अब समय आ गया सरकार अपने लोहे के हाथ दिखाए
प्रदीप सिंह।
दिल्ली में भारत मंडपम में शुक्रवार को जो कुछ हुआ उस पर अगर आपको गुस्सा नहीं आ रहा है तो आप भारतीय नहीं हैं। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में करीब सवा सौ देशों के प्रतिनिधियों और बड़ी-बड़ी इंटरनेशनल कंपनियों के सीईओ के समक्ष जिस तरह से यूथ कांग्रेस के गुंडों ने देश की प्रतिष्ठा को गिराया और देश की संप्रभुता पर हमला किया, उसके बाद कांग्रेस पार्टी के नेताओं में अगर जरा भी शर्म बची हो तो उन्हें चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए।
एआई के क्षेत्र में भारत का लोहा आज पूरी दुनिया मान रही है। इस समिट के हर सेशन में भारत की प्रशंसा हो रही है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों भारत की प्रशंसा में एक कहानी सुनाते हैं कि आज से 10 साल पहले मुंबई में जो रेहड़ी-पटरी वाला पैसा न ले सकता था, न दे सकता था,वह आज अपने मोबाइल से यूपीआई के जरिए ट्रांजैक्शन करता है। यह बदला है भारत में। वे अपने भाषण के आखिर में कहते हैं ‘जय हो।’ ऐसे समिट से सबसे ज्यादा दुखी और चिंतित कांग्रेस पार्टी है। ऐसे समिट के विरोध में मंडप के अंदर घुसकर अधनंगे होकर जिस तरह का प्रदर्शन किया गया,उससे लगता है कि आज गांधी परिवार की हालत एक विक्षिप्त व्यक्ति जैसी हो गई है। वह किसी भी हद तक गिरने को तैयार है। आप भाजपा के विरोधी हैं, आप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोधी हैं, आप राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विरोधी हैं, यह सब ठीक है। देश विरोधी होने की छूट कैसे दी जाएगी? प्रदर्शन के दौरान यूथ कांग्रेस के गुंडों की टीशर्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की फोटो लगी हुई थी और उसमें लिखा हुआ था कॉम्प्रोमाइज्ड पीएम। ऐसा ही पोस्टर लोकसभा में राहुल गांधी ने दिखाया था और यही पोस्टर लेकर कुछ महिला सांसद प्रधानमंत्री की सीट घेरने गई थीं।

ऐसा नहीं है कि एआई समिट के दौरान विरोध प्रदर्शन स्वतः स्फूर्त था। यह प्रायोजित षड्यंत्र है। यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष कह रहा है कि मुझे अपने लड़कों पर गर्व है और कांग्रेस के प्रवक्ता और नेता दुम दबाकर छिप गए हैं। जो जयराम रमेश सोशल मीडिया पर लंबी-लंबी पोस्ट लिखते हैं,उनसे जब पत्रकारों ने सवाल पूछा तो चुपचाप भाग गए। एक शब्द उनके मुंह से नहीं निकला। यह तक नहीं कह पाए कि हमने यह नहीं कराया।

बहुत से लोग कह रहे हैं कि कांग्रेस ने तो इसे ओन किया नहीं है। मेरा उनसे सवाल है, क्या कांग्रेस ने डिसओन किया है? यह पूरी साजिश गांधी परिवार की रची हुई है क्योंकि सत्ता जितनी कांग्रेस के लोगों को चाहिए, उससे ज्यादा गांधी परिवार को चाहिए। गांधी परिवार सत्ता के बिना जल से बाहर निकली हुई मछली की तरह तड़फड़ा रहा है और उसका यह फ्रस्ट्रेशन देश के विरोध में चला गया है। अभी कुछ दिन पहले संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजीजू ने कहा था कि राहुल गांधी देश की सुरक्षा के लिए खतरा हो गए हैं। लेकिन राहुल गांधी की आप पिछले 11 साल की हरकतें देख लें तो मुझे तो लगता है किरण रिजीजू ने जो बोला, बहुत देर से बोला है और उससे भी ज्यादा मेरी नाराजगी केंद्र सरकार से है कि आप किसी को देश के विरोध में जाने की इजाजत कैसे दे सकते हैं? ऐसे प्रदर्शन में जो लोग शामिल थे, उनके खिलाफ यूएपीए के तहत मुकदमा चलना चाहिए। इनकी गिरफ्तारी होनी चाहिए और नार्को टेस्ट कराकर पूछा जाना चाहिए कि वे किसके निर्देश पर आए थे।
राहुल गांधी को देश से कोई मतलब नहीं है। उनको चिंता है तो बस चीन की। राहुल गांधी तय कर लें कि वह भारत के नागरिक हैं या चीन के नागरिक हैं। उनका हर कदम, हर वक्तव्य चीन के बचाव में और भारत के खिलाफ क्यों होता है। देश का जब सम्मान बढ़ रहा था तो कांग्रेस पार्टी बौखला रही थी। तो उसने इस समारोह को बिगाड़ने और दुनिया भर में भारत की छवि को गिराने के लिए अपने गुंडों को भेजा। मेरा तो मानना है कि अब राहुल गांधी देश में जहां भी जाएं, उनसे एक सवाल पूछा जाना चाहिए कि वे भारत के विरुद्ध क्यों हैं? उनकी नागरिकता को लेकर भी सवाल है और मेरी तो सरकार और न्यायालयों से अपील होगी कि उनकी नागरिकता को लेकर जो मामला अदालत में चल रहा है, उस केस का निपटारा जल्दी से जल्दी हो और इस मामले की जांच के बाद अगर राहुल गांधी या गांधी परिवार के किसी सदस्य का नाम आए तो उसके खिलाफ भी मुकदमा चले और जेल भेजा जाए।

