पटना हाई कोर्ट ने बिहार में जाति गणना पर तत्काल प्रभाव से लगाई रोक

दो दिनों की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट का फैसला।

बिहार में नीतीश सरकार की जाति आधारित गणना पर गुरुवार को पटना हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस विनोद चंद्रन की बेंच ने आदेश दिया है कि गणना को तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाए। इसके पहले हाई कोर्ट में मामले को लेकर दो दिन तक सुनवाई हुई थी। इसके बाद चीफ जस्टिस विनोद चंद्रन की बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस फैसले के बाद नीतीश सरकार को बड़ा झटका लगा है।

 

दूसरी ओर जातीय गणना पर मुख्यमंत्री ने गुरुवार को कहा कि जाति आधारित गणना सर्वसम्मति से कराई जा रही है। हम लोगों ने केंद्र सरकार से इसकी अनुमति ली है। हम पहले चाहते थे कि पूरे देश में जाति आधारित जनगणना हो लेकिन जब केंद्र सरकार नहीं मानी तो हम लोगों ने जाति आधारित गणना सह आर्थिक सर्वे कराने का फैसला लिया।

बीते 24 अप्रैल को ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पटना हाई कोर्ट जाने को कहा था। इसके बाद 2 और 3 मई को हाई कोर्ट में इस मामले में सुनवाई हुई थी। मामले में बीते सोमवार को पहली सुनवाई होनी थी लेकिन सरकार की ओर से किए गए काउंटर एफिडेविट रिकॉर्ड में नहीं होने के कारण हाई कोर्ट ने सुनवाई को मंगलवार के लिए टाल दिया।

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अपराजिता सिंह और हाई कोर्ट के अधिवक्ता दीनू कुमार को जातीय गणना को असंवैधानिक करार देने के लिए हाई कोर्ट में दलीलें पेश करनी थीं। एडवोकेट जनरल (महाधिवक्ता) पीके शाही ने सरकार की ओर से अपना पक्ष रखा। कोर्ट ने एडवोकेट जनरल से पूछा कि जाति आधारित गणना कराने का उद्देश्य क्या है? इसको लेकर क्या कोई कानून बनाया गया है? जवाब में पीके शाही ने कहा कि दोनों सदन में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर जातीय गणना कराने का निर्णय लिया गया था। कैबिनेट ने उसी के मद्देनजर गणना कराने पर अपनी मुहर लगाई। यह राज्य सरकार का नीतिगत फैसला है। इसके लिए बजट में प्रावधान किया गया है।

याचिकाकर्ता के वकील दीनू कुमार ने कहा कि आखिर इस जाति आधारित गणना का उद्देश्य क्या है? इसमें 500 करोड़ रुपये खर्च करने की बात कही जा रही है लेकिन इसका परिणाम क्या होगा और किसे फायदा होगा। सरकार यह बताए कि समाज में जाति प्रथा को खत्म करने की बात लगातार कही जा रही है लेकिन जातीय गणना कराकर किसे फायदा पहुंचाया जा रहा है? इसका जवाब सरकार दे।

संविधान के अनुच्छेद-37 का हवाला देकर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि राज्य सरकार का यह संवैधानिक दायित्व है कि वह अपने नागरिकों के बारे में जानकारी प्राप्त करे ताकि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि जाति से कोई भी राज्य अछूता नहीं है। जातियों की जानकारी के लिए पहले भी मुंगेरीलाल कमीशन का गठन हुआ था। बिहार सरकार की ओर से गणना असंवैधानिक है।

सरकार के पास डेटा नहीं

पीके शाही ने यह भी कहा कि सरकार के पास वंचित समाज और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का कोई डाटा नहीं है। लिहाजा जातिगत आंकड़े जरूरी हैं। उन्होंने यह भी दलील दी है कि यह कास्ट सेंसस नहीं है। यह जातीय गणना सह आर्थिक सर्वेक्षण हैं। महाधिवक्ता से याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि आपका निर्णय राजनीति से प्रेरित है। राजनीतिक फायदे के लिए यह सब हो रहा है।

इसके जवाब में महाधिवक्ता ने कहा कि हर सरकार राजनीति के तहत कार्य करती है। वोट बैंक के लिए होती है। हर राज्य और केंद्र की सरकार वोट बैंक के लिए ही योजना बनाती है। किसी भी सरकार के कार्यों को वोट बैंक से दूर नहीं कहा जा सकता है। पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बेंच ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।(एएमएपी)

2021 मेष राशि : मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि, आय के स्रोत बढ़ेंगे

समीर उपाध्याय, ज्योतिर्विद

(चु, चे, चो, ल, ली, लू, ले, लो, अ)

