आपको बता दें कि सीमापार से जारी आतंकवाद से भारत सर्वाधिक प्रभावित रहा है। भारत द्वारा बार-बार इस मुद्दे पर दुनिया का ध्यान आकृष्ट कराया गया है। लेकिन पाकिस्तान का रुख इस पर नहीं बदला है।

रक्षा क्षेत्र में साझेदारी
मिस्र इस्लामिक राष्ट्रों द्वारा किए जाने वाले दुष्प्रचार में शामिल नहीं रहा है, जिसकी वजह मिस्र और भारत की 75 साल पुरानी दोस्ती है। राष्ट्रपति सिसी की इस यात्रा के बाद अब दोनों देशों के बीच संबंध दो कदम और आगे बढ़े हैं। वह रणनीति साझेदारी की श्रेणी में आ गए हैं। इससे दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग मजबूत होने के आसार हैं। खासकर मिस्र और भारत के बीच रक्षा क्षेत्र में औद्यौगिक साझीदारी शुरू हो सकती है। जिसके तहत भारत और मिस्र की रक्षा कंपनियां वहां साझीदारी में कारखाने स्थापित कर सकते हैं।
मिस्र भारत से मिसाइल, लड़ाकू विमान तथा अन्य रक्षा उपकरण खरीदने का इच्छुक है। इसी प्रकार अंतरिक्ष क्षेत्र में भी वह भारत की मदद चाहता है। सैद्धान्तिक तौर पर भारत इस पर सहमत भी है तथा इस दिशा में दोनों देशों के बीच बातचीत का दौर पहले से ही चल रहा है। (एएमएपी)








