पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में देश की कई ऐतिहासिक धरोहर मौजूद हैं लेकिन उचित संरक्षण व रखरखाव के अभाव में इनमें से कुछ विलुप्त हो चुके हैं तो कुछ इतिहास बनने की ओर अग्रसर हैं। इन्हीं में से एक है मल्लिकबाजार समाधिस्थल जहां देश के महानतम वैज्ञानिकों में से एक जगदीश चंद्र बोस का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हुआ था।1937 के नवंबर महीने में जब यहां बोस के शव को अंतिम संस्कार के लिए लाया गया था तब गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर से लेकर कई दिग्गज हस्ती पहुंचे थे। देश को वैज्ञानिक पहचान देने वाले मेघनाद साहा, सत्येंद्र नाथ बोस, पीसी महालानविस जैसे वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा स्रोत रहे जगदीश चंद्र बोस का अंतिम संस्कार यहीं मौजूद गैस चैंबर में हुआ था। यहीं पास में एक बड़ा श्मशान है जहां अंतिम संस्कार के बाद उन लोगों की अस्थियों को या तो विसर्जित किया जाता था या दफन कर दिया जाता था।
आजादी के पहले से यहां का यह समाधिस्थल और गैस चैंबर ना केवल जगदीश चंद्र बोस बल्कि भारतीय इतिहास की कई बड़ी शख्सियतों के लिए जिंदगी का अंतिम पड़ाव बना। इस ऐतिहासिक तथ्य को संरक्षित करने के उद्देश्य से यहां से गुजरने वाली सड़क का नाम जगदीश चंद्र बोस रोड रखा गया था। दुर्भाग्य से अब यह गैस चैंबर इतिहास बनने की कगार पर है।
लंबे समय से इसकी देखरेख कर रहे क्रिश्चियन ब्यूरियल बोर्ड (सीबीबी) के लिये अब इसे बचाये रखना मुश्किल साबित हो रहा है। तकनीक का हाथ पकड़कर विकसित होती दुनिया के साथ अंतिम संस्कार की पद्धति भी अत्याधुनिक होती गयी। इस बीच श्मशान घाट में गैस की आपूर्ति सुनिश्चित रखना और गैस चैंबर में अंत्येष्टि जारी रखना कठिन होता गया। धीरे धीरे यहां आस-पास तथाकथित निम्न श्रेणी के लोग आकर बस गए और गैस चेंबर से सामानों की चोरी होने लगी। वक्त के साथ इसे भी आधुनिक करने की कोशिशें की गई, गैस की आपूर्ति भी सुनिश्चित की गई लेकिन चोरी का सिलसिला नहीं थमा। कई बार पुलिस में मामला दर्ज किया गया लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ।
सीबीबी के सचिव असीम विश्वास ने इसके पतन की कहानी बयां करते हुए कहा, 1978 में गैस की नियमित आपूर्ति नहीं हो पाने की वजह से यह बंद हो चुका था। इस बीच चोरों ने जमकर उत्पात मचाया। गैस चैंबर के पास मौजूद जमीन पर कब्जा करने के लिए भी कुछ प्रमोटर्स तत्पर थे और वे कल, बल, छल का इस्तेमाल कर किसी तरह से इस बड़े भूखंड पर कब्जा जमाना चाहते थे। पुलिस के पास शिकायत करने का भी कोई लाभ नहीं हुआ। बाद में 2014 में नगर निगम से एक समझौता किया गया। सुनिश्चित किया गया कि यहां मॉर्चुअरी (शव संरक्षण गृह) बनाया जाएगा। जैसे ही इसका काम शुरू होना था उसके बाद एक बार फिर यहां रहने वाले कट्टरपंथी लोगों ने उत्पात मचाना शुरू कर दिया। चोरियां तोड़फोड़ होती रहीं। हालात नियंत्रित करने के लिये वरिष्ठ तृणमूल नेता फिरहाद हकीम और कोलकाता नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त खलील अहमद के अलावा स्थानीय अल्पसंख्यक समुदाय के कई प्रतिनिधि वहां पहुंचे। लोगों को समझाने की कोशिशें हुई लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। अंतत: शव गृह को तोपसिया इलाके में शिफ्ट कर दिया गया।
अपनी वृद्धावस्था का हवाला देते हुए सीबीबी सचिव ने निराशा और लाचारी जाहिर करते हुए कहा कि इसे बचा कर रखना हमारे लिए भी संभव नहीं हो पा रहा। यहां चोरियां और जमीन पर कब्जा रोकने के लिए हम लोगों ने प्राइवेट गार्ड भी नियुक्त किए लेकिन इसमें काफी खर्च होता है जबकि यहां कोई आय नहीं है। नगर निगम के साथ मिलकर इसे संभालने की कोशिश हो रही है लेकिन अब लगता है कि इसे संभाल पाना संभव नहीं हो पाएगा। सांकेतिक लहजे में उन्होंने कहा कि वक्त बताएगा कि हम लोग इसे बचा कर रखने में कितना सफल हुए।
उल्लेखनीय है कि मल्लिकबाजार का इलाका अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र है जहां पश्चिम बंगाल के अलावा दूसरे राज्यों से आए मुस्लिम समुदाय के लोग बहुतायत संख्या में रहते हैं। ऐतिहासिक गैस चेंबर और समाधिस्थल यहीं स्थित है जिस पर कब्जे की कोशिशें लगातार जारी है। (एएमएपी)
गाजा पट्टी पर युद्ध के 26वें दिन बुधवार को इजराइली सुरक्षा बलों और फिलिस्तीन के आतंकवादी संगठन हमास के बीच घमासान मचा हुआ है। इजराइल की थलसेना और वायुसेना ने सात अक्टूबर के गुनहगारों में से एक और हमास के खूंखार कमांडर (सेंट्रल जबालिया बटालियन) इब्राहिम बियारी को सुरंग में ढेर कर दिया। इससे पहले इस बर्बर गुनाह में शामिल हमास कमांडर निजाम अबू अजीना को मार गिराया जा चुका है। इजराइल ने रातभर मिसाइल और रॉकेट दागकर हमास के दर्जनों मजबूत ठिकानों (सुरंगों) को ध्वस्त कर दिया। इस बीच गाजा में संचार व्यवस्था फिर ठप पड़ गई है। यह जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स में दी गई है।
We will fight to eliminate Hamas.
We will fight for the thousands of lives lost.