धार्मिक कार्यों में आपकी रुचि बढ़ेगी साथ ही धार्मिक कार्यों में खर्च भी करेंगे। मई से दिसंबर के मध्य अवश्य ही कोई लंबी यात्रा कर सकते हैं। विदेश यात्रा के लिए योजना भी बनाएंगे। संतान के ऊपर आपको खर्च करना पड़ सकता है। संतान के स्वास्थ्य को लेकर कुछ परेशानी हो सकती है। सावधानी बरतें अच्छा रहेगा। रुके हुए या बिगड़े हुए कार्य को पूर्ण करने में मित्र की सहायता से लाभ मिलेगा। अपने पड़ोसी तथा भाई-बन्धु के साथ वाद-विवाद से बचें। इस साल आप अपने कार्य को लेकर कुछ ज्यादा व्यस्त रहेंगे। मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। आय के स्रोत बढ़ेंगे। व्यवसाय में लाभ और उन्नति होगी। सुख-सुविधा के लिए आप खर्च करेंगे। वाहन की खरीद बिक्री कर सकते हैं। प्रेम सम्बन्ध को संभालकर रखने में भलाई है। प्रेम को प्रेम ही समझें कुछ और नहीं। धन प्राप्त करने के लिए आपको बहुत मेहनत करनी पड़ेगी। माता-पिता का सहयोग मिलेगा। माता-पिता धार्मिक यात्रा पर जा सकते हैं। यदि इसके लिए आपका योगदान होता है तो आपके व्यवसाय के लिए शुभ रहेगा। ईमानदार अतिरिक्त प्रयास से अपने भाग्य का निर्माण करने का योग बन रहा है। अपने स्वस्थ जीवन के लिए स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।

क्या करें, क्या न करें

  1. आप नियमित हनुमान चालीसा तथा सुन्दर काण्ड का पाठ करें।
  2. स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो रही है तो बजरंगबाण का पाठ करें।
  3. परिवार के सदस्यो के बीच बहस करने से बचें।
  4. अपने जीवनसाथी का सम्मान करें और उनको उपहार देने से अनेक समस्यायों का निराकरण स्वयं हो जाएगा।
  5. अपनी ऊर्जा का सकारात्मक कार्यों के लिए उपयोग करें। नकारात्मक पक्ष को टाटा बाय-बाय करें तो ठीक रहेगा।
  6. प्रेम सम्बन्ध को दृढ़ करने के लिए एक दूसरे को धार्मिक पुस्तक गिफ्ट में दें तो अच्छा रहेगा।
  7. शत्रुओं को बल से नहीं बुद्धि से परास्त करें।

(राशिफल चंद्र राशि के अनुसार)


2021 मेष राशि : मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि, आय के स्रोत बढ़ेंगे

2021 वृष राशि : आर्थिक स्थिति बेहतर होगी, कुछ नया करने की सोचें

2021 मिथुन राशि : नए कार्यों की योजनाएं बनेंगी और सफल होंगे

2021 कर्क राशि : नया वाहन- मकान, वेतन वृद्धि व पदोन्नति का योग

2021 सिंह राशि : ऐसी खुशी मिलने की संभावना जिसका इंतजार कर रहे हैं

वसुंधरा ने गहलोत के आरोपों को बताया झूठ

बोंली- इतना अपमान किसी ने नहीं किया

भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता वसुंधरा राजे ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के उन आरोपों का जवाब दिया है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि पूर्व सीएम ने सचिन पायलट के बगावत के समय उनकी सरकार बचाई थी। राजे ने गहलोत के दावों को ‘अपमान’ और ‘साजिश’ बताते हुए चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यदि गहलोत के पास इस बात का सबूत है कि उनके विधायकों ने रिश्वत ली थी तो वह एफआईआर दर्ज कराएं।

 

राजे ने देर शाम एक बयान जारी किया और गहलोत के आरोपों को नकारा। उन्होंने मुख्यमंत्री की ओर से गृहमंत्री अमित शाह पर लगाए गए आरोपों को झूठ बताते हुए अपने अपमान का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिस तरह गहलोत ने उनका अपमान किया ऐसा राजस्थान में किसी ने अब तक नहीं किया था। वसुधरा ने कहा, ‘गहलोत का बयान मेरे खिलाफ साजिश है। गहलोत के जितना किसी ने मेरा अपमान नहीं किया है। विधानसभा चुनाव में हार के डर से वह झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने ऐसे झूठे आरोप अपने ही पार्टी में बगावत से विचलित होकर लगाए हैं।’

