दूसरे दिन भी जारी ड्राइवरों की हड़ताल, पेट्रोल-डीजल के लिए मचा हाहाकार

केन्‍द्र सरकार के फैसले के बाद हिट एंड रन कानून में किए गए संशोधन का देशभर में विरोध दूसरे दिन मंगलवार को भी जारी है। नए साल के पहले ही दिन से कई राज्यों में पेट्रोल, डीजल के लिए बवाल मचा। वहीं, ट्रकों, टैंकरों ने भी विरोध स्‍वरूप चक्का जाम कर दिया है। इससे पेट्रोल और डीजल की सप्लाई प्रभावित हो रही है। जहां भी पेट्रोल और डीजल उपलब्ध है, उन पंपों पर लंबी लाइन लग गई है। इसकी वजह यह डर है कि कहीं यहां भी पेट्रोल और डीजल खत्म न हो जाए। हिमाचल प्रदेश, पंजाब, यूपी, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, एमपी और राजस्थान एवं गुजरात समेत देश के सभी राज्यों में यही हाल है।

क्‍यों हो रहा विरोध ?

दरअसल, ट्रक ड्राइवर, कैब चालत एवं अन्य कॉमर्शियल गाड़ियां चलाने वालों का कहना है कि हिट एंड रन का कानून बेहद खतरनाक है। इसमें हादसे के बाद ड्राइवर के खुद या गाड़ी समेत भागने पर 10 साल  तक की सजा और 7 लाख रुपये तक के फाइन का प्रावधान है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में कोई हादसा हुआ तो हमारा शोषण होगा। कई ड्राइवरों ने कहा कि हम कुछ भी कर लेंगे, लेकिन यह पेशा छोड़ ही देंगे। ऑल पंजाब ट्रक ऑपरेटर्स यूनियन के अध्यक्ष हैपी सिद्धू ने कहा कि यह काला कानून है, जो ट्रक वालों को बर्बाद कर देगा।

अटकी तेल सप्लाई

ड्राइवरों के आंदोलन में टैंकरों के हजारों चालक भी शामिल हैं। इसकी वजह से जहां-तहां टैंकर अटके हुए हैं और पेट्रोल पंपों तक ईंधन नहीं पहुंच रहा है। कई शहरों और राज्यों में इसकी वजह से तेल संकट दिख रहा है। हिमाचल के तो कई शहरों में नए साल के पहले ही दिन तेल खत्म हो गया। महाराष्ट्र के औरंगाबाद के पेट्रोल पंपों में आज शाम तक संकट बढ़ सकता है। पेट्रोल पंप डीलर्स ने यह बात कही है। एसोसिएशन के सेक्रेटरी अकील अब्बास ने कहा, ‘ईंधन लेकर आने वाले टैंकरों के ड्राइवर भी आंदोलन में शामिल हो गए हैं।’

हिमाचल में टूरिस्ट मुश्किल में

हिमाचल में टूरिज्म सेक्टर भी तेल की कमी से प्रभावित हो रहा है। यहां पर्यटकों को वाहन ही नहीं मिल रहे हैं क्योंकि टैक्सी ड्राइवर भी आंदोलन में शामिल हैं। ड्राइवरों का आंदोलन पटना से लेकर पुणे तक चल रहा है। इन चालकों का कहना है कि यदि किसी हादसे पर हम लोगों को 10 साल की सजा मिलेगी तो फिर परिवार कौन चलाएगा। नवी मुंबई में तो एक जगह ट्रक ड्राइवरों ने पुलिस वालों पर ही हमला बोल दिया। इसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग किया तो भीड़ छंट गई।

प्रदर्शनों से मचा हाहाकार

ट्रांसपोर्टर यूनियनों की हड़ताल का असर उत्तर भारत के पंजाब से लेकर मध्य भारत में महाराष्ट्र तक देखा जा रहा है। यहां पेट्रोल टैंकरों के न पहुंच पाने से कई पेट्रोल पंप खाली हो गए। माना जा रहा है कि यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में सब्जी और दूध के दाम भी बढ़ सकते हैं। कई जिलों में तो मंगलवार शाम को ही तेल की आपूर्ति न होने का अनुमान लगाया गया है।

आम जन-जीवन प्रभावित

ड्राइवरों की हड़ताल के चलते लोगों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोगों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। माल ढुलाई ना होने से कई जगहों पर जरूरी सामान की कमी हो गई है और कुछ पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल भी नहीं मिल रहा है। कई जगहों पर पेट्रोल खत्म होने की अफवाह फैल रही है, जिसकी वजह से लोग कमी को देखते हुए अपने वाहनों में पेट्रोल भरवा रहे हैं, इससे पेट्रोल पंपों पर लंबी लंबी कतारें लग गई हैं।

हिट एंड रन कानून में बदलाव का देशभर में जमकर विरोध, मप्र में दिखा ज्‍यादा असर

परिवहन मंत्री का बयान

परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि कोई भी कानून दोषी-अपराधी के लिए बनता है। इस एक्ट में कहां है कि अगर दुर्भाग्य से दुर्घटना होती भी है तो सजा होगी ही। हिट एंड रन में आप दुर्घटना करके भाग जाते हैं, यातना देकर चले जाते हैं, उन परिस्थितियों में आप दोषी हैं। सड़क पर दुर्घटना का अंदेशा हमेशा रहता है। अगर इन्फॉर्मर आप बनते हैं तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। गलत तरीके से कानून को समझाया जा रहा है। चीज़ों को समझना होगा, जल्दबाजी में हड़ताल चक्काजाम करना गलत है। यूनियन को सरकार के साथ बैठकर बात करनी चाहिए।(एएमएपी)

प्रधानमंत्री मोदी और बीबीसी डॉक्यूमेंट्री के बीच भारत की छवि को भी देख लिया जाए !

