येचुरी की जीत का अपना गठित, टिपरा मोथा पर टिकी हैं निगाहें
येचुरी का कहना है कि बीजेपी और उसकी सहयोगी इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) ने पिछले चुनाव में जनजातीय इलाकों की 20 में से 18 सीटें जीती थीं। राज्य विधानसभा की 60 में से 20 सीट जनजातीय क्षेत्रों के लिए आरक्षित हैं। बीजेपी ने 2018 में कुल 36 सीटें जीती थीं, जिनमें से आधी सीट जनजातीय क्षेत्र से मिली थीं। इस बार जनजातीय क्षेत्रों में टिपरा मोथा सबसे आगे हैं। येचुरी ने कहा कि आईपीएफटी को बीजेपी ने सिर्फ पांच सीटें दी हैं। इसका लाभ हमें होगा। वहीं, पिछले चुनावों में सीपीएम को मिले 42.22 प्रतिशत और कांग्रेस के दो प्रतिशत वोटों की तुलना में बीजेपी को 43.59 फीसदी वोट मिले थे, हमें पिछली बार से इस बार अधिक मिलेगा।
येचुरी ने यह भी माना है कि टिपरा मोथा के साथ कोई चुनाव पूर्व गठबंधन नहीं है, लेकिन आदिवासी पार्टी के साथ स्थानीय स्तर पर कुछ समझ कायम हो सकती है, जो राज्य के मौजूदा चुनावों में तीसरे ध्रुव के रूप में उभरी है। हालांकि वर्ष 1977 में छह महीने के लिए विपरीत ध्रुवों पर स्थित यह दोनों पार्टियां ज़रूर एक साथ आई थीं और एक समझौते के ज़रिए सरकार का संचालन भी किया था, पर ये उनका निर्णय असफल ही साबित हुआ था।
विकास के आधार पर भाजपा को है जीत का भरोसा
इसके उलट त्रिपुरा में भाजपा के द्वारा किए गए विकास के कार्यों की अपनी लम्बी लिस्ट है, इसलिए भाजपा का मानना है कि जिन्हें हमारी सरकार में रहते हुए लाभ मिला है और आम नागरिकों का जो सामान्य जीवन सुखमय हुआ है, उसे देखते हुए त्रिपुरा का वोटर फिर से भाजपा के साथ ही आएगा। इसके साथ ही इस बार के अपने संकल्प पत्र (घोषणापत्र) में राज्य की सत्ता में लगातार दूसरी बार आने के लिए पार्टी की ओर से कई वादे किए गए हैं। चुनावी घोषणा पत्र में आर्थिक कमजोर वर्ग के लोगों, महिलाओं, छात्र-छात्राओं, आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और किसानों पर फोकस किया गया है।

भाजपा के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार ने राज्य में विकास को तेज गति दी
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में त्रिपुरा में चुनाव प्रचार किया, जिसमें उन्होंने साफ कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार ने राज्य में विकास को तेज गति दी है। राज्य की पूर्ववर्ती मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और कांग्रेस की गठबंधन सरकार ने राज्य के विकास को बाधित करने का काम किया था। लेकिन अब यहां का दृष्य पूरी तरह से बदला हुआ है। त्रिपुरा एक हिंसाग्रस्त या पिछडे राज्य के रूप में नहीं पहचाना जाता।
त्रिपुरा के चुनाव प्रचार में इस बार दिख रहा असली लोकतंत्र
इस वर्ष विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य में कई राजनीतिक दलों के झंडे दिखाई दे रहे हैं लेकिन पांच साल पहले यह संभव नहीं था, तब केवल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का झंडा दिखाई देता था। भाजपा सरकार ने राज्य को इस दहशत से मुक्ति दिलाई है। इसके साथ ही सातवें वेतन आयोग के लागू होने से राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों का वेतन बढ़ा है। पहले त्रिपुरा के लोगों को पुलिस थाने पहुंचने में दिक्कत आती थी, लेकिन अब भाजपा के राज में ऐसा नहीं है। एक समय ऐसा था जब हिंसा के कारण राज्य में लड़कियों और महिलाओं को काफी अत्याचार सहने पड़ते थे लेकिन अब वे सशक्त हो गई हैं और उनका जीवन बेहतर हो गया है।
त्रिपुरा बन रहा दक्षिण पूर्व एशिया का प्रवेश द्वार
प्रधानमंत्री बताते हैं कि पिछले चुनाव में उन्होंने राज्य के लोगों से राजमार्ग, इंटरनेट, रेल और हवाई सेवाओं की सौगात देने का वायदा किया था। इस दिशा में प्रयास जारी हैं। राज्य के हर गांव में आप्टिकल फाइबर नेटवर्क बिछाने का काम हो रहा है। सरकार त्रिपुरा को पूर्वोत्तर के अन्य क्षेत्रों के साथ जल मार्ग, सडक मार्ग और रेल मार्ग से जोडने का प्रयास कर रही है। त्रिपुरा दक्षिण पूर्व एशिया का प्रवेश द्वार बन रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना ने लोगों का जीवन बदल दिया है। इस योजना के तहत पिछले पांच वर्षों के दौरान भाजपा सरकार ने तीन