमि है। यहां बद्रीनाथ, केदारनाथ जैसे दिव्य धाम हैं। गंगा-यमुना जैसी पवित्र नदी हैं। हिमालय जैसा पवित्र पर्वत है, जहां तपस्वी साधकों ने योगियों ने धर्म और अध्यात्म की उच्चता को पाया है।

उन्होंने उत्तराखंड राज्य को सनातन हिंदू संस्कृति के लिए संरक्षित राज्य घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहाकि यहां सनातन हिंदू संस्कृति के अतिरिक्त अन्य किसी भी प्रकार की गतिविधियों को प्रतिबंधित किया जाए। ऐसा कानून प्रदेश सरकार में आना चाहिए, तभी उत्तराखंड सुरक्षित रह सकेगा। कहाकि जिन्होंने भी अवैध रूप से मजार बनाई है या अवैध रूप से वह उत्तराखंड में रह रहे हैं, उन सब पर कानून के तहत मुकदमा दर्ज कर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। स्वामी यतीन्द्रानंद गिरि महाराज ने कहाकि जिन विभागों की भूमि पर अवैध मजार बनी है, उनके अधिकारियों पर भी कार्यवाही होनी चाहिए।(एएमएपी)

शेयर बाजार ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, उच्चतम स्तर पर सेंसेक्स और निफ्टी

चालू वित्त वर्ष 2023-24 के आखिरी महीने यानी मार्च के पहले दिन शुक्रवार को सेंसेक्स और निफ्टी ने नया रिकॉर्ड बनाया है। अक्टूबर-दिसंबर तीसरी तिमाही के प्रभावी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) आंकड़ों और विदेशी निवेशकों का फिर रुझान बढ़ने से घरेलू शेयर बाजारों के दोनों प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी अपने अब तक के रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर पहुंच गए।

शेयर बाजार में दोपहर के कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी ने नया रिकॉर्ड बनाया है। सेंसेक्स 1,186.59 अंकों यानी 1.64 फीसदी की उछाल के साथ 73,686.88 के स्तर पर ट्रेंड कर रहा है, जो सेंसेक्स का अबतक का सबसे ऊंचा स्तर है। निफ्टी भी 344.10 अंक यानी 1.57 फीसदी की बढ़त के साथ 22,326.90 अंक के अपने नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले गुरुवार को शेयर बाजार हरे निशान पर बंद हुआ। बीएसई का सेंसेक्स 195.41 अंक यानी 0.27 फीसदी की उछाल के साथ 72,500.30 के स्तर पर बंद हुआ। एनएसई का निफ्टी भी 31.65 अंक यानी 0.14 फीसदी की बढ़त के साथ 21,982.80 के स्तर पर बंद हुआ था।

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बीएसई सेंसेक्स के 30 में से 26 शेयरों में उछाल देखा जा रहा है और चार शेयरों में गिरावट बनी हुई है। सेंसेक्स के 26 शेयरों में टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, एलएंडटी, आईसीआईसीआई बैंक, टाटा मोटर्स और टाइटन के शेयरों में उछाल देखा जा रहा है। जेएसडब्ल्यू स्टील का मार्केट कैप 2 लाख करोड़ रुपये के पार हो गया है। बैंक निफ्टी हालांकि आज फिर 47 हजार के पार निकला है लेकिन 48,636.45 इसका ऑलटाइम हाई रिकॉर्ड लेवल है जिसे पार करने की उम्मीद बन रही है।(एएमएपी)