डॉ. राजेश शर्मा।

भारत में बीबीसी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर विवाद थम नहीं रहा है। केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया पर वीडियो लिंक ब्लॉक करने के आदेश दिए जो दिए जैसे राजनीतिक दलों को एक अवसर और मिल गया केंद्र सरकार की खुली आलोचना करने का । लेकिन जो आज इस बीबीसी डॉक्यूमेंट्री को अभिव्‍यक्‍ति का आधार बता रहे हैं और संविधानिक अधिकारों की बढ़ चढ़कर चर्चा कर रहे हैं, उन्‍हें अवश्‍य एक बार भारतीय इतिहास को देखना चाहिए, जहां समय, काल, परिस्‍थ‍िति में तत्‍कालीन सरकारों ने उन तमाम पुस्‍तकों को बैन किया है जिनसे लगा कि यह भारती की संप्रभुता, एकता और अखण्‍डता के लिए किसी प्रकार से संकट खड़ा कर सकती हैं।

यह है बड़ी चिंता की बात

देश में इस समय जो सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए याचिकाएं दायर की गई हैं, उनका बहुत औचित्‍य नजर नहीं आ रहा है। वह इसलिए कि आप ऐसे समय में अपने देश के प्रधानमंत्री का विरोध कर रहे हैं जब दुनिया भारत के नेतृत्‍व को खुले मन से स्‍वीकार करने के लिए आगे आई है। आप उस दौर में हैं जहां आपका नेता स्‍थानीय न रहकर वैश्‍विक हो गया है और उसके व्‍यक्‍तित्‍व के प्रभाव से दुनिया आपको भी एक महाशक्‍ति के रूप में देखने लगी है। हर वह देश जो कल तक भारत को कमजोर, बीमारू और आर्थ‍िक रूप से पिछड़ा मानता रहा, हमारे वैज्ञानिक प्रयोगों को अस्‍वीकार करता रहा, हमारी क्षमताओं को सदैव कम आंकता रहा है।  उन देशों की स्‍थ‍िति आज यह है कि वे भी भारत की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए नजर आ रहे हैं। यह चमत्‍कार जिस व्‍यक्‍ति के दम से है, यह तो विपक्ष को भी स्‍वीकारना होना कि उसका नाम नरेंद्र मोदी है, फिर आप उसके ऊपर रची गई इस फिल्‍म को दिखाकर किसे कमजोर कर रहे हैं?  वास्‍तव में आज यह सोचनेवाली महत्‍वपूर्ण चिंता की बात है।

पहले भी विवादित फिल्मों और डॉक्‍यूमेंट्री पर लग है चुकी रोक

यह पहली बार नहीं है जब किसी सरकार ने राजनीतिक कारणों से किसी फिल्म, डॉक्यूमेंट्री या किताब पर रोक लगाया हो। इसके पहले इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई, राजीव गांधी और मनमोहन सिंह की सरकार में विवादित फिल्मों और डॉक्‍यूमेंट्री पर कार्रवाई की गई थी। इंदिरा सरकार के दौरान कई फिल्मों को रिलीज होने पहले ही रोक दिया गया।  यह एतिहासिक तथ्‍य है कि साल 1964 से 1997 के बीच 7 प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में 17 किताबों पर बैन लगाया गया था। इनमें से 7 किताबें ऐसी थी जिस पर इंदिरा गांधी के कार्यकाल में बैन किया गया था। ‘सैटेनिक वर्सेज’ साल  1988 में बैन लगाया गया था, जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे। ये सलमान रुश्दी की चर्चित किताबों में से एक थी।

पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के कार्यकाल में ‘प्राइस ऑफ पावर’ की बिक्री पर स्टे लगा दिया था। इस किताब में मौजूदा पीएम के बारे में दावा किया गया था कि मोरारजी देसाई अमेरिकी खुफिया एजेंसी के एजेंट थे। इसके अलावा ‘स्मैश एंड ग्रैब: एनेक्सेशन ऑफ सिक्किम’ किताब के खिलाफ भी दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका के बाद इस पर बैन लगा दिया गया था। इनके अतिरिक्‍त अनेक पुस्‍तकों का और जिक्र किया जा सकता है,जिन्‍हें समय-समय पर विभिन्‍न सरकारों द्वारा रोका गया है।

यह भी आज समझ लेने की जरूरत है कि बीबीसी द्वारा डॉक्यूमेंट्री से भारत में विवाद खड़ा करने का यह कोई पहला प्रकरण नहीं है। वह पूर्व में भी विवाद खड़े करती रही है। 2015 में आई लेस्ली उडविन की ‘इंडियाज डॉटर’ दिल्ली में कुख्यात निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्या पर आधारित डॉक्यूमेंट्री बीबीसी की ही थी। बलात्कारियों में से एक मुकेश के साथ इंटरव्यू के कुछ हिस्सों सहित फिल्म के कुछ अंश प्रसारित किए गए थे। पुलिस ने इस डॉक्यूमेंट्री पर रोक लगाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। उस मामले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी जिसमें कहा गया था कि कंटेंट अत्यधिक आपत्तिजनक, दुर्भावनापूर्ण और अपमानजनक टिप्पणियों के साथ है।  भारत सरकार, सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने तुरन्‍त इस को संज्ञान में लिया और ‘एडवाइजरी’ जारी की थी, जिसमें सभी प्राइवेट सैटेलाइट टीवी चैनलों को ‘इंडियाज़ डॉटर’ डॉक्यूमेंट्री या इसके किसी अंश का प्रसारण नहीं करने की सलाह दी गई थी।

ध्‍यान में रखने की जरूरत है कि बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री द मोदी क्वेश्चन 2002 के गुजरात दंगों पर बनी पहली डॉक्यूमेंट्री नहीं है बल्कि इसके आने से दशकों पहले राकेश शर्मा की तरफ से डायरेक्ट की गई डॉक्यूमेंट्री ‘फाइनल सॉल्यूशन’ में बताया गया था कि गुजरात में सांप्रदायिक हिंसा को प्लान किया गया था। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन ने डॉक्यूमेंट्री को समाज में हिंसा फैलाने वाला बताते हुए इसे पास नहीं किया। आनंद पटवर्धन की डॉक्यूमेंट्री ‘राम के नाम’ की गिनती सबसे विवादित डॉक्युमेंट्री में की जाती है। 1992 में फिल्माई गई ये डॉक्यूमेंट्री अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अभियान पर आधारित है। ‘किस्सा कुर्सी का’, ‘आंधी’, ‘तमिल ड्रामा कुत्रापथिरिकई’, ‘ब्‍लैक फ्राइडे’ और ‘इंशाअल्लाह कश्मीर’ को भी पुरानी सरकारों की तरफ से बैन किया जा चुका है।

