संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा से सांसदों के निलंबन के बाद भाजपा के संसदीय दल की मंगलवार को बैठक हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों को संबोधित भी किया। उन्होंने संसद की सुरक्षा में सेंध की घटना पर विपक्षी पार्टियों को घेरते हुए कहा, “कुछ पार्टियां संसद में हुई घुसपैठ का समर्थन कर रही थीं। यह सेंध लगने जितनी ही खतरनाक बात है।” पीएम ने कहा कि जो भी लोग लोकतंत्र पर भरोसा करते हैं, उन्हें इस सुरक्षा में सेंध की साझा तौर पर आलोचना करनी चाहिए थी।
#WATCH | Opposition MPs, who were suspended from the Parliament today for the remainder of the Winter Session, protest on the stairs to the Parliament.
33 MPs from Lok Sabha and 34 from Rajya Sabha were suspended today; the matter of suspension of 3 MPs from Lok Sabha and 11… pic.twitter.com/7Sz4JHySJz
उन्होंने कहा कि जनता सांसदों को चुनती है और संविधान के अनुसार उन्हें मुद्दे उठाने का अधिकार है, लेकिन हंगामा नहीं करना चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि विपक्ष का अजेंडा यह है कि संविधान और संसदीय संस्थाओं का अपमान किया जाए। यह दुख की बात है। एक अन्य नेता ने कहा कि पीएम ने पार्टी के सांसदों से कहा है कि वे विरोध के जवाब में मर्यादा न तोड़ें। विपक्ष के नेताओं को जवाब देने में अपनी भाषा को मर्यादित रखें। उन्होंने कहा कि एक पार्टी के तौर पर भाजपा संविधान का सम्मान करेगी और संसदीय नियमों को बनाकर रखेगी। हमें अपने जनादेश का सम्मान करना है।
पीएम ने विपक्षी गठबंधन पर कसा तंज
लोकसभा चुनाव में भाजपा को चुनौती पेश करने की कोशिश कर रहे इंडिया गठबंधन की बैठक को लेकर भी पीएम मोदी ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष का लक्ष्य उनकी सरकार को उखाड़ फेंकना है, लेकिन उनकी सरकार का लक्ष्य देश का उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करना है। पीएम मोदी ने कहा कि उनका यही आचरण रहा तो 2024 के लोकसभा चुनावों में उनकी संख्या और कम हो जाएगी और इससे भाजपा को फायदा होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि विपक्षी दल हालिया विधानसभा चुनावों में अपनी हार से हताश और निराश हैं और इसलिए संसद की कार्यवाही बाधित कर रहे हैं।
विपक्ष का रवैया संसद में चूक की घटना से भी ज्यादा खतरनाक
बैठक में हुई चर्चा की जानकारी केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी दी। उन्होंने बताया कि पीएम मोदी ने संसद की सुरक्षा में चूक पर भी बात की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र पर भरोसा रखने वाला कोई भी शख्स इसकी निंदा करेगा। लेकिन कुछ दल जो हाल के चुनाव में हार झेल चुके हैं, वे ऐसी भाषा बोल रहे हैं, जिससे लगता है कि वे इस घटना का समर्थन कर रहे हैं। विपक्ष का ऐसा रवैया तो घटना से भी ज्यादा खतरनाक है। गौरतलब है कि विपक्ष लगातार इस मांग पर अड़ा हुआ है कि लोकसभा में दो युवकों के कूदने और बाहर हंगामे को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी खुद या फिर होम मिनिस्टर अमित शाह सदन में बयान दें।(एएमएपी)
आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका ने घोषणा की है कि वह तकनीकी और सामरिक रूप से मजबूत और संतुलित रक्षा बल तैयार करने के लिए वर्ष 2030 तक सेना की मौजूदा ताकत को घटाकर आधा कर देगा। श्रीलंकाई सरकार ने 2023 के बजट में स्वास्थ्य और शिक्षा की तुलना में सैन्य खर्च के लिए अधिक आवंटन की आलोचना के बीच यह घोषणा की है।रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि वर्ष 2030 तक सैन्य संख्या बल को घटाकर 100,000 तक किया जाएगा, जबकि वर्तमान में स्वीकृत संख्या 200,783 है। बयान में कहा गया है कि अगले साल तक सैन्य संख्या बल 135,000 तक सीमित हो जाएगी।
श्रीलंका के रक्षा मंत्री प्रमिथ बंडारा टेनाकून ने एक बयान में कहा कि रणनीतिक ब्लूप्रिंट का उद्देश्य आगामी सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए वर्ष 2030 तक तकनीकी और सामरिक रूप से मजबूत और संतुलित रक्षा बल को तैयार करना है। बता दें, श्रीलंकाई सरकार ने वर्ष 2023 के बजट में 539 अरब रुपये का रक्षा आवंटन किया, जिसकी आलोचना हुई, क्योंकि श्रीलंका 1948 के बाद से अपने सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहा है।
विदेशी मुद्रा की कमी के कारण श्रीलंका ईंधन, उर्वरक और दवाओं सहित प्रमुख आयात को वहन करने में असमर्थ था। स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए, 2023 के बजट में 300 अरब रुपये से अधिक का आवंटन किया गया है।
हालांकि, श्रीलंका ने वर्ष 2009 में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (एलटीटीई) के साथ संघर्ष समाप्त होने के बाद से लगभग 400,000 संख्या बल वाली सेना की ताकत को आधा कर दिया था। राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने पिछले साल कहा था कि नई चुनौतियों का सामना करने के लिए श्रीलंका की सेना को तैयार करने के लिए सैन्य रणनीति में सुधार की आवश्यकता है। तमिल अल्पसंख्यक और मानवाधिकार समूह उत्तरी और पूर्वी प्रांतों में संघर्ष क्षेत्रों में सेना की कमी की मांग कर रहे हैं। (एएमएपी)
