जनता दल यूनाइटेड के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव नहीं रहे। गुरुवार रात गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में उनका निधन हो गया। वह 75 साल के थे। सांस लेने में तकलीफ होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शरद यादव कई सरकारों में केंद्रीय मंत्री भी रहे चुके थे। शरद यादव ने 2018 में लोकतांत्रिक जनता दल का गठन किया था। मार्च 2020 में उन्होंने लालू यादव के संगठन राजद में विलय कर लिया। उन्होंने कहा था कि एकजुट विपक्ष की ओर पहला कदम था।उनके निधन पर राजनीतिक जगत में शोक की लहर है। उनके देहांत पर पीएम मोदी ने दुख जताया। उन्होंने कहा कि “शरद यादव के निधन से बहुत दुख हुआ। अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में उन्होंने खुद को सांसद और मंत्री के रूप में प्रतिष्ठित किया। वे डॉ. लोहिया के आदर्शों से काफी प्रभावित थे। मैं हमेशा हमारी बातचीत को संजो कर रखूंगा। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदनाएं।”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी दिग्गज राजनेता के निधन पर शोक जताया। उन्होंने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं देश के बड़े वरिष्ठ नेता शरद यादव के निधन से मुझे गहरी वेदना की अनुभूति हुई है। अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने हमेशा समाज के कमजोर वर्गों की समस्याओं को पुरजोर तरीके से उठाया। आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए भी उन्होंने काफी संघर्ष किया। उनके निधन से भारतीय राजनीति की एक प्रभावी आवाज खामोश हो गई है।

केंद्र की वीपी सिंह और वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे

शरद यादव यादव 1989 में वीपी सिंह नीत सरकार में मंत्री थे। उन्होंने 90 के दशक के अंत में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में भी मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। 1990 में बिहार के मुख्यमंत्री बने लालू प्रसाद यादव को एक समय उनका समर्थन प्राप्त था।

प्रमुख समाजवादी नेता थे शरद यादव

शरद यादव का जन्म एक जुलाई 1947 को मध्य प्रदेश के होशंगाबाद के बंदाई गांव के एक किसान परिवार में हुआ था। शरद यादव एक प्रमुख समाजवादी नेता थे। वे 70 के दशक में कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल कर चर्चा में आए थे। वह लोकदल और जनता पार्टी से टूटकर बनी पार्टियों में रहे।

राजीव गांधी से हारने वाले पहले नेता थे शरद यादव

शरद यादव का नाम राष्ट्रीय स्तर पर तब चर्चा में आया जब 1974 में जबलपुर में हुए लोकसभा के उपचुनाव में उन्होंने विपक्ष के साझा उम्मीदवार के रूप में कांग्रेस के दिग्गज नेता गोविंद दास को चुनाव हराया। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार की अलग-अलग सीटों से 11 बार सांसद रहे शरद यादव के लंबे राजनीतिक सफर में कई उतार-चढाव आए। लेकिन ऐसे कम चुनाव ही रहे जब शरद यादव को हार का सामना करना पड़ा हो। ऐसा ही एक चुनाव था, अमेठी का उपचुनाव। जिसमें राजीव गांधी से हारने वाले पहले नेता शरद यादव थे। संजय के निधन के बाद उपचुनाव में राजीव के खिलाफ लोकदल ने शरद को ही उतारा गया था जिसमे शरद की बुरी हार हुई थी, भाई की सहानुभूति लहर में राजीव गांधी ने बड़ी जीत दर्ज की। राजीव गांधी को 258884  वोट मिले जबकि शरद यादव को महज 21188 वोट मिले। इस उपचुनाव में 237696 वोटों से राजीव ने जीत दर्ज की थी। शरद को मिले वोटों का प्रतिशत 6.98 फीसदी था तो वहीं राजीव गांधी के वोटों का प्रतिशत 84.18 फीसदी था।

मेनका गांधी को भी मिली थी हार

वहीं 1984 के लोकसभा चुनाव में भी राजीव गांधी की प्रचंड जीत हुई थी। संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी ने निर्दलीय चुनाव लड़ा था। मेनका को  50163 वोट मिले थे,  तो वहीं राजीव को 365041 वोट हासिल हुए थे। और 314878 वोटों से बड़ी जीत राजीव गांधी ने हासिल की थी। वोटों के प्रतिशत की बात करें तो मेनका को 11.50 फीसदी और राजीव को 83.67 फीसदी मत मिले थे।