केंद्रीय मंत्री की बातें बहुत हद तक सही

बीबीसी की विवादित डॉक्यूमेंट्री पर अभी कुछ दिन पहले केंद्रीय मंत्री किरेण रिजिजू ने सोशल मीडिया में लिखा है कि ‘कुछ लोगों के लिए गोरे शासक अभी भी मालिक हैं जिनका भारत पर फैसला अंतिम है न कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय का फैसला या भारत के लोगों की इच्छा. भारत में कुछ लोग अभी भी औपनिवेशिक नशे से दूर नहीं हुए हैं।  वे लोग बीबीसी को भारत का उच्चतम न्यायालय से ऊपर मानते हैं  और अपने नैतिक आकाओं को खुश करने के लिए  देश की गरिमा और छवि को किसी भी हद तक गिरा देते हैं। आज केंद्रीय मंत्री की कही ये सभी बातें बहुत हद तक सच लग रही हैं।

बीबीसी डॉक्यूमेंट्री पर समझने की बात इतनी भर है कि ये भारत की तेजी से वैश्विक शक्‍तिशाली उभरती छवि के खिलाफ ‘षड्यंत्र’ है।  डॉक्यूमेंट्री में प्रधानमंत्री पर हमला वास्‍तविकता में भारतीय न्यायपालिका के लिए भी चुनौती है। यह भी आश्‍चर्य है कि भारत में आज ऐसे लोगों की कोई कमी नहीं है जोकि एक विदेशी डॉक्यूमेंट्री निर्माता, ‘वह भी हमारे औपनिवेशिक शासक’, की राय को देश की शीर्ष अदालत के फैसले से अधिक महत्व दे रहे हैं।

भारत को विश्‍व भर में कमजोर करने की साजिश

आज आवश्‍यकता देश के सभी लोगों के बीच इस बात को ध्‍यान में रखने की है कि यह एक ऐसा समय है जब भारत ने जी20 की अध्यक्षता ग्रहण की है। आखिर इसी समय इस झूठी सामग्री को सामने लाने के लिए यह विशेष समय चुना जाना दर्शाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो सिर्फ बहाना हैं, इनके माध्‍यम से भारत को विश्‍व भर में कमजोर करने की साजिश बीबीसी ने रची है और हमारे देश के तमाम लोग उसे सिर्फ इसलिए कि वे पीएम के रूप में मोदी को पसंद नहीं करते हैं अभिव्‍यक्‍ति का नाम देकर वास्‍तव में देश को कमजोर करने का ही काम कर रहे हैं।
(लेखक वरिष्‍ठ स्‍तम्‍भकार एवं सामाजिक विश्‍लेषण  हैं।)

पीएम मोदी को भाया मप्र की लहरी बाई का मिलेट्स बीज बैंक, बताया प्रेरणादायक

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मध्य प्रदेश के जनजातीय बहुल जिले डिंडौरी में मिलेट्स (मोटे अनाज) के बीज बैंक की देशभर में प्रशंसा हो रही है। यह बीज बैंक डिंडौरी के ग्राम बैगा चक निवासी 27 वर्षीय बैगा महिला लहरी बाई चला रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके इस बीज बैंक की प्रशंका की है। उन्होंने ट्वीट के माध्यम से लहरी बाई का जिक्र करते हुए विलुप्त हो रहे मोटे अनाज के बीज बचाने की प्रशंसा की, साथ ही इसे अन्य लोगों के लिए प्रेरणादायक बताया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को लहरी बाई के एक वीडियो को रीट्वीट करते हुए लिखा है कि- लहरी बाई पर गर्व है, जिन्होंने श्री अन्न के प्रति उल्लेखनीय उत्साह दिखाया है। उनके प्रयास कई अन्य लोगों को प्रेरित करेंगे। मध्य प्रदेश फिलहाल मिलेट्स उत्पादन में देश में दूसरे नंबर पर है। पहला नंबर है छत्तीसगढ़ का, लेकिन छत्तीसगढ़ की सीमा से ही लगा है मप्र का डिंडौरी जिला। ये जिला मिलेट्स उत्पादन में प्रदेश में पहले नंबर पर है।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गत दिनों कहा था कि डिंडौरी जिले में मोटे अनाज के प्रसंस्करण को लेकर पहले से ही कार्य चल रहा है। इसके बाद लहरी बाई का बीज बैंक मीडिया की सुर्खियों में आ गया। डिंडौरी जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर के बजाग विकासखंड के सिलपीड़ी गांव में रहने वाली 27 साल की लहरी बाई करीब एक दशक से मिलेट्स बैंक चला रही हैं। उनके छोटे से अपने कच्चे आवास एक कमरे में 25 से अधिक विलुप्त प्रजाति के बीज का बैंक तैयार किया है और वह अपने गांव सहित आसपास के दो दर्जन से अधिक गांव के किसानों को अनाज के बदले यह बीज उपलब्ध कराती हैं। इनमें से कई अनाज ऐसे हैं, जिनके नाम जानने वाले भी अब बहुत कम लो बचे हैं। लहरी बाई के पास अनाज की उन किस्मों के बीज हैं जो लोगों की थाली ही, नहीं खेतों से भी गायब हो गए हैं। यानी दुर्लभ कलेक्शन।

जिले में मोटे अनाज बोवनी का रकबा और बढ़ाने की तैयारी भी कलेक्टर ने तेज कर दी है। लहरी बाई को कलेक्टर विकास मिश्रा ने गणतंत्र दिवस के समारोह में मुख्य अतिथि भी बनाया गया था। जिले में यह पहला अवसर था, जब किसी बैगा महिला को गणतंत्र दिवस के समारोह में मुख्य अतिथि बनाकर मंच पर बैठाया गया था।

बैंक में तीन प्रकार के विलुप्त सलहार के बीज सहित इसी तरह बड़े कोदो, लदरी कोदो, डोंगर कुटकी, लाल डोंगर कुटकी, सिताही कुटकी, नागदावन कुटकी, लालमडिया, गोदपारी मडिया सहित अन्य बीज भी महिला के बीज बैंक में उपलब्ध है। यह अनाज अब वैगाचक क्षेत्र में दिखने लगा है। अपने आवास में मिट्टी की कोठी बनाकर बीज को संरक्षित रखा गया है।