इससे पहले केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी गहलोत के दावों को झूठा करार दिया था और पूछा कि उन्होंने केस क्यों नहीं दर्ज कराया है? गहलोत ने वसुंधरा का साथ मिलने की बात ऐसे समय पर कही है जब उनकी पार्टी के ही नेता और पूर्व उपमुख्यंत्री सचिन पायलट दोनों नेताओं के बीच मिलीभगत के दावे कर रहे हैं।

विधानसभा चुनाव से पहले अशोक गहलोत की ओर किए गए दावों ने राजस्थान की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। राजनीतिक के जादूगर कहे जाने वाले वाले गहलोत के इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। एक तरफ जहां इसे सचिन पायलट पर हमले के रूप में देखा जा रहा है तो दूसरी तरफ वसुंधरा राजे को भी भाजपा में अहसज करने के प्रयास के तौर पर बताया जा रहा है। सचिन पायलट की प्रतिक्रिया पर भी नजरें टिकी हुई हैं।

गौरतलब है कि जुलाई 2020 में अशोक गहलोत के तब उपमुख्यमंत्री रहे सचिन पायलट ने 18 वफादार विधायकों के साथ बगावत कर दी थी। एक महीने तक चले राजनीतिक संकट का अंत राहुल गांदी और प्रियंका गांधी वाड्रा के हस्तक्षेप से हुआ था। बाद में पायलट को उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। रविवार को राजे के गृहक्षेत्र धौलपुर में गहलोत ने दावा किया कि वसुंधरा राजे, पूर्व विधानसभा स्पीकर कैलाश मेघवाल और विधायक शोभारानी कुशवाहा को पता था कि उनकी पार्टी के कुछ लोग सरकार गिरा रहे हैं। लेकिन उन्होंने उनका साथ देने से इनकार कर दिया और कांग्रेस सरकार को गिरने से बचा लिया था।(एएमएपी)

किसान आंदोलन : तीनों कानूनों पर समिति बनाने के संकेत, मंगलवार को आदेश सुनाएगा सुप्रीम कोर्ट

अनूप भटनागर । 

दिल्ली की सीमाओं पर पड़ोसी राज्यों के किसानों की घेराबंदी से उत्पन्न स्थिति के परिप्रेक्ष्य में तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों पर अमल स्थगित करके इनके आपत्तिजनक बिन्दुओं पर विचार के लिये उच्चस्तरीय समिति गठित करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नजर नहीं आता है। इस समिति की अध्यक्षता देश के किसी पूर्व प्रधान न्यायाधीश को सौंपे जाने का न्यायालय ने संकेत दिया है। साथ ही न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि इस समय वह इन कानूनों की खत्म करने के बारे में बात नहीं कर रहा है। न्यायालय इस मामले पर मंगलवार, 12 जनवरी को अपना आदेश सुनाएगा। 


 

समिति बनने पर घर लौट जाएं किसान

न्यायालय ने कोविड-19 महामारी के दौरान उचित दूरी बनाये रखने जैसे नियमों का पालन नहीं होने और कुछ किसानों की मृत्यु होने पर चिंता व्यक्त की और कहा वह चाहता है कि समिति गठित होने की स्थिति में किसान अपने घर लौट जायें।

न्यायालय ने इस विवाद का अभी तक समाधान नहीं होने पर गहरी निराशा व्यक्त की और कहा, ‘‘हमें यह कहते हुए दुख हो रहा है कि केन्द्र इस समस्या और किसान आन्दोलन को नहीं सुलझा पाया।’’

Supreme Court 'disappointed' with govt's handling of farmer protests, says hold farm laws or we will - India News

उच्चतम न्यायालय ने 17 दिसंबर को भी कहा था कि वह इस सारे विवाद के समाधान के लिये एक स्वतंत्र समिति गठित करने पर विचार कर रहा है और इस दौरान सरकार से भी आग्रह करेगा कि वह इन कानूनों पर अमल स्थगित रखे। हालांकि, केन्द्र ने इस सुझाव पर रजामंदी नहीं दी थी।

वैसे तो इस प्रकरण पर सुनवाई की पिछली तारीख से अभी तक स्थिति में कोई विशेष बदलाव नहीं हुआ। हां, केन्द्र और किसान यूनियनों के नेताओं के बीच हुई बातचीत की प्रगति और प्रक्रिया पर न्यायालय ने जरूर निराशा व्यक्त की।