We will fight to defend our country. 🇮🇱 pic.twitter.com/D7B7KcyRIM
एक रिपोर्ट् में दावा किया गया है कि इजराइल के सैनिकों ने गाजा में हमास की प्रमुख चौकी पर कब्जा कर उसके कुछ कमांडरों समेत 50 आतंकियों को ढेर कर दिया है। इजराइल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) ने बुधवार सुबह इसकी पुष्टि की है। आईडीएफ ने कहा कि इस जमीनी लड़ाई में उसके नौ सैनिकों का बलिदान हो गया। वेस्ट बैंक के जेनिन में बुधवार सुबह इजराइली फौज और हमास आतंकियों के बीच झड़प हुई। इजराइल ने हमास के कई खूंखार आतंकियों के घरों को बमों से उड़ा दिया।
कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यमन के हूथी विद्रोहियों को जवाब देते हुए इजराइली सेना ने उसकी सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल को मार गिराया। इजराइल की फौज ने हमास की कमान को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। इजराइल सात अक्टूबर की बर्बरता में शामिल हमास के दहशतगर्दों को चुन-चुन कर मार रहा है। जिस स्थान पर कमांडर इब्राहिम बियारी को ढेर किया गया, वहां बड़ा गड्ढा हो गया और बड़े पैमाने पर क्षति हुई।
इस बीच फिलिस्तीन की प्रमुख दूरसंचार कंपनी पलटेल ने कहा है कि पहले जो इंटरनेशनल एक्सेस मिला था उसे दोबारा रोक दिया गया है। इस वजह से समूचे गाजा में इंटरनेट सेवा ठप हो गई है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मिस्र की सीमा पर स्थित राफा बॉर्डर को गंभीर रूप से घायल फिलिस्तीनी नागरिकों के लिए खोला जा सकता है। यह जानकारी ब्रिटेन के विदेश कार्यालय ने गाजा में फंसे ब्रिटिश नागरिकों को दी है।
Over the past day, IDF troops operated in a Hamas terrorist stronghold in Jabaliya, northern Gaza.
The stronghold was used for training and execution of terrorism activities.
During the ground activity, the troops eliminated approx. 50 terrorists, as well as destroyed… pic.twitter.com/XMT7ZTZYKv
यमन की राजधानी साना से एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान समर्थक हूथी विद्रोहियों ने इजराइल को चेतावनी दी है कि अगर उसने हमास के खिलाफ जंग नहीं रोकी तो घातक परिणाम होंगे। उस पर ड्रोन और मिसाइल से हमले जारी रखेंगे। विद्रोहियों ने अल-मसीराह टीवी पर इस आशय का बयान जारी किया है। बयान में दावा किया गया है कि उसने मंगलवार को इजराइल पर सैकड़ों मिसाइल दागी हैं। इस पर इजराइल ने कहा है कि उसने हूथी की मिसाइलों को मार गिराया। अमेरिका ने हूथी विद्रोहियों की इस घोषणा पर प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने वाशिंगटन में कहा कि अगर कोई भी इस संघर्ष में शामिल होने की सोच रहा है तो उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए।
पेंटागन के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल पैट राइडर ने इसकी पुष्टि की है कि इजराइल ने हूथी विद्रोहियों की तरफ से दागी गई मिसाइलों को मार गिराया है। इजराइल के सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल जोनाथन कोनरिक्स ने कहा है कि गाजा के जबालिया हमले में हमास कमांडर इब्राहिम बियारी का मारा जाना हमारे लिए बड़ी कामयाबी है। यह भूमिगत सुरंग में छुपा हुआ था। (एएमएपी)
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को फोर्ब्स ने 2022 के लिए जारी सौ सबसे शक्तिशाली महिलाओं की सूची में जगह दी है। अमेरिकी कारोबारी पत्रिका फोर्ब्स ने दुनिया की सौ सबसे शक्तिशाली महिलाओं की सूची में सीतारमण के अलावा पांच अन्य भारतीयों को भी जगह दी है।फोर्ब्स 2022 की ताजा सूची के मुताबिक दुनिया की सबसे शक्तिशाली महिलाओं में 36वें नंबर पर रहीं वित्त मंत्री सीतारमण ने लगातार चौथी बार जगह बनाई है। सीतारमण के साथ बायोकॉन की कार्यकारी अध्यक्ष किरण मजूमदार-शॉ और नायका की संस्थापक फाल्गुनी नायर भी शामिल हैं।
सूची में लगातार चौथी बार शामिल 63 वर्षीय वित्त मंत्री सीतारमण वर्ष 2021 में 37वें स्थान पर रखा गया था, जबकि 2020 में वह 41वें और 2019 में 34वें स्थान पर थीं। सूची में शामिल अन्य भारतीयों में एचसीएलटेक की चेयरपर्सन रोशनी नादर मल्होत्रा 53वें स्थान, सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच 54वें और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया की चेयरपर्सन सोमा मंडल 67वें स्थान पर हैं।
फोर्ब्स सूची के मुताबिक इस साल किरण मजूमदार-शॉ 72वें स्थान पर हैं, जबकि फाल्गुनी नायर 89वें स्थान पर हैं। पिछले साल इस प्रतिष्ठित सूची में मल्होत्रा, मजूमदार-शॉ और नायर ने क्रमश: 52वें, 72वें और 88वें स्थान पर अपनी जगह बनाई थी। फोर्ब्स की सबसे शक्तिशाली महिलाओं की इस सूची में 39 सीईओ, दस राष्ट्राध्यक्षों और 11 अरबपतियों को शामिल किया गया है, जिनकी कुल संपत्ति 115 अरब डॉलर है। (एएमएपी)
यूट्यूबर एल्विश यादव का नाम एक बार फिर विवादों में है. विवाद भी ऐसा, जिसमें बात यूट्यूबर की गिरफ्तारी तक पहुंच गई है. मामला जहरीलों सांपों के जहर की अवैध सप्लाई से जुड़ा हुआ है, जिसका इस्तेमाल रेव पार्टी में नशे के लिए किया जाता है।
यह अपने आप में अनोखा मामला है, लेकिन यह पहली बार नहीं है, जब एल्विश यादव विवादों में आए हैं. इससे पहले भी एल्विश का नाम कई बार विवादों में आ चुका है, फिर चाहे वह गमला चुराने वाला केस हो या फिर सांप्रदायिकता फैलाने का आरोप हो. बता दें कि एल्विश पर कई बार सोशल मीडिया के जरिए सांप्रदायिकता फैलाने के आरोप लग चुके हैं।
क्या है गमला चोरी का किस्सा?
