राष्ट्र जागरण और गौरक्षा के लिये जीवन समर्पित

भारतीय स्वतंत्रता के लिये जितना संघर्ष प्रत्यक्ष आँदोलन के लिये हुआ उससे कहीं अधिक उस अप्रत्यक्ष संघर्ष में जीवन समर्पित हुये जिन्होंने स्वाधीनता आँदोलन में तो भाग लिया ही साथ ही भारतीय संस्कृति के मानविन्दुओं और परंपराओं के प्रति जाग्रति के लिये जीवन समर्पित किया । ऐसे ही जीवनदानी थे संत प्रभुदत्त ब्रह्मचारी जो स्वाधीनता आँदोलन में भी जेल गये और गौरक्षा आँदोलन में भी ।

भारतीय संस्कृति के प्रति समाज जागरण के लिये जीवन समर्पित करने वाले संत प्रभुदत्त ब्रह्मचारी जी का जन्म अलीगढ़ जनपद के अंतर्गत ग्राम नगला में 9 अक्टूबर 1885 को हुआ था । उसदिन कार्तिक मास कृष्णपक्ष की अष्टमी थी । उनके पिता पं॰ मेवाराम जी भगवताचार्य थे और  माता अयुध्यादेवी भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति समर्पित मानों एक ग्रहस्थ संत थीं। परिवार आर्थिक दृष्टि बहुत कमजोर था किन्तु आध्यात्म और मनोबल की दृष्टि से बहुत सुदृढ़ था । सनातन परंपरा के अनुरूप बालक प्रभुदत्त को बालवय से पढ़ने के लिये गुरुकुल भेज दिया गया । जहाँ उन्होंने संस्कृत के साथ गीता और उपनिषदों की शिक्षा प्राप्त की गुरुकुल में ही आजीवन ब्रह्मचर्य
का व्रत लेकर लिया था ।

गुरुकुल छोड़ आंदोलन में शामिल हुए

इसी बीच गुरुकुलों पर अंग्रेजों का दबाव बढ़ रहा था । इसलिये गुरुकुल के विद्यार्थियों में बेचैनी थी । तभी पंजाब और बंगाल के युवकों द्वारा स्वाधीनता आँदोलन में बढ़ चढ़ भाग लेने के समाचार आये तो प्रभुदत्त ने भी पढ़ाई छोड़कर गुरुकुलों के दमन के विरुद्ध आँदोलन आरंभ किया । 1905 में गिरफ्तार हुये और अलीगढ़ जेल भेजे गये । रिहा होकर मथुरा आये तथा आश्रम बनाकर रहने लगे । उनका आश्रम सांस्कृतिक जागरण का एक प्रमुख केन्द्र था । 1921 में गाँधी जी के आव्हान पर देशभर में असहयोग आँदोलन प्रारंभ हुआ । प्रभुदत्त जी पुनः आँदोलन में सहभागी बने और पुनः गिरफ्तार हुये । लेकिन असहयोग आँदोलन में खिलाफत आँदोलन जोड़ने से वे सहमत नहीं थे और उन्होंने स्वयं को सीधे राजनैतिक आँदोलन से तो तटस्थ कर लिया पर सामाजिक जागरण के काम में सक्रिय हुये । और पूरे भारत की यात्रा की । स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद वे भारत के बटवारे से बहुत दुखी हुये । और स्वयं को एकाकी बना लिया । उन्होंने गायत्री मंत्र की साधना आरंभ की और तप करने के विचार से हिमालय की ओर गए और फिर वृन्दावन में आश्रम बनाकर रहने लगे। आश्रम में प्रवचन और श्रीमद्भागवत का काव्य रूपान्तरण करने के काम में जुट गये । वे ब्रजभाषा के सिद्धहस्त कवि थे। उन्होंने श्रीमद्भागवत को ब्रजभाषा के छन्दों में तैयार की । ब्रजभाषा में पहला “भागवत चरित कोश’ रचना करने वाले वे पहले विद्वान थे ।

स्‍वतंत्र भारत में गौहत्‍या बंद न होने से दुखी

भारत की स्वतंत्रता के बाद देश में गौहत्या बंद न होने से वे बहुत दुःखी रहा करते थे । उन्होंने 1960 में ब्रन्दावन में पहली गो-हत्या निरोध समिति बनायी और गौरक्षा केलिये जन जागरण करने के लिये पूरे देश की यात्रा की । 1966 में जब स्वामी करपात्री जी महाराज ने गौरक्षा आँदोलन आरंभ किया तो उसमें भी सहभागी बने । दिल्ली के प्रदर्शन में भाग लिया तथा गौरक्षा के लिये अनशन आरंभ किया जो 80 दिन तक चला । तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गाँधी ने उनसे अनशन त्यागने का आग्रह किया और संतों ने रसपान कराकर उनका अनशन समाप्त कराया। समय के साथ वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क में आये और संघ के द्वितीय सरसंघचालक। श्री गुरुजी के भी निकट रहे देश के अनेक भागों की यात्रा भी की । इसी बीच जब “हिन्दू कोड बिल’ आया तो स्वामी जी ने इसे हिन्दु समाज के हितों  के विपरीत माना और सामाजिक जागरण केलिए पुनः देशव्यापी यात्रा की और सभाएँ संबोधित कीं।

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स्वामी प्रभुदत्त ब्रह्मचारी जी भारतीय संस्कृति का एक स्तम्भ

सामाजिक जागरण के लिये उन्होंने दिल्ली में 26 फीट ऊँची हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित की । स्वामी प्रभुदत्त ब्रह्मचारी जी भारतीय संस्कृति का एक स्तम्भ माने जाते हैं उन्होंने अपने जीवन का हर पल भारतीय संस्कृति की स्थापना एवं सनातन जीवन शैली में शुद्धि के लिये समर्पित किया । उन्होने अनेक ग्रंथों की रचना की जिनमें महाभारत के प्राण महात्मा कर्ण, गोपालन, शिक्षा, बद्रीनाथ दर्शन, मुक्तिनाथ दर्शन, महावीर हनुमान जैसा उदात्त साहित्य ग्रंथ प्रमुख है । ब्रह्मचारी जी ने दिल्ली, वृन्दावन, बद्रीनाथ और प्रयाग में संकीर्तन भवन के नाम से चार आश्रम स्थापित किये जो आज भी सुचारू रूप से संचालित हैं। वे आध्यात्म के अद्भुत विद्वान थे । वे कहते थे कि समाज को पहले संकीर्तन से जोड़ो फिर आध्यात्म ज्ञान के प्रवचन हों। इसीलिये उन्होंने वृन्दावन में यमुना के तट पर वंशीवट के निकट, प्रयागराज प्रतिष्ठानपुर झूसी में अनेकानेक प्रकल्पों के साथ संकीर्तन भवन स्थापित किया तो दिल्ली के वसंत विहार में संकीर्तन भवन के साथ हनुमान जी की विशालकाय मूर्ति स्थापना का कार्य आरंभ किया । पर यह कार्य उनके जीवन काल में पूरा न हो सका । वे अपने प्रवास के दौरान अपने झूंसी आश्रम आये थे और उन्होंने देह त्यागने का निर्णय ले लिया और उपवास आरंभ कर दिया । वह 1 अप्रैल 1990 का दिन था ब्रह्मचारी जी गायत्री मंत्र जाप के साथ गंगा मैया के जल में प्रविष्ट हुये और समाधिस्थ हो गये । उनके चिर समाधिस्थ हो जाने के बाद दिल्ली में 120 फीट ऊँची प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई । वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे । गौसेवा, गौरक्षा आँदोलन, स्वाधीनता आँदोलन में जितनी सक्रियता रही उतनी ही सक्रियता ग्रंथ रचना और पत्रकारिता में भी थी ।