अमेरिकी कमांडर का दावा, चीन से भारत और अमेरिका दोनों को खतरा

अमेरिका के शीर्ष कमांडर ने दावा किया है कि भारत और अमेरिका, दोनों देशों को चीन से खतरा है। यूएस इंडो पैसिफिक कमांड के कमांडर एडमिरल जॉन क्रिस्टोफर एक्विलिनो ने भारत और अमेरिकी सुरक्षा चुनौतियों को एक जैसा बताते हुए कहा है कि अमेरिका की जो बाइडन सरकार न सिर्फ रक्षा क्षेत्र में भारत का सहयोग कर रही है बल्कि भारत में उसके खुद के उद्योग क्षेत्र को विकसित करने में मदद कर रही है।अमेरिका की आर्म्ड सर्विस कमेटी के सदस्यों के साथ संवाद के दौरान भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने सवाल उठाया था कि औपनिवेशिक काल के बाद भारत और चीन के रिश्ते अच्छे थे और दोनों देश एशिया की आवाज बनकर उभर रहे थे लेकिन उसके बाद रिश्ते खराब हो गए। अब चीन एशिया के अपने अन्य सहयोगी देशों के साथ जूनियर की तरह व्यवहार कर रहा है।

इस पर यूएस इंडो पैसिफिक कमांड के कमांडर एडमिरल जॉन क्रिस्टोफर एक्विलिनो ने कहा कि भारत के साथ अपनी साझेदारी की अहमियत को अमेरिका समझता है और समय के साथ बहुत कुछ किया जा रहा है। भारत और अमेरिका, दोनों एक जैसी सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। दोनों देश साथ में काम करने की इच्छा भी रखते हैं क्योंकि भारत और अमेरिका ही दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं। दोनों देशों के मूल्य भी समान हैं और भारतीय व अमेरिकी लोगों के बीच आपसी संबंध कई सालों से हैं। उन्होंने दो वर्ष में पांच बार भारत जाने की जानकारी भी दी।

एडमिरल एक्विलिनो ने क्वाड का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि क्वाड कोई सुरक्षा संगठन नहीं है। यह एक कूटनीतिक और आर्थिक संगठन है। उन्होंने कहा कि भारत, अमेरिका का अहम सहयोगी है और दोनों देश अक्सर संयुक्त रूप से युद्धाभ्यास भी करते रहते हैं, जिनमें मालाबार युद्धाभ्यास शामिल है। अमेरिका भारत को सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग कर रहा है और भारत में रक्षा उत्पादन में भी सहयोग कर रहा है। उन्होंने बताया कि सी-130 हेलीकॉप्टर के तमाम महत्वपूर्ण हिस्सों का निर्माण भारत में हो रहा है।(एएमएपी)

फास्टैग टॉप-अप करने वाली बैंकों की सूची से पेटीएम बाहर

एनएचएआई ने फास्टैग जारी करने वाले 39 बैंकों की सूची जारी की

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की ओर से पेटीएम पेमेंट बैंक लिमिटेड (पीपीबीएल) पर 15 मार्च के बाद टॉप-अप पर रोक लगाने के बाद नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने फास्टैग जारी करने वाले बैंकों की सूची को रिवाइज की है। एनएचएआई ने फास्टैग टॉप-अप करने वाली बैंकों की सूची से पेटीएम को बाहर कर दिया है।एनएचएआई के फास्टैग जारी करने वाले बैंक और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज की ताजा सूची में पेटीएम पेमेंट बैंक लिमिटेड का नाम शामिल नहीं है। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया की रिवाइज लिस्ट में केवल 39 बैंकों के नाम शामिल हैं, जिनसे फास्टैग लिया जा सकता है। इसका मतलब है कि पीपीबीएल के ग्राहक अब पेटीएम से फास्टैग नहीं ले पाएंगे। इससे पहले एनएचएआई ने फरवरी में 32 बैंकों की सूची जारी की थी।

नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया की रिवाइज लिस्ट में कुल 39 बैंक और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज (एनबीएफसी) शामिल हैं, जिन्हें फास्टैग जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है। नई सूची में एयरटेल पेमेंट्स बैंक, एक्सिस बैंक लिमिटेड, बंधन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, इंडसइंड बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, यस बैंक शामिल हैं।