गुरुग्राम में जी-20 की सजावट के लिए रखे गए गमलों को चोरी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. हरियाणा पुलिस ने इस मामले में मनमोहन यादव नाम के शख्स को गिरफ्तार किया था. लेकिन लोगों ने फोटो और वीडियो शेयर करते हुए दावा किया था कि जिस कार से गमले चोरी किए गए वह एल्विश यादव की थी, या एल्विश उसे इस्तेमाल करते थे. कई यूजर्स ने यह भी कहा था कि एल्विस के तिजारा वाले मीट के वीडियो और गमले चोर के वीडियो की गाड़ियों के नंबर मिलाने पर सब कुछ क्लियर समझ में आ जाएगा. हालांकि, एल्विश ने बाद में सफाई जारी करते हुए कहा था कि गमला चोरी से उनका कोई कनेक्शन नहीं है।
कैसे हुआ ‘कोबरा कांड’ का खुलासा
जानवरों की भलाई के लिए काम करने वाले एनजीओ पीपल्स फॉर एनिमल (PFF) की एक टीम काफी दिनों से इस रहस्य के खुलासे की कोशिश में लगी हुई थी. असल में एनजीओ से जुडे लोगों को लंबे वक्त ये खबर मिल रही थी कि दिल्ली एनसीआर में कुछ ऐसी रेव पार्टीज का भी आयोजन होता है, जिसमें अमीरजादे नशे के लिए सांपों के जहर तक का इस्तेमाल करते हैं. ये अपने-आप में जितनी खतरनाक बात थी, उतनी ही चौंकाने वाली. लेकिन इससे भी ज्यादा हैरानी की बात ये थी कि PFF के इनफॉर्मर लगातार ये बता रहे थे कि ऐसी रेव पार्टी के पीछे सोशल मीडिया का एक ऐसा मशहूर चेहरा है, जिसके फॉलोअर्स लाखों में हैं. लेकिन इसके बावजूद वो ना सिर्फ जानवरों की तस्करी के इस रैकेट से बल्कि जहर वाली रेव पार्टी के नेक्सस से भी जुड़ा हुआ है।
खुलासे सुनकर PFA की टीम भी हैरान
मामला बेहद संगीन था. इसलिए PFF ने किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले इस मामले से जुडे सबूत जुटाने का फैसला किया. इसी कड़ी में प्लान किया गया एक स्टिंग ऑपरेशन, जिसके जाल में फंसे एक एजेंट ने ऐसे-ऐसे खुलासे किए कि सुन कर PFA की टीम हैरान रह गई. इस एजेंट ने खुद को ना सिर्फ मशहूर यू-ट्यूबर एल्विश यादव का खास आदमी बताया, बल्कि एल्विश का नाम लेने भर से वो किसी भी रेव पार्टी के लिए सांप और उनके जहर की खेप के साथ हाजिर होने को भी तैयार हो गया।
#WATCH | Mumbai: Shiv Sena (Uddhav Thackeray faction) MP Sanjay Raut says, “…The biggest drug mafia of this country who sells snake venom, which is used in rave parties… He (Elvish Yadav) came to the CM’s residence. He was welcomed and performed Lord Ganapati Aarti. Are the… pic.twitter.com/zJiWjxipp9
कहानी में असली ट्विस्ट तब आया, जब छद्म तरीके से एजेंट को टैप करने की कोशिश कर रहे PFF के कार्यकर्ताओं के बुलावे पर वो एजेंट ना सिर्फ एक साथ अलग-अलग किस्म के 9 सांपों को ले आया, बल्कि 20 ML स्नैक वेनम यानी सांपों के जहर के साथ भी हाजिर हो गया. यहीं से दिल्ली-NCR में सांपों के जहर से चलने वाली रेव पार्टी के खेल का खुलासा हो गया।
एल्विश ने सीएम योगी से लगाई गुहार
PFA की निशानदेही पर नोएडा पुलिस ने इस एजेंट समेत कुल 5 लोगों को सांप और उनके जहर के साथ दबोच लिया. चूंकि इस सिलसिले में दर्ज कराई गई एफआईआर में मशहूर यू-ट्यूबर एल्विश यादव का नाम आ चुका है और पुलिस उनकी तलाश कर रही है. इसलिए एल्विश की सांसें अटक गई हैं. एफआईआर में मुल्जिम के तौर पर एल्विश का नाम है और उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी बेगुनाही का दावा करते हुए ना सिर्फ रील्स बना कर पोस्ट की है, बल्कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी खुद को बचा लेने की गुहार लगाई है।
नोएडा पुलिस ने राहुल और उसके साथियों के पास से पुलिस ने जो सांप बरामद किए हैं, उनमें पांच कोबरा, एक घोड़ा पछाड़ यानी रैट स्नैक, एक अजगर और दो दोमुंहे सांप यानी कॉमन सैंड बोआ शामिल हैं. पुलिस ने खुद को एल्विश का खास आदमी बताने वाले राहुल को तो पकड़ लिया है, लेकिन एल्विश की तलाश अभी जारी है।
इस्तेमाल से जा सकती है जान
अब बात उस पहलू की, जिसके चलते ये मामला सुर्खियों में आया. सवाल ये है कि आखिर सांपों के जहर का इस्तेमाल लोग रेव पार्टी में नशे के लिए कैसे करते हैं? वो भी तब जब आम तौर पर सांपों के जहर बेहद खतरनाक होते हैं और किसी जहरीले सांप के काट लेने से महज एक से डेढ घंटे के अंदर इंसान की जान भी जा सकती है।
इस जहर का नशा सिर्फ भारत में
असल में नशे के आदी लोग तरह-तरह के नशों से किक लेने कोशिश करते हैं. लेकिन जैसे-जैसे नशे की आदत बढ़ती जाती है नशे के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ड्रग का असर भी कम होता जाता है, ऐसे में नशे का शिकार इंसान नए-नए किस्म के नशे की तलाश में रहता है. और तब वो ऐसी चीजों में भी नशा ढूंढता है, जो नशीला होने के साथ-साथ जहरीला भी हो. नशे के लिए सांपों के जहर का इस्तेमाल इसी नशाखोरी की एक कड़ी है. इंडियन जर्नल ऑफ फिजियोलॉजी एंड फार्माकोलॉजी की 2021 की एक रिपोर्ट के मुताबिक सांपों के जहर से नशाखोरी के मामले अब तक सिर्फ भारत में ही देखने को मिले हैं।
#WATCH | Nagpur: Maharashtra LoP and Congress MLA Vijay Wadettiwar says, “…We have come to know that Elvish Yadav is hiding in Mumbai. Mumbai Police should find him & action should be taken immediately. If he is hiding in Mumbai then whose shelter is he getting? Why do they… pic.twitter.com/trPsfbMaod
नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो यानी एनसीबी के अधिकारियों का कहना है कि ज्यादातर रेव पार्टी में नशे के लिए कोबरा सांप के जहर का ही इस्तेमाल होता है. कोबरा पूरे भारत में बहुतयात में पाए जाते हैं और सपेरे इन्हें आसानी से पकड़ लेते हैं. पहले इनका जहर निकालकर उन्हें सूखा कर पाउडर बना लिया जाता है और फिर उसे शराब या ऐसे ही दूसरे ड्रिंक्स में मिला कर लिया जाता है. कोबरा के जहर से बनी नशे की एक खेप की कीमत करीब 20 से 25 हजार रुपये की होती है. कोबरा के आधे लीटर जहर की कीमत लाखों में होती है और इसके जहर से किया जाने वाला नशा कई दिनों तक रहता है।
लैविश लाइफ के लिए फेमस हैं एल्विश
एल्विश यादव अपने यूट्यूब चैनल्स की बदौलत पहले ही सुर्खियों में थे. लेकिन बिग बॉस ओटीटी-2 में जीत हासिल करने के बाद तो मानों उनकी निकल पड़ी. फिलहाल एल्विश भले विवादों में घिरे हों, लेकिन वो अपनी अमीरी और लैविश लाइफ स्टाइल के लिए भी जाने जाते हैं. महज 26 साल की उम्र में एल्विश ने कैसे कमाई करोड़ों की दौलत?.