स्वतंत्रता आँदोलन में खादी प्रयोग का संकल्प लिया

विशेषकर स्वतंत्रता आँदोलन में उनकी पत्रिकारिता के कायल तो पंडित जवाहरलाल नेहरू भी हुये ।उन्होंने कई पन्नों का संपादन और प्रकाशन किया । स्वतंत्रता आँदोलन में खादी प्रयोग का संकल्प लिया तो जीवन भर अडिग रहे । उन्होंने अपने कार्यों, संस्कृति सेवा, परंपराओ के प्रति समाज के आत्मविश्वास का जागरण और धार्मिक पुनर्जागरण के साथ लेखन और ग्रंथ रचनाओं का जो कार्य किया वह अद्भुत और अलौकिक लगता है । वे आशु कवि भी थे। श्रीमद्भागवत, गीता, उपनिषद, ब्रह्मसूत्र आदि अत्यंत दुरूह ग्रंथों की सरल सुबोध हिंदी में व्याख्या कर भक्तवर गोस्वामी तुलसीदास के अनुरूप जनकल्याण कार्य किया। उन्होंने श्री भागवत को 118 भागों में जन सामान्य की सरल भाषा में प्रस्तुत किया। उनके रचित ब्रजभाषा के सुललित छन्द (छप्पय) बोधगम्यएवं गेय है, जिनका आज भी स्थान-स्थान पर वाद्य-वृंद संगति के साथ पारायण कर लोग आनंदित होते हैं। इनके अतिरिक्त नाम संकीर्तन महिमा, शुक (नाटक), भागवत कथा की वानगी, भारतीय संस्कृति एवं शुद्धि, वृंदावन माहात्म्य, राघवेंद्र चरित्र, प्रभु पूजा पद्धति, कृष्ण चरित्र, रासपंचाध्यायी, गोपीगीत, प्रभुपदावली, चैतन्य चरितावली आदि 100 से अधिक आध्यात्मिक ग्रंथों की रचना की(एएमएपी)

ब्रिटेन में महंगाई अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर, फ्यूल और खाने के सामान पर ज्यादा असर

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ब्रिटेन में महंगाई अब सालों के रिकॉर्ड तोड़ रही है। फिलहाल देश के लोगों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा महंगाई बना हुआ है। बजट से ठीक पहले आए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2022 के दौरान ब्रिटेन में खुदरा महंगाई बढ़कर 11.1 फीसदी हो चुकी है, जो 1981 से अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। यहां जनता लगातार मांग कर रही है कि उन्हें राहत देने के लिए सरकार की तरफ से कोई कदम उठाया जाए।इकोनॉमिस्ट ने उम्मीद जताई थी कि अक्टूबर में मुद्रास्फीति (Inflation) का आंकड़ा 10.7 प्रतिशत रहेगा। हालांकि, असल आंकड़ा उनकी उम्मीद से ज्यादा रहा। ओएनएस ने कहा कि खाद्य पदार्थों और ऊर्जा की ऊंची कीमतों के चलते महंगाई बढ़ी। इसके बाद अब फ्यूल और खाने के सामान पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ने वाला है, जिससे आम आदमी की परेशानी और ज्यादा बढ़ सकती है।

आज ब्रिटेन में पेश होगा बजट

ब्रिटेन के वित्त मंत्री जेरेमी हंट ने बजट से एक दिन पहले जारी इन आंकड़ों पर प्रतिक्रिया जाहिर की है। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई और कीमतों में बढ़ोतरी के लिए सरकार कड़े कदम उठाएगी। माना जा रहा है कि इस बजट में खर्च घटाने और टैक्स में बढ़ोतरी के फैसले किए जा सकते हैं। ब्रिटेन में आज नया बजट पेश होने जा रहा है। इस बजट से यहां की जनता को भी कई उम्मीदें हैं।

बजट को लेकर G-20 समिट में बोले थे ऋषि सुनक

ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने G-20 समिट के दौरान कहा था कि गुरुवार का बजट यह निर्धारित करेगा कि हम इस देश को सही रास्ते पर कैसे लाएंगे। इससे पहले उन्होंने कहा था कि सबसे बड़े आर्थिक संकट को दूर करने के लिए दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को एक दशक तक ठोस प्रयास करने की आवश्यकता होगी।

बाजार के जानकारों ने बताया कि बैंक ऑफ इंग्लैंड जल्द ही दरों को मौजूदा 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 से 4.5 प्रतिशत तक पहुंचा सकता है। वहीं, दूसरी तरफ बाजार के जानकार कह रहे हैं कि महंगाई दर के रिकॉर्ड स्तर के बाद भी कीमतों के बढ़ने की रफ्तार कम हुई है। (एएमएपी)

 मिशन शक्ति का अगला चरण 14 अक्टूबर, योगी सरकार महिलाओं  को  सिखाएंगी आत्‍मरक्षा के गुर  

उत्तर प्रदेश में शारदीय नवरात्रि के साथ मिशन शक्ति के चौथे चरण की शुरुआत हो रही है. सीएम योगी ने कहा कि महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘मिशन शक्ति’ अभियान का समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) द्वारा महिलाओं और लड़कियों को सशक्त बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से चलाए गए ‘मिशन शक्ति’ अभियान से महिलाओं के सपनों को नई उड़ान मिल रही है. उत्तर प्रदेश में शारदीय नवरात्रि के साथ मिशन शक्ति के चौथे चरण की शुरुआत हो रही है. सीएम योगी ने कहा कि महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘मिशन शक्ति’ अभियान का समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है. UP: प्रतापगढ़ बना मां बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़ जंक्शन, इन दो स्टेशनों के नाम भी बदले गए।

मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 14 अक्टूबर को राज्य भर में वाहन रैली आयोजित करके और महिला सशक्तिकरण से संबंधित केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के बारे में लोगों को जागरूक करके चरण की शुरुआत की जाएगी।

आत्मरक्षा में दक्ष बनेंगी UP की बेटियां

इस मिशन के जरिए योगी सरकार उत्तर प्रदेश में बेटियों की सुरक्षा के लिए मिशन शक्ति के अगले चरण में उन्हें आत्मरक्षा में दक्ष बनाने का प्रयास करेगी, ताकि उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े. इसके तहत न सिर्फ उन्हें आत्मरक्षा में दक्ष बनाने का प्रयास किया जाएगा, बल्कि उन्हें विभिन्न महिला कानूनों से भी परिचित कराया जाएगा, जिससे वो समय पड़ने पर अपने अधिकारों का लाभ ले सकें।

विज्ञप्ति के अनुसार, सीएम योगी ने इस बात पर जोर दिया कि फील्ड में तैनात महिला अधिकारियों को महिलाओं को सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देनी चाहिए और प्राथमिकता के आधार पर उनकी समस्याओं का समय पर समाधान सुनिश्चित करना चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा, ”यह अभियान प्रत्येक ग्राम पंचायत और वार्ड में आयोजित किया जाए और इसमें ग्राम प्रधान, महिला पुलिस बीट, लेखपाल, पंचायत सचिव, आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी, एएनएम की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

महिलाओं को योजनाओं की जानकारी देंगे अधिकारी

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस अवसर पर केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा चलायी गयी महिला सशक्तिकरण एवं महिला सुरक्षा जागरूकता से संबंधित योजनाओं की जानकारी प्रदान करने जैसे कार्य सुनिश्चित किये जायें. बीट अधिकारी सप्ताह में एक बार पंचायत भवन पर जाकर महिलाओं की समस्याओं का समाधान करें. लोगों को विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के बारे में सूचित किया जाना चाहिए और इन योजनाओं का लाभ उठाने में आने वाली समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा, “इस अभियान के दौरान पूरे प्रदेश में बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के बच्चों को शामिल करते हुए जन जागरूकता हेतु प्रभात फेरी निकाली जाए. साथ ही गृह विभाग द्वारा मिशन शक्ति के जागरूकता अभियान हेतु पब्लिक एड्रेस सिस्टम का उपयोग किया जाए. सभी विभाग मिशन शक्ति अभियान से जुड़े लोग 14 और 15 अक्टूबर को जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करें. इसके बाद 16 अक्टूबर से विभागवार निर्धारित कार्यक्रम भव्य तरीके से आयोजित किए जाएं।