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दरअसल, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने 15 मार्च के बाद पेटीएम पेमेंट्स बैंक खाते या वॉलेट को नई जमा को स्वीकार करने या क्रेडिट लेन-देन की अनुमति देने से प्रतिबंधित कर दिया है। हालांकि, 15 मार्च के बाद पेटीएम में मौजूदा बैलेंस से पैसा निकालने पर कोई प्रतिबंध लागू नहीं है। पेटीएम पेमेंट्स बैंक की मार्केट में करीब 30 फीसदी हिस्सेदारी है।(एएमएपी)

गहलोत की चुप्पी सचिन पायलट को पड़ सकती है भारी

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने धुर विरोधी सचिन पायलट के सवालों पर चुप्पी साधे हुए है। जबकि सचिन पायलट लगातार हमलावर है। गहलोत ने सियासी नरेटिव पर कहा है- मीडिया आपस में हम लोगों को किसी से नहीं लड़वाए। हम चुनाव जीतकर आएंगे। जनता ने पूरी तरह से मूड बना लिया है। इस बार सरकार रिपीट होने जा रही है।

 

राजधानी जयपुर में मीडिया से बात करते हुए सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि महंगाई राहत शिविरों से जनता को फायदा मिलेगा। राजनीतिक विश्लेषक गहलोत के दिल्ली दौरे के बाद बयान को सियासी टर्न के तौर पर देख रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गहलोत चाहते हैं कि पायलट की बयानबाजी उन्हीं पर भारी पड़ जाए। पायलट पार्टी आलाकमान की नजर में खलनायक बन जाए। इसलिए गहलोत सधी हुई रणनीति के तहत पायलट के सवालों का जवाब देने से बच रहे हैं। जबकि सचिन पायलट लगातार उकसावे वाली बयानबाजी कर रहे हैं। पायलट निर्णायक लड़ाई के दौर में है। जबकि गहलोत बचाव मुद्रा में दिखाई दे रहे है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सीएम अशोक गहलोत सचिन पायलट को कोई जवाब नहीं देकर पार्टी हाईकमान और जनता के बीच यह दिखाना चाहते हैं कि उनका ध्यान केवल गवर्नेंस और चुनाव की तैयारियों पर है। इसीलिए उन्होंने पायलट के अनशन के बाद से जब भी कोई सवाल पूछा गया तो जवाब आया- महंगाई राहत। गहलोत सियासी रणनीति के तहत पायलट मुद्दे पर नहीं बोलना चाहते। अब आज के बयान का टोन इस तरह का है जैसे गहलोत विवाद की जगह एकजुटता का मैसेज देना चाह रहे हों।

बता दें राजस्थान की राजनीति में सीएम गहलोत ने पायलट के बयान के बाद पलटवार करते रहे है। लेकिन इस बार गहलोत ने पलटवार नहीं किया है। राजनीति विश्लेषक गहलोत की चुप्पी के अलग-अलग सियासी मायने निकाल रहे हैं। दरअसल, गहलोत चाहते है कि पायलट बयानबाजी करें ताकि कांग्रेस आलाकमान उन पर कार्रवाई करने के लिए मजबूर हो जाए।

पायलट बोल रहे हैं गहलोत पर लगातार हमला

उल्लेखनीय है कि सचिन पायलट ने वसुंधरा सरकार के समय हुए करप्शन पर कार्रवाई नहीं करने पर सीएम अशोक गहलोत को निशाने पर लिया था। सचिन पायलट ने कहा कि अनशन करने के बावजूद भी उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों का समाधान नहीं हुआ है। बता दें इससे पहले सचिन पायलट ने राजधानी जयपुर में अनशन किया था। हालांकि, पार्टी आलाकमान ने पायलट के अनशन को पार्टी विरोधी गतिविधि माना।