तो फिर हम ऐसा करेंगे

Dushyant Dave: Latest News, Videos and Photos on Dushyant Dave - DNA Newsइस मामले में कुछ किसान यूनियनों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे और अधिवक्ता प्रशांत भूषण सरीखे अधिवक्ता जरूर पेश हुए थे और उन्होंने भी समिति के गठन के विचार से सहमति व्यक्त की। लेकिन न्यायाधीशों ने जानना चाहा कि क्या वे आन्दोलन कर रहे किसानों को अपनी मांगे समिति के समक्ष रखने के लिये तैयार कर सकेंगे।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने आज बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि ‘‘अगर सरकार इन कानूनों पर अमल स्थगित नहीं करने के लिये तैयार नहीं है तो फिर हम ऐसा करेंगे।’’

समिति की अध्यक्षता के लिये पूर्व प्रधान न्यायाधीशों के नाम मांगे

अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने इन कानूनों पर अमल स्थगित करने के प्रति अनिच्छा व्यक्त करते हुए न्यायालय से कहा कि अगर पहली नजर में उसे लगता है कि इन कानूनों से मौलिक अधिकारों और संविधान के प्रावधानों का हनन हो रहा है तो वह इन पर रोक लगा सकता है।

प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली इस पीठ ने संबंधित पक्षकारों से इस समिति की अध्यक्षता के लिये पूर्व प्रधान न्यायाधीश आर एम लोढ़ा सहित दो तीन पूर्व प्रधान न्यायाधीशों के नाम मांगे हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘अगर समिति की सलाह होगी तो वह इन कानूनों के अमल पर रोक लगा देगा। पीठ ने कहा कि किसान इन कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और वे अपनी आपत्तियां समिति के समक्ष रख सकते हैं।

आन्दोलन जारी रख सकते हैं किसान

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने हालांकि, यह इच्छा जरूर की कि वह चाहता है कि किसान अपने घर लौट जायें। लेकिन साथ ही यह टिप्पणी भी की कि इन कानूनों के अमल पर रोक लगाये जाने के बाद आन्दोलनकारी किसान अपना आन्दोलन जारी रख सकते हैं क्योंकि न्यायालय किसी को यह कहने का मौका नहीं देना चाहता कि उसने विरोध की आवाज दबा दी।

Kisan Andolan: Farmers Received Computerized Calls In Favor Of Farm Laws At Kundli Border - आंदोलन में जुटे किसानों के मोबाइल में आ रहीं कंप्यूटरीकृत कॉल्स, कृषि कानून के बताए जा रहे

न्यायालय महसूस करता है कि किसानों के साथ बातचीत टूटने की वजह या इसमें गतिरोध बने रहने का कारण यही है कि केन्द्र इन कानूनों के प्रत्येक प्रावधान पर चर्चा करने पर जोर दे रहा है जबकि आन्दोलनकारी किसान चाहते हैं कि इन्हें खत्म किया जाये।

किसानों के आन्दोलन को कुछ राजनीतिक दलों और संगठनों का समर्थन प्राप्त है। पंजाब, केरल और दिल्ली विधानसभा इन कानूनों को वापस लेने के प्रस्ताव पारित कर चुकी हैं।

केन्द्र से सवाल

न्यायालय ने भी केन्द्र से सवाल किया है कि आपने ऐसा कानून क्यों बनाया जिसका राज्य ही विरोध कर रहे हैं। हमारे सामने एक भी ऐसी याचिका नहीं है जिसमे इन कानूनों को लाभकारी बताया जा रहा हो।

केन्द्र ने पिछले साल सितंबर में जो तीन नये कानून बनाये उनमें कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार, कानून, 2020, कृषक उत्पाद व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण) कानून, 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून शामिल हैं।

इन कानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए कई याचिकायें दायर की गयी थीं। इन याचिकाओं पर न्यायालय ने पिछले साल 12 अक्टूबर को केन्द्र को नोटिस भी जारी किये थे।

अब देखना यह है कि शीर्ष अदालत के किसी पूर्व प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति गठित होने के बाद क्या आन्दोलनकारी किसान दिल्ली की सीमाओं की घेराबंदी खत्म करते हैं या वे ‘कानूनी वापसी’ पर ही ’घर वापसी’ पर अड़े रहते हैं।


 

बंगाल में आक्रामक हुई भाजपा तो बचाव की मुद्रा में आईं ममता

शेयर बाजार में यूपी ने महाराष्ट्र को पछाड़ा

शेयर बाजार में उत्‍तर प्रदेश का दबदबा दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। शेयर बाजार के गढ़ महाराष्ट्र को ही यूपी वालों ने सीधी टक्कर दे दी है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के मुताबिक एक साल में यूपी से 35 लाख नए निवेशकों ने शेयर बाजार में प्रवेश किया है। ये संख्या महाराष्ट्र (44 लाख) के बाद सर्वाधिक है। गुजरात से 17 लाख नए निवेशकों ने प्रवेश किया है।