प्रधानमंत्री की नसीहत के बाद पठान और दूसरी फिल्म्स के सीन पर कड़ी प्रतिक्रिया देते आए मध्यप्रदेश के गृहमंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा ने अब चुप्पी साध ली है। मीडिया ने जब उनसे प्रधानमंत्री के बयान का जिक्र करते हुए फिल्म ‘गांधी-गोडसे एक युद्ध’ पर सवाल किया तो वे खामोश हो गए और कान छूते नजर आए।दरअसल, दिल्ली में हुई भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पार्टी नेताओं को मुसलमानों और फिल्मों पर अनावश्यक बयानबाजी न करने की नसीहत दी है। गृहमंत्री डा. मिश्रा ने भोपाल में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान पत्रकारों ने प्रधानमंत्री द्वारा फिल्मों पर बेवजह बयानबाजी से बचने की नसीहत को लेकर सवाल पूछा तो डा. मिश्रा ने कहा कि उन्होंने (पीएम) ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका हर शब्द हमारे लिए शिरोधार्य है। सारे कार्यकर्ता वहां से प्रेरणा लेकर आए हैं।
इसके बाद पत्रकारों ने राजकुमारी संतोषी की फिल्म ‘गांधी-गोडसे एक युद्ध’ को लेकर मप्र में हो रहे विरोध पर गृहमंत्री ने सवाल पूछा, तो उन्होंने चुप्पी साध ली। गृहमंत्री से पत्रकारों ने दूसरी बार फिर पूछा कि गांधी-गोडसे को लेकर एनएसयूआई विरोध कर रही है, हिंदूवादी संगठन इस फिल्म के समर्थन में हैं। इस पर आप क्या कहेंगे? गृह मंत्री ने इस सवाल का भी जवाब नहीं दिया। वे आंख पर हाथ फेरते हुए अन्य मुद्दों पर बात करने लगे।
मप्र में ‘गांधी-गोडसे एक युद्ध’ फिल्म का कांग्रेस विरोध कर रही है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के बयान के बाद सार्वजनिक तौर पर मध्यप्रदेश में भाजपा नेताओं पर कांग्रेस ने तंज कसना शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस ने नरोत्तम मिश्रा, रामेश्वर शर्मा, विश्वास सारंग का नाम लेते हुए कहा कि यही बयानबाजी करते हैं।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी में कहा था कि मुस्लिम समाज के बारे में गलत बयानबाजी न करें। पार्टी कार्यकर्ता देश के अल्पसंख्यक समाज से बिना वोट की अपेक्षा के मिलें। चाहे वे मुस्लिम ही क्यों न हों। अगले लोकसभा चुनाव में सिर्फ 400 दिन बचे हैं। ऐसे में पार्टी पदाधिकारियों और हर एक कार्यकर्ता को एक-एक वोटर से मिलने उनके दरवाजे तक जाना चाहिए।
कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष केके मिश्रा ने कहा कि अच्छा होता कि प्रधानमंत्री जी नरोत्तम मिश्रा, रामेश्वर शर्मा, विश्वास सारंग का नाम भी ले लेते। मेरा सीधा आरोप है कि भाजपा के नेता फिल्म निर्माताओं से साठगांठ कर इस तरह की बयानबाजी करते हैं। इसके पीछे उनका मकसद आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनैतिक भी हो सकता है। मैं सीधे तौर पर कहना चाहता हूं कि उसका कुछ अंश भाजपा के नेताओं को मिलता है। अन्यथा ऐसा कोई कारण नहीं है। जिन पर कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी है, वे लोग दीपिका पादुकोण की बिकनी को देखने में व्यस्त रहते हैं।
नरोत्तम के पुराने बयान
फिल्म पठानः गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा था कि पठान फिल्म के गाने में अभिनेत्री की वेशभूषा और दृश्यों को ठीक करें, नहीं तो फिल्म को प्रदेश में अनुमति दी जाए या नहीं? इस पर फैसला किया जाएगा। दूषित मानसिकता के कारण फिल्माया गया गाना है। पठान के गाने ‘बेशर्म रंग’ में एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण भगवा बिकनी में दिखाई दीं। इस पर ही गृहमंत्री ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी।
फिल्म ‘आदिपुरुष’: नरोत्तम मिश्रा ने 3 महीने पहले आदिपुरुष के डायरेक्टर को लेटर लिखा। उन्होंने कहा फिल्म के टीजर में हिंदू धर्म की आस्था पर कुठाराघात और धार्मिक भावना को आहत करने वाले कई आपत्तिजनक सीन है। हनुमान जी के अंगवस्त्र चमड़े के दिखाए हैं। फिल्म में साउथ सुपर स्टार प्रभास, सैफ अली खान और कृति सेनन मुख्य भूमिका में हैं।
आमिर खान को दी थी नसीहत
आमिर खान की फिल्म लाल सिंह चड्ढा का भी रिलीज से पहले विरोध हुआ था। ट्विटर पर बायकॉट ट्रेंड हुआ। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने आमिर खान को नसीहत दी थी। उन्होंने कहा था, किसी धर्म विशेष को सॉफ्ट टारगेट बनाकर फिल्में क्यों बनाई जाती हैं।इसके बाद इस तरह के विरोध का सामना करना पड़ता है और माफी मांगनी पड़ती है।
स्वरा भास्कर को बताया टुकड़े-टुकड़े गैंग की सदस्य
जब राहुल गांधी की यात्रा मध्यप्रदेश में थी, तब एक्ट्रेस स्वरा भास्कर इससे जुड़ीं। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा था, ॠचा चड्डा ने सेना के खिलाफ जो बयान दिया, उसका स्वरा भास्कर ने समर्थन किया था। इसके अलावा स्वरा भास्कर ने सेना में मॉब लिंचिंग, हॉरर किलिंग जैसे मुद्दों पर भी टिप्पणी की थी। स्वरा भास्कर पाकिस्तान के समर्थन में भी कई बार विवादित बयान दे चुकी हैं। भारत जोड़ो यात्रा में ‘टुकड़े- टुकड़े’ गैंग शामिल हो रही है। यह भारत ‘जोड़ो’ नहीं, भारत ‘तोड़ो’ का समर्थन कर रही हैं। (एएमएपी)
ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में 20 लाख करोड़ के एमओयू की उम्मीद।
यूपी में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए यूपी को अब तक लगभग 20 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। इससे बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर मिलेंगे। ये निवेश प्रस्ताव देश-विदेश में हुए रोड शो और प्रदेश के जिलों को मिलाकर हैं। विदेश में हुए रोड शो से लगभग 7.2 लाख करोड़ रुपये का निवेश मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
देश के विभिन्न राज्यों में चल रहे रोड शो की आखिरी कड़ी में चंडीगढ़ में निवेशकों को खासा उत्साह दिखाया। अपर मुख्य सचिव औद्योगिक विकास अरविंद कुमार ने बताया कि 11 हजार करोड़ रुपये के 29 एमओयू किए गए हैं।
इनके अमल पर राज्य में 21 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। एशियन सीमेंट ने यूपी में सीमेंट प्लांट लगाने का ऐलान किया है जबकि बायोजेंटा लाइफसाइंस प्राइवेट लिमिटेड ने यूपी में फार्मूलेशन और एपीआई प्लांट लगाने के लिए दो एमओयू किए हैं। वहीं सीतापुर में निवेशकों ने 26 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव दिए।
रोड शो कार्यक्रम में शामिल हुए निवेशकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संकल्प को सिद्धि तक ले जाने की बात कही। औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता ‘नन्दी’, कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख और राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार, होमगार्ड धर्मवीर प्रजापति के नेतृत्व में चंडीगढ़ पहुंची टीम योगी निवेशकों को आकर्षित करने में सफल रही।
नन्द गोपाल गुप्ता ‘नन्दी’ ने कहा कि उत्तर प्रदेश भारत का सबसे ज्यादा उपभोक्ता वाला राज्य है। कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख ने प्रदेश में बेहतर हुई कनेक्टिविटी की बात करते हुए कहा कि एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट के विकास से कनेक्टिविटी बेहतर हुई है।
निवेशकों ने सराहा
एशियन सीमेंट्स लिमिटेड के मुख्य प्रबंध निदेशक हरीश अग्रवाल ने कहा कि योगी डायनमिक मुख्यमंत्री हैं, जिस तरह से वह यूपी में इंडस्ट्री को बढ़ावा दे रहे हैं। आज उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था अच्छी हुई है। आज हमने उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए एमओयू किया है। हम यूपी में 10 से 15 एकड़ में प्लांट लगाएंगे।
बायोजेंटा लाइफसाइंस प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक दीप नारायण शर्मा ने कहा कि हम उत्तर प्रदेश के ही रहने वाले हैं। जिस तरह से सीएम योगी निवेशकों को प्रोत्साहित कर रहे हैं, उससे हमारे मन में भी आया कि हम यूपी में निवेश करें। इसके लिए आज हमने फार्मूलेशन और एपीआई प्लांट में निवेश के लिए दो एमओयू पर हस्ताक्षर किया है।
कॉम्पैक टेक्नोलॉजीज इंडिया लिमिटेड के निदेशक रमन सिंगला ने कहा कि पिछले पांच-छह सालों में उत्तर प्रदेश में काफी कार्य हुआ है। यूको बैंक की पहली महिला मैनेजर प्रकाश कौर अहलूवालिया ने कहा कि उनका उत्तर प्रदेश से पुराना नाता है.. यही नहीं उन्होंने मौजूदा उत्तर प्रदेश और 40 वर्ष पुराने उत्तर प्रदेश को लेकर अनुभव साझा किया।
कॉरपोरेट ट्रेनर जगदीश खत्री ने कहा कि जब उत्तर प्रदेश के बदले हुए माहौल को देखता हूं तो एक बार फिर से यूपी में काम करने का हिम्मत आई है और मन बना है। कॉम्पिटेंट ग्रुप के हरी सिंह ने कहा कि हम 2018 से उत्तर प्रदेश में काम कर रहे हैं।
सीतापुर में 26 हजार करोड़ रुपये के प्रस्ताव
ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में निवेशकों ने सीतापुर पर लक्ष्मी बरसाई। पर्यटन, चीनी उद्योग, एथलान आदि सेक्टरों में निवेश के 26 हजार करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव मिले। उद्योगपतियों ने जिले की मानव संपदा और एग्रीकल्चर को निवेश के लिए माकूल बताया।
डीएम और एसपी ने उद्यमियों को बेहतर माहौल देने का भरोसा दिलाया। उद्योग विभाग की ओर से उद्यमियों को प्रोजेक्टर के माध्यम से योजनाओं की जानकारी दी। डीएम अनुज सिंह ने कहा कि 115 निवेशकों ने 26037.29 करोड़ निवेश के लिये प्रस्ताव दिए हैं। जिले को दरी के रूप में एक नई पहचान मिली है।
टॉप पांच निवेशक कंपनी निवेश प्रस्ताव (करोड़ में)
यूनिक एनर्जीज प्रा. लि. 1100
स्प्रे इंजीनियरिंग डिवाइसेज प्रा. लि. 1000
अमर्टेक्स इंडस्ट्री 1000
स्प्रे इंजीनियरिंग डिवाइसेज प्रा. लि 1000
माधव केआरजी प्रा. लि 700
केन्द्र सरकार के फैसले के बाद हिट एंड रन कानून में किए गए संशोधन का देशभर में विरोध दूसरे दिन मंगलवार को भी जारी है। नए साल के पहले ही दिन से कई राज्यों में पेट्रोल, डीजल के लिए बवाल मचा। वहीं, ट्रकों, टैंकरों ने भी विरोध स्वरूप चक्का जाम कर दिया है। इससे पेट्रोल और डीजल की सप्लाई प्रभावित हो रही है। जहां भी पेट्रोल और डीजल उपलब्ध है, उन पंपों पर लंबी लाइन लग गई है। इसकी वजह यह डर है कि कहीं यहां भी पेट्रोल और डीजल खत्म न हो जाए। हिमाचल प्रदेश, पंजाब, यूपी, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, एमपी और राजस्थान एवं गुजरात समेत देश के सभी राज्यों में यही हाल है।