कलेक्टर विकास मिश्रा का कहना है कि लहरी बाई के पास विलुप्त हो रहे मोटे अनाज के 25 से अधिक प्रजाति के बीज है। लहरी बाई विगत 10 वर्ष से आसपास के 25 गांव के आदिवासी किसानों को अनाज के बदले यह बीज उपलब्ध कराती आ रही हैं। इस पहल से विलुप्त होती प्रजाति के अनाज अब भी लोगों के पास है। लहरी बाई ने बीज बैंक भी बना है। यह बहुत उल्लेखनीय पहल है। जिले में मोटे अनाज की पैदावार और बढ़ाने को लेकर विशेष कार्ययोजना बनाते हुए पहल की जा रही है।(एएमएपी)

जी-20 देशों का आगरा में महिला सशक्तिकरण पर मंथन शुरू

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जी-20 देश के प्रतिनिधि आगरा के होटल ताज कन्वेंसन में महिला सशक्तीकरण पर मंथन कर रहे हैं। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी और उप्र की महिला कल्याण , बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री बेबीरानी मौर्य ने संबोधन दिया है । यहां चार सत्रों में पैनल बनाकर चर्चा हो रही है। पहले दिन महिला सशक्तिकरण का मुद्दा चर्चा का विषय रहा । इसके साथ ही महिलाओं के नेतृत्व क्षमता को बढ़ाना, महिला उद्यमिता और कार्यक्षेत्र में महिलाओं की भागीदारिता बढ़ाना, डिजिटल स्किल और फ्यूचर स्किल को बढ़ावा देना चर्चा का विषय रहे।

केंद्र सरकार दे रही  महिला उद्यमिता को  बढ़ावा

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने इस अवसर पर कहा है कि भारत का जी-20 का अध्यक्ष बनना, हमारे लिए ऐतिहासिक पल है, जो भारत की विश्व बंधुत्व की नीतियों को दर्शता है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि महिला उद्यमिता को केंद्र सरकार बढ़ावा दे रही है। इससे रोजगार के अधिक अवसर विकसित किए जा रहे हैं। मंत्रालय द्वारा महिलाओं और शिशुओं के लिए विभिन्न योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं।

वहीं, आयोजन में अन्‍य विद्वानों ने भी अपने विचार रखे। जी-20 शेरपा अमिताभ कांत, जी-20 महिला सशक्तीकरण की चेयरपर्सन डा. संगीता रेड़डी, सलीमा अहमद  व अन्य वक्ताओं ने भी महिला सशक्तीकरण पर व्याख्यान दिए। इन्‍होंने कहा कि महिलाओं के लिए फ्रेंडली इन्वायरमेंट होना चाहिए। उनकी सुविधा के अनुसार कार्यालय होने चाहिए।

इस थीम पर हो रही है ये बैठक

डिजिटल क्षमता और भविष्य के कौशल को विकसित करना। जी 20 सशक्तीकरण में महिलाओं के विकास से महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास के बदलाव को प्राथमिकता देना। व्यवसायों और सरकारों के बीच सबसे समावेशी और कार्रवाई संचालित गठबंधन बनाना। महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए साझेदारी बनाना।  कार्यबल में महिलाओं को अधिक से अधिक शामिल करना। सूक्ष्म उद्यमों, महिला कारीगरों और शिल्पकारों के साथ काम को प्रदर्शित करना।

एयरपोर्ट पर ड्रोन से पुष्प वर्षा कर किया गया मेहमानों का स्‍वागत

आगरा में कल जी- 20 देशों के मेहमानों का कल भव्य स्वागत किया गया था। एयरपोर्ट पर ड्रोन से पुष्प वर्षा कर भारतीय परंपरा के अनुसार तिलक लगा शॉल ओढ़ाकर वेलकम किया गया। शाही बग्गी पर सवार होकर प्रतिनिधिमंडल का जोरदार स्वागत किया। इसके बाद फतेहाबाद रोड स्थित सेल्फी प्वाइंट पर कमिश्नर और डीएम ने जी-20 देशों के प्रतिनिधियों संग केक काटा।आज चार सत्रों की मीटिंग के बाद शाम को प्रतिनिधि आगरा किला का दीदार करने जाएंगे। आगरा किला में मेहमानों के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है।

एयरपोर्ट से होटल तक शाही अंदाज में विदेशी मेहमानों का दिव्य, अकल्पनीय और अभूतपूर्व स्वागत किया गया। पारम्परिक भारतीय संगीत, शहनाई, ढोल-नगाड़ों की धुन पर फूलों से सजी बग्घी में सवार होकर मेहमान एयरपोर्ट के गेट तक पहुंचे। उसके बाद रास्ते में उन पर पुष्प वर्षा की गई। विदेशी मेहमानों के स्वागत की श्रृंखला में वीआईपी रूट के विभिन्न चौराहों पर लोक कलाकारों द्वारा रंगारंग प्रस्तुतियां दी गई। वहीं स्कूली बच्चों ने 20 देशों के झंडे लहराकर विदेशी मेहमानों का स्वागत किया। योगी सरकार के द्वारा किए गए अभूतपूर्व स्वागत से विदेशी मेहमान भी गदगद और भावुक दिखाई दिखे।

जी 20 देशों के प्रतिनिधिमंडल में शामिल करीब 125 सदस्य जब एयरफोर्स के खेरिया एयरपोर्ट पहुंचे, तो आगरा के पुलिस कमिश्नर और मंडलायुक्त ने गर्मजोशी के साथ हाथ उनकी आगवानी की। एयरपोर्ट लाउंज में प्रतिनिधिमंडल के माथे पर तिलक लगाकर, कोट पर बैज लगाकर और शॉल ओढ़ाकर स्वागत की शुरुआत हुई। इसके बाद स्वागत की श्रृंखला को देखकर जी-20 प्रतिनिधिमंडल भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति, परंपरा अद्भुत है, अकल्पनीय है।