यूट्यूब की बदौलत कमाई शोहरत
असल में एल्विश यादव फेमस यूट्यूबर हैं, एल्विश यादव शॉर्ट फिल्में बनाते हैं. यूट्यूब की बदौलत ही एल्विश शोहरत के आसमान पर हैं।
एल्विश ने साल 2016 से यूट्यूब चैनल की शुरूआत की थी. एल्विश के पास दो चैनल हैं, ‘एल्विश यादव व्लॉग्स’ और ‘एल्विश यादव’. एल्विश के दोनों चैनलों पर 4.7 मिलियन और 10 मिलियन सब्सक्राइबर हैं. एक चैनल पर वह रोस्ट वीडियोज बनाते हैं. दूसरे चैनल पर डे-टूडे लाइफ की डिटेल्स फैंस के साथ शेयर करते हैं।
हंसराज कॉलेज से किया है बीकॉम
इसी साल अगस्त में एल्विश यादव बिग बॉस ओटीटी के विजेता बने और सुर्खियों में छा गए थे. 25 साल के यूट्यूबर एल्विश यादव गुरुग्राम के पास, वजीराबाद गांव के रहने वाले हैं. वजीराबाद गांव में उनका परिवार रहता है. वह गुरुग्राम में अपने दोस्तों के साथ फ्लैट पर रहते हैं. एल्विश फाउंडेशन भी चलाते हैं. इंस्टाग्राम प्रोफाइल के मुताबिक एल्विश ‘सिस्टम क्लोदिंग’ के संस्थापक हैं. एल्विश ने दिल्ली के हंसराज कॉलेज से बीकॉम में ग्रेजुएशन किया है।
कई बेशकीमती प्रॉपर्टी के मालिक
दरअसल एल्विश को उनकी लग्जरी लाइफ के लिए भी अलग से पहचान मिली हुई है. एल्विश को महंगी-महंगी गाड़ियों का बेहद शौक है. इस यूट्यूबर के पास लग्जरी पोर्श गाड़ी है, जिसकी कीमत 1.75 करोड़ रुपये है. बताया जाता है कि एल्विश के पास गुरुग्राम में कई फ्लैट हैं. वजीराबाद में 4 मंजिला मकान है. इसके अलावा वह एक नया घर बनवा रहे हैं, जिसकी कीमत करोड़ों में बताई जा रही है. आए दिन अपने चैनल पर एल्विश अपने नए घर की झलक शेयर करते रहते हैं. एल्विश ने कई बार अपने वीडियो में बताया है कि उनके नए घर में पिछले कई सालों से काम चल रहा है. इससे तैयार होने में करीब एक साल का समय और लगेगा।
विवादों में कई बार सामने आया नाम
इन सबके बावजूद एल्विश का जिक्र सुर्खियों में अक्सर किसी न किसी विवाद की वजह से ज्यादा रहता है. बिग बॉस का खिताब जीतने के बाद जब एल्विश ने हरियाणा के मुख्यमंत्री के साथ मंच साझा किया था उसकी चर्चा कई दिनों तक सुर्खियों में होती रही थी. अब सवाल यही उठ रहा है कि क्या एल्विश को उनकी इस करतूत के खुलासे के बाद भी गिरफ्तार किया जाएगा या यहां भी उनका नाम और उनकी शोहरत उन्हें कानून के शिकंजे से बचाकर उनके बेहद खास होने का सबूत देगी। (एएमएपी)
पाकिस्तान के हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह अमेरिकी राजधानी में अपनी कीमती राजनयिक संपत्ति बेचने को मजबूर है। वाशिंगटन के प्रतिष्ठित आर. स्ट्रीट पर मौजूद इमारत, जो 1950 के दशक से 2000 के दशक तक दूतावास का रक्षाखंड था, अब बाजार में बिक्री के लिए तैयार है। हालांकि अधिकारियों ने कहा है कि दूतावास की पुरानी या नई इमारत बिकने योग्य नहीं है।
इमारत अब बिक्री के लिए बाजार में
एक अधिकारी के हवाले से पुष्टि की है कि यह इमारत अब बिक्री के लिए बाजार में है और इसके लिए उचित प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है। दूतावास ने समाचार पत्रों में बिक्री का बाकायदा विज्ञापन दिया है और कई बोलियां प्राप्त की हैं। हालांकि अधिकारी ने कहा कि अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। दूतावास ने कहा है कि उसने मूल्यांकनकर्ता से परामर्श लिया है ताकि यह आकलन किया जा सके कि उनके लिए क्या बेहतर है। यानी इमारत को ऐसे ही बेच दिया जाए या फिर रेनोवेशन के बाद। दूतावास के अधिकारी ने कहा, हम जल्दबाजी में नहीं हैं और ऐसा कोई समझौता नहीं करेंगे जिससे पाकिस्तान को नुकसान हो। मौजूदा दूतावास 2000 के दशक की शुरुआत में बनी नई इमारत में है जबकि पुराना दूतावास भारतीय दूतावास के पास मैसाचुसैट्स एवेन्यू पर शहर के केंद्र में है। हालांकि किसी ने नया दूतावास बेचने का सुझाव नहीं दिया लेकिन पुराने दूतावास की बिक्री के बारे में कुछ समय से रिपोर्ट चल रही है।
जीर्णोद्धार पर खर्च किए 70 लाख डॉलर
पाकिस्तान में वाशिंगटन स्थित पुरानी इमारत के जीर्णोद्धार को लेकर जांच की मांग चल रही है। दरअसल इसके जीर्णोद्धार पर 70 लाख डॉलर खर्च कर दिए गए हैं जबकि आर. स्ट्रीट पर मौजूद इमारत के जीर्ण-शीर्ण होने के बावजूद इसका कभी जीर्णोद्धार तक नहीं किया गया। जीर्णोद्धार पर खर्च की गई राशि ने कई लोगों को चौंका तक दिया है। स्थानीय निवासी जीर्ण-शीर्ण इमारत को सुरक्षा खतरा मानकर इसे गिराने या जीर्णोद्धार करने के पक्ष में हैं। ऐसे में सरकार द्वारा किए गए गलत खर्च सवालों के घेरे में हैं।
कर्मचारियों को भुगतान भी मुश्किल
एक पूर्व राजदूत ने बताया कि दोनों भवन करीब 20 वर्ष से खाली पड़े हैं। दो राजदूत जलील अब्बास जिलानी और शेरी रहमान पुरानी इमारत बेचना चाहते थे लेकिन मीडिया में हंगामे के बाद वे पीछे हट गए। पूर्व राजदूत खुद खाली पड़ी इमारतों को बेचने के पक्ष में हैं क्योंकि इनकी हालत खराब है और कर्मचारियों को भुगतान करना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में देरी की तो इन्हें बेचना और भी मुश्किल होगा। (एएमएपी)
दीपावली पर्व को लेकर बाजारों में सजे मिट्टी के दीपक