एआई समिट के दौरान विदेशी मेहमानों के सामने आधे कपड़े उतार कर प्रदर्शन करने वाले इन डरपोकों की इतनी हिम्मत नहीं हुई कि जो टीशर्ट दिखा रहे थे, उसे पहन कर भारत मंडप में जाते। उन्होंने उसको अंदर उल्टा करके पहना और उसके बाद वहां जाकर उतारा। असल में इनका जो नेता है राहुल गांधी, उससे बड़ा डरपोक इस देश में कोई नेता नहीं हुआ होगा। जान के डर से आपने सुना है कि भारत के किसी नेता ने अपना नाम बदल लिया हो। यह विदेश पढ़ने गया तो इसने अपना नाम राउल विंची रख लिया। यह देश का अकेला नेता है, जिसके दो-दो ऑफिशियल नाम हैं। ऑफिशियल इसलिए कह रहा हूं कि अगर विदेश में पढ़ाई का कोई डिग्री सर्टिफिकेट मिला होगा तो उस पर नाम राउल विंची होगा।
आपने सुना नहीं होगा कि यह राउल विंची यूपीए के 10 साल के राज के दौरान कभी अपने ननिहाल गया हो। वह इसलिए क्योंकि यूपीए के शासन में इसकी नानी और मौसियां यहीं भारत में रहते थे और उनको सरकारी बंगला मिला हुआ था। हर राजकीय समारोह में उनकी उपस्थिति होती थी। मोदी सरकार बनने के 15 दिन के अंदर ये सब इटली भाग गए। अगर राहुल गांधी या गांधी परिवार के किसी सदस्य में थोड़ी सी भी शर्म बची होती तो पहला बयान यह आना चाहिए था कि ये गुंडे हैं और इनका हमसे कोई संबंध नहीं है। अगर ये कांग्रेस के सदस्य हैं, कांग्रेस के पदाधिकारी हैं तो हम अभी तत्काल प्रभाव से इनको पार्टी से निकालते हैं। लेकिन यह तो आप तब करेंगे जब आपके उकसावे पर न हुआ हो।

मैं आज संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजीजू के उस बयान का पूरी तरह से समर्थन करता हूं कि राहुल गांधी इस देश के लिए खतरा हैं। ऐसे व्यक्ति को नेता प्रतिपक्ष किसी भी हालत में नहीं रहने दिया जाना चाहिए। ऐसे व्यक्ति को संसद के किसी सदन का सदस्य भी नहीं रहने दिया जाना चाहिए। इसके लिए कोई नया कानून बनाने की भी जरूरत नहीं है। वर्तमान कानून, वर्तमान संवैधानिक व्यवस्था के तहत ऐसा हो सकता है और यह किया जाना चाहिए। इसको बर्दाश्त करने का मतलब है कि हम अराजकता को न्योता दे रहे हैं। इसको बर्दाश्त करने का मतलब है कि हम गुंडों के सामने विवश हैं। कोई भी 20-25 गुंडे आएंगे और देश के सम्मान को धूल में मिलाकर मुस्कुराते हुए चले जाएंगे और उनका नेता कहेगा कि मुझे गर्व है।
आज दुनिया भारत के साथ नए-नए एग्रीमेंट कर रही है। भारत फ्रांस से 114 राफेल विमान खरीद रहा है तो फ्रांस उसकी टेक्नोलॉजी भी ट्रांसफर कर रहा है। फ्रांस का राष्ट्रपति कह रहा है कि यह मेक इन इंडिया को मजबूत करेगा। उसी मेक इन इंडिया का राहुल गांधी मजाक उड़ाते हैं। राहुल गांधी की नजर में इस देश की संस्कृति,सभ्यता, सेनाओं, देश के सारे संवैधानिक पदों व संस्थाओं की कोई कीमत नहीं है। उनकी समझ से वे इस देश के राजा हैं और वह जो बोलेंगे, वही कानून माना जाना चाहिए।
अब समय आ गया है सरकार अपने लोहे के हाथ दिखाए। यह जो नरम हाथों से राहुल गांधी और उनके साथियों को समझाने की कोशिश हो रही थी, वह बंद होनी चाहिए। देखिए गलती की माफी होती है लेकिन अपराध की सजा होती है। अगर सरकार इस मामले में जरा भी नरमी बरतती है तो यह सरकार की कमजोरी का बहुत बड़ा प्रमाण होगा। आप सरकार को इसी कसौटी पर कसने के लिए तैयार रहिए।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक और ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)