प्रतिनिधिमंडल के स्वागत के लिए रास्ते भर लोक कलाकारों ने विभिन्न भारतीय विधाओं का प्रदर्शन कर विदेशी मेहमानों का दिल जीत लिया। विदेशी मेहमानों का जगह-जगह हर चौराहे पर स्वागत किया गया। खेरिया मोड़ चौराहे पर विदेशी मेहमानों का मारवाड़ी, राजस्थानी डांस कर कलाकारों ने स्वागत किया। वहीं फतेहाबाद रोड के दोनों तरफ हजारों लोगों ने हाथ हिलाकर बस में सवार प्रतिनिधियों का पूरे उत्साह के साथ अभिवादन किया। स्कूली बच्चे ने हाथ मे रंग-बिरंगे झंडे, गुब्बारे, तिरंगा लेकर विदेशी मेहमानों का स्वागत किया। विदेशी मेहमानों के स्वागत के लिए जिला प्रशासन ने फतेहाबाद रोड को शानदार तरीके से सजाया है। पूरे रुट पर लाइटिंग की गई है। जगह जगह पेड़- पौधे लगाए गए है। सड़को की मरम्मत की गई है। दीवारों पर रंग-रोगन कराया गया है। बीएसएनएल चौराहे पर पुष्प प्रदर्शनी लगाई गई है। मेहमानों के स्वागत में घरों के छज्जों से लोगों ने पुष्प वर्षा की।

जी-20 प्रतिनिधिमंडल का कारवां आई लव आगरा यानी सेल्फी प्वाइंट पर पहुंचा तो वहां प्रतिनिधिमंडल के आने की खुशी में शहरवासियों ने 21 किलो का केक काटकर उनका जोरदार स्वागत किया। देश के जाने-माने ग़ज़ल गायक सुधीर नारायण और उनके साथियों ने वसुधैव कुटुंबकम का गीत गाकर भारत के राग और ताल से प्रतिनिधिमंडल को जोड़ा। जी-20 देशों के प्रतिनिधिमंडल ने इसे सहभागिता, समन्वय और स्वागत की अभूतपूर्व मिसाल बताया।विदेशी मेहमानों की सुरक्षा को लेकर भी आगरा में विशेष इंतजाम किए गए हैं। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात किया गया है। आगरा को मानो पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। एटीएस, पैरामिलिट्री फोर्स के साथ स्पेशल कमांडो की तैनाती की गई है। जमीन से लेकर आसमान तक विदेशी मेहमानों की सुरक्षा की जा रही है ।

उल्‍लेखनीय है कि भारत को पहली बार जी-20 देशों की मेजबानी मिली है। ऐसे में दुनियाभर की नजर आगरा पर टिकी है। आगरा में हो रहे इस सम्‍मेलन में महिला एवं बाल विकास से जुड़ी 20 देशों की महिलाएं, सचिव और वक्ता सहित 150 सदस्य शामिल हुए हैं ।  (एएमएपी)

नेपाल में बड़ा हादसा, राप्ती नदी में बस गिरने से 12 यात्रियों की मौत

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मृतकों और घायलों में कई भारतीय

नेपाल में बीती देर रात एक यात्री बस भालुवांग के निकट राप्ती नदी के पुल से नीचे नदी में गिर गई। इस दुर्घटना में 12 लोगों की मौत हो गई और 23 लोगों के घायल हो गए। घायल यात्रियों का अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। पुलिस ने बताया कि मृतकों और घायल यात्रियों में कई भारतीय नागरिक भी हैं।नेपालगंज से काठमांडू की तरफ आ रही यह यात्री बस बीती देर रात भालुवांग के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई। घायल यात्रियों ने पुलिस को बताया कि शुक्रवार की शाम को नेपालगंज से काठमांडू के लिए रवाना हुई इस बस की स्पीड बहुत अधिक थी। राप्ती नदी के पुल पर ड्राइवर ने बस पर नियंत्रण खो दिया और बस पुल से नीचे नदी में गिर गई। जान बचाने के लिए कई यात्रियों ने बस से छलांग लगा दी थी। दुर्घटनास्थल से पुलिस को शनिवार दोपहर तक 12 शव मिल चुके थे। हालांकि इनमें से शाम चार बजे तक 9 शवों की ही पहचान हो पाई है।

घटनास्थल पर पहुंची राजमार्ग पुलिस ने बताया कि मृतकों में अब तक दो भारतीय नागरिकों की भी शिनाख्त हुई है। पुलिस इंस्पेक्टर उज्जवल बहादुर सिंह ने बताया कि मरने वालों में उत्तर प्रदेश के मनोज (31) तथा बिहार के योगेन्द्र राम (67) भी हैं। पुलिस ने यह भी बताया है कि जिन तीन शवों की पहचान नहीं हो पाई है, उनमें भी कोई भारतीय नागरिक हो सकता है।

भारतीय परियोजनाओं से नेपाली युवाओं के पलायन में आई कमी : विदेश मंत्री साउद  

इस दुर्घटना में घायल हुए 23 यात्रियों को नेपालगंज मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। अस्पताल की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक गम्भीर रूप से घायल भारतीय नागरिकों में उत्तर प्रदेश के निरंजन कोरी (20), आशुतोष गौतम (24), अरबाज खान (20), मोहम्मद जावेद (25), छोटी सिलौरा (20), नाफीजा खान (19), राहुल कुमार अहीर (23) हैं। इनके अलावा 16 नेपाली नागरिक भी घायल हुए हैं। इस बीच पुलिस ने बस चालक और सह चालक को हिरासत में ले लिया है। (एएमएपी)

तुर्किये-सीरिया में मरीजों के लिए मसीहा बन रहा भारतीय फिक्सेटर

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भारतीय सेना के जवान ने किया है तैयार।

भारतीय सेना के एक डॉक्टर ने हाथ की हड्डी टूटने पर उसके इलाज के लिए एक बाहरी फिक्सेटर विकसित किया है जिसका उपयोग तुर्किये और सीरिया में भूकंप पीड़ितों की मदद के लिए किया जा रहा है। अधिकारी ने कहा कि बाहरी फिक्सेटर का उद्देश्य मरीजों को तेजी से ठीक करना है। फिक्सेटर को विकसित करने वाले कर्नल विजय पांडे ने कहा कि यह अन्य उपलब्ध समाधानों से सस्ता है।