प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि पायलट का अनशन पार्टी विरोधी है। पायलट के अनशन के लेकर दिल्ली में कांग्रेस नेताओं के बीच अहम बैठक भी हुई। लेकिन राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद पायलट के खिलाफ कार्रवाई को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है। गहलोत कैंप के विधायकों का कहना है कि सचिन पायलट चुनाव से पहले पुराने मुद्दे उठाकर दबाव बनाने की रणनीति बना रहे हैं। पार्टी आलाकमान के संज्ञान में सबकुछ है। पीपीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा का कहन है कि सचिन पायलट के का मामला प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, केसी वेणुगोपाल और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के संज्ञान में है। पार्टी आलाकमान को ही निर्णय लेना है। मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता हूं।(एएमएपी)

अमेरिका में शुरू हुई ट्रांज़ीशन की प्रक्रिया 

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प्रमोद जोशी ।

हफ़्तों तक चली खींचतान के बाद अमेरिका की जनरल सर्विस एडमिनिस्ट्रेशन (जीएसए) के सामने यह सुनिश्चित हो गया है कि प्रेसीडेंट इलेक्ट जो बिडेन को राष्ट्रपति चुनावों में जीत मिल गई है। दूसरी ओर, मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी नए प्रशासन के लिए ट्रांज़ीशन प्रक्रिया शुरू करने की इजाज़त दे दी है। लिहाज़ा अमेरिका में बिडेन प्रशासन के लिए ट्रांज़ीशन प्रक्रिया अब शुरू हो गई है।


 

अमेरिका में राष्ट्रपति पद पर बैठने की तैयारी काफ़ी जटिल और बेहद महत्वपूर्ण है। राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के चुनाव जीतने और शपथ ग्रहण समारोह के बीच के समय को ट्रांज़ीशन कहा जाता है। यह ट्रांज़ीशन चुने गए राष्ट्रपति की नॉन-प्रॉफिट ट्रांज़ीशन टीम करती है। यह टीम कैंपेन टीम से अलग होती है और इसका अपना स्टाफ और बजट होता है।

जवाहरलाल नेहरू (जेएनयू) यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ़ इंटरनेशनल स्टडीज़ में प्रोफ़ेसर केपी विजयलक्ष्मी बताती हैं, “अमेरिका में सभी राज्यों को 24 दिसंबर तक अपने यहां के चुनाव के नतीजों को सर्टिफ़ाई करना ज़रूरी है। 20 जनवरी को इनॉगरेशन डे है।”

अब होगा क्या?

‘बीबीसी’ की एक रिपोर्ट में उन परिस्थितियों का जिक्र है, जो अब सामने आ रही हैं। शुरू में लगता था कि डोनाल्ड ट्रंप अड़चनें पैदा करेंगे, पर अब लग रहा है कि वे व्यवस्था में रुकावट नहीं डालेंगे, पर अपने हितों की रक्षा करने के लिए अंतिम समय तक प्रयास करेंगे। अमेरिका के राज्यों में चुनाव से जुड़े अलग-अलग नियम हैं, इस वजह से इस प्रक्रिया में देरी लग रही है। बहरहाल राज्यों की चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की समय-सीमा 8 दिसंबर है। इसके पहले दुबारा मतगणना हो सकती है। इसके लिए राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी माँग कर सकते हैं और कई राज्यों में जीत का अंतर कम होने पर यह प्रक्रिया अपने आप शुरू हो जाती है।

अमेरिका का एक संघीय कानून (3 U.S. Code § 5)  है जिसे “safe harbor provision” कहा जाता है। इसके अनुसार राज्य को उन सारे विवादों को उस तारीख के छह दिन पहले निपटा लेना चाहिए, जिस दिन मतदाता मंडल राष्ट्रपति का चुनाव करेगा। इस साल 14 दिसंबर को चुनाव होना है, इसलिए 8 दिसंबर विवाद निपटाने की अंतिम तिथि है। अलबत्ता सन 2000 में यह मामला 8 दिसंबर के भी आगे चला गया था। उस साल जॉर्ज बुश बनाम अल गोर मुकाबले में कानूनी प्रक्रिया चलती रही और 12 दिसंबर को देश के सुप्रीम कोर्ट ने कहा फ्लोरिडा में दुबारा मतगणना को रोका। इसके बाद 13 को अल गोर ने बुश को बधाई दी, तब जाकर मतदाता मंडल की बैठक का रास्ता खुला।

और 14 दिसंबर को क्या होगा?