नए जमाने की हवा भले ही पुराने रीति-रिवाजों को पीछे छोड़ने पर उतारू हो मगर दीपावली पर आज भी मिट्टी के एक छोटे से दीपक की लौ के आगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की चका-चौंध के बाजार की चमक फीकी ही है। कोई भी त्योहार हो, कुम्हारों के चाक और बर्तनों के बिना पूरे नहीं होते। ऐसी मान्यता है कि मिट्टी का दीपक जलाने से घर में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है।
Women from Udhampur are actively contributing to the Hon’ble Prime Minister’s “Vocal for Local” initiative. In the Tikri area of Udhampur, a group of 12 women have come together with the aim of promoting an eco-friendly Diwali this season by crafting diyas made from cow dung.… pic.twitter.com/nm5wQdCpe4
कुम्हार के चाक से बने खास दीये दीपावली में चार चांद लगाते हैं। दीपावली का त्योहार को कुछ दिन शेष है ऐसे में कुम्भकारों के चाक ने गति पकड़ ली है और मिट्टी के दीपक बनाने का काम तेज कर दिया है। जिसके चलते बाजारों में मिट्टी के रंग बिरंगे दीपकों के ढेर लगे हुए है और लोग इन्हे खरीदते नजर आए रहे है।
पांच तत्वों से मिलकर बनता है मिट्टी का दीपक
मिट्टी का दीपक पांच तत्वों से मिलकर बनता है जिसकी तुलना मानव शरीर से की जाती है। पानी, आग, मिट्टी, हवा तथा आकाश तत्व ही मनुष्य व मिट्टी के दीपक में मौजूद होते हैं। दीपक जलाने से ही समस्त धार्मिक कर्म होते हैं। दीपावली के शुभ अवसर पर मिट्टी के दीयों का ही अत्यंत महत्व है। वास्तु शास्त्र में इसका महत्व इस बात से है कि यदि घर में अखंड दीपक को जलाने व्यवस्था की जाए तो वास्तु दोष समाप्त होता है।
दीपावली पर इन दिनों कुम्हार बिक्री के लिए अलग-अलग वैरायटी के दीपक तैयार करने में लगे हुए हैं। इस बार महंगाई के चलते मिट्टी के दीयों में बढोतरी की गई है। कुम्हार रमेश ने बताया कि बाजार में ग्राहकों को 70 रुपये से 90 रुपये में सौ दीये दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दीया बनाना ही परेशानी का सबब नहीं बल्कि बिक्री करने में भी काफी दिक्कतें होती है। लोग इतनी कम कीमत के बाद भी मोलभाव करते हैं।
दीयों की जगह पहले चायनीज लड़ियों ने ले ली थी
एक समय ऐसा भी था जब मिट्टी के दीयों की जगह चायनीज लड़ियों ने ले ली थी और लोग मिट्टी के दीये कम खरीद रहे थे। लेकिन दो-तीन सालों में फिर से मिट्टी के दीयों का दौर लौट आया है। इस बार दीयों की वैरायटी भी इतनी है कि ग्राहक खरीदने से पहले कंफ्यूज हो रहे हैं कि क्या खरीदे। वहीं बाजारों में इस बार की स्थिति देखकर यह अंदाजा तो लगाया जा सकता है कि चीनी वस्तुओं की अनदेखी हो रही है। ग्राहक चीनी दीये लेने की बजाए लोकल दीये खरीद रहे हैं।
मिट्टी के दीपकों का ही दीपावली में महत्व होता है। इसे बच्चे व युवा खूब अच्छे से जान रहे हैं। लोगों की माने तो रौशनी के त्योहार का असली मजा दीपको की रौशनी से है, ना कि इलक्ट्रोनिक लड़ियों से। भगवान राम का स्वागत अयोध्यावासियों ने दीपक जलाकर ही किया था। शास्त्रों के अनुसार सरसों का तेल अथवा देशी घी डाल कर मिट्टी के दीपक जलाने से वातावरण शुद्ध होता है और मच्छरों का नाश होता है। दीपावली पर सभी को मिट्टी के दीपक जलाने चाहिए और लोगों को भी प्रेरित करना चाहिए।
पहले फ्री में मिलती थी मिट्टी अब एक हजार रुपये प्रति ट्रॉली
पिछले कई वर्षों से मिट्टी के बर्तन बनाने का कार्य करने वाले वृद्ध कैलाश ने बताया कि उनकी चौथी पीढ़ी मिट्टी से बर्तन बनाने का कार्य कर रही है। पिछले कई वर्षों से मिट्टी के दीपक बनाने में काम में बहुत उतार-चढ़ाव देखे है। कुछ वर्षों पूर्व मिट्टी के दीपक की मांग बिल्कुल कम हो गई थी। लोग अपने घरों में इलेक्ट्रानिक लडिय़ों से घरों को रोशन करने लगे थे। लेकिन चाइनीज वस्तुओं के बहिष्कार करने के अभियान के बाद से मिट्टी के दीपक की मांग एक बार फिर बढ़ गई है। लेकिन सरसों के तेल व दीपक के बढ़ते हुए भावों के कारण इनकी मांग अपेक्षाकृत कम है। उन्होंने बताया कि मिट्टी के बर्तन बनाने में लागत पहले की अपेक्षा काफी बढ़ गई है। कुछ समय पूर्व तक मिट्टी निःशुल्क मिल जाती थी। बैलगाड़ी पर जाकर मिट्टी ले आते थे तो उस पर लागत नहीं आती थी।
आज बर्तन बनाने वाली मिट्टी के भाव एक हजार रुपए प्रति ट्रॉली हो गए है। बर्तन को पकाने के लिए लकड़ी के भाव भी आसमान पर है। जिससे लागत अधिक आती है। उन्होंने बताया कि एक कारीगर एक दिन में एक हजार के लगभग दीपक बनाता है। बढ़ रही लागत को देखते हुए इस बार होलसेल के दामों में भी दीपक के दाम बढ़ाने की मजबूरी है। उन्होंने बताया कि आगामी पीढ़ी इस कारीगरी के कार्य से दूर होती जा रही है। कई परिवार मिट्टी के बर्तन बनाने के काम को छोड़ गए है
ऐसे देते है मिट्टी को बर्तन का आकार
मिट्टी को बर्तन का आकार देने में तीन से चार दिन लगते है। मिट्टी को एक बर्तन में डाल कर भीगने के लिए छोड़ दिया जाता है। लगभग 48 घंटे बाद उसे उस बर्तन से निकालकर गूंथकर सुखाया जाता है। इसके बाद अगले दिन उसे चाक पर चढ़ाया जाता है,जिसके बाद उसे घड़ा,सुराही,दीपक या अन्य किसी मिट्टी के बर्तन का आकार दिया जाता है। मिट्टी के बर्तन को सूखने के बाद उसे पक्का करने के लिए आग पर पकाया जाता है। उसके बाद कई कारीगर उस पर रंग या अन्य कारीगरी भी करते है। जिसके बाद वह बर्तन बाजार में बिकने के लिए तैयार हो जाता है।