दरअसल, ट्रक ड्राइवर, कैब चालत एवं अन्य कॉमर्शियल गाड़ियां चलाने वालों का कहना है कि हिट एंड रन का कानून बेहद खतरनाक है। इसमें हादसे के बाद ड्राइवर के खुद या गाड़ी समेत भागने पर 10 साल तक की सजा और 7 लाख रुपये तक के फाइन का प्रावधान है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में कोई हादसा हुआ तो हमारा शोषण होगा। कई ड्राइवरों ने कहा कि हम कुछ भी कर लेंगे, लेकिन यह पेशा छोड़ ही देंगे। ऑल पंजाब ट्रक ऑपरेटर्स यूनियन के अध्यक्ष हैपी सिद्धू ने कहा कि यह काला कानून है, जो ट्रक वालों को बर्बाद कर देगा।
अटकी तेल सप्लाई
ड्राइवरों के आंदोलन में टैंकरों के हजारों चालक भी शामिल हैं। इसकी वजह से जहां-तहां टैंकर अटके हुए हैं और पेट्रोल पंपों तक ईंधन नहीं पहुंच रहा है। कई शहरों और राज्यों में इसकी वजह से तेल संकट दिख रहा है। हिमाचल के तो कई शहरों में नए साल के पहले ही दिन तेल खत्म हो गया। महाराष्ट्र के औरंगाबाद के पेट्रोल पंपों में आज शाम तक संकट बढ़ सकता है। पेट्रोल पंप डीलर्स ने यह बात कही है। एसोसिएशन के सेक्रेटरी अकील अब्बास ने कहा, ‘ईंधन लेकर आने वाले टैंकरों के ड्राइवर भी आंदोलन में शामिल हो गए हैं।’
हिमाचल में टूरिज्म सेक्टर भी तेल की कमी से प्रभावित हो रहा है। यहां पर्यटकों को वाहन ही नहीं मिल रहे हैं क्योंकि टैक्सी ड्राइवर भी आंदोलन में शामिल हैं। ड्राइवरों का आंदोलन पटना से लेकर पुणे तक चल रहा है। इन चालकों का कहना है कि यदि किसी हादसे पर हम लोगों को 10 साल की सजा मिलेगी तो फिर परिवार कौन चलाएगा। नवी मुंबई में तो एक जगह ट्रक ड्राइवरों ने पुलिस वालों पर ही हमला बोल दिया। इसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग किया तो भीड़ छंट गई।
प्रदर्शनों से मचा हाहाकार
ट्रांसपोर्टर यूनियनों की हड़ताल का असर उत्तर भारत के पंजाब से लेकर मध्य भारत में महाराष्ट्र तक देखा जा रहा है। यहां पेट्रोल टैंकरों के न पहुंच पाने से कई पेट्रोल पंप खाली हो गए। माना जा रहा है कि यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में सब्जी और दूध के दाम भी बढ़ सकते हैं। कई जिलों में तो मंगलवार शाम को ही तेल की आपूर्ति न होने का अनुमान लगाया गया है।
आम जन-जीवन प्रभावित
ड्राइवरों की हड़ताल के चलते लोगों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोगों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। माल ढुलाई ना होने से कई जगहों पर जरूरी सामान की कमी हो गई है और कुछ पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल भी नहीं मिल रहा है। कई जगहों पर पेट्रोल खत्म होने की अफवाह फैल रही है, जिसकी वजह से लोग कमी को देखते हुए अपने वाहनों में पेट्रोल भरवा रहे हैं, इससे पेट्रोल पंपों पर लंबी लंबी कतारें लग गई हैं।
परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि कोई भी कानून दोषी-अपराधी के लिए बनता है। इस एक्ट में कहां है कि अगर दुर्भाग्य से दुर्घटना होती भी है तो सजा होगी ही। हिट एंड रन में आप दुर्घटना करके भाग जाते हैं, यातना देकर चले जाते हैं, उन परिस्थितियों में आप दोषी हैं। सड़क पर दुर्घटना का अंदेशा हमेशा रहता है। अगर इन्फॉर्मर आप बनते हैं तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। गलत तरीके से कानून को समझाया जा रहा है। चीज़ों को समझना होगा, जल्दबाजी में हड़ताल चक्काजाम करना गलत है। यूनियन को सरकार के साथ बैठकर बात करनी चाहिए।(एएमएपी)
भारत में बीबीसी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर विवाद थम नहीं रहा है। केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया पर वीडियो लिंक ब्लॉक करने के आदेश दिए जो दिए जैसे राजनीतिक दलों को एक अवसर और मिल गया केंद्र सरकार की खुली आलोचना करने का । लेकिन जो आज इस बीबीसी डॉक्यूमेंट्री को अभिव्यक्ति का आधार बता रहे हैं और संविधानिक अधिकारों की बढ़ चढ़कर चर्चा कर रहे हैं, उन्हें अवश्य एक बार भारतीय इतिहास को देखना चाहिए, जहां समय, काल, परिस्थिति में तत्कालीन सरकारों ने उन तमाम पुस्तकों को बैन किया है जिनसे लगा कि यह भारती की संप्रभुता, एकता और अखण्डता के लिए किसी प्रकार से संकट खड़ा कर सकती हैं।
यह है बड़ी चिंता की बात
देश में इस समय जो सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए याचिकाएं दायर की गई हैं, उनका बहुत औचित्य नजर नहीं आ रहा है। वह इसलिए कि आप ऐसे समय में अपने देश के प्रधानमंत्री का विरोध कर रहे हैं जब दुनिया भारत के नेतृत्व को खुले मन से स्वीकार करने के लिए आगे आई है। आप उस दौर में हैं जहां आपका नेता स्थानीय न रहकर वैश्विक हो गया है और उसके व्यक्तित्व के प्रभाव से दुनिया आपको भी एक महाशक्ति के रूप में देखने लगी है। हर वह देश जो कल तक भारत को कमजोर, बीमारू और आर्थिक रूप से पिछड़ा मानता रहा, हमारे वैज्ञानिक प्रयोगों को अस्वीकार करता रहा, हमारी क्षमताओं को सदैव कम आंकता रहा है। उन देशों की स्थिति आज यह है कि वे भी भारत की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए नजर आ रहे हैं। यह चमत्कार जिस व्यक्ति के दम से है, यह तो विपक्ष को भी स्वीकारना होना कि उसका नाम नरेंद्र मोदी है, फिर आप उसके ऊपर रची गई इस फिल्म को दिखाकर किसे कमजोर कर रहे हैं? वास्तव में आज यह सोचनेवाली महत्वपूर्ण चिंता की बात है।