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14 अक्टूबर को प्रदेश भर में एक साथ वाहन रैली निकाली जाए

सीएम योगी ने कहा कि 14 अक्टूबर को प्रदेश भर में एक साथ वाहन रैली निकालकर केंद्र और राज्य सरकार की महिलाओं से जुड़ी योजनाओं के बारे में लोगों को जागरुक करते हुये इसका नवीन चरण प्रारंभ किया जाए। उन्होंने कहा कि फील्ड में तैनात महिला बीट अधिकारी महिलाओं के बीच जाकर शासन की योजनाओं के बारे में जानकारी दें। बीट अधिकारी सप्ताह में एक दिन पंचायत भवन में जाकर महिलाओं की समस्याओं का निस्तारण करें। मिशन शक्ति अभियान से जुडे़ सभी विभाग 14 और 15 अक्टूबर को जागरुकता के कार्यक्रमों का आयोजन करें। वहीं 16 अक्टूबर से विभागवार निर्धारित कार्यक्रमों को भव्य आयोजन किया जाए।

कहीं जाम की स्थिति न बनने पाए

मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रैफिक की प्रभावी मॉनिटरिंग की जाए और जाम की समस्या न बनने दी जाए। प्रदेशवासियों के साथ प्रशासन और पुलिस के लोग सहयोगपूर्ण व्यवहार करें। आगामी त्योहारों के मद्देनजर पटाखों की दुकानें भीड़ भाड़ इलाके में न हो इसका विशेष ध्यान रखा जाए।  नगर विकास विभाग सिटी बसों में पैनिक बटन की व्यवस्था को सुचारु रूप से चालू करें । बस ड्राइवर, ई-रिक्शा चालक, टू-व्हीलर चालक का पंजीकरण जरूर किया जाए। किरायेदारों का सत्यापन अनिवार्य रूप से किया जाए।

बीसी सखियों समेत स्वयं सहायता समूहों को बनाया जाएगा मास्टर ट्रेनर

मिशन शक्ति अभियान के लिए विभागवार प्रस्तावित कार्ययोजना के अनुसार ग्राम्य विकास विभाग के तहत 36816 ग्राम पंचायतों में 18-40 आयु वर्ग की बीसी सखियों और 18-40 आयु वर्ग की समूह सखियों, कृषि आजीविका सखियों, स्वास्थ्य सखी, विद्युत सखी, स्वयं सहायता समूह को स्थानीय महिला पुलिस के माध्यम से आत्मरक्षा प्रशिक्षण प्रदान कर मास्टर ट्रेनर के रूप में दक्ष किया जाएगा। ये मास्टर ट्रेनर ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न माध्यमों से बेटियों को आत्मरक्षा के गुर सिखाएंगी।

चलाया जाएगा दुर्गा शक्ति मेगा सेफ्टी वर्कशॉप

इसी तरह महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत दुर्गा शक्ति मेगा सेफ्टी वर्कशॉप के अंतर्गत बालिका गृहों में आवासित बालिकाओं के लिए सेल्फ डिफेंस प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित कराई जाएंगी। शक्ति कार्यशालाओं के तहत समस्त जनपदों में कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 के अंतर्गत गठित स्थानीय, आंतरिक परिवाद समितियों का प्रशिक्षण और अभिमुखीकरण भी किया जाएगा।

महिला दलों के साथ स्कूली बेटियों को भी मिलेगा प्रशिक्षण

युवा कल्याण विभाग निर्भया योजना के अंतर्गत महिला मंगल दलों को आत्मरक्षा, स्वावलंबन और सशक्तीकरण के लिए 7 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण प्रदान करेगा। वहीं, उच्च शिक्षा विभाग भी छात्राओं को आपातकाल में आत्मसुरक्षा के लिए मार्शल आर्ट, जूडो का प्रशिक्षण प्रदान कराने की व्यवस्था करेगा। इसके साथ ही पुलिस विभाग के सहयोग से प्रत्येक जनपद में महिला सुरक्षा एवं साइबर क्राइम पर जागरूकता अभियान का भी संचालन किया जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग में प्रोजेक्ट वीरांगना के अंतर्गत गृह विभाग के सहयोग से 11 हजार पीटीआई शिक्षकों को प्रशिक्षित करते हुए उच्च प्राथमिक विद्यालयों की 40 लाख बालिकाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। (एएमएपी)

गुजरात चुनाव : बीजेपी ने झोंकी ताकत तो सुस्त पड़ी कांग्रेस, “आप” की एंट्री से विपक्ष में बेचैनी

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इन दिनों पूरे देश की नजर गुजरात विधानसभा चुनाव पर टिकी हुईं हैं। पीएम मोदी का गृह राज्य होने के कारण यहां का हर चुनाव अहम होता है। भले ही पीएम मोदी चुनावी मैदान में नहीं हैं, लेकिन बैनर-पोस्टर से लेकर हार्डिंग तक में मोदी की छवि ही नजर आ रही है। लेकिन डायमंड सिटी सूरत में चुनावी माहौल शांत नजर आ रहा है। 2017 के चुनाव में यहां सीधी लड़ाई कांग्रेस और भाजपा के बीच थी, लेकिन आम आदमी पार्टी की एंट्री ने इस बार मुकाबला त्रिकोणीय कर दिया है।आप की एंट्री ने भाजपा की बेचैनी बढ़ा दी है। ऐसा पहली बार होगा जब खुद पीएम मोदी जिले की पाटीदार बहुल सीटों पर अपनी बड़ी सभा करते नजर आएंगे। जबकि दूसरी तरफ पांच सीटों पर आम आदमी पार्टी दमखम के साथ मैदान में उतरी है। पार्टी को उम्मीद है कि वे यहां भाजपा को करारी शिकस्त दे सकती है। वहीं पूरे सूरत में कांग्रेस के उम्मीदवार बजट की कमी से जूझते नजर आ रहे हैं। 16 में से केवल एकाध सीट पर ही पार्टी जीत का दम भरते हुए नजर आ रही है।

सूरत को कर्मभूमि बनाने वाले हिंदी भाषी हमेशा सत्ताधारी भाजपा के वोट बैंक रहे है। नोटबंदी, जीएसटी जैसे फैसलों के बाद भी हिंदी भाषी वोटरों ने सूरत में भाजपा से दूरी नहीं बनाई। हर बार की तरह इस बार भी भाजपा ने किसी भी हिंदी भाषी को अपनी पार्टी से मैदान में नहीं उतारा है। इसके बावजूद यह वर्ग भाजपा के साथ खड़ा है। एक तरफ भाजपा जहां सूरत में बसे यूपी, एमपी, बिहार और हरियाणा के मतदाताओं को लेकर आश्वस्त नजर आ रही है। वहीं, दूसरी तरफ वराछा विधानसभा सीट के जरिए भाजपा कहीं न कहीं पाटीदार गढ़ में सेंध लगती हुई नजर आ रही है। क्योंकि यहां आम आदमी पार्टी की सक्रियता ज्यादा है। यहां से पार्टी के सबसे ज्यादा 27 पार्षद पिछले वर्ष महानगर पालिका चुनाव जीते थे। यह सीट भाजपा के हाथ से निकल नहीं जाए, इसलिए 27 नवंबर को मोदी पहली बार पीएम बनने के बाद यहां प्रचार और सभा के लिए पहुंच रहे हैं।

