सुप्रीम कोर्ट ने कहा- रातों रात नहीं हटाए जा सकते 50 हजार लोग।

उत्तराखंड के हल्द्वानी में रेलवे की 29 एकड़ जमीन से अतिक्रमण हटाने के उत्तराखंड हाईकोर्ट के निर्देश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। देश की सर्वोच्च अदालत ने गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान कहा कि यह एक मानवीय मुद्दा है। इस केस में कुछ व्यावहारिक समाधान खोजने की जरूरत है। कोर्ट का यह भी कहना है कि रातोंरात 50 हजार लोगों को बेघर नहीं किया जा सकता है। अपने ऑर्डर में कोर्ट ने सरकार को इलाके के लोगों के पुनर्वास के लिए व्यवस्था करने के लिए कहा है।

उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर इस इलाके को 10 जनवरी से अतिक्रम मुक्त कराने के लिए अभियान चलाया जाना था। इसके खिलाफ हल्द्वानी में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन चल रहा है। इस इलाकें में दशकों से रह रहे लोगों के विरोध-प्रदर्शन को कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, एआईएमआईएम जैसे राजनीतिक दलों का समर्थन मिला है। हल्द्वानी में अतिक्रमण हटाने के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय ने रेलवे और उत्तराखंड सरकार से जवाब मांगा। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में अब इस मामले पर 7 फरवरी को अगली सुनवाई होगी।

जो लोग 50-60 सालों से रह रहे उनका क्या होगा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उत्तराखंड सरकार का स्टैंड क्या है इस मामले में? शीर्ष अदालत ने पूछा कि जिन लोगों ने नीलामी में जमीन खरीदी है, उसे आप कैसे डील करेंगे? लोग 50/60 वर्षों से वहां रह रहे हैं। उनके पुनर्वास की कोई योजना तो होनी चाहिए।

स्कूलों-कॉलेजों को इस तरह से नहीं गिरा सकते

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उस जमीन पर आगे कोई निर्माण नहीं होगा। पुनर्वास योजना को ध्यान में रखा जाना चाहिए। ऐसे स्कूल, कॉलेज और अन्य ठोस ढांचे हैं जिन्हें इस तरह नहीं गिराया जा सकता है।

याचिकाकर्ता के वकील ने दी दलील

वहीं इस दौरान याचिकाकर्ता के वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने दलील देते हुए कहा कि  प्रभावित होने वाले लोगों का पक्ष पहले भी नहीं सुना गया था और फिर से वही हुआ। हमने राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग की थी। उन्होंने कहा कि ये भी साफ नहीं है कि ये जमीन रेलवे की है। हाईकोर्ट के आदेश में भी कहा गया है कि ये राज्य सरकार की जमीन है। इस फैसले से हजारों लोग प्रभावित होंगे।

जानें क्या है हल्द्वानी रेलवे भूमि अतिक्रमण विवाद

इस विवाद की शुरुआत उत्तराखंड हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद हुई। इस आदेश में रेलवे स्टेशन से 2.19 किमी दूर तक अतिक्रमण हटाए जाने का फैसला दिया गया। खुद अतिक्रमण हटाने के लिए सात दिन की मोहलत दी गई थी। जारी नोटिस में कहा गया है कि हल्द्वानी रेलवे स्टेशन 82.900 किमी से 80.710 किमी के बीच रेलवे की भूमि पर सभी अनाधिकृत कब्जों को तोड़ा जाएगा। (एएमएपी)