उन्होंने कहा कि नया फिक्सेटर पहले से उपलब्ध समाधानों की तुलना में हल्का और सस्ता है और रोगियों को तेजी से ठीक कर सकता है।  कर्नल विजय पांडे ने कहा कि यह बाहरी फिक्सेटर जिसका मैंने आविष्कार किया है, मुख्य रूप से हाथ के इंटरकॉन्डाइलर फ्रैक्चर के लिए है। यह काफी सस्ता है, इसकी कीमत 300 रुपये के आसपास है और इसका वजन करीब पांच ग्राम है। इसे एक सामान्य सर्जन द्वारा आसानी से लगाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि हम पहले ही 100 रोगियों पर इस फिक्सेटर का उपयोग कर चुके हैं और वर्तमान में इसका उपयोग सीरिया और तुर्किये में आए भूकंपों में किया जा रहा है। इस फिक्सेटर से अन्य फिक्सेटरों द्वारा लिए गए छह महीनों की तुलना में केवल एक महीने में 90 फीसदी गतिशीलता प्राप्त कर सकते हैं। भूकंप प्रभावित तुर्किये के अंताक्य में बचाव और खोजी दल लोगों को बचाने के लिए समय के साथ संघर्ष कर रहा है क्योंकि देश में मरने वालों की संख्या 24,617 तक पहुंच गई है।

संयुक्त राष्ट्र के राहत प्रमुख ने कहा, यह सदी की सबसे खराब घटना

तुर्किये की सरकारी समाचार एजेंसी अनादोलू ने ट्वीट किया, चूंकि मरने वालों की संख्या बढ़ रही है, संयुक्त राष्ट्र के राहत प्रमुख मार्टिन ग्रिफिथ्स ने इस सप्ताह की शुरुआत में दक्षिणी तुर्किये और उत्तर-पश्चिमी सीरिया में आए शक्तिशाली भूकंपों का वर्णन इस क्षेत्र में एक सदी में होने वाली “सबसे खराब घटना” के रूप में किया है।

इससे पहले रविवार को भारत की ओर से चलाए जा रहे ऑपरेशन दोस्त की सातवीं खेप 23 टन से अधिक राहत सामग्री के साथ भूकंप प्रभावित सीरिया पहुंची, जिसे दमिश्क हवाई अड्डे पर स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण उप मंत्री मुताज डौजी ने प्राप्त किया। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ट्वीट किया, 7वां ऑपरेशन दोस्त विमान 23 टन से अधिक राहत सामग्री के साथ सीरिया पहुंचा, जिसमें जेनसेट, सोलर लैंप, आपातकालीन और महत्वपूर्ण देखभाल की दवाएं और आपदा राहत उपभोग्य वस्तुएं शामिल थीं। राहत सामग्री को दमिश्क हवाई अड्डे पर स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण उप मंत्री मुताज डौजी द्वारा प्राप्त किया गया।

बता दें कि 06 फरवरी को तुर्किये और सीरिया में विनाशकारी भूकंप आया था। भारत ने इस क्षेत्र में विनाशकारी भूकंपों और झटकों के बाद तुर्किये और सीरिया को सहायता प्रदान करने के लिए ऑपरेशन दोस्त लॉन्च किया था। ऑपरेशन दोस्त के तहत भारत तुर्किये और सीरिया को भारी मात्रा में मानवीय सहायता भेज रहा है। इसके तहत भारत ने शनिवार को सी-17 सैन्य परिवहन विमान से तुर्किये और सीरिया के भूकंप पीड़ितों के लिए जीवन रक्षक दवाओं और राहत सामग्री की अतिरिक्त खेप भेजी। भारत के ‘ऑपरेशन दोस्त’ के तहत राहत सामग्री की यह सातवीं खेप भेजी गई है।(एएमएपी)

देश की पहली महिला जासूस नीरा आर्य की याद में बना स्मारक, 26 को होगा उद्घाटन

साहित्यकार तेजपाल सिंह धामा ने 70 लाख रुपये से बनवाया है स्मारक एवं पुस्तकालय
आजादी की जंग में योगदान देने वाले 300 से अधिक स्वतंत्रता सेनानियों के चित्र लगाए गए

आजाद हिन्द फौज में रानी झांसी रेजिमेंट की सिपाही एवं देश की पहली महिला जासूस नीरा आर्य की याद में उनके जन्म स्थान पर स्मारक एवं पुस्तकालय बनाया गया है, जिसका लोकार्पण 26 जनवरी को होगा। नीरा आर्य स्मारक एवं पुस्तकालय की स्थापना खेकड़ा की पट्टी गिरधरपुर में साहित्यकार तेजपाल सिंह धामा एवं मधु धामा ने की है। इसका लोकार्पण चाणक्य फेम प्रख्यात फिल्म निर्देशक चंद्रप्रकाश द्विवेदी, फिल्म निर्माता विशाल त्यागी एवं विधायक योगेश धामा करेंगे।

सीताकौर देवी की प्रतिमा भी स्थापित

साहित्यकार तेजपाल सिंह धामा ने बताया कि आजाद हिन्द फौज की अमर सेनानी वीरांगना नीरा आर्य की स्मृति में निर्मित स्मारक एवं पुस्तकालय का लोकार्पण 26 जनवरी को दोपहर बारह बजे किया जाएगा। इसका लोकार्पण चाणक्य फेम प्रख्यात फिल्म निर्देशक चंद्रप्रकाश द्विवेदी, फिल्म निर्माता विशाल त्यागी एवं विधायक योगेश धामा करेंगे। नीरा आर्य स्मारक एवं पुस्तकालय की स्थापना खेकड़ा की पट्टी गिरधरपुर में की गई है। भूमि की कीमत समेत इसके निर्माण में करीब 70 लाख रुपये खर्च हुए हैं। यहां नीरा आर्य की प्रतिमा के साथ-साथ सीताकौर देवी की प्रतिमा भी स्थापित की गई है। दो मंजिला इस स्मारक में नीचे प्रतिमा एवं पुस्तकालय बनाया गया है और ऊपरी मंजिल पर गरीब लड़कियों को निशुल्क सिलाई सिखाने की व्यवस्था की गई है।

ऐतिहासिक महत्व की पत्रिकाओं के दुर्लभ अंक किए गए संग्रहित

साहित्यकार मधु धामा ने बताया कि पुस्तकालय में सामाजिक, धार्मिक, ऐतिहासिक पुस्तकों के साथ-साथ साहित्य से संबंधित पुस्तकें एवं दर्जनों ऐतिहासिक महत्व की पत्रिकाओं के दुर्लभ अंक भी संग्रहित किए गए हैं। ऐसी 16 पुस्तकें भी पुस्तकालय में हैं, जिनमें नीरा आर्य के जीवन के अनेक प्रसंग दिए गए हैं। इस पुस्तकालय में बागपत जिले के सभी 300 से अधिक स्वतंत्रता सेनानियों के चित्र एवं आजादी की जंग में उनके योगदान को दर्शाने वाले फोटो फ्रेम में लगाए गए हैं। इसी के साथ गोबिंद बल्लभ पंत, मैथिलीशरण गुप्त, हरिवंश राय बच्चन, पंडित नेहरू एवं नेताजी सुभाष के हाथ के लिखे हुए कई मूल पत्र भी इस पुस्तकालय में रखे गए हैं। पुस्तकालय को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयारी करने वाले छात्रों के साथ-साथ आम पाठकों और शोधार्थियों के लिए भी उपयोगी बनाया गया है, क्योंकि इसमें हर प्रकार की पुस्तकें संग्रहित की गई हैं।