गढ़ बचाने के लिए मोदी की रैली का सहारा

पाटीदार वोट बैंक बिखरे नहीं, इसलिए केंद्रीय मंत्री मनसुख भाई मांडविया और पुरुषोत्तम भाई रुपाला को यहां की कमान दी गई है। 2017 के विधानसभा चुनावों में पाटीदार समुदाय भाजपा से नाखुश था। बावजूद इसके पीएम मोदी या अन्य कोई बड़ा नेता यहां सभा के लिए नहीं पहुंचा था। लेकिन इस बार की स्थिति बिल्कुल अलग नजर आ रही है। क्योंकि जब पार्टी मुश्किल में होती है तो पार्टी मोदी के चेहरे और उनकी रैली का सहारा लेने से नहीं चूकती है। अब मोदी अपनी रैली के जरिए पाटीदार वोटों को साधने का काम करेंगे। सूरत की वराछा रोड हॉट सीट बनी हुई है। क्योंकि यहां आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर है। इसलिए पीएम मोदी अपनी इस सीट के जरिए इस सीट से लगी हुई कामरेज, करंज, ओलपाड़, कतारगाम के साथ सूरत उत्तर के मतदाताओं को भी साधने की कोशिश करेंगे।

दरअसल, सूरत महानगर पालिका के चुनाव में पाटीदार वोटों से आम आदमी पार्टी को पहली बार में ही 27 सीटें हासिल हुई थीं। इस चुनाव में आप प्रत्याशियों की सभाओं में भारी भीड़ जुट रही है। इसलिए भाजपा को कहीं न कहीं यह डर है कि अगर नगर पालिका चुनाव जैसी वोटिंग हो गई, तो पांच से ज्यादा सीट भाजपा खो सकती है।

सूरत की 16 में से 15 सीटों पर भाजपा का करीब 15 वर्षों से कब्जा है। यहां दो लोकसभा सीट हैं। इनमें एक सूरत, जहां से केंद्रीय मंत्री दर्शना विक्रम जरदोश सांसद है। वहीं नवसारी सीट से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल चुनकर आते हैं। नवसारी सीट का आधा हिस्सा सूरत में आता है। भाजपा फिलहाल गृह राज्यमंत्री हर्ष संघवी की सीट मंजूरा, उधना, चौर्यासी, सूरत पूर्व, लिंबायत और सूरत पश्चिम सीट पर मजबूत स्थिति में नजर आ रही है।

मजूरा सीट जैन, मारवाड़ी, राजस्थानी बाहुल्य सीट है। कपड़ा व्यापार से जुड़े व्यापारियों का यह गढ़ है। चौर्यासी सीट भाजपा का गढ़ है। यहां पार्टी दो बार से नए चेहरे को मौका दे रही है। लिंबायत सीट मराठी बाहुल सीट है। पार्टी ने यहां से मराठी भाषी संगीता पाटिल को दोबारा चुनाव मैदान में उतारा है। उधना सीट हिंदी बाहुल सीट है। इसके बावजूद पार्टी ने यहां से हिंदी भाषी के बजाए गुजराती पटेल को मैदान में उतारा है।

इन सीटों पर आप बिगाड़ सकती है भाजपा का खेल

2017 के विधानसभा चुनाव के रिजल्ट देखें, तो भाजपा 100 के आंकड़े तक को नहीं छू पाई थी। पार्टी को महज 99 सीटें मिली थीं। हालांकि कांग्रेस 77 सीटें जीती थीं। 2017 के चुनाव में सूरत में सीधी लड़ाई कांग्रेस और भाजपा के बीच थी, लेकिन आम आदमी पार्टी की एंट्री ने इस बार मुकाबला त्रिकोणीय कर दिया है। हालांकि लोगों का मानना है कि कांग्रेस इस बार लड़ाई में नहीं है। अरविंद केजरीवाल की पार्टी की एंट्री से भाजपा को ही फायदा होगा। कांग्रेस का वोट बैंक आप में शिफ्ट होगा। सूरत की 16 सीटों में से पांच सीटों पर आप की कड़ी टक्कर भाजपा से है। वराछा, कतारगाम, करंज, ओलपाड़ और कामरेज पाटीदार बहुल सीट है।

अरविंद केजरीवाल का फोकस सूरत की इन सीटों पर इसलिए ज्यादा है, क्योंकि यहीं से गुजरात में पहली जीत का स्वाद आप ने चखा था। इस जीत के बाद आप को यहां अपनी जमीन नजर आने लगी और इसी के दम पर अब पार्टी विधानसभा चुनाव में उतरी है। आप के 27 पार्षद भी इन्हीं क्षेत्रों से महानगर पालिका में चुनकर आए हैं। आम आदमी पार्टी ने यहां एक साल में 20 से ज्यादा सभाएं की हैं। इनमें दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, पंजाब के सीएम भगवंत मान, राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा शामिल हैं।

कतारगाम सीट पर भी लड़ाई बड़ी दिलचस्प है। यहां से आप ने गुजरात में आम आदमी पार्टी के संयोजक गोपाल इटालिया को प्रत्याशी बनाया है। इटालिया क्षेत्र में बेहद लोकप्रिय हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं। वराछा सीट पर आप ने पादीदार अनामत आंदोलन समिति के संयोजक रहे अल्पेश कथरिया को मैदान में उतारा है। पाटीदारों में यह अच्छा रसूख रखते हैं। इसके अलावा करंज सीट से आप ने प्रदेश महामंत्री मनोज सोरठिया को टिकट दिया है।

कांग्रेस के नजर नहीं आ रहे बड़े नेता

विधानसभा चुनावों में जहां भाजपा और आम आदमी पार्टी आक्रमक प्रचार में लगी हुई हैं। वहीं कभी गुजरात में लंबे समय तक शासन कर चुकी कांग्रेस सुस्त नजर आ रही है। इस चुनावों में कांग्रेस का सहारा उन्हीं की पार्टी का बनाया हुआ घोषणा पत्र है। इसी घोषणा के पत्र के आधार पर कांग्रेस प्रत्याशी डोर टू डोर कैंपेन में लगे हुए हैं। क्योंकि कांग्रेस के उम्मीदवारों को प्रचार के लिए कोई खास फंड नहीं मिल रहा है। कांग्रेस उम्मीदवार बजट की कमी के चलते बड़े होर्डिंग और विज्ञापन भी नहीं लगा पा रहे हैं। जहां आप और भाजपा सोशल मीडिया के जरिए दमखम के साथ लोगों तक पहुंच रही है।

वहीं कांग्रेस सोशल मीडिया पर भी सक्रिय नहीं है। क्योंकि कांग्रेस की सोशल मीडिया देखने वाली टीम को अब तक बजट ही नहीं मिला है, जिससे उम्मीदवारों को अपने प्रचार के लिए अपनी जेब से खर्च करना पड़ रहा है। फंड न मिलने से कांग्रेस नेताओं की बेबसी साफ नजर आ रही है। कांग्रेस के बड़े नेता कहते हैं कि पिछले 27 सालों में भाजपा का राज रहा। हम सत्ता से बाहर चल रहे हैं। ऐसे में हमारे पास प्रचार और बड़ी सभाओं के लिए बजट अब नहीं है। बजट उन्हीं सीटों पर खर्चा किए जा रहा है, जहां पार्टी को थोड़ी बहुत जीत की उम्मीद नजर आ रही है। पार्टी सूरत पूर्व, उधना और वराछा सीट पर टक्कर देने की स्थिति का दावा करती है। इसलिए कांग्रेस ने इन्हीं सीटों पर अपने स्टार प्रचारकों को प्रचार के लिए बुलाया है। (एएमएपी)

ब्रिटेन में कोविड संक्रमण बढ़ने की आशंका, कोरोना वायरस का आया नया वैरियंट 

ब्रिटेन में इन दिनों दहशत का माहौल है, क्योंकि यहां तापमान में गिरावट के साथ कोविड संक्रमण बढ़ने की आशंका जताई है। साथ ही कहा है कि इस मौसम में कोविड का नया वैरियंट फैल रहा है। हालातों को देखते हुए सरकार की ओर से लोगों को वर्तमान में मुख्य तीन लक्षणों के बारे में चेतावनी जारी की है। ब्रिटेन सरकार की ओर से लोगों को कोविड के तीन प्रमुख लक्षणों के बारे में सचेत किया जा रहा है। कहा गया है कि इन लक्षणों पर अभी से ध्यान देना जरूरी होगा क्योंकि सर्दियां बढ़ने के साथ-साथ मामले बढ़ने की आशंका है।