पहले भी विवादित फिल्मों और डॉक्यूमेंट्री पर लग है चुकी रोक
यह पहली बार नहीं है जब किसी सरकार ने राजनीतिक कारणों से किसी फिल्म, डॉक्यूमेंट्री या किताब पर रोक लगाया हो। इसके पहले इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई, राजीव गांधी और मनमोहन सिंह की सरकार में विवादित फिल्मों और डॉक्यूमेंट्री पर कार्रवाई की गई थी। इंदिरा सरकार के दौरान कई फिल्मों को रिलीज होने पहले ही रोक दिया गया। यह एतिहासिक तथ्य है कि साल 1964 से 1997 के बीच 7 प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में 17 किताबों पर बैन लगाया गया था। इनमें से 7 किताबें ऐसी थी जिस पर इंदिरा गांधी के कार्यकाल में बैन किया गया था। ‘सैटेनिक वर्सेज’ साल 1988 में बैन लगाया गया था, जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे। ये सलमान रुश्दी की चर्चित किताबों में से एक थी।
पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के कार्यकाल में ‘प्राइस ऑफ पावर’ की बिक्री पर स्टे लगा दिया था। इस किताब में मौजूदा पीएम के बारे में दावा किया गया था कि मोरारजी देसाई अमेरिकी खुफिया एजेंसी के एजेंट थे। इसके अलावा ‘स्मैश एंड ग्रैब: एनेक्सेशन ऑफ सिक्किम’ किताब के खिलाफ भी दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका के बाद इस पर बैन लगा दिया गया था। इनके अतिरिक्त अनेक पुस्तकों का और जिक्र किया जा सकता है,जिन्हें समय-समय पर विभिन्न सरकारों द्वारा रोका गया है।
यह भी आज समझ लेने की जरूरत है कि बीबीसी द्वारा डॉक्यूमेंट्री से भारत में विवाद खड़ा करने का यह कोई पहला प्रकरण नहीं है। वह पूर्व में भी विवाद खड़े करती रही है। 2015 में आई लेस्ली उडविन की ‘इंडियाज डॉटर’ दिल्ली में कुख्यात निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्या पर आधारित डॉक्यूमेंट्री बीबीसी की ही थी। बलात्कारियों में से एक मुकेश के साथ इंटरव्यू के कुछ हिस्सों सहित फिल्म के कुछ अंश प्रसारित किए गए थे। पुलिस ने इस डॉक्यूमेंट्री पर रोक लगाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। उस मामले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी जिसमें कहा गया था कि कंटेंट अत्यधिक आपत्तिजनक, दुर्भावनापूर्ण और अपमानजनक टिप्पणियों के साथ है। भारत सरकार, सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने तुरन्त इस को संज्ञान में लिया और ‘एडवाइजरी’ जारी की थी, जिसमें सभी प्राइवेट सैटेलाइट टीवी चैनलों को ‘इंडियाज़ डॉटर’ डॉक्यूमेंट्री या इसके किसी अंश का प्रसारण नहीं करने की सलाह दी गई थी।
ध्यान में रखने की जरूरत है कि बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री द मोदी क्वेश्चन 2002 के गुजरात दंगों पर बनी पहली डॉक्यूमेंट्री नहीं है बल्कि इसके आने से दशकों पहले राकेश शर्मा की तरफ से डायरेक्ट की गई डॉक्यूमेंट्री ‘फाइनल सॉल्यूशन’ में बताया गया था कि गुजरात में सांप्रदायिक हिंसा को प्लान किया गया था। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन ने डॉक्यूमेंट्री को समाज में हिंसा फैलाने वाला बताते हुए इसे पास नहीं किया। आनंद पटवर्धन की डॉक्यूमेंट्री ‘राम के नाम’ की गिनती सबसे विवादित डॉक्युमेंट्री में की जाती है। 1992 में फिल्माई गई ये डॉक्यूमेंट्री अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अभियान पर आधारित है। ‘किस्सा कुर्सी का’, ‘आंधी’, ‘तमिल ड्रामा कुत्रापथिरिकई’, ‘ब्लैक फ्राइडे’ और ‘इंशाअल्लाह कश्मीर’ को भी पुरानी सरकारों की तरफ से बैन किया जा चुका है।
केंद्रीय मंत्री की बातें बहुत हद तक सही
बीबीसी की विवादित डॉक्यूमेंट्री पर अभी कुछ दिन पहले केंद्रीय मंत्री किरेण रिजिजू ने सोशल मीडिया में लिखा है कि ‘कुछ लोगों के लिए गोरे शासक अभी भी मालिक हैं जिनका भारत पर फैसला अंतिम है न कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय का फैसला या भारत के लोगों की इच्छा. भारत में कुछ लोग अभी भी औपनिवेशिक नशे से दूर नहीं हुए हैं। वे लोग बीबीसी को भारत का उच्चतम न्यायालय से ऊपर मानते हैं और अपने नैतिक आकाओं को खुश करने के लिए देश की गरिमा और छवि को किसी भी हद तक गिरा देते हैं। आज केंद्रीय मंत्री की कही ये सभी बातें बहुत हद तक सच लग रही हैं।
बीबीसी डॉक्यूमेंट्री पर समझने की बात इतनी भर है कि ये भारत की तेजी से वैश्विक शक्तिशाली उभरती छवि के खिलाफ ‘षड्यंत्र’ है। डॉक्यूमेंट्री में प्रधानमंत्री पर हमला वास्तविकता में भारतीय न्यायपालिका के लिए भी चुनौती है। यह भी आश्चर्य है कि भारत में आज ऐसे लोगों की कोई कमी नहीं है जोकि एक विदेशी डॉक्यूमेंट्री निर्माता, ‘वह भी हमारे औपनिवेशिक शासक’, की राय को देश की शीर्ष अदालत के फैसले से अधिक महत्व दे रहे हैं।