नीरा आर्य के जीवन पर बन रही फिल्म

उन्होंने बताया कि नीरा आर्य के जीवन पर बॉलीवुड में एक फिल्म का निर्माण भी किया जा रहा है। इस फिल्म के निर्देशक चंद्रप्रकाश द्विवेदी को चाणक्य टेलीविज़न धारावाहिक के निर्देशक एवं अभिनेता के रूप में सर्वाधिक जाना जाता है। उपनिषद गंगा भी इनका लोकप्रिय धारावाहिक रहा। इसके अलावा पिंजर, जेड प्लस, मोहल्ला अस्सी, सम्राट पृथ्वीराज जैसी फिल्मों का इन्होंने कुशल निर्देशन किया। रामसेतु और ओएमजी-2 में ये क्रिएटिव प्रोड्यूसर थे। नीरा आर्य फिल्म के निर्माता विशाल त्यागी बॉलीवुड में किसी परिचय के मोहताज नहीं है।

नौ महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंची थोक महंगाई दर

नेताजी ने दिया था उन्हें ‘नागिनी’ नाम

नीरा आर्य का जन्म 5 मार्च, 1902 को तत्कालीन संयुक्त प्रांत के खेकड़ा नगर में हुआ था। वर्तमान में खेकड़ा भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में बागपत जिले का एक शहर हैं। इनकी शादी ब्रिटिश भारत में सीआईडी इंस्पेक्टर श्रीकांत जयरंजन दास के संग हुई थी। श्रीकांत जयरंजन दास अंग्रेज भक्त अधिकारी था। इन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जान बचाने के लिए अंग्रेजी सेना में अफसर अपने पति श्रीकांत जयरंजन दास की हत्या कर दी थी। पति को मारने के कारण ही नेताजी ने उन्हें ‘नागिनी’ कहा था। आजाद हिन्द फौज के समर्पण के बाद जब दिल्ली के लाल किले में मुकदमा चला तो सभी बंदी सैनिकों को छोड़ दिया गया लेकिन पति की हत्या के आरोप में नीरा आर्य को काला पानी की सजा हुई, जहां इन्हें घोर यातनाएं दी गईं।(एएमएपी)

पहले आर्थिक संकट, अब राजनैतिक अस्थिरता…कंगाल पाक में खुलेआम हो रहे न्यायपालिका पर जुबानी हमले

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पाकिस्तान के आर्थिक हालात पहले ही खराब हैं लेकिन इसके बावजूद वहां राजनैतिक अस्थिरता लगातार बढ़ रही है। अब वहां न्यायपालिका पर भी खुलेआम हमले शुरू हो गए हैं। दरअसल पाकिस्तान की सत्ताधारी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) की नेता मरियम नवाज ने खुले मंच से सुप्रीम कोर्ट जजों पर निशाना साधा है। उन्होंने पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश की भी खुलेआम आलोचना की है और इमरान खान का परोक्ष समर्थन करने का आरोप लगाया।

पाकिस्तान के सरगोधा शहर में अपनी पार्टी के एक कार्यक्रम में पीएमएल (एन) की उपाध्यक्ष और चीफ ऑर्गेनाइजर मरियम नवाज ने सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस इजाजुल अहसान, जस्टिस मजाहिर अली नकवी, पूर्व मुख्य न्यायाधीश साकिब निसार और जस्टिस आसिफ सईद खोसा, आईएसआई के पूर्व चीफ लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद की तस्वीरें दिखाते हुए कहा कि लोगों को इनके चेहरे ध्यान से देख लेने चाहिए क्योंकि 2017 में नवाज शरीफ को सत्ता से बाहर करने की इन्होंने ही साजिश रची थी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के मौजूदा संकट के लिए यही लोग जिम्मेदार हैं।

सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जजों पर खुले तौर पर हमला करते हुए मरियम नवाज ने कहा कि वह अपनी कही बातों के परिणाम झेलने के लिए तैयार हैं लेकिन वह इनका पर्दाफाश किए बिना नहीं रहेंगी। मौजूदा चीफ जस्टिस उमर अदा बंदियाल पर निशाना साधते हुए मरियम नवाज ने कहा कि ‘मुख्य न्यायाधीश अपने बेंच संबंधी काम करने के बजाय सरकार, चुनाव आयोग और राज्यपालों की जिम्मेदारी तय कर रहे हैं।’ मरियम ने कहा कि ‘आप अपनी बेसिक जिम्मेदारी नहीं निभा रहे हैं और कुछ और ही काम में लगे हैं।’

मरियम नवाज ने कहा कि इमरान खान को सेना ने छोड़ दिया है तो अब वह न्यायपालिका के जरिए सत्ता में आना चाहते हैं। वहीं मरियम नवाज के बयान पर इमरान खान ने कहा कि चुनाव से बचने के लिए ही मरियम नवाज ने न्यायपालिका पर हमला बोला है। इमरान खान ने न्यायपालिका से मरियम नवाज के बयान का संज्ञान लेने की अपील की है।(एएमएपी)

जब आई न्यूक्लियर प्रोग्राम के जनक भाभा की मौत की खबर

(24 जनवरी पर विशेष)