 

बीएसई के मुताबिक, नए डीमैट खाते खोलने में यूपी ने महाराष्ट्र के अलावा सभी को पीछे छोड़ दिया है। एक साल में 37% की बढ़त हुई है। इसी अवधि में महाराष्ट्र की ग्रोथ 20%, गुजरात की 15%, राजस्थान की 26% और कर्नाटक की 20% रही है। यूपी में आय बढ़ने, महिलाओं का बाजार में रुझान और जोखिम की क्षमता प्रमुख वजहें हैं।

यूपी वालों के डीमैट खातों में 18,700 करोड़ के शेयर

कुल डीमैट खातों में 3.40 लाख करोड़ रुपये के शेयर जमा हैं। इसमें यूपी की हिस्सेदारी करीब 5.5% है। यानी डीमैट खातों में यूपी वालों के 18,700 करोड़ रुपये के शेयर सुरक्षित हैं। शेयर बाजार के कुल कारोबार में सालाना 1.28 लाख करोड़ यूपी से हो रहा है। इसमें भी 30% की वृद्धि हुई है।

इस तरह बढ़ी यूपी की धमक

2021-22 में निवेशक-   92 लाख
2022-23 में निवेशक-  1.27 करोड़
एक साल में बढ़ी संख्या-   35 लाख

ब्रोकिंग कंपनियों की संख्या

महाराष्ट्र : 7309
यूपी : 6693
गुजरात : 5709
कर्नाटक :  3742
प.बंगाल :  3561
तमिलनाडु : 3537
(सोर्स : नेशनल सिक्योरिटी डिपॉजिटरी लिमिटेड)(एएमएपी)

‘सिंघम अगेन’ में अजय देवगन के साथ दिखेंगे अक्षय और टाइगर

बड़े मियां छोटे मियां एक बार फिर पुलिस ऑफिसर की भूमिका में।

आपका अख़बार ब्यूरो।
पिछले महीने ईद के मौक़े पर रिलीज हुई अक्षय कुमार और टाइगर श्रॉफ की एक्शन पैक्ड फ़िल्म बड़े मियां छोटे मियां बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक़ परफॉर्म नहीं कर पाई । बॉलीवुड हंगामा न्यूज़ नेटवर्क ने यह खबर दी है।
अली अब्बास जफर के निर्देशन में बनी वाशु भगनानी, जैकी भगनानी और दीपशिखा देशमुख की पूजा एंटरटेनमेंट द्वारा निर्मित, बड़े मियां छोटे मियां से बहुत उम्मीदें थी क्योंकि न केवल इस फ़िल्म में इंटरनेशनल लेवल का एक्शन देखने को मिलना था बल्कि अक्षय कुमार और टाइगर श्रॉफ पहली बार एक साथ भी नज़र आए। हालाँकि दोनों की जोड़ी बॉक्स ऑफिस पर कुछ ख़ास कमाल नहीं दिखा पाई। मेकर्स ने भी फिल्म का खूब प्रमोशन और मार्केटिंग की। लेकिन दुर्भाग्य से, बड़े मियां छोटे मियां बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकीं।

यह पहली बार था जब अक्षय कुमार और टाइगर श्रॉफ एक ही फिल्म में एक साथ नजर आए। हालाँकि, बड़े मियाँ छोटे मियाँ निश्चित रूप से आखिरी फिल्म नहीं थी जहाँ दोनों एक साथ दिखाई देंगे। दोनों की जोड़ी जल्द ही एक और फ़िल्म में साथ नज़र आने वाली है जिसमें एक बार फिर अक्षय और टाइगर बड़े मियाँ छोटे मियाँ की तरह पुलिस ऑफिसर के किरदार में नज़र आने वाले हैं।

अक्षय और टाइगर रोहित शेट्टी की सिंघम अगेन के कलाकारों की टुकड़ी का हिस्सा हैं, जो सिंघम फ्रेंचाइजी की तीसरी फिल्म है.यह सिंघम, सिंघम रिटर्न्स, सिम्बा और सूर्यवंशी के बाद फिल्म निर्माता के कॉप यूनिवर्स की अगली फिल्म है।

Singham Again Tiger Shroff Look: दीपिका के बाद अब टाइगर की भी सिंघम में एंट्री

अक्षय हमेशा सूर्यवंशी के रूप में सिंघम अगेन का हिस्सा थे। शेट्टी के सभी पुलिस ड्रामा में तीनों किरदार – सिंघम, सिम्बा और सूर्यवंशी – का एकजुट होना अब लाज़िमी हो गया है। और पिछले साल, यह पता चला था कि टाइगर श्रॉफ सिंघम अगेन में एक अतिरिक्त कलाकार होंगे और वह सत्या नाम के एक एसीपी (सहायक पुलिस आयुक्त) की भूमिका निभाएंगे।