अभी चुनाव हुआ है, राष्ट्रपति को चुनने वालों का। अब 14 को ये मतदाता राष्ट्रपति को चुनेंगे। देश के सभी 50 राज्यों और डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया में अब 14 को राष्ट्रपति का चुनाव होगा। इन बैठकों में एक और विवादास्पद बात हो सकती है। जो मतदाता जिसे चुनने के लिए चुना गया है, उसके बजाय दूसरे को वोट दे दे तो क्या होगा? वह ऐसा कर सकता है, केवल उसके नाम पर ‘फेथलैस इलेक्टर’ का धब्बा लगेगा। कुछ राज्य फेथलैस को वोट को स्वीकार करते हैं और कुछ नहीं करते। इस साल जुलाई में संघीय सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यों के कानून वैध हैं।

इस चुनाव के बाद राज्यों की जिम्मेदारी है कि वे दिसंबर के चौथे बुधवार तक उपराष्ट्रपति को दे दें, जो सीनेट के सभापति भी होते हैं। इस साल वह तारीख 23 दिसंबर है। बहरहाल जब सारे परिणाम आ जाएं, तब संसद का एक संयुक्त सत्र होता है, जिसमें इन वोटों की फिर गिनती होती है और उसके बाद राष्ट्रपति चुनाव के विजेता की घोषणा होती है। 6 जनवरी, 2021 को दिन में एक बजे यह घोषणा होगी।

हाँ राज्यों से आए चुनाव परिणामों को संसद के दोनों सदनों का कोई सदस्य भी चुनौती दे सकता है। ऐसा होने पर हाउस एक घंटे के लिए स्थगित होता है, ताकि विचार किया जाए कि क्या किया जाए। जरूरी हुआ तो उस वोट को अलग किया जा सकता है। यानी कि चुनाव परिणामों में देरी करने के तमाम रास्ते वहाँ उपलब्ध हैं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह आलेख उनके ब्लॉग ‘जिज्ञासा’ से लिया गया है) 


फ्रांस विरोधी प्रतिक्रियाओं में मुस्लिम देशों की दरार

भारतीय नौसेना ने छुड़ाया अपहृत जहाज, 35 समुद्री डाकुओं ने किया आत्मसमर्पण

चालक दल के 17 सदस्यों को सकुशल बचाया

समुद्री डाकुओं के खिलाफ भारतीय नौसेना को एकबार फिर बड़ी कामयाबी मिली है। भारतीय युद्धक जहाज आईएनएस कोलकाता, अरब सागर में एक अपहृत जहाज में सवार सभी 35 समुद्री डाकुओं को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर कर दिया। भारतीय नौसेना का यह अभियान तकरीबन 40 घंटे चला।भारतीय नौसेना की तरफ से सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर इससे ऑपरेशन से संबंधित जानकारी साझा की गई है। जिसमें बताया गया है कि आईएनएस कोलकाता ने भारतीय तट से करीब 2600 किमी दूर समुद्री लुटेरों के जहाज रुएन को घेरा था। अभियान में आईएनएस सुभद्रा और समुद्री गश्ती विमान के साथ सी17 एयरक्रॉफ्ट से भारतीय नौसेना के मार्कोस कमांडो को इस जहाज पर उतारा गया। इस साझा प्रयास से समुद्री डाकुओं के जहाज को रोकने में कामयाबी मिली। लुटेरों को तुरंत सरेंडर करने और बंधकों को छोड़ने के लिए कहा गया। 40 घंटे चले ऑपरेशन में अपहृत जहाज एमवी रुएन से चालक दल के 17 सदस्यों को सकुशल बचा लिया गया।

