नाक के जरिए दी जाने वाली भारत बायोटेक की इंट्रानेजल कोरोना वैक्सीन इन्कोवैक की कीमत तय कर दी गई है। भारत सरकार के अनुसार प्राइवेट अस्पतालों में इसकी एक डोज की कीमत 800 रुपये होगी। इसके अलावा पांच फीसदी जीएसटी भी देनी होगी। रिपोर्ट के अनुसार निजी अस्पतालों को एक डोज के लिए 150 रुपये का एडमिनिस्ट्रेटिव चार्ज लगाने की भी मंजूरी है। इस प्रकार इस वैक्सीन की एक खुराक की कीमत फिलहाल लगभग 1000 रुपये पड़ेगी। वहीं सरकारी अस्पतालों में इस वैक्सीन की कीमत 325 रुपये होगी। बता दें कि पिछले हफ्ते ही भारत बायोटेक की इंट्रानेजल वैक्सीन इन्कोवैक को कोरोना टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया गया था।

जनवरी के अंत तक होगी उपलब्ध

इंट्रानेजल वैक्सीन को पहले कोवाक्सीन  या कोविशील्ड के साथ पूरी तरह से टीका लगाए गए लोगों के लिए बूस्टर शॉट के रूप में मंजूरी मिली थी। रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी के अंत तक ये उन लोगों के लिए उपलब्ध होगी जिन्होंने कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज ली है।

मंडाविया ने की थी घोषणा

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा था कि केंद्र सरकार ने कोविड-19 टीकाकरण अभियान में इन्कोवैक को शामिल करने को मंजूरी दे दी है। उन्होंने यह भी कहा था कि शुरुआत में वैक्सीन निजी अस्पतालों में उपलब्ध होगी और इसे CoWin ऐप में जोड़ दिया जाएगा।

वॉशिंगटन विश्वविद्यालय के सहयोग से तैयार की गई वैक्सीन

भारत बॉयोटेक ने इस नेजल वैक्सीन को वॉशिंगटन विश्वविद्यालय के सहयोग से तैयार किया है। भारत बायोटेक के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ. कृष्णा एला के अनुसार, ‘इनकोवैक’ कोविड के खिलाफ कारगर है। यह कोविड-19 के खिलाफ म्यूकोसेल इम्युनिटी प्रदान करता है।

डॉ. एला ने बताया कि इस टीके के जरिए हमने ऐसा कोविड प्रतिरक्षक तंत्र विकसित किया है, जो अमेरिका में भी नहीं है। यह नेजल वैक्सीन आईजीए म्यूकोसेल इम्युनिजी प्रदान करता है। बता दें, चीन में ओमिक्रॉन के नए वैरिएंट बीएफ.7 के कारण बुरा हाल है। लाखों की संख्या में लोग संक्रमित हो रहे हैं और हजारों मौतें हो रही हैं। ब्राजील व अमेरिका में कोविड के मामलों में बढ़ोतरी की खबर है।

किसे दी जा सकेगी नैजल वैक्सीन?

ये वैक्सीन 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को दी जाएगी। नाक से दी जाने वाली इस वैक्सीन को बूस्टर डोज की तरह इस्तेमाल किया जाएगा। बता दें कि भारत बायोटेक ने इसी साल 6 सितंबर को ये घोषणा की थी कि उसकी दुनिया की पहले इंट्रानेजल कोरोना वैक्सीन इन्कोवैक को डीजीसीआई की ओर 18 साल से ऊपर के लोगों के इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिल गई है।

कैसे दी जाएगी नैजल वैक्सीन?

नैजल वैक्सीन इन्कोवैक नाक के जरिए स्प्रे करते हुए दी जाएगी। इसे कोविशील्ड या कोवैक्सीन की तरह इंजेक्शन के जरिए नहीं दिया जाएगा। लोग इसे बड़े आराम से स्प्रे के जरिए बिना किसी तकलीफ के ले सकते हैं। आईएमए के सेक्रेटरी अनिल गोयल के मुताबिक, नेजल वैक्सीन भी दूसरी वैक्सीन की तरह ही असरकारक है। इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि इसे इंजेक्शन की तरह लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी बल्कि नाक के जरिए दिया जा सकेगा।

4 हजार लोगों पर हुआ था सफल ट्रायल

भारत बायोटेक ने करीब 4 हजार लोगों पर इस नैजल वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल किया था। इनमें से किसी पर भी वैक्सीन का कोई साइड इफेक्ट देखने को नहीं मिला था। यह वैक्सीन कोरोना इन्फेक्शन को रोकने में बहुत मददगार साबित होगी।

इसलिए होगी ज्यादा असरदार

बता दें कि कोरोना और दूसरे वायरस म्यूकोसा के के माध्यम से शरीर में प्रवेश करते हैं। म्यूकोसा नाक, फेफड़ों और पाचन तंत्र में पाया जाने वाला एक चिपचिपा पदार्थ होता है। ऐसे में नाक से दी जाने वाली नेजल वैक्सीन सीधे म्यूकोसा में ही इम्यून रिस्पॉन्स पैदा करती है, जिससे संक्रमण को जल्दी रोकने में मदद मिलती है। वहीं इंजेक्शन के जरिए शरीर में दी जाने वाली वैक्सीन ऐसा नहीं कर पाती है।   (एएमएपी)