कोविड संक्रमण भी बढ़ना तय

न्यूज साइट द मिरर की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूके स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी (यूकेएचएसए) ने कहा है कि फ्लू जैसे अन्य श्वसन संबंधी (सांस संबंधी) शीतकालीन वायरस में वृद्धि के साथ-साथ कोविड संक्रमण भी बढ़ना तय है, क्योंकि लोगों ने घरों के अंदर कम समय बिताना शुरू कर देंगे। इसके साथ ही सरकार ने शीतकालीन कोविड और फ्लू टीकाकरण के काम में तेजी लाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।रिपोर्ट में कहा गया है कि ओमिक्रॉन का नया सबवेरिएंट, जिसे BA.2.86 के नाम से जाना जाता है, पहली बार अगस्त में यूके में सामने आया था। विशेषज्ञों का कहना है कि इस नए स्ट्रेन से वर्तमान में प्रचलित अन्य वेरिएंट की तुलना में गंभीर बीमारी होने की ज्यादा संभावना नहीं है। बताया गया है कि पूर्व के टीकाकरण से इससे सुरक्षा मिलती रहनी चाहिए।

इंग्लैंड ने 15,797 नए कोविड मामले दर्ज

अब तक इंग्लैंड और वेल्स में शरद ऋतु में शुरुआती वृद्धि के बाद कोविड मामलों की संख्या में गिरावट शुरू हो गई है, लेकिन अपने सबसे हालिया कोविड-19 महामारी विज्ञान बुलेटिन में उत्तरी आयरलैंड में स्वास्थ्य एजेंसी ने बताया कि अक्टूबर के पहले वीकेंड में नैदानिक और नियमित जांच में पाए गए नए कोविड संक्रमणों की संख्या 448 थी, जबकि पिछले सप्ताह की संख्या 441 थी। यॉर्कशायर लाइव की रिपोर्ट में नवीनतम सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 7 अक्टूबर तक चलने वाले सप्ताह में इंग्लैंड ने 15,797 नए कोविड मामले दर्ज किए। यह प्रत्येक 100,000 लोगों पर लगभग 27.9 नए मामलों के बराबर है। यह 30 सितंबर को पिछले सप्ताह के आंकड़ों से थोड़ी कमी है, जिसमें प्रति 100,000 लोगों पर 16,186 मामले या 28.6 मामले देखे गए थे।

मरीजों की संख्या पांच महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई

हालांकि, जैसे-जैसे मौसम ठंडा होगा, आशंका है कि कोविड संक्रमण फिर से बढ़ेगा। पहले से ही इंग्लैंड में सकारात्मक परीक्षण करने वाले अस्पताल में मरीजों की संख्या पांच महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है, जो दर्शाती है कि वायरस अधिक व्यापक रूप से फैल रहा है। 8 अक्टूबर तक एनएचएस इंग्लैंड ने अस्पताल में कोविड के 4,414 मरीजों की सूचना दी। यह पिछले सप्ताह से 14% की वृद्धि है और 4 मई के बाद से सबसे अधिक है।

बुजुर्गों पर अटैक कर रहा नया वेरिएंट

UKHSA की टीकाकरण प्रमुख डॉ मैरी रामसे ने कहा, ‘हम देख रहे हैं इस सप्ताह की रिपोर्ट में कोविड-19 मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. सभी आयु वर्गों के लोग विशेषकर बुजुर्ग बड़ी संख्या में अस्पतालों में आ रहे हैं.’ उन्होंने कहा, ‘नियमित रूप से हाथ धोने से आप काफी हद तक कोरोना और अन्य वायरस से बचे रह सकते हैं. अगर किसी मरीज में सांस की बीमारी के लक्षण हैं तो उसे हरसंभव तरीके से दूसरों से दूर रहना चाहिए.’

फिलहाल काबू में हैं हालात

कोरोना का नया वेरिएंट मिलने के बावजूद फिलहाल इसे ज्यादा गंभीर नहीं माना जा रहा है. इसकी वजह ये है कि ब्रिटेन में सामने आ रहे कोरोना के ताजा आंकड़ों में इस नए वेरिएंट के मरीजों की संख्या केवल 14.6 प्रतिशत ही है. UKHSA के ‘रेस्पिरेटरी डेटामार्ट सिस्टम’ के जरिए रिकॉर्ड किए गए 4,396 नमूनों में से 5.4 प्रतिशत लोग कोरोना से पीड़ित पाए गए।

बनाए रखें सतर्कता

विश्व स्वास्थ्य संगठन  ने दो सप्ताह पहले ही EG.5.1 वेरिएंट पर उस वक्त नजर रखना शुरू कर दिया था, जब डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडनोम घेबियस ने कहा था कि लोग टीकों और पूर्व संक्रमण से अब पहले से बेहतर सुरक्षित हैं. हालांकि सभी देशों को अपनी सतर्कता में अभी कमी नहीं लानी चाहिए. एशिया में कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से 31 जुलाई को इसे कोविड के नए वेरिएंट के रूप में वर्गीकृत किया गया।

कोरोना संक्रमण से बचने के लिए अपनाएं ये तरीके

कोरोना या किसी भी तरह के वायरस से बचने के लिए हाथों की सफाई का ध्यान रखा बेहद जरूरी है। ऐसे में समय-समय पर साबुन से हाथ धोते रहें।
अपने मुंह और आंखों को बार-बार छूने से बचें, क्योंकि इससे संक्रमण फैलने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।
कोराना के मामले कम होने का मतलब ये नहीं कि कोरोना खत्म हो चुका है। ऐसे में लगातार मास्क का उपयोग करें और इसके छूने से भी बचें।
घर के दरवाजे, चाबियां, गाड़ी का डोर और अन्य चीजों या सतह को छूने से बचें या फिर छूने के बाद हाथ सैनिटाइज जरूर करें।
कोरोना वायरस अभी भी हमारे आसपास के वातावरण में मौजूद है। ऐसे में सोशल डिस्टेसिंग का पालन करें और भीड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
जब तक बहुत जरूरी न हो, सोशल एक्टिविटीज से दूर रहें। दरअसल, खासतौर पर मानसून में संक्रमण बहुत तेजी से फैलता है।
कोरोना वायरस से बचाव के लिए वैक्सीन की दोनों डोज और इसके बाद बूस्टर डोज जरूर लगवाएं।
अगर आपके बच्चे स्कूल जाते हैं, तो बच्चों को कोविड सुरक्षा के नियम जरूर सिखाएं। साथ ही मास्क और सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने के लिए भी प्रेरित करें।
सुरक्षा नियमों का पालन करने के साथ ही इस बीमारी से बचे रहने के लिए अपनी डाइट का भी पूरा ध्यान रखें। इम्युनिटी बढ़ाने के लिए अपनी डाइट में विटामिन-सी,ए, जिंक, कैल्शियम और आयरन युक्त फूड्स शामिल करें।
कोरोना के कोई भी लक्षण नजर आने पर तुरंत खुद को दूसरों से अलग आइसोलेट करें और डॉक्टर से संपर्क करें। (एएमएपी)

कई जगह नोटा और निर्दलीय बिगाड़ देते हैं पार्टियों का चुनावी गणित

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गुजरात विधानसभा चुनाव।

गुजरात में सत्ता के लिए 182 सीटों पर हुए पिछले पांच विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को लगातार हार का सामना करना पड़ा है। केंद्रीय चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि गुजरात का चुनावी गणित नोटा, निर्दलीय और अन्य दल बिगाड़ते हैं। पांच में से तीन विधानसभा चुनाव कांग्रेस उतने ही वोटों से हारी है जितना निर्दलीयों, दूसरे राष्ट्रीय दलों और गुजरात के स्थानीय दलों ने अपने नाम किया था।आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2012, 2007 और 1998 के चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच हार-जीत का अंतर 22,44,812, 24,30,523 और 16,23,440 वोट था। वहीं इसके सापेक्ष में निर्दलीयों, अन्य राष्ट्रीय और स्थानीय दलों ने 25,46,503, 25,61,457, 33,10,046 वोट अपने नाम किया था।