सभी समुद्री डाकू सोमालिया के रहने वाले हैं और समुद्र में अपहरण को अंजाम देने के लिए 14 दिसंबर को इन समुद्री लुटेरों ने एमवी रुएन जहाज का अपहरण कर लिया था। भारतीय नौसेना के युद्धपोत ने 15 मार्च को इसका पीछा किया और इस दौरान अपहृत जहाज से गोलीबारी की गई। भारतीय युद्धपोत ने भी अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक जवाबी कार्रवाई की।

चारधाम यात्रा को प्रदूषण मुक्त बनाने की तैयारी, इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर

इससे पहले भी भारतीय नौसेना ने समुद्री सुरक्षा के मामले में लगातार अपनी बेहतरीन क्षमता का प्रदर्शन करते हुए कई कामयाबी हासिल कर चुकी है। इस महीने की शुरुआत में सोमालिया के पूर्वी तट पर 11 ईरानी और 8 पाकिस्तानी नागरिकों के चालक दल वाले जहाज पर डकैती के प्रयास को विफल कर दिया था। जबकि जनवरी में भारतीय युद्धपोत आईएनएस सुमित्रा ने सोमालिया के पूर्वी तट पर समुद्री डाकुओं द्वारा हमला किए जाने के बाद ईरानी ध्वज वाले जहाज के 19 पाकिस्तानी चालक दल को बचाया था। नौसेना ने 05 जनवरी को उत्तरी अरब सागर में लाइबेरिया के झंडे वाले जहाज एमवी लीला नोरफोक के अपहरण के प्रयास को विफल कर दिया था।(एएमएपी)

गैंगस्टर एक्ट में मुख्तार अंसारी को 10 साल की सजा भाई अफजाल भी दोषी करार

सजा होने के कारण अफजाल अंसारी की संसद सदस्यता भी खत्म

माफिया मुख्तार अंसारी पर गैंगस्टर मामले में गाजीपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट का फैसला आ गया। कोर्ट ने मुख्तार अंसारी को दोषी करार देते हुए दस साल की सजा सुनाई है। साथ ही पांच लाख का जुर्माना भी लगाया गया है। साथ ही कोर्ट ने सांसद अफजाल अंसारी को भी दोषी करार किया है। कोर्ट ने अफजाल अंसारी को चार साल की सजा सुनाई है साथ ही एक लाख का जुर्माना भी लगाया गया है। दो साल से ज्यादा की हो गई।

 

बता दें कि शनिवार सुबह से ही गाजीपुर के एसपी कार्यालय के बाहर न्यायालय जाने वाले मार्ग को बैरिकेडिंग कर आवागमन रोक दिया गया था। पीएसी और पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई थी। वहीं, न्यायालय में फैसला आने को लेकर गाजीपुर सांसद अफजाल अंसारी सुबह 10.45 बजे कोर्ट में पहुंच गए थे। जबकि पूर्व विधायक मुख्‍तार अंसारी की पेशी बांदा जेल से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कराई गई। सांसद अफजाल और मुख्‍तार पर आने वाले फैसले के मद्देनज़र कोर्ट परिसर में सुबह से ही कड़ी सुरक्षा व्‍यवस्‍था की गई थी। सजा सुनाए जाने के बाद मौके पर गाजीपुर डीएम और एसएसपी भी पहुंचे।

कृष्‍णानंद राय के परिवार ने जताया संतोष

अंसारी बंधुओं को सजा सुनाए जाने पर कृष्‍णानंद राय के परिवार ने संतोष जताया है। कृष्‍णानंद राय के बेटे पीयूष ने एक निजी चैनल से बात करते हुए कहा कि यह मुख्‍यमंत्री आदित्‍यनाथ की सरकार की मजबूत पैरवी और अपराध के प्रति जीरो टालरेंस नीति का सबूत है। सजा सुनाए जाने के वक्‍त सांसद अफजाल अंसारी अदालत के कठघरे में मौजूद रहे।