अमेठी उपचुनाव लड़ने के पक्ष में नहीं थे शरद

कहा जाता है कि शरद यादव का इस उपचुनाव में उतरने का कोई मन नहीं था। किसी की सलाह पर चौधरी चरण सिंह ने शरद यादव को उपचुनाव में राजीव गांधी के मुकाबले में उतारा था। अमेठी उपचुनाव में शरद यादव को चुनाव मैदान में उतारने के पीछे नाना जी देशमुख की भी सलाह थी। नाना जी देशमुख और चौधरी चरण सिंह से कहा था कि अमेठी से राजीव गांधी चुनाव हार जाएंगे। इसका सीधा असर केंद्र की इंदिरा गांधी सरकार पर होगी। इसी बात को आधार बनाकर शरद यादव को अमेठी उपचुनाव में उतारा गया था। हालांकि शरद यादव इस चुनाव में नहीं उतरना चाहते थे, लेकिन नाना भाई देशमुख ने कहा कि इस चुनाव में वह खुद लड़ रहे हैं, आप केवल चेहरा हैं। शरद यादव को जीत दिलाने के लिए चौधरी चरण सिंह और नाना भाई देशमुख ने ना केवल खुद खूब प्रचार किया था बल्कि विपक्ष के कई कद्दावर नेताओं से रैलियां कराई थी। हालांकि शरद यादव वह चुनाव हार गए थे। आपको बता दें इस सीट से राजीव गांधी चुनाव मैदान में थे।

इन राजनैतिक हस्तियों ने जताया दुख

मल्लिकार्जुन खरगे

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि देश की समाजवादी धारा के वरिष्ठ नेता, जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव के निधन से दुःखी हूं।  एक पूर्व केंद्रीय मंत्री व दशकों तक एक उत्कृष्ट सांसद के तौर पर देश सेवा का कार्य कर उन्होंने समानता की राजनीति को मजबूत किया। उनके परिवार एवं समर्थकों को मेरी गहरी संवेदनाएं। कांग्रेस पार्टी की ओर से ट्ववीट किया गया, ‘JDU के पूर्व अध्यक्ष, पूर्व केंद्रीय मंत्री, वरिष्ठ समाजवादी नेता शरद यादव का निधन भारतीय राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है। ईश्वर उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें और उनके परिवार एवं समर्थकों को यह पीड़ा सहने की शक्ति प्रदान करें।

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी शरद यादव के निधन पर शोक जताया। राहुल ने ट्वीट कर कहा कि मैं उनसे बहुत कुछ सीखा है। राजद प्रमुख लालू यादव ने सिंगापुर से वीडियो जारी कर शरद यादव के निधन पर शोक जताया। बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी शरद यादव को श्रद्धांजलि दी। राजद सुप्रीमो लालू यादव की बेटी मीसा भारती ने भी शरद यादव के निधन पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि समाजवाद की प्रबल आवाज आज शांत जरूर हुई है पर प्रेरणा बनकर हमारी स्मृतियों में सदा कौंधती रहेगी! आदरणीय शरद यादव को अश्रुपूरित भावभीनी श्रद्धांजलि।

नितिन गडकरी

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी ट्वीट कर शरद यादव को याद किया। उन्होंने लिखा- वरिष्ठ नेता शरद यादव जी को मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि। शरद जी मेरे अच्छे मित्र थे। वे संघर्षशील और गरीबों के हितों के लिए राजनीति करने वाले नेता थे, जयप्रकाश जी के नेतृत्व में इमरजेंसी के खिलाफ और उसके बाद जनता पार्टी में उनकी अहम भूमिका रही है।

ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शरद यादव के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी विरासत चलती रहेगी। यादव को एक कद्दावर राजनेता बताते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि वह एक बेहद सम्मानित सहयोगी थे। टीएमसी प्रमुख ने ट्वीट किया, श्री शरद यादव के निधन के बारे में सुनकर मुझे दुख हुआ है। एक दिग्गज राजनेता और बेहद सम्मानित सहयोगी, उनकी विरासत जीवित रहेगी। मैं प्रार्थना करती हूं कि उनके परिवार और अनुयायियों को दुख की इस घड़ी में धैर्य और शक्ति मिले।

शरद पवार

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार ने शरद यादव के निधन को भारतीय राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने ट्वीट किया कि  उनके निधन पर उनके परिवार और अनुयायियों को संवेदनाएं। भगवान उनकी आत्मा को शांति दें।

नीतीश कुमार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समाजवादी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव के निधन से दुखी हूं। शरद यादव के साथ मेरा बहुत गहरा रिश्ता था। उनके निधन की खबर से स्तब्ध और दुखी हूं। वे एक प्रखर समाजवादी नेता थे। उनका निधन सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र के लिए अपूरणीय है। उनकी आत्मा को शांति मिले।(एएमएपी)