2017 में 5.51 लाख लोगों ने दबाया नोटा

आयोग के अनुसार 2017 के विधानसभा चुनाव में 5,51,594 लोगों ने नोटा का बटन दबाया था। वहीं निर्दलीय, अन्य राष्ट्रीय दलों और स्थानीय दलों को कुल 17,79,838 वोट मिले थे। ये सभी वोट मिलाकर कुल 23,31,432 वोट होते हैं। वहीं इस चुनाव में कांग्रेस 22,86,370 वोटों से हारी थी। स्पष्ट है कांग्रेस जितने वोटों से हारी थी उससे 45,062 ज्यादा वोट निर्दलीयों, अन्य दलों और नोटा को मिले थे।

वोट का गणित बिगाड़ने में ये दल सबसे आगे

गुजरात के पिछले पांच विधानसभा चुनावों की बात करें तो बसपा, सीपीआई, सीपीएम और एनसीपी वोट काटने में सबसे आगे थे। इसी तरह स्थानीय दलों में जेडीएस, जेडीयू, एसएचएस और एसपी जैसे दल शामिल थे। 2017 के चुनाव में बसपा ने 139 उम्मीदवार उतारे थे। पार्टी को कुल 2,06,768 वोट मिले लेकिन एक भी उम्मीदवार जीत नहीं सका। 2002 के चुनाव में एनसीपी के 81 उम्मीदवारों को 3,49,021 वोट मिले पर जीत किसी को नसीब नहीं हुई थी।

एआईआरजेपी ने बिगाड़ा कांग्रेस का वोट गणित

वर्ष 1998 के चुनाव में भाजपा 73,00,826 वोट लेकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। कांग्रेस 56,77,386 वोटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी थी। इस चुनाव में कांग्रेस 16,23,440 वोटों से हारी थी। वहीं अकेले स्थानीय दल ऑल इंडिया राष्ट्रीय जनता पार्टी (एआईआरजेपी) ने कुल 19,02,171 वोट अपने नाम किया था। एआईआरजेपी ने कुल 168 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। इसमें से चार ही जीत सके थे जबकि 114 की जमानत जब्त हो गई थी।

दो चुनावों में हार का अंतर बढ़ गया

आंकड़ों के अनुसार कांग्रेस को पिछले पांच चुनावों में औसतन 21,49,278 कम वोट मिले हैं। कांग्रेस की हार को वोट प्रतिशक्ष में समझा जाए तो 2017 के चुनाव में भाजपा के मुकाबले उसे 8.06 फीसदी कम वोट मिले थे। इसी तरह 1998 और 2012 के चुनाव में वोट प्रतिशत का अंतर आठ से नौ फीसदी के बीच था। 2002 और 2007 का चुनाव केवल ऐसा था जब कांग्रेस भाजपा के हाथों दस से ग्यारह फीसदी वोटों के बड़े अंतर से चुनाव हारी थी।(एएमएपी)

कनाडा में राजशाही की अनिवार्य शपथ को लेकर दायर याचिका खारिज, जानें पूरा मसला 

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कनाडा की एक अदालत ने कानून की पढ़ाई कर रहे एक सिख छात्र की चुनौती को खारिज कर दिया है, जिसने पिछले साल राजशाही की अनिवार्य शपथ को लेकर अल्बर्टा के एडमॉन्टन शहर और प्रांत की लॉ सोसायटी पर मुकदमा दायर किया था। सीबीसी न्यूज के अनुसार, एक लेखक छात्र और अमृतधारी सिख, प्रबजोत सिंह विरिंग ने अपने मुकदमे में कहा था राजशाही के नाम की अनिवार्य शपथ लेना उसकी धार्मिक मान्यताओं के विपरीत होगा।

अल्बर्टा में प्रांतीय कानून के अनुसार, वकीलों को राजा, उनके उत्तराधिकारियों और भावी राजाओं के प्रति “वफादार होने और सच्ची निष्ठा रखने” की शपथ लेनी होती है। विरिंग ने कहा कि उसने पूरी तरह से शपथ ली है और खुद को अकाल पुरख – सिख धर्म में परमात्मा – को सौंप दिया है और किसी अन्य के प्रति ऐसी निष्ठा नहीं रख सकता है। विरिंग ने सीबीसी न्यूज को बताया था, “मेरे लिए यह, एक व्यक्ति के रूप में मैं कौन हूं इसका एक बुनियादी हिस्सा है। निष्ठा की शपथ लेने के लिए मुझे उन प्रतिज्ञाओं और शपथ से मुकरना होगा जो मैंने पहले ही ले ली हैं। यह पहचान और एक व्‍यक्ति के रूप में मैं जो हूं उसे नष्‍ट कर देगा।”

उस समय महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ब्रिटेन की गद्दी पर थीं

जिस समय विरिंग ने मुकदमा दायर किया था उस समय महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ब्रिटेन की गद्दी पर थीं। पूरे फैसले में उनका संदर्भ दिया गया है। मामले की सुनवाई क्वीन्स बेंच की अदालत में हुई थी। सोमवार को दिए गए निर्णय के मूल में शपथ की प्रकृति थी – चाहे वह स्वयं रानी के लिए हो या कनाडा की संवैधानिक राजशाही का प्रतीक हो। न्यायमूर्ति बारबरा जॉनसन ने अपने फैसले में कहा: “मैंने पाया है कि निष्ठा की शपथ को कानून के शासन और कनाडाई संवैधानिक प्रणाली को बनाए रखने की शपथ के रूप में उचित रूप से चित्रित किया गया है। “निष्ठा की शपथ में रानी का कोई भी संदर्भ इन मूल्यों के प्रतीक के रूप में है, न कि एक राजनीतिक या धार्मिक इकाई के रूप में।” लॉ सोसयटी ने इस मामले में कुछ भी नहीं कहा।

संशोधन कर शपथ को वैकल्पिक बनाने का आग्रह किया

इसने पिछले साल एक बयान में कहा था कि यह मुद्दा प्रांत का है, क्योंकि किसी भी बदलाव के लिए कानून बनाया जाना चाहिए। जॉनसन ने अलबर्टा के उस आवेदन को भी खारिज कर दिया जिसमें मामले को इस तर्क के साथ समाप्त करने की मांग की गई थी कि इसे पहले ही सुलझा लिया गया था। अल्बर्टा के बत्तीस कानून प्रोफेसरों ने पिछले साल तत्कालीन न्याय मंत्री को एक खुला पत्र भेजा था जिसमें कानून में संशोधन करने और शपथ को वैकल्पिक बनाने का आग्रह किया था, जैसा कि ओंटारियो और ब्रिटिश कोलंबिया जैसे अन्य न्यायालयों में होता है।

क्या बोली अदालत

जिस समय विरिंग ने मुकदमा दायर किया था उस समय महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ब्रिटेन की गद्दी पर थीं। पूरे फैसले में उनका संदर्भ दिया गया है। मामले की सुनवाई क्वीन्स बेंच की अदालत में हुई थी। सोमवार को दिए गए निर्णय के मूल में शपथ की प्रकृति थी – चाहे वह स्वयं रानी के लिए हो या कनाडा की संवैधानिक राजशाही का प्रतीक हो। न्यायमूर्ति बारबरा जॉनसन ने अपने फैसले में कहा: ‘मैंने पाया है कि निष्ठा की शपथ को कानून के शासन और कनाडाई संवैधानिक प्रणाली को बनाए रखने की शपथ के रूप में उचित रूप से चित्रित किया गया है। निष्ठा की शपथ में रानी का कोई भी संदर्भ इन मूल्यों के प्रतीक के रूप में है, न कि एक राजनीतिक या धार्मिक इकाई के रूप में।’