भारत को विश्व भर में कमजोर करने की साजिश
आज आवश्यकता देश के सभी लोगों के बीच इस बात को ध्यान में रखने की है कि यह एक ऐसा समय है जब भारत ने जी20 की अध्यक्षता ग्रहण की है। आखिर इसी समय इस झूठी सामग्री को सामने लाने के लिए यह विशेष समय चुना जाना दर्शाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो सिर्फ बहाना हैं, इनके माध्यम से भारत को विश्व भर में कमजोर करने की साजिश बीबीसी ने रची है और हमारे देश के तमाम लोग उसे सिर्फ इसलिए कि वे पीएम के रूप में मोदी को पसंद नहीं करते हैं अभिव्यक्ति का नाम देकर वास्तव में देश को कमजोर करने का ही काम कर रहे हैं। (लेखक वरिष्ठ स्तम्भकार एवं सामाजिक विश्लेषण हैं।)
मध्य प्रदेश के जनजातीय बहुल जिले डिंडौरी में मिलेट्स (मोटे अनाज) के बीज बैंक की देशभर में प्रशंसा हो रही है। यह बीज बैंक डिंडौरी के ग्राम बैगा चक निवासी 27 वर्षीय बैगा महिला लहरी बाई चला रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके इस बीज बैंक की प्रशंका की है। उन्होंने ट्वीट के माध्यम से लहरी बाई का जिक्र करते हुए विलुप्त हो रहे मोटे अनाज के बीज बचाने की प्रशंसा की, साथ ही इसे अन्य लोगों के लिए प्रेरणादायक बताया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को लहरी बाई के एक वीडियो को रीट्वीट करते हुए लिखा है कि- लहरी बाई पर गर्व है, जिन्होंने श्री अन्न के प्रति उल्लेखनीय उत्साह दिखाया है। उनके प्रयास कई अन्य लोगों को प्रेरित करेंगे। मध्य प्रदेश फिलहाल मिलेट्स उत्पादन में देश में दूसरे नंबर पर है। पहला नंबर है छत्तीसगढ़ का, लेकिन छत्तीसगढ़ की सीमा से ही लगा है मप्र का डिंडौरी जिला। ये जिला मिलेट्स उत्पादन में प्रदेश में पहले नंबर पर है।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गत दिनों कहा था कि डिंडौरी जिले में मोटे अनाज के प्रसंस्करण को लेकर पहले से ही कार्य चल रहा है। इसके बाद लहरी बाई का बीज बैंक मीडिया की सुर्खियों में आ गया। डिंडौरी जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर के बजाग विकासखंड के सिलपीड़ी गांव में रहने वाली 27 साल की लहरी बाई करीब एक दशक से मिलेट्स बैंक चला रही हैं। उनके छोटे से अपने कच्चे आवास एक कमरे में 25 से अधिक विलुप्त प्रजाति के बीज का बैंक तैयार किया है और वह अपने गांव सहित आसपास के दो दर्जन से अधिक गांव के किसानों को अनाज के बदले यह बीज उपलब्ध कराती हैं। इनमें से कई अनाज ऐसे हैं, जिनके नाम जानने वाले भी अब बहुत कम लो बचे हैं। लहरी बाई के पास अनाज की उन किस्मों के बीज हैं जो लोगों की थाली ही, नहीं खेतों से भी गायब हो गए हैं। यानी दुर्लभ कलेक्शन।
जिले में मोटे अनाज बोवनी का रकबा और बढ़ाने की तैयारी भी कलेक्टर ने तेज कर दी है। लहरी बाई को कलेक्टर विकास मिश्रा ने गणतंत्र दिवस के समारोह में मुख्य अतिथि भी बनाया गया था। जिले में यह पहला अवसर था, जब किसी बैगा महिला को गणतंत्र दिवस के समारोह में मुख्य अतिथि बनाकर मंच पर बैठाया गया था।
बैंक में तीन प्रकार के विलुप्त सलहार के बीज सहित इसी तरह बड़े कोदो, लदरी कोदो, डोंगर कुटकी, लाल डोंगर कुटकी, सिताही कुटकी, नागदावन कुटकी, लालमडिया, गोदपारी मडिया सहित अन्य बीज भी महिला के बीज बैंक में उपलब्ध है। यह अनाज अब वैगाचक क्षेत्र में दिखने लगा है। अपने आवास में मिट्टी की कोठी बनाकर बीज को संरक्षित रखा गया है।
कलेक्टर विकास मिश्रा का कहना है कि लहरी बाई के पास विलुप्त हो रहे मोटे अनाज के 25 से अधिक प्रजाति के बीज है। लहरी बाई विगत 10 वर्ष से आसपास के 25 गांव के आदिवासी किसानों को अनाज के बदले यह बीज उपलब्ध कराती आ रही हैं। इस पहल से विलुप्त होती प्रजाति के अनाज अब भी लोगों के पास है। लहरी बाई ने बीज बैंक भी बना है। यह बहुत उल्लेखनीय पहल है। जिले में मोटे अनाज की पैदावार और बढ़ाने को लेकर विशेष कार्ययोजना बनाते हुए पहल की जा रही है।(एएमएपी)
जी-20 देश के प्रतिनिधि आगरा के होटल ताज कन्वेंसन में महिला सशक्तीकरण पर मंथन कर रहे हैं। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी और उप्र की महिला कल्याण , बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री बेबीरानी मौर्य ने संबोधन दिया है । यहां चार सत्रों में पैनल बनाकर चर्चा हो रही है। पहले दिन महिला सशक्तिकरण का मुद्दा चर्चा का विषय रहा । इसके साथ ही महिलाओं के नेतृत्व क्षमता को बढ़ाना, महिला उद्यमिता और कार्यक्षेत्र में महिलाओं की भागीदारिता बढ़ाना, डिजिटल स्किल और फ्यूचर स्किल को बढ़ावा देना चर्चा का विषय रहे।
केंद्र सरकार दे रही महिला उद्यमिता को बढ़ावा
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने इस अवसर पर कहा है कि भारत का जी-20 का अध्यक्ष बनना, हमारे लिए ऐतिहासिक पल है, जो भारत की विश्व बंधुत्व की नीतियों को दर्शता है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि महिला उद्यमिता को केंद्र सरकार बढ़ावा दे रही है। इससे रोजगार के अधिक अवसर विकसित किए जा रहे हैं। मंत्रालय द्वारा महिलाओं और शिशुओं के लिए विभिन्न योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं।