मिट्टी के दीये बेचने वाले दुकानदारों ने बताया कि इस बार की दीपावली पर काफी बिक्री होने उम्मीद है। उन्होंने बताया कि पिछली दीपावली पर तो जब वे घरों में दीये बेचने जाते थे तब भी बहुत कम बिक्री होती थी लेकिन इस बार तो लोग उनकी दुकान पर आकर दीयों के साथ साथ अन्य मिट्टी का सामान भी खरीद रहे हैं। उल्लेखनीय है कि मिट्टी को मंगल ग्रह का प्रतीक माना जाता है। मंगल साहस, पराक्रम में वृद्धि करता है और तेल को शनि का प्रतीक माना जाता है। शनि को भाग्य का देवता कहा जाता है। मिट्टी का दीपक जलाने से मंगल और शनि की कृपा आती है। (एएमएपी)
पेरू में चल रहा राजनीतिक संकट अब हिंसक हो उठा है। देश में आपातकाल लगाए जाने की घोषणा के बाद अब पूर्व राष्ट्रपति पेड्रो कैस्टिलो को जेल भेज दिया गया है। इस बीच देश में जारी हिंसा में आठ लोगों की मौत हो गई है और दर्जनों लोग घायल हुए हैं।
राजनीतिक संकट के बीच सात दिसंबर को तत्कालीन राष्ट्रपति पेड्रो कैस्टिलो को हटा दिया गया था। उनके हटाए जाने के बाद देश में हिंसक घटनाएं बढ़ गई हैं। सड़क पर उतरे कैस्टिलो समर्थक लगातार पुलिस से भिड़ रहे हैं। पुलिस व कैस्टिलो समर्थकों के बीच हिंसा में आठ लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हुए हैं। पुलिस ने हिंसा भड़काने के लिए पूर्व राष्ट्रपति पेड्रो कैस्टिलो को जिम्मेदार मानकर गिरफ्तार कर लिया है। इसके बाद पेरू के सर्वोच्च न्यायालय ने कैस्टिलो को 18 माह के लिए जेल भेजने का आदेश दिया है। उन पर देश में उन पर देश में विद्रोह भड़काने व साजिश रचने के आरोप में मुकदमा चलाया जाएगा।
पेरू के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश कार्लोस चेकले ने गुरुवार को पूर्व राष्ट्रपति पेड्रो कैस्टिलो को जेल भेजने का आदेश जारी किया। उन्हें 18 माह तक न्यायिक हिरासत में रखने के आदेश जारी किए गए हैं। इससे पहले पेरू की राजधानी लीमा स्थित अभियोजन कार्यालय ने कोर्ट से मुकदमे के दौरान पेड्रो कैस्टिलो को 18 महीने तक हिरासत में रखने का अनुरोध किया था। कैस्टिलो की गिरफ्तारी के बाद पेरू में अशांति फैल गई थी। उनके समर्थकों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए थे।
इसे देखते हुए कैस्टिलो के स्थान पर राष्ट्रपति बनीं डिना बोलुआर्ते ने देश में 30 दिन के लिए आपातकाल लगा दिया। हड़ताल व आंदोलन के कारण पेरू को रोजाना 2.60 करोड़ डॉलर का नुकसान उठाना पड़ रहा है। पेरू की नई राष्ट्रपति ने आंदोलनकारियों से बातचीत की अपील की है। उन्होंने कहा है कि देश की नई सरकार शांति, सद्भाव और भाईचारे के साथ रहते हुए देश की जरूरतों और लक्ष्यों का पाना चाहती है। (एएमएपी)
बीते रविवार को यमुनोत्री हाइवे पर सिलक्यारा सुरंग के धंसने की घटना ने उत्तराखंड में निर्माणाधीन चार धाम परियोजना और अन्य सड़क निर्माण कार्यों की सुरक्षा मानकों को सवालों के घेरे में ला दिया है। इसको लेकर शासन भी उलझन में दिखाई दे रहा है। एक ओर निर्माण कार्यों में सुरक्षा की अनदेखी हो रही है तो दूसरी ओर यह तथ्य भी सामने आया है कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में निर्माण कार्य शुरू करने से पहले आवश्यक तकनीकी और भूगर्भीय सर्वे नहीं किया जा रहा है या फिर सुरंग निर्माण की गुणवत्ता को परखा नहीं जाता है, जिससे इस तरह की दुर्घटनाएं हो रही हैं।
सिलक्यारा टनल धंसने की घटना पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष मनीष राणा ने बताया कि कम्पनी ने सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किये थे। उनका कहना है कि उन्होंने रविवार को खासकर दिवाली के दिन निर्माण कार्य किये जाने पर भी सवाल खड़ा किया है। इसमें मशीन फंस गई थी। आरोप है कि इस मशीन को निकालने के लिए दूसरी टनल बनाई गई तो उसमें अवैज्ञानिक तरीके अपनाए गए। बताया जाता है कि टनल के अवैज्ञानिक तरीके से निर्माण के कारण ही जोशीमठ दरकने लगा और जमीन धंसने लगी थी। इस घटना के बाद धामी सरकार ने हिमालय क्षेत्र के सभी शहरों की कैरिंग कैपेसिटी की जांच के आदेश दिये थे, लेकिन भूस्खलन के लिए जिम्मेदार सबसे बड़ी वजह यानी टनल निर्माण को लेकर किसी तरह के जांच की बात नहीं की गई।
सरकार के पास इसका भी आकड़ा नहीं है कि टनल के निर्माण से पहले संबंधित क्षेत्र का सेफ्टी ऑडिट होता है या नहीं। हिमालय के पहाड़ कच्चे हैं और यहां मामूली भूगर्भीय हलचल भी भूस्खलन पैदा कर सकता है। इस कारण टनल जैसे निर्माण कार्यों से पहले यह जांचना जरूरी होता है कि संबंधित क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना टनल के निर्माण के लायक है या नहीं। यदि विपक्ष के आरोपों को नजरअंदाज भी कर दिया जाए तो यह सच है कि उत्तराखंड में सुरंगों के लगातार धंसने की घटनाएं हो रही हैं। इसी वर्ष जनवरी में जब जोशीमठ के धंसने का मामला सामने आया तो तपोवन विष्णुगाड पावर प्रोजेक्ट के लिए निर्माणाधीन टनल को इसका जिम्मेदार माना गया। दरअसल, इस टनल में बोरिंग किया गया है। जांच में सब कुछ साफ हो जाएगा।