कैदी वाहन में जिला जेल के लिए रवाना हुए अफजाल

सजा सुनाए जाने के थोड़ी देर बाद सांसद अफजाल अंसारी को कैदी वाहन से गाजीपुर जिला जेल रवाना कर दिया गया। जेल में अंसारी की सुरक्षा और उन्‍हें मिलने वाली सुविधाओं के बारे में पूछे जाने पर डीएम और एसएसपी ने कहा कि इस बारे में जेल अधीक्षक जेल मैनुअल के हिसाब से व्‍यवस्‍था करेंगे।

सांसदी जाना तय

अफजाल अंसारी अब सजायाफ्ता हो गए हैं। नियमों के मुताबिक किसी आपराधिक मामले में दो साल से अधिक की सजा सुनाए जाने के बाद जनप्रतिनिधि की विधानसभा या संसद की सदस्‍यता स्‍वत: खत्‍म हो जाती है। माना जा रहा है कि अफजाल को चार साल की सजा होने के बाद 24 से 48 घंटे में उसकी लोकसभा की सदस्‍यता खत्‍म हो सकती है।

क्या है मामला ?

एमपी/एमएलए कोर्ट में चल रहे इस मामले में बीते 15 अप्रैल को फैसला आना था। न्यायाधीश के अवकाश में होने के चलते फैसला नहीं आ पाया था। ऐसे फैसले के लिए 29 अप्रैल को तारीख नियत की गई थी। वर्ष 2007 के इस मामले में बीते एक अप्रैल को बहस और सुनवाई पूरी कर ली गयी थी और 15 अप्रैल को फैसला होना था। अफजाल अंसारी, मुख्तार अंसारी के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत एमपी/एमएलए कोर्ट में चल रहे इस केस में बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड केस गैंग चार्ट में शामिल है। जबकि नन्दकिशोर रूंगटा के अपहरण और हत्या का केस भी गैंग चार्ट में शामिल है।

29 नवंबर 2005 को गाजीपुर के भांवरकोल थाना अंतर्गत सियाड़ी गांव में भाजपा विधायक कृष्णानंद राय सहित सात लोगों पर एके-47 जैसे अत्याधुनिक असलहों से लगभग 400 राउंड से ज्यादा फायरिंग कर उनकी हत्या कर दी गई थी। सातों लोगों का शव पोस्टमार्टम के लिए बीएचयू लाया जाने लगा तो भाजपा विधायक के समर्थक उग्र हो गए थे और जगह-जगह तोड़फोड़ व हिंसा की गई थी।

अंसारी और उसके गिरोह की दहशत तीन दशक तक

पूर्वांचल में माफिया मुख्तार अंसारी और उसके गिरोह की दहशत तीन दशक तक व्यापारियों और उद्यमियों में भी खूब थी। भेलूपुर के कोयला व्यवसायी नंद किशोर रूंगटा को अगवा कर हत्या की वारदात ने तो कारोबारियों में खौफ पैदा कर दी थी। यह खौफ तीन दशकों तक बना रहा। सरकारी ठेकों पर आधिपत्य बना रहा।  वर्ष 1997 में भेलूपुर थाना क्षेत्र के जवाहर नगर कालोनी निवासी कोयला कारोबारी नंद किशोर रूंगटा को अगवा कर लिया गया था। फोन कर परिजनों से तीन करोड़ की फिरौती मांगी गई थी। उस समय मुख्तार का सबसे भरोसेमंद शूटर अताउर रहमान ने नंद किशोर को कोयला व्यवसायी विजय बनकर डील के बहाने उठाया था। नंद किशोर की हत्या कर शव को प्रयागराज में ठिकाने लगाया था।

अभी तक करोड़ों की संपत्ति की जा चुकी है कुर्क

पुलिस के आंकड़ों को देखा जाए तो मुख्तार अंसारी के खिलाफ दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, मऊ, चंदौली, लखनऊ और गाजीपुर के विभिन्न थानों में संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। मुख्तार पर गाजीपुर के विभिन्न थानों में केस दर्ज है। गाजीपुर जिला प्रशासन माफिया मुख्तार अंसारी, बड़े भाई गाजीपुर सांसद अफजाल अंसारी, परिजनों और संबंधियों की करोड़ों की अचल संपत्ति कुर्क कर चुकी है।(एएमएपी)