बड़े मियां छोटे मियां बॉक्स ऑफिस पर अजय देवगन की मैदान के साथ रिलीज हुई थी। और सिंघम अगेन में अक्षय और टाइगर फ़िल्म के लीड एक्टर अजय देवगन के साथ नज़र आएंगे ।

हालांकि, अभी तक यह नहीं पता कि अक्षय और टाइगर सिंघम अगेन में स्क्रीन शेयर करेंगे या नहीं । यदि बड़े मियां छोटे मियां को बड़ी सफलता मिलती तो इसकी संभावना अधिक होती।

देशद्रोह में फंसा कर 10 साल जेल में रखना चाहती पाकिस्तानी सेना : इमरान

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना उन्हें देशद्रोह के आरोप में फंसाकर अगले दस साल तक जेल में रखना चाहती है। इमरान ने सोमवार को ट्वीट कर इसे लंदन योजना यानी पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की योजना करार दिया।

 

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के प्रमुख इमरान खान ने अपने लाहौर स्थित आवास पर पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर आगे की रणनीति बनाई। बैठक के बाद ट्वीट कर उन्होंने पाकिस्तानी सेना पर गंभीर आरोप लगाए। इमरान ने कहा कि यह सब उस लंदन योजना के तहत हो रहा है, जो पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने लंदन में बैठकर बनाई है। इमरान ने आरोप लगाया कि उनकी बेगम बुशरा को जेल भेजने की योजना है, जिससे उन्हें अपमानित किया जा सके। साथ ही अगले 10 वर्षों के लिए उन्हें जेल में रखने के लिए राजद्रोह कानून का सहारा लिया जा रहा है।

इमरान खान ने कहा कि सार्वजनिक प्रतिक्रिया से बचने के लिए सेना ने दो काम किये। पहला काम पीटीआई कार्यकर्ताओं के साथ आम लोगों में आतंक फैलाया और दूसरा काम मीडिया पर पूरी तरह नियंत्रण स्थापित कर लिया गया। उन्होंने सेना पर लोगों के घरों को तोड़ने और महिलाओं के साथ मारपीट करने के भी आरोप लगाए। आरोप लगाया कि लोगों में जानबूझकर डर पैदा करने की कोशिश की जा रही है, जिससे जब सेना के लोग उन्हें गिरफ्तार करने आएं, तो लोग बाहर नहीं निकलें। आशंका जताई कि सेना के लोग फिर से इंटरनेट सेवाओं को निलंबित कर देंगे और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा देंगे।(एएमएपी)

भारतीय नामों वाली गलियां ऑस्ट्रेलिया को भारत से जोड़ती है : पीएम मोदी

पीएम मोदी ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि ‘ऑस्ट्रेलिया के लोग इतने विशाल दिल वाले हैं। इतने सच्चे और अच्छे हैं कि भारत की इस विविधता को खुले दिल से स्वीकारते हैं। यही वजह है कि परमाता शहर में परमात्मा चौक बन जाता है। विग्रम स्ट्रीट भी विक्रम स्ट्रीट के तौर पर मशहूर हो जाती है और हैरिस पार्क लोगों के लिए हरीश पार्क हो जाता है। हैरिस पार्क में जयपुर स्वीट्स की जलेबी, चाट, इसका तो कोई जवाब नहीं है। आप लोग मेरे मित्र अल्बानीज को भी कभी वहां ले जाइएगा। जब खाने की बात चली है, तो लखनऊ का नाम आना भी स्वाभाविक ही है। मैंने सुना है कि सिडनी में लखनऊ नाम की जगह है। मुझे पता नहीं वहां चाट मिलती है या नहीं। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय नामों वाली कितनी ही गलियां आपको भारत से जोड़ती हैं। मुझे बताया गया कि अब तो ग्रेटर सिडनी में इंडिया परेड शुरू होने जा रही है।’