#WATCH | Uttarakhand | On Uttarkashi Tunnel accident, Prashant Kumar, Circle Officer of Uttarkashi says, “40 people are trapped inside the tunnel. All are safe, we have provided oxygen and water to them…”
कुल मिलाकर यदि टनल के निर्माण के साथ ही ह्यूम पाइप भी साथ चलती है। यदि भूस्खलन जैसी कोई स्थिति पैदा होती है तो मजदूर उसके माध्यम से सुरक्षित बाहर निकल जाते हैं। उन्होंने कम्पनी पर आरोप लगाया है कि मजदूरों की सुरक्षा की अनदेखी की गई है। आपदा प्रबंधन सचिव रंजीत सिन्हा ने भी माना है कि सेफ्टी ऑडिट जरूर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि चारधाम परियोजना से जुड़े निर्माण कार्यों में ऐसा हुआ है या नहीं, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। जहां तक यमुनोत्री मार्ग पर सुरंग धंसने का मामला है तो इसके लिए तकनीकी समिति को मौके पर भेजा गया है।
सिलक्यारा टनल घटनास्थल पर पहुंचे आपदा प्रबंधन सचिव रंजीत सिन्हा ने कहा कि सुरंग के निर्माणाधीन क्षेत्र में मुलायम चट्टान होने की बात सामने आई है। यह चट्टानें दबाव नहीं झेल पाईं और इस कारण भूस्खलन हुआ है। उन्होंने कहा कि इसके निदान के उपाय बाद में किये जाएंगे। फिलहाल हम राहत व बचाव कार्य को प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि अगले 24 से 48 घंटे में सभी मजदूरों को सुरक्षित निकाल लिया जाएगा। सुरंग में प्रभावित क्षेत्र में पांच से छह दिनों तक के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन है। (एएमएपी)
चीन में एक बार फिर कोरोना का कहर बढ़ता जा रहा है। कोविड का खौफ कुछ इस कदर हावी है कि लोग खुद को बचाने के लिए घरों में कैद हो गए हैं। लिहाजा सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। चीन के कई शहर ऐसे हैं, जहां कोविड के केसों में बेतहाशा बढ़ोतरी हो रही है। आलम ये है कि कई शहरों में अस्पतालों में एंटीजन टेस्ट किट की कमी आ गई है, श्मशान घाटों पर लंबी कतारें लगी हुई हैं। इतना ही नहीं, एक्सपर्ट कह रहे हैं कि चीन को तीन लहरों से अलर्ट रहना होगा, क्योंकि इस दौरान केस बढ़ सकते हैं।
चीन के प्रमुख महामारी विशेषज्ञ वू ज़ुन्यो ने चेतावनी दी है कि चीन में कोरोना की तीन लहर (वेव) आएंगी। पहला मौका क्रिसमस, दूसरा अवसर न्यू ईयर और तीसरा मौका लूनर न्यू ईयर के बाद होगा। क्योंकि लोग इन मौकों पर अपने घरों की ओर लौटते हैं, ऐसे में लापरवाही बरतने पर खतरा कई गुना बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि कोरोना की तीन लहरों में से पहली वेव इसी सर्दी में आएगी।
दरअसल, चीन की शी जिनपिंग सरकार ने कोविड को लेकर अपनी जीरो कोविड पॉलिसी को देश में तमाम विरोधों के बाद खत्म कर दिया था। इसके बाद कोरोना के केसों में अप्रत्याशित तौर पर इजाफा हुआ है। जानकारी के मुताबिक चीन के उतर से लेकर दक्षिण तक फैले शहरों में कोरोना का ग्राफ बढ़ता जा रहा है।
खानपान, पार्सल और डिलीवरी तक की किल्लत
चीन की राजधानी बीजिंग में कोरोना केसों की बात करें तो यहां कोविड के ओमिक्रॉन वैरिएंट ने खलबली मचा दी है। यहां खानपान से लेकर पार्सल और डिलीवरी तक की सेवाएं बाधित हो चुकी हैं। इतना ही नहीं, हालात ये हैं कि 22 मिलियन की आबादी वाले शहर में अंतिम संस्कार के लिए भी श्मशान में लंबी लाइनें लग रही है। क्योंकि यहां काम करने वाले लोग भारी संख्या में कोविड पॉजिटिव पाए जाने की वजह से छुट्टी पर चले गए हैं।
श्मशान घाट पर लगी लंबी कतारें
बीजिंग का सबसे बड़ा श्मशान बाबोशान के हालात डराने वाले हैं। यहां पार्किंग के लिए भी जगह नहीं बची है। श्मशान में काम करने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि अभी शव यात्रा के लिए बुकिंग करना मुश्किल है। इसलिए लोग अपने परिजनों या रिश्तेदारों के शव निजी वाहनों से ही ला रहे हैं। आलम ये है कि यहां श्मशान घाट से दिनभर धुआं उठता रहता है।
क्रिसमस और न्यूईयर की तैयारियां भी फीकीं
जानकारी के मुताबिक चीन के उत्तर-पश्चिम में स्थित जियान शहर में सब-वे खाली दिखाई दे रहे हैं, जबकि देश के वाणिज्यिक केंद्र शंघाई में भी क्रिसमस औऱ न्यू ईय़र के बाद कोई खास चहल-पहल नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां उत्सव का माहौल नहीं है। लोग सहमे हुए हैं। वहीं चीन के चेंगदू में सड़कें सुनसान हैं, आलम ये है कि अस्पतालों में एंटीजन टेस्ट किट की भी कमी हो गई है।
ये तीन लहरें बढ़ा सकती हैं टेंशन
चीन के अधिकारियों ने कहा कि सोमवार से अधिकांश स्कूलों को बंद कर दिया जाएगा। स्टूडेंट्स से कहा है कि वह घर से ही पढ़ाई करें। उधर, हांग्जो में अधिकांश स्कूलों से कहा गया है कि शीतकालीन सेमेस्टर जल्दी खत्म करें। साथ ही एजुकेशन अथॉरिटी ने कहा कि गुआंगज़ौ में जिन स्कूलों में पहले से ही ऑनलाइन क्लास चल रही है, उन्हें इसी फॉरमेट में कक्षाओं का संचालन करना होगा।