उत्तराखंड : मौसम पर आस्‍था भारी, बिगड़ैल मौसम के बावजूद धामों में उमड़ा जनसैलाब

बारिश और बर्फबारी का मौसम भी श्रद्धालुओं के कदमों को नहीं रोक पा रहा है। इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद चार धामों में आस्था का सैलाब उमड़ रहा है। कहने का मतलब कि बिगड़ैल मौसम के बावजूद भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के कदम चार धाम तीर्थस्थलों की ओर लगातार बढ़ रहे हैं। हालांकि राज्य सरकार प्रतिकूल मौसम को देखते हुए तीर्थ यात्रियों के लिए हर दिन अलर्ट भी जारी कर रही है और इसी के आधार पर सभी को यात्रा करने की सलाह दे रही है।

 

प्रदेश सरकार ने मौसम के बदले मिजाज को देखते हुए फिलहाल पंजीकरण को रोक दिया है। इसके बावजूद पहले से पंजीकृत तीर्थयात्री और श्रद्धालु चार धामों की ओर बढ़ रहे हैं। गंगोत्री-यमुनोत्री में हो रही झमाझम बारिश से श्रद्धालुओं के उत्साह में किसी तरह की कोई कमी नहीं दिखाई दे रही है।

सोमवार को भारी बारिश के बीच भी हजारों यात्रियों का हुजूम इन मार्गों जाते हुए देखा जा सकता है। उधर, सोनप्रयाग से भी केदारनाथ धाम के लिए सुबह आठ बजे तक 2584 यात्री रवाना हुए हैं। आज दोपहर बाद बदरीनाथ धाम का मार्ग भी खोल दिया गया है। इस मार्ग पर भी श्रद्धालुओं का धाम की ओर जाने का क्रम शुरू हो गया है।

बारिश और बर्फबारी से चार धामों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। गंगोत्री और यमुनोत्री सहित यमुना घाटी में लगातार बारिश हो रही है। साथ ही ऊंचाई वाले स्थानों पर बर्फबारी हो रही है। यमुनोत्री धाम के आखिर प्रमुख पड़ाव जानकीचट्टी से यमुनोत्री धाम पैदल मार्ग पर मूसलाधार बारिश के बीच यात्री जोखिम उठाकर आवाजाही कर रहे हैं। उनकी आस्था और श्रद्धा के आगे बारिश-बर्फबारी और विपरीत परिस्थितियां भी बेमाने साबित हो रही हैं।

इस संबंध में बदरी-केदार समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने आज फिर वीडियो जारी कर कहा है कि बदरी और केदारनाथ धाम में मौसम बहुत दिनों से प्रतिकूल बना हुआ है। लगातार बारिश और बर्फबारी हो रही है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं-तीर्थयात्रियों की श्रद्धा और आस्था में कोई कमी नहीं दिखाई दे रही है। श्रद्धालु बहुत ही उत्साहित नजर आ रहे हैं।

प्रदेश सरकार और केदारनाथ मंदिर समिति के स्तर से श्रद्धालुओं के सरल और सुगम दर्शन की व्यवस्था के सभी प्रयास सुनिश्चित किए जा रहे हैं। धाम के मार्गों और पड़ाव स्थलों पर अलाव आदि की भी व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद भी श्रद्धालुओं-तीर्थयात्रियों से मौसम के मद्देनजर प्रदेश सरकार की जारी की गई गाइडलाइन का पालन करने का आग्रह किया गया है। खासकर बुजुर्ग, महिलाओं और बच्चों को यात्रा करने से पहले मौसम को देखने और चिकित्सक की सलाह लेने को कहा गया है।(एएमएपी)