पहले भी होता रहा है विरोध

लॉ सोसयटी ने इस मामले में कुछ भी नहीं कहा। इसने पिछले साल एक बयान में कहा था कि यह मुद्दा प्रांत का है, क्योंकि किसी भी बदलाव के लिए कानून बनाया जाना चाहिए। जॉनसन ने अलबर्टा के उस आवेदन को भी खारिज कर दिया जिसमें मामले को इस तर्क के साथ समाप्त करने की मांग की गई थी कि इसे पहले ही सुलझा लिया गया था। अल्बर्टा के बत्तीस कानून प्रोफेसरों ने पिछले साल तत्कालीन न्याय मंत्री को एक खुला पत्र भेजा था जिसमें कानून में संशोधन करने और शपथ को वैकल्पिक बनाने का आग्रह किया था, जैसा कि ओंटारियो और ब्रिटिश कोलंबिया जैसे अन्य न्यायालयों में होता है। (एएमएपी)

बच्चों को शक, संशय और संवादहीनता से बचाएं परिवार: कानूनगो

आपका अख़बार ब्यूरो।
राष्ट्रीय राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने कहा है कि समाज और परिवार के लिए बेहद जरूरी है कि वे बच्चों को शक, संशय और संवादहीनता से बचाएं। उन्होंने कहा कि मीडिया को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों के साथ लैंगिक अपराध के प्रकरणों में उनकी पहचान उजागर करना पॉक्सो एक्ट की धारा 23 के तहत दंडनीय अपराध है। इसका उल्लंघन होने पर 6 माह से 1 वर्ष तक की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकता है।

कानूनगो शुक्रवार को भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) द्वारा आयोजित कार्यक्रम ‘शुक्रवार संवाद’ को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी एवं डीन (अकादमिक) प्रो. गोविंद सिंह सहित आईआईएमसी के सभी केंद्रों के संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

‘बाल अधिकार और मीडिया’ विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कानूनगो ने कहा कि बच्चों के साथ लैंगिक अपराध होने की दशा में किसी भी प्रकार से पहचान प्रकट नहीं की जा सकती है। समाचार पत्रों, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं वेब पोर्टल्स के द्वारा संस्थाओं का नाम, फोटो आदि प्रकाशित किये जाने की घटनाएं घट रही हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा ऐसी घटनाओं को रोकने और बच्चों को सुरक्षित एवं अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

कानूनगो के अनुसार बच्चों के संरक्षण के लिए मीडिया के साथियों को बाल अधिकारों से जुड़े कानूनों को जानना आवश्यक है। उन्‍होंने कहा कि पत्रकारों को आयोग से पहले पता होता है कि अपराध कहां घटित हुआ है। मीडिया को बाल अधिकरों के उल्‍लंघन और शोषण के मामलों की रिपोर्टिंग संवेदनशीलता और जिम्‍मेदारी से करनी चाहिए।

कानूनगो ने कहा कि हम चाहते हैं कि बच्चों से जुड़े हर मामले की सूचना आयोग को दी जाए। बच्चों से जुड़े अपराधों पर नीति निर्माताओं, न्यायपालिका, पुलिस और मीडिया को संवेदनशील होने और उन्हें गंभीरता से लेने की सख्त जरूरत है, ताकि किसी पीड़ित बच्चे और विशेषकर यौन अपराधों से पीड़ित बच्चों की गरिमा को ठेस पहुंचे बगैर उन्हें न्याय मिल सके। उन्होंने कहा कि कानूनों के क्रियान्वयन के लिए आम लोगों को भी जागरुक होने की जरूरत है। बच्चों के साथ अपराध की स्थिति में समाज के हर वर्ग की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह उसके खिलाफ आवाज उठाएं।

कार्यक्रम का संचालन आउटरीच विभाग के प्रमुख प्रो. (डॉ.) प्रमोद कुमार ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन डिजिटल मीडिया विभाग की प्रमुख डॉ. रचना शर्मा ने दिया।

पितृपक्ष : पितरों के प्रसन्न होने से वंशजों का भी होता है कल्याण

डॉ. श्रीगोपाल नारसन।

प्रतिवर्ष भाद्रपद पूर्णिमा से पितृपक्ष शुरू हो जाता है, जो 16 दिनों तक आश्विन अमावस्या तक चलता है। इस साल पितृ पक्ष की शुरुआत आज यानि 29 सितंबर से हो रही है और श्राद्ध पक्ष का समापन 14 अक्टूबर को होगा।श्राद्ध पक्ष की अवधि में पूर्वजों के निमित्त पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। ऐसा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। जिससे पूर्वज प्रसन्न होते हैं। कहा जाता है कि पितरों के प्रसन्न होने से वंशजों का भी कल्याण होता है।जो लोग पूरे श्राद्धपक्ष में अपने पूर्वजों का तर्पण, पिंडदान न कर पाए हो वह सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त श्राद्ध कर सकते हैं।इस दिन बिहार के गयाजी में पिंडदान करने का सबसे ज्यादा महत्व है।आश्विन माह की सर्वपितृ अमावस्या के दिन साल का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण भी लग रहा है।सर्वपितृ अमावस्या पर सूर्य ग्रहण रात 08.34 मिनट से अगले दिन प्रात: 02.25 मिनट तक रहेगा। यह वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जो भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी नहीं रहेगा।सर्व पिृत अमावस्या को महालया अमावस्या और पितृ विसर्जनी अमावस्या भी कहते हैं। पितृ पक्ष में पूर्वज धरती पर अपने परिवार के बीच आते हैं और उन्हें आशीर्वाद देते हैं,ऐसी धार्मिक मान्यता है। सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों को सम्मान पूर्वक श्राद्ध, पिंडदान और पूजा करते हुए विदाई दी जाती है। कहते हैं सर्वपिृत अमावस्या तिथि पर किया गया श्राद्ध, परिवार के सभी पूर्वजों की आत्माओं को प्रसन्न करने के लिये पर्याप्त है। सर्वपितृ अमावस्या पर परिवार के उन मृतक सदस्यों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु अमावस्या तिथि, पूर्णिमा तिथि तथा चतुर्दशी तिथि को हुई हो।

अगर किसी कारणवश मृत्यु तिथि पर श्राद्ध करने में सक्षम न हो, तो वो मात्र अमावस्या तिथि पर श्राद्ध कर सकता है।जिन पूर्वजों की पुण्यतिथि ज्ञात नहीं है, उनका श्राद्ध भी अमावस्या तिथि पर किया जा सकता है, इसीलिये अमावस्या श्राद्ध को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। श्राद्ध पक्ष के दिनों में ।।ऊॅं नमो भगवते वासुदेवाय।।मन्त्र का वाचन करना चाहिए। जिस दिन श्राद्ध हो उस दिन श्राद्ध की शुरूआत और समापन में ।।देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्यन एव च। नमः स्वा्हायै स्व धायै नित्ययमेव भवन्युव त।।का वाचन करें।

पितर दो प्रकार के होते हैं एक दिव्य पितर और दूसरे पूर्वज पितर। दिव्य पितर ब्रह्मा के पुत्र मनु से उत्पन्न हुए ऋषि हैं। पितरों में सबसे प्रमुख अर्यमा हैं जिनके बारे में गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है कि पितरों में प्रधान अर्यमा वे स्वयं हैं। दूसरे प्रकार के पितर पूर्वज होते हैं। पितृपक्ष में अपने इन्हीं पितरों को लोग याद करते हैं और इनके नाम से पिंडदान, श्राद्ध और ब्राह्मण भोजन करवाते हैं। कठोपनिषद्, गरुड़ पुराण, मार्कण्डेय पुराण के अनुसार पितर अपने परिजनों के पास पितृपक्ष श्राद्ध के समय आते हैं और अन्न जल एवं आदर की अपेक्षा करते हैं। जिन परिवार के लोग पितृ पक्ष के दौरान पितरों के नाम से अन्न जल दान नहीं करते। श्राद्ध कर्म नहीं करते हैं। उनके पितर भूखे-प्यासे धरती से लौट जाते हैं। इससे परिवार के लोगों को पितृ दोष लगता है। इसे पितृ शाप भी कहते हैं। इससे संतान प्राप्ति में बाधा आती है। परिवार में रोग और कष्ट बढ जाता है।