बीजिंग में चीनी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र के प्रमुख महामारी विज्ञानी वू ने कहा कि इस सर्दी में कोरोना का कहर चरम पर होगा और लगभग तीन महीनों तक तीन लहरों का सामना करना होगा।
इन दिनों में बरतनी होगी सावधानी
पहली लहर दिसंबर के मध्य से जनवरी के मध्य तक चलेगी, जो कि बड़े पैमाने पर शहरों को प्रभावित करेगी। जबकि दूसरी लहर 2023 में जनवरी के अंत से फरवरी के मध्य तक शुरू होगी, उन्होंने कहा कि चीन में लूनर न्यू ईयर के चलते कोरोना के केस बढ़ सकते हैं। जबकि तीसरी लहर फरवरी के अंत से मार्च के मध्य तक चलेगी, क्योंकि लोग छुट्टी के बाद काम पर लौटेंगे।
बूस्टर डोज लगवाने की अपील
वू ने कहा कि कोरोना के गंभीर मामलों में पिछले वर्षों की तुलना में गिरावट आई है और वैक्सीनेशन भी तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि बूस्टर डोज जरूर लगवाएं।
अमेरिका ने कहा- 2023 में 10 लाख से ज्यादा मौतें हो सकती हैं
अमेरिका स्थित एक शोध संस्थान ने इस सप्ताह कहा कि देश में मामलों का विस्फोट देखा जा सकता है और चीन में 2023 में 10 लाख से अधिक लोग कोविड से मर सकते हैं। (एएमएपी)
उत्तर प्रदेश के संभल में पिछले महीने शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग के दो सदस्यों ने रविवार को मस्जिद सहित शहर के हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा किया।
आयोग के प्रमुख एवं इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश देवेंद्र कुमार अरोड़ा और सेवानिवृत्त आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) अधिकारी अरविंद कुमार जैन ने कड़ी सुरक्षा के बीच मस्जिद के पास कोट गर्वी इलाके में हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा किया।
आयोग के तीसरे सदस्य पूर्व आईएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा) अधिकारी अमित मोहन प्रसाद इस दौरान मौजूद नहीं थे।
बाद में, मुरादाबाद के मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह ने कहा, ‘आज जांच आयोग के अध्यक्ष और एक अन्य सदस्य ने घटनास्थल का दौरा किया। उनका मुख्य उद्देश्य स्थल का निरीक्षण करना था। उन्होंने उन क्षेत्रों का दौरा किया जहां गड़बड़ी हुई थी। टीम ने घटनास्थल एवं मस्जिद की जांच की और वहां मौजूद कुछ लोगों से बात की। टीम फिर से दौरा करेगी और दौरे का पूरा कार्यक्रम घोषित किया जाएगा। वे निश्चित रूप से दोबारा आएंगे।’
उन्होंने कहा, ‘संभल में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है और हालात पर कड़ी नजर रखी जा रही है। हालात तेजी से स्थिर हो रहे हैं। फिलहाल, जिलाधिकारी के आदेश 10 दिसंबर तक प्रभावी हैं और उसके बाद किसी पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। हम साक्ष्य एकत्र करने की प्रक्रिया में हैं और अब तक इसमें शामिल 400 व्यक्तियों की पहचान कर चुके हैं।’
सिंह उस आदेश का हवाला दे रहे थे, जिसके तहत कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हिंसा प्रभावित संभल शहर में नेताओं, सामाजिक संगठनों या जनप्रतिनिधियों सहित बाहरी लोगों के सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना प्रवेश पर 10 दिसंबर तक रोक लगाई गई है।
इस बीच, शाही जामा मस्जिद के इमाम आफताब हुसैन वारसी ने कहा, ‘टीम करीब 15 मिनट तक रुकी और मस्जिद का निरीक्षण किया।’
मस्जिद प्रबंध समिति के सचिव मसूद फारूकी ने कहा, ‘टीम ने हमसे कुछ नहीं पूछा। वे केवल जामा मस्जिद देखने आए थे और उसने घटनास्थल का दौरा किया था। उन्होंने कहा कि वे बाद में बयान लेंगे।’
आयोग के सदस्यों ने हालांकि सुबह के दौरे के समय मीडिया के किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। उनके साथ मुरादाबाद के मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह, पुलिस उपमहानिरीक्षक मुनिराज जी, संभल के जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार भी थे।
मंडलायुक्त ने शनिवार को बताया था कि अरोड़ा और जैन एक दिन पहले ही मुरादाबाद पहुंच गए थे तथा प्रसाद के संभल में उनके साथ दौरे में शामिल होने की उम्मीद थी।
संभल में अदालत के आदेश पर मुगलकालीन शाही जामा मस्जिद का सर्वेक्षण किए जाने के दौरान 24 नवंबर को हिंसा भड़क गई थी। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी और अनेक अन्य घायल हो गए थे। सर्वेक्षण का आदेश एक याचिका पर दिया गया था जिसमें दावा किया गया था कि मस्जिद स्थल पर कभी हरिहर मंदिर हुआ करता था।
आयोग को दो महीने के भीतर अपनी जांच पूरी करने का निर्देश दिया गया है। इस समयसीमा को बढ़ाने के लिए सरकार की मंजूरी की जरूरत होगी। आयोग इस बात की जांच करेगा कि 24 नवंबर को हुई हिंसक झड़पें किसी सुनियोजित आपराधिक साजिश का हिस्सा थीं या नहीं। साथ ही स्थिति को संभालने में पुलिस और प्रशासन की तैयारियों की भी जांच होगी।
आयोग हिंसा के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों का भी विश्लेषण करेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों की सिफारिश करेगा।