क्रिकेट और मास्टर शेफ हमें जोड़ते हैं

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारे क्रिकेट के रिश्तों को भी 75 वर्ष पूरे हो गए हैं। क्रिकेट के मैदान पर हमारा मुकाबला जितना कड़ा होता है, उतनी ही गहरी हमारी दोस्ती है। इस बार तो ऑस्ट्रेलिया की महिला क्रिकेटर भी भारत में आईपीएल खेलने आई हैं। ऐसा नहीं है कि हम सिर्फ सुख के ही साथी हैं। अच्छा दोस्त सुख का तो साथी होता है, दुख का भी साथी होता है। उन्‍होंने कहा कि पिछले साल जब महान शेन वॉर्न का निधन हुआ तो ऑस्ट्रेलिया के साथ कोटि-कोटि भारतीयों ने भी शोक मनाया। यह ऐसा था जैसे हमने अपना कोई खो दिया है। साथियों आप सभी यहां ऑस्ट्रेलिया में हैं। यहां विकास को देख रहे हैं। आप सभी का एक सपना रहा है कि हमारा भारत भी विकसित राष्ट्र बने। यह हमारे सभी साथियों का भी सपना है। भारत के पास सामर्थ्य की कमी नहीं है। संसाधनों की कमी भी नहीं है। आज दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे युवा टैलेंट फैक्ट्री, जिस देश में है, वह है भारत।

ब्रिस्बेन में खोला जाएगा भारत का कॉन्सुलेट

पीएम मोदी ने कहा कि ‘पहले ऑस्ट्रेलिया के संबंध कॉमनवेल्थ, क्रिकेट और करी से डिफाइन किए जाते थे। इसके बाद हमारे संबंध डेमोक्रेसी, डायस्पोरा और दोस्ती से डिफाइन किए गए और अब हमारे संबंध एनर्जी, इकॉनोमी और एजुकेशन से डिफाइन किए जाते हैं लेकिन हमारे संबंध इससे कहीं ज्यादा हैं। पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिस्बेन में भारत का नया कॉन्सुलेट खोला जाएगा। पीएम मोदी ने कहा कि इसकी मांग काफी समय से की जा रही थी, जिसके बाद यह फैसला किया गया है।’

भारत में क्षमता और संसाधनों की कमी नहीं

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में क्षमताओं या संसाधनों की कोई कमी नहीं है। आज भारत दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे युवा टैलेंट फैक्ट्री है। आईएमएफ भी वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत को सबसे अहम मानता है। भारत का बैंकिंग सिस्टम भी मजबूत है। भारत ने बीते साल रिकॉर्ड निर्यात किया और हमारा विदेशी मुद्रा भंडार भी रिकॉर्ड स्तर पर है। भारत में फिनटेक क्षेत्र में क्रांति आई हुई है। पीएम मोदी ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में भारत की सबसे बड़ी ताकत यहां रहने वाले भारतीय हैं। (एएमएपी)

मुझे इंजीनियर नहीं कवि होना है यह ओशो ने बताया -डॉ. कुमार विश्वास

मेरी चेतना के सहयात्री (एक)।

डॉ. कुमार विश्वास।
ओशो के पास हर चीज, हर घटना और हर प्रक्रिया को देखने का अपना ही नजरिया है। अलग नजरिया होना कोई कमाल नहीं है। लेकिन दूसरों को भी इस नजरिए से दुनिया दिखला देना एक ऐसा चमत्कार है जो दीवानगी में मुब्तिला ओशो ही कर सकता है। ओशो कमाल हैं। सब कुछ चाहिए और कुछ नहीं होने में भी कोई मलाल नहीं है। ओशो आपको आपके तय किए हुए फ्रेम से बाहर लाते हैं और फिर एक नए रंग का चश्मा लगाकर दिखाते हैं। ओशो वो दीवाने हैं जो आपको आपके जड़ दृष्टिकोण को चेतन करते हैं।

ओशो मेरी चेतना के शुरुआती सहयात्री हैं। सहयात्री मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि ओशो अनुचर स्वीकार नहीं करते, उन्हें किसी भी दर्शन, किसी भी सोच, किसी व्यक्ति, किसी प्रवृत्ति या प्रकृति के किसी भी अंग का अनुचर हो जाना बर्दाश्त नहीं है। ओशो अपनी तरह के पहले बुद्धपुरुष हैं जो किसी अनुचर के हाथ छुड़ा लेने पर उसे मुस्कुराकर विदा करते हैं। ओशो मेरे जीवन में सम्मिलित हुए ग्यारहवीं कक्षा में, जब मैंने उनकी पहली पुस्तक पढ़ी – माटी कहे कुम्हार से। उसमें लिखा था कि अपनी प्रवृत्ति या प्रकृति के विपरीत मत जाइए, क्योंकि वो ईश्वर है और उसके खिलाफ जाओगे तो वो आपको कुछ बनने नहीं देगा और ओशो ही पहले व्यक्ति है जिन्होंने मेरा इंजीनियरिंग का रास्ता भटका दिया कि मुझे उस मार्ग पर नहीं जाना, मुझे कवि होना है।

 

तो इस प्रकार ओशो मेरे जीवन में दाखिल हुए और फिर ओशो लंबे समय तक साथ चलते गये, अब भी वे कई बार साथ चलते हैं लेकिन जैसा मैंने कहा वे ये स्वीकार नहीं करते कि मेरे अनुचर बनो। नहीं तो कितने ही लोग हैं जो कहते हैं कि मेरे पीछे चलो, मुझे मानो, मैं जो कह रहा हूं वो सुनो, मैंने जो किताब लिख दी है इसकी मानो, मैंने जो देशना दी है उसको मानो, ओशो पहले हैं जो कहते हैं कि मेरी क्यों मानो, अपनी सुनो और इसके लिए वो तैयार करते हैं आपको, आपकी मानसिकता, आपका मन मस्तिष्क तैयार करते हैं!

