राजभवन में कालानमक धान की फसल तैयार जल्द शुरू होगी कटाई।

एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल तथागत महात्मा बुद्ध के प्रसाद के रूप में प्रतिष्ठित कालानमक धान की खूसबू से सूबे का राजभवन भी महक रहा है। वजह यहां रोपी गयी कालानमक धान की दो प्रजातियां अब कटाई के लिए तैयार हैं। यहां पहली बार रोपी गई धान की प्रजाति कालानमक किरण एवं कालानमक बौना धान 102 अब कटाई के लिए तैयार है। पीआरडीएफ के कृषि वैज्ञानिक डॉ आरसी चौधरी ने राजभवन के डॉ डीके मिश्र के साथ फसल का जाएजा लिया है।उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल की इच्छा पर खरीफ सत्र में राजभवन परिसर में पहली बार आधा एकड़ रकबे में कालानमक धान की रोपाई हुई थी। बेहन भी गोरखपुर से तैयार कराकर डॉ रामचेत चौधरी स्वयं लेकर राजभवन पहुंचे थे। राजभवन के कृषि क्षेत्र में कालानमक किरण एवं बौना कालानमक 102 की प्रजाति की रोपाई हुई थी। अब यह फसल कटने के लिए तैयार है।

प्राकृतिक पद्धति से हुई खेती

राजभवन में कालानमक धान की खेती प्राकृतिक पद्धति से की गई। फसल में किसी तरह के रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल नहीं हुआ। जैविक खाद एवं जैविक कीटनाशक ही इस्तेमाल हुए हैं।

ज्ञातव्य हो कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कोशिशों से कालानमक धान का न केवल निरंतर रकबा बढ़ रहा है। बल्कि विदेशों में उसकी मांग भी बढ़ रही है। सरकार की पहल पर सिद्धार्थनगर में कालानमक धान के लिए सीएफसी भी संचालित हो गई है। कुशीनगर के कप्तानगंज ब्लॉक के चार गांव में 100 किसान 100 एकड़ में कालानमक धान की प्राकृतिक खेती कर हैं। वहीं, कौड़ीराम में 100 एकड़ में कालानमक धान की प्राकृतिक खेती की गई है। कालानमक धान को सिद्धार्थनगर, महराजगंज, गोरखपुर, संतकबीरनगर, बहराइच, बस्ती, कुशीनगर, गोंडा, बाराबंकी और देवरिया का जियोग्राफिकिल इंडिकेटर (जीआई) टैग भी हासिल है।

कहते हैं वैज्ञानिक

कृषि वैज्ञानिक डॉ रामचेत चौधरी के मुताबिक कालानमक चावल में सुंगध एवं स्वाद के अलावा प्रोटीन, जिंक, आयरन, बीटा कैरोटीन भी मिलता है। यह भरपूर स्वास्थ्यवर्धक है। (एएमएपी)