पितृ पक्ष में जिन तिथियों में पूर्वज यानी पिता, दादा, परिवार के लोगों की मृत्यु हुई होती है उस तिथि को उनका श्राद्ध किया जाता है। श्राद्ध का नियम है कि दिन के समय पितरों के नाम से श्राद्ध और ब्राह्मण भोजन करवाना चाहिए। देवताओं की पूजा सुबह में और पितरों की दोपहर में होती है। तर्पण विधि – सर्वप्रथम अपने पास शुद्ध जल, बैठने का आसन (कुशा का हो), बड़ी थाली या ताम्रण (ताम्बे की प्लेट), कच्चा दूध, गुलाब के फूल, फूल-माला, कुशा, सुपारी, जौ, काली तिल, जनेऊ आदि पास में रखे।

आसन पर बैठकर तीन बार आचमन करें।
ॐ केशवाय नम:,
ॐ माधवाय नम:,
ॐ गोविन्दाय नम: बोलें।

आचमन के बाद हाथ धोकर अपने ऊपर जल छिड़के अर्थात् पवित्र होवें, फिर गायत्री मंत्र से शिखा बांधकर तिलक लगाकर कुशे की पवित्री (अंगूठी बनाकर) अनामिका अंगुली में पहन कर हाथ में जल, सुपारी, सिक्का, फूल लेकर निम्न संकल्प लें। अपना नाम एवं गोत्र उच्चारण करें फिर बोले अथ् श्रुतिस्मृतिपुराणोक्तफलप्राप्त्यर्थ देवर्षिमनुष्यपितृतर्पणम करिष्ये।। फिर थाली या ताम्र पात्र में जल, कच्चा दूध, गुलाब की पंखुड़ी डाले, फिर हाथ में चावल लेकर देवता एवं ऋषियों का आह्वान करें। स्वयं पूर्व मुख करके बैठें, जनेऊ को रखें। कुशा के अग्रभाग को पूर्व की ओर रखें, देवतीर्थ से अर्थात् दाएं हाथ की अंगुलियों के अग्रभाग से तर्पण दें, इसी प्रकार ऋषियों को तर्पण दें।

फिर उत्तर मुख करके जनेऊ को कंठी करके (माला जैसी) पहने एवं पालकी लगाकर बैठे एवं दोनों हथेलियों के बीच से जल गिराकर दिव्य मनुष्य को तर्पण दें, इसके बाद दक्षिण मुख बैठकर, जनेऊ को दाहिने कंधे पर रखकर बाएं हाथ के नीचे ले जाए, थाली या ताम्र पात्र में काली तिल छोड़े फिर काली तिल हाथ में लेकर अपने पितरों का आह्वान करें।

ॐ आगच्छन्तु में पितर इमम ग्रहन्तु जलान्जलिम

फिर पितृ तीर्थ से अर्थात् अंगूठे और तर्जनी के मध्य भाग से तर्पण दें। जो स्वजन अपने शरीर को छोड़कर चले गए हैं चाहे वे किसी भी रूप में अथवा किसी भी लोक में हों, उनकी तृप्ति और उन्नति के लिए श्रद्धा के साथ जो शुभ संकल्प और तर्पण किया जाता है, वह श्राद्ध है। माना जाता है कि सावन की पूर्णिमा से ही पितर मृत्यु लोक में आ जाते हैं और नवांकुरित कुशा की नोकों पर विराजमान हो जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि पितृ पक्ष में हम जो भी पितरों के नाम का निकालते हैं, उसे वे सूक्ष्म रूप में आकर ग्रहण करते हैं। केवल तीन पीढ़ियों का श्राद्ध और पिंड दान करने का ही विधान है।श्राद्ध स्त्री या पुरुष, कोई भी कर सकता है। श्रद्धा से कराया गया भोजन और पवित्रता से जल का तर्पण ही श्राद्ध का आधार है।

श्राद्ध का अनुष्ठान करते समय दिवंगत पूर्वज का नाम और उसके गोत्र का उच्चारण किया जाता है। परिवार का उत्तराधिकारी या ज्येष्ठ पुत्र ही श्राद्ध करता है। जिसके घर में कोई पुरुष न हो, वहां स्त्रियां ही इस परम्परा को निभाती हैं। परिवार का अंतिम पुरुष सदस्य अपना श्राद्ध जीते जी करने के लिए स्वतंत्र माना गया है। संन्यासी वर्ग अपना श्राद्ध अपने जीवन में कर ही लेते हैं।जब महाभारत के युद्ध में कर्ण का निधन हो गया था और उनकी आत्मा स्वर्ग पहुंच गई, तो उन्हें रोजाना भोजन की बजाय खाने के लिए सोना और गहने दिए गए।

इस बात से निराश होकर कर्ण की आत्मा ने इंद्र देव से इसका कारण पूछा। तब इंद्र ने कर्ण को बताया कि आपने अपने पूरे जीवन में सोने के आभूषणों को दूसरों को तो दान किया, लेकिन कभी भी अपने पूर्वजों को दान नहीं दिया। तब कर्ण ने उत्तर दिया कि वह अपने पूर्वजों के बारे में नहीं जानता है और उसे सुनने के बाद, भगवान इंद्र ने उसे 15 दिनों की अवधि के लिए पृथ्वी पर वापस जाने की अनुमति दी ताकि वह अपने पूर्वजों को भोजन दान कर सके। तब से इसी 15 दिन की अवधि को पितृ पक्ष के रूप में जाना जाता है।(एएमएपी)

अभी भी इंटरनेट से दूर हैं भारतीय महिलाएं

बिहार में सबसे कम यूजर्स।

एनजीओ ऑक्सफैम इंडिया द्वारा किए गए एक अध्ययन में कहा गया है कि भारत में इंटरनेट उपयोग करने में महिलाएं अभी भी काफी पीछे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में इंटरनेट उपयोग करने वाली महिलाएं केवल एक तिहाई हैं। एनजीओ द्वारा रविवार को जारी ‘इंडिया इनइक्वलिटी रिपोर्ट 2022: डिजिटल डिवाइड’ के अनुसार, भारतीय महिलाओं के पास मोबाइल फोन होने की संभावना 15 फीसदी कम है और पुरुषों की तुलना में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं का उपयोग करने की संभावना 33 फीसदी कम है।

भारत 40.4 फीसदी के व्यापक लिंग अंतर के साथ सबसे खराब स्थिति में

अध्ययन में कहा गया है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में, भारत 40.4 फीसदी के व्यापक लिंग अंतर के साथ सबसे खराब स्थिति में है। रिपोर्ट ग्रामीण-शहरी डिजिटल विभाजन की ओर भी इशारा करती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक वर्ष में 13 फीसदी की महत्वपूर्ण (डिजिटल) वृद्धि दर दर्ज करने के बावजूद, केवल 31 फीसदी ग्रामीण आबादी अपने शहरी समकक्षों के 67 फीसदी की तुलना में इंटरनेट का उपयोग करती है।  रिपोर्ट जनवरी 2018 से दिसंबर 2021 तक आयोजित सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के घरेलू सर्वेक्षण के प्राथमिक आंकड़ों का विश्लेषण करती है।

महाराष्ट्र में इंटरनेट की पहुंच सबसे अधिक तो बिहार फिसड्डी

रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्यों में, महाराष्ट्र में इंटरनेट की पहुंच सबसे अधिक है, इसके बाद गोवा और केरल का स्थान है, जबकि बिहार में सबसे कम, इसके बाद छत्तीसगढ़ और झारखंड का स्थान है। एनएसएस (2017-18) के अनुसार, किसी भी पाठ्यक्रम में नामांकित छात्रों में से केवल नौ फीसदी के पास इंटरनेट के साथ कंप्यूटर तक पहुंच थी और नामांकित छात्रों में से 25 प्रतिशत के पास किसी भी तरह के उपकरणों के माध्यम से इंटरनेट तक पहुंच थी।  (एएमएपी)