जब मैंने ओशो को पढ़ना शुरू किया 70 के दशक में तो मैं अपने परिवार और समाज में कोई आदरेय बालक नहीं था ओशो को पढ़ने की वजह से। हमारे पड़ोस में एक बड़े विद्वान व्यक्ति रहते थे, संस्कृत के आचार्य थे, मेरे पिता जी के मित्र थे, उन्होंने मुझे सार्वजानिक रूप से अपमानित किया ओशो की किताब हाथ में देख के। मेरे पिता जी का मत भी कोई बहुत अच्छा नहीं था ओशो के विषय में और बहुत सारे लोगों का नहीं था। दिल्ली में शुरुआती दौर में जब पुस्तक मेले लगते थे तो वहां ओशो स्टाल में ओशो के संन्यासी कुछ पुस्तकें रखकर बैठे रहते थे, आज आप पुस्तक मेला जाइए तो हर उम्र के लोगों का सबसे ज्यादा हुजूम जो मिलेगा तो ओशो स्टाल पर मिलेगा!

(अप्रैल 2017 में ओशो टाइम्स में छपे साक्षात्कार और कुछ अन्य सामग्री पर आधारित) 

अमेरिका में भारतीयों का बढ़ा प्रभाव

दिवाली पर सरकारी छुट्टी देने की तैयारी।


अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों के बढ़ते प्रभाव का ही असर है कि अब वहां दिवाली पर सरकारी छुट्टी देने की तैयारी चल रही है। बता दें कि यह पहल हुई है न्यूयॉर्क में, जहां इसे लेकर न्यूयॉर्क की विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसके पास होने के बाद दिवाली पर छुट्टी मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। दिवाली के साथ ही इस प्रस्ताव में न्यूयॉर्क में लूनर न्यू ईयर पर भी सरकारी छुट्टी देने का प्रावधान किया गया है।

मौजूदा विधानसभा सत्र में ही मिल सकती है मंजूरी

न्यूयॉर्क असेंबली के स्पीकर कार्ल हेस्टी ने बुधवार को एक बयान जारी कर इसकी पुष्टि की और कहा कि न्यूयॉर्क के समृद्ध और विविधता भरी संस्कृति को पहचान देने के लिए ऐसा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ‘असेंबली में लूनर न्यू ईयर और दिवाली पर छुट्टी देने के लिए असेंबली के सत्र के खत्म होने से पहले इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है। इस फैसले का स्कूलों के कैलेंडर पर क्या फर्क पड़ेगा, इसे लेकर विचार विमर्श किया जा रहा है।’

भारतीय समुदाय को मिलेगा फायदा

न्यूयॉर्क असेंबली का सत्र 8 जून तक चलेगा। माना जा रहा है कि सत्र की समाप्ति तक प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है। इस प्रस्ताव को दिवाली डे एक्ट नाम दिया गया है, जिसके तहत न्यूयॉर्क में दिवाली की छुट्टी 12वीं सरकारी छुट्टी घोषित हो जाएगी। इससे अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के समुदाय को काफी फायदा होगा और वह अपने परिवार और दोस्तों के साथ अच्छे से दिवाली के त्योहार को सेलिब्रेट कर पाएंगे।

स्कूलों में भी छुट्टी कराने की तैयारी

न्यूयॉर्क असेंबली की सदस्य जेनिफर राजकुमार और सीनेटर जोए अद्दाबो ने मांग की है कि दिवाली पर न्यूयॉर्क सिटी के स्कूलों में भी छुट्टी की जाए। न्यूयॉर्क स्टेट काउंसिल के सदस्य शेखर कृष्णन और काउंसिल वुमन लिंडा ली ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। बता दें कि लंबे समय से दिवाली पर सरकारी छुट्टी देने की मांग की जा रही थी, जो अब जल्द ही पूरी होने जा रही है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका के पेंसिल्वेनिया प्रांत में पहले से ही अमेरिका पर छुट्टी  देने का कानून बना हुआ है।(एएमएपी)