वहीं, आयोजन में अन्य विद्वानों ने भी अपने विचार रखे। जी-20 शेरपा अमिताभ कांत, जी-20 महिला सशक्तीकरण की चेयरपर्सन डा. संगीता रेड़डी, सलीमा अहमद व अन्य वक्ताओं ने भी महिला सशक्तीकरण पर व्याख्यान दिए। इन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए फ्रेंडली इन्वायरमेंट होना चाहिए। उनकी सुविधा के अनुसार कार्यालय होने चाहिए।
इस थीम पर हो रही है ये बैठक
डिजिटल क्षमता और भविष्य के कौशल को विकसित करना। जी 20 सशक्तीकरण में महिलाओं के विकास से महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास के बदलाव को प्राथमिकता देना। व्यवसायों और सरकारों के बीच सबसे समावेशी और कार्रवाई संचालित गठबंधन बनाना। महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए साझेदारी बनाना। कार्यबल में महिलाओं को अधिक से अधिक शामिल करना। सूक्ष्म उद्यमों, महिला कारीगरों और शिल्पकारों के साथ काम को प्रदर्शित करना।
एयरपोर्ट पर ड्रोन से पुष्प वर्षा कर किया गया मेहमानों का स्वागत
आगरा में कल जी- 20 देशों के मेहमानों का कल भव्य स्वागत किया गया था। एयरपोर्ट पर ड्रोन से पुष्प वर्षा कर भारतीय परंपरा के अनुसार तिलक लगा शॉल ओढ़ाकर वेलकम किया गया। शाही बग्गी पर सवार होकर प्रतिनिधिमंडल का जोरदार स्वागत किया। इसके बाद फतेहाबाद रोड स्थित सेल्फी प्वाइंट पर कमिश्नर और डीएम ने जी-20 देशों के प्रतिनिधियों संग केक काटा।आज चार सत्रों की मीटिंग के बाद शाम को प्रतिनिधि आगरा किला का दीदार करने जाएंगे। आगरा किला में मेहमानों के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है।
एयरपोर्ट से होटल तक शाही अंदाज में विदेशी मेहमानों का दिव्य, अकल्पनीय और अभूतपूर्व स्वागत किया गया। पारम्परिक भारतीय संगीत, शहनाई, ढोल-नगाड़ों की धुन पर फूलों से सजी बग्घी में सवार होकर मेहमान एयरपोर्ट के गेट तक पहुंचे। उसके बाद रास्ते में उन पर पुष्प वर्षा की गई। विदेशी मेहमानों के स्वागत की श्रृंखला में वीआईपी रूट के विभिन्न चौराहों पर लोक कलाकारों द्वारा रंगारंग प्रस्तुतियां दी गई। वहीं स्कूली बच्चों ने 20 देशों के झंडे लहराकर विदेशी मेहमानों का स्वागत किया। योगी सरकार के द्वारा किए गए अभूतपूर्व स्वागत से विदेशी मेहमान भी गदगद और भावुक दिखाई दिखे।
जी 20 देशों के प्रतिनिधिमंडल में शामिल करीब 125 सदस्य जब एयरफोर्स के खेरिया एयरपोर्ट पहुंचे, तो आगरा के पुलिस कमिश्नर और मंडलायुक्त ने गर्मजोशी के साथ हाथ उनकी आगवानी की। एयरपोर्ट लाउंज में प्रतिनिधिमंडल के माथे पर तिलक लगाकर, कोट पर बैज लगाकर और शॉल ओढ़ाकर स्वागत की शुरुआत हुई। इसके बाद स्वागत की श्रृंखला को देखकर जी-20 प्रतिनिधिमंडल भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति, परंपरा अद्भुत है, अकल्पनीय है।
प्रतिनिधिमंडल के स्वागत के लिए रास्ते भर लोक कलाकारों ने विभिन्न भारतीय विधाओं का प्रदर्शन कर विदेशी मेहमानों का दिल जीत लिया। विदेशी मेहमानों का जगह-जगह हर चौराहे पर स्वागत किया गया। खेरिया मोड़ चौराहे पर विदेशी मेहमानों का मारवाड़ी, राजस्थानी डांस कर कलाकारों ने स्वागत किया। वहीं फतेहाबाद रोड के दोनों तरफ हजारों लोगों ने हाथ हिलाकर बस में सवार प्रतिनिधियों का पूरे उत्साह के साथ अभिवादन किया। स्कूली बच्चे ने हाथ मे रंग-बिरंगे झंडे, गुब्बारे, तिरंगा लेकर विदेशी मेहमानों का स्वागत किया। विदेशी मेहमानों के स्वागत के लिए जिला प्रशासन ने फतेहाबाद रोड को शानदार तरीके से सजाया है। पूरे रुट पर लाइटिंग की गई है। जगह जगह पेड़- पौधे लगाए गए है। सड़को की मरम्मत की गई है। दीवारों पर रंग-रोगन कराया गया है। बीएसएनएल चौराहे पर पुष्प प्रदर्शनी लगाई गई है। मेहमानों के स्वागत में घरों के छज्जों से लोगों ने पुष्प वर्षा की।
जी-20 प्रतिनिधिमंडल का कारवां आई लव आगरा यानी सेल्फी प्वाइंट पर पहुंचा तो वहां प्रतिनिधिमंडल के आने की खुशी में शहरवासियों ने 21 किलो का केक काटकर उनका जोरदार स्वागत किया। देश के जाने-माने ग़ज़ल गायक सुधीर नारायण और उनके साथियों ने वसुधैव कुटुंबकम का गीत गाकर भारत के राग और ताल से प्रतिनिधिमंडल को जोड़ा। जी-20 देशों के प्रतिनिधिमंडल ने इसे सहभागिता, समन्वय और स्वागत की अभूतपूर्व मिसाल बताया।विदेशी मेहमानों की सुरक्षा को लेकर भी आगरा में विशेष इंतजाम किए गए हैं। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात किया गया है। आगरा को मानो पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। एटीएस, पैरामिलिट्री फोर्स के साथ स्पेशल कमांडो की तैनाती की गई है। जमीन से लेकर आसमान तक विदेशी मेहमानों की सुरक्षा की जा रही है ।
उल्लेखनीय है कि भारत को पहली बार जी-20 देशों की मेजबानी मिली है। ऐसे में दुनियाभर की नजर आगरा पर टिकी है। आगरा में हो रहे इस सम्मेलन में महिला एवं बाल विकास से जुड़ी 20 देशों की महिलाएं, सचिव और वक्ता सहित 150 सदस्य शामिल हुए हैं । (एएमएपी)