देश-दुनिया के इतिहास में 24 जनवरी की तारीख तमाम अहम वजह से खास है। यह ऐसी तारीख है, जिसने सारे देश को हिलाकर रख दिया था। दरअसल 24 जनवरी, 1966 को भारतीय न्यूक्लियर प्रोग्राम के जनक होमी जहांगीर भाभा के विमान दुर्घटना में मारे जाने की खबर आई तो सारा राष्ट्र रो पड़ा। भाभा का जन्म 30 अक्टूबर, 1909 को मुंबई के एक अमीर पारसी परिवार में हुआ था। भाभा न केवल वैज्ञानिक, बल्कि बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। डॉ. भाभा की शख्सियत ऐसी थी कि नोबेल पुरस्कार विजेता सीवी रमन उन्हें भारत का लियोनार्दो द विंची कहकर बुलाते थे।एयर इंडिया का यह विमान मुंबई से न्यूयॉर्क जा रहा था। अमेरिका पहुंचने से पहले वह यूरोप के आलप्स माउंटेन रेंज में क्रैश हो गया। इस हादसे में होमी जहांगीर भाभा समेत 117 लोगों की जान गई थी। कहा जाता है कि होमी जहांगीर भाभा की मौत के पीछे अमेरिकी खुफिया एजेंसी का हाथ था। भारत के न्यूक्लियर एनर्जी प्रोग्राम को रोकने के लिए भाभा की मौत की साजिश रची गई थी। हादसे के 42 साल बाद 2008 में छपी विदेशी पत्रकार ग्रेगरी डगलस की किताब कन्वर्सेशन विद द क्रो में यह दावा किया गया।

विमान हादसे के तीन महीने पहले भाभा की एक घोषणा ने दुनिया के बड़े मुल्कों को चौंका दिया था। भाभा ने ऑल इंडिया रेडियो पर घोषणा की थी कि अगर उन्हें छूट मिले, तो वे 18 महीने में एटम बम बनाकर दिखा सकते हैं। भाभा हमेशा देश की सुरक्षा, ऊर्जा, कृषि और मेडिसिन के क्षेत्र में न्यूक्लियर एनर्जी के डेवलपमेंट का जिक्र करते थे। कहते हैं कि अगर उनका विमान क्रैश नहीं होता तो भारत न्यूक्लियर साइंस की फील्ड में कई उपलब्धियां बहुत पहले हासिल कर सकता था।

गाजा युद्ध में इजराइल को बड़ा नुकसान, 21 सैनिक हुए हताहत

होमी भाभा भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के काफी नजदीक थे। साथ ही दुनिया के उन चुनिंदा लोगों में से थे जो उन्हें भाई कहकर पुकारते थे। भाभा 1950 से 1966 तक परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष थे। तब वे भारत सरकार के सचिव भी हुआ करते थे। कहते हैं कि सादगी पसंद भाभा कभी भी अपने चपरासी को अपना ब्रीफकेस नहीं उठाने देते थे।(एएमएपी)

कर्नाटक फतह के लिए भाजपा ने बदली अपनी रणनीति, बोम्मई संग येदियुरप्पा को भी कमान

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कर्नाटक की चुनावी जंग में भाजपा अपने मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के नेतृत्व में चुनाव मैदान में तो उतरेगी, लेकिन उनको भावी सरकार के चेहरा बताने से बचेगी। उसका मानना है कि इस रणनीति से वह विभिन्न सामाजिक समुदायों का समर्थन हासिल कर सकेगी। दरअसल, पार्टी इस समय अपने समर्थक माने जाने वाले लिंगायत समुदाय के साथ राज्य के दूसरे प्रभावी वोक्कालिगा समुदाय में भी पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रही है।पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के पद से हटने के बाद उनकी सहमति से ही बसवराज बोम्मई को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया था। बोम्मई भी लिंगायत समुदाय से आते हैं, जिसके सबसे बड़े नेता के रूप में येदियुरप्पा जाने जाते हैं। भाजपा को लगता है कि चुनाव अभियान में उनको आगे रखने से ज्यादा लाभ मिलेगा। राज्य विधानसभा में अपने संभवत: आखिरी और विदाई भाषण में उन्होंने जिस तरह से पार्टी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई और उनके भाषण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो तारीफ कर ट्वीट किया, उसके भी राजनीतिक मायने काफी अहम हैं।

अब भी येदियुरप्पा है जरूरी

साफ है कि भाजपा अब भी येदियुरप्पा के सहारे है और उनके रहते वह किसी और नेता को राज्य का नेतृत्व नहीं सौंप सकती है, भले ही वह किसी पद पर रहें या नहीं। यही वजह है कि उनको पार्टी ने अपने सर्वोच्च नीति निर्धारक निकाय केंद्रीय संसदीय बोर्ड में भी शामिल किया हुआ है। हालांकि बीच बीच में येदियुरप्पा के बेटों को लेकर चर्चाएं होती रही है कि उनको आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है, लेकिन फिलहाल वह भी इस मुद्दे को तूल देने के मूड में नहीं हैं। दूसरी तरफ राज्य के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए पार्टी जिस रणनीति पर चल रही है, उसमें चुनावी राजनीति से दूर हो चुके पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा को चुनाव अभियान की अगुआई सौंप रखी है।

बोम्मई से भी मिल सकता है लाभ

बसवराज बोम्मई को मुख्यमंत्री बनाए जाने के पीछे एक बड़ी वजह लिंगायत समुदाय को यह संदेश देना था कि पार्टी उसको पूरा सम्मान दे रही है। इसके अलावा बोम्मई चूंकि समाजवादी पृष्ठभूमि से आते हैं और उनके पिता एसआर बोम्मई भी जनता दल से मुख्यमंत्री रह चुके हैं, ऐसे में इस चुनाव में वह समाजवादी खेमे खासकर जद एस के समर्थक वर्ग में सेंध लगा सकते हैं। हालांकि इसका खुलासा तो चुनाव नतीजे आने के बाद ही हो सकेगा।

वोक्कालिगा पर नजर

भाजपा की कोशिश इस बार वोक्कालिगा समुदाय में पैठ बढ़ाने की है। राज्य की भाजपा सरकार में आधा दर्जन से ज्यादा मंत्री इसी समुदाय के हैं। पार्टी ने दूसरे दलों के प्रमुख वोक्कालिगा नेताओं को सरकार में अहमियत भी दी है। पूराना मैसूर क्षेत्र में इस समुदाय का प्रभाव है और वही भाजपा की सबसे कमजोर कड़ी है। ऐसे में अगर बोम्मई के चेहरे पर सीधे दांव लगाया जाता है तो उसे दोहरे नुकसान की आशंका है। एक तो येदियुरप्पा पीछे चले जाएंगे और दूसरा उसके सामाजिक समीकरण बिगड़ जाएंगे।(एएमएपी)