ऐतिहासिक पहल
दक्षिण बंगाल फ्रंटियर के प्रवक्ता व डीआईजी अमरीश कुमार आर्य ने बताया कि बीएसएफ के इतिहास में यह पहली घटना है। इसे आप महिला सशक्तीकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल भी कह सकते हैं। उन्होंने कहा, यह पहली बार है जब सुंदरवन जैसे कठिन क्षेत्र में एक फ्लोटिंग बीओपी के संचालन एवं सीमा पेट्रोलिंग के लिए महिला जवानों को तैनात किया गया है। उन्होंने बताया कि फिलहाल महिला जवानों के एक प्लाटून (टुकड़ी) को यहां तैनात किया गया है, जिसमें 15 से 20 जवान होते हैं।

बीएसएफ की महिला जांबाजों ने संभाला मोर्चा
आर्य के मुताबिक, इस क्षेत्र में नदियां ही भारत-बांग्लादेश की सीमा को विभाजित करती हैं। इसलिए इस क्षेत्र की निगरानी बढ़ाने के लिए कुछ माह पहले ही बीएसएफ ने छह नए फ्लोटिंग बीओपी (पानी में तैरते सीमा चौकी) तैनात किए थे। इनमें से एक ‘बीओपी गंगा’ से पर सवार होकर बीएसएफ की महिला जवान सुरक्षा की जिम्मेदारी निभार रही हैं, जो कुछ दिन पहले ही उन्हें दी गई है। इस तरह अब बीओपी से सीमा सुरक्षा का मोर्चा बीएसएफ की महिला जांबाजों ने संभाला लिया है और अब वह लड़ाकू भूमिका में स्वतंत्र रूप से नजर आएंगी।
चुनौतियों से भरी है सुंदरवन क्षेत्र की सुरक्षा
उल्लेखनीय है कि बंगाल के उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिले में भारत और बांग्लादेश की सीमा के बीच सैकड़ों किलोमीटर में फैले सुंदरवन क्षेत्र की सुरक्षा बहुत ही चुनौतीपूर्ण है। यह क्षेत्र घने जंगलों और दलदल से भरा हुआ है। इस क्षेत्र से मवेशियों और मादक पदार्थों की तस्करी एवं घुसपैठ बड़ी समस्याओं में से एक है। घने जंगल और चारों ओर पानी से घिरे होने के कारण यहां फ्लोटिंग बीओपी के जरिए बीएसएफ चौबीसों घंटे निगरानी करती है। इसलिए यहां पर लहरों पर सवार होकर कठिन परिस्थितियों में अपने कर्तव्य का निर्वहन करना पड़ता है। (एएमएपी)