नेपाल में बीती देर रात एक यात्री बस भालुवांग के निकट राप्ती नदी के पुल से नीचे नदी में गिर गई। इस दुर्घटना में 12 लोगों की मौत हो गई और 23 लोगों के घायल हो गए। घायल यात्रियों का अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। पुलिस ने बताया कि मृतकों और घायल यात्रियों में कई भारतीय नागरिक भी हैं।नेपालगंज से काठमांडू की तरफ आ रही यह यात्री बस बीती देर रात भालुवांग के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई। घायल यात्रियों ने पुलिस को बताया कि शुक्रवार की शाम को नेपालगंज से काठमांडू के लिए रवाना हुई इस बस की स्पीड बहुत अधिक थी। राप्ती नदी के पुल पर ड्राइवर ने बस पर नियंत्रण खो दिया और बस पुल से नीचे नदी में गिर गई। जान बचाने के लिए कई यात्रियों ने बस से छलांग लगा दी थी। दुर्घटनास्थल से पुलिस को शनिवार दोपहर तक 12 शव मिल चुके थे। हालांकि इनमें से शाम चार बजे तक 9 शवों की ही पहचान हो पाई है।
घटनास्थल पर पहुंची राजमार्ग पुलिस ने बताया कि मृतकों में अब तक दो भारतीय नागरिकों की भी शिनाख्त हुई है। पुलिस इंस्पेक्टर उज्जवल बहादुर सिंह ने बताया कि मरने वालों में उत्तर प्रदेश के मनोज (31) तथा बिहार के योगेन्द्र राम (67) भी हैं। पुलिस ने यह भी बताया है कि जिन तीन शवों की पहचान नहीं हो पाई है, उनमें भी कोई भारतीय नागरिक हो सकता है।
इस दुर्घटना में घायल हुए 23 यात्रियों को नेपालगंज मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। अस्पताल की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक गम्भीर रूप से घायल भारतीय नागरिकों में उत्तर प्रदेश के निरंजन कोरी (20), आशुतोष गौतम (24), अरबाज खान (20), मोहम्मद जावेद (25), छोटी सिलौरा (20), नाफीजा खान (19), राहुल कुमार अहीर (23) हैं। इनके अलावा 16 नेपाली नागरिक भी घायल हुए हैं। इस बीच पुलिस ने बस चालक और सह चालक को हिरासत में ले लिया है। (एएमएपी)
भारतीय सेना के एक डॉक्टर ने हाथ की हड्डी टूटने पर उसके इलाज के लिए एक बाहरी फिक्सेटर विकसित किया है जिसका उपयोग तुर्किये और सीरिया में भूकंप पीड़ितों की मदद के लिए किया जा रहा है। अधिकारी ने कहा कि बाहरी फिक्सेटर का उद्देश्य मरीजों को तेजी से ठीक करना है। फिक्सेटर को विकसित करने वाले कर्नल विजय पांडे ने कहा कि यह अन्य उपलब्ध समाधानों से सस्ता है।
उन्होंने कहा कि नया फिक्सेटर पहले से उपलब्ध समाधानों की तुलना में हल्का और सस्ता है और रोगियों को तेजी से ठीक कर सकता है। कर्नल विजय पांडे ने कहा कि यह बाहरी फिक्सेटर जिसका मैंने आविष्कार किया है, मुख्य रूप से हाथ के इंटरकॉन्डाइलर फ्रैक्चर के लिए है। यह काफी सस्ता है, इसकी कीमत 300 रुपये के आसपास है और इसका वजन करीब पांच ग्राम है। इसे एक सामान्य सर्जन द्वारा आसानी से लगाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि हम पहले ही 100 रोगियों पर इस फिक्सेटर का उपयोग कर चुके हैं और वर्तमान में इसका उपयोग सीरिया और तुर्किये में आए भूकंपों में किया जा रहा है। इस फिक्सेटर से अन्य फिक्सेटरों द्वारा लिए गए छह महीनों की तुलना में केवल एक महीने में 90 फीसदी गतिशीलता प्राप्त कर सकते हैं। भूकंप प्रभावित तुर्किये के अंताक्य में बचाव और खोजी दल लोगों को बचाने के लिए समय के साथ संघर्ष कर रहा है क्योंकि देश में मरने वालों की संख्या 24,617 तक पहुंच गई है।
संयुक्त राष्ट्र के राहत प्रमुख ने कहा, यह सदी की सबसे खराब घटना
तुर्किये की सरकारी समाचार एजेंसी अनादोलू ने ट्वीट किया, चूंकि मरने वालों की संख्या बढ़ रही है, संयुक्त राष्ट्र के राहत प्रमुख मार्टिन ग्रिफिथ्स ने इस सप्ताह की शुरुआत में दक्षिणी तुर्किये और उत्तर-पश्चिमी सीरिया में आए शक्तिशाली भूकंपों का वर्णन इस क्षेत्र में एक सदी में होने वाली “सबसे खराब घटना” के रूप में किया है।
इससे पहले रविवार को भारत की ओर से चलाए जा रहे ऑपरेशन दोस्त की सातवीं खेप 23 टन से अधिक राहत सामग्री के साथ भूकंप प्रभावित सीरिया पहुंची, जिसे दमिश्क हवाई अड्डे पर स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण उप मंत्री मुताज डौजी ने प्राप्त किया। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ट्वीट किया, 7वां ऑपरेशन दोस्त विमान 23 टन से अधिक राहत सामग्री के साथ सीरिया पहुंचा, जिसमें जेनसेट, सोलर लैंप, आपातकालीन और महत्वपूर्ण देखभाल की दवाएं और आपदा राहत उपभोग्य वस्तुएं शामिल थीं। राहत सामग्री को दमिश्क हवाई अड्डे पर स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण उप मंत्री मुताज डौजी द्वारा प्राप्त किया गया।
बता दें कि 06 फरवरी को तुर्किये और सीरिया में विनाशकारी भूकंप आया था। भारत ने इस क्षेत्र में विनाशकारी भूकंपों और झटकों के बाद तुर्किये और सीरिया को सहायता प्रदान करने के लिए ऑपरेशन दोस्त लॉन्च किया था। ऑपरेशन दोस्त के तहत भारत तुर्किये और सीरिया को भारी मात्रा में मानवीय सहायता भेज रहा है। इसके तहत भारत ने शनिवार को सी-17 सैन्य परिवहन विमान से तुर्किये और सीरिया के भूकंप पीड़ितों के लिए जीवन रक्षक दवाओं और राहत सामग्री की अतिरिक्त खेप भेजी। भारत के ‘ऑपरेशन दोस्त’ के तहत राहत सामग्री की यह सातवीं खेप भेजी गई है।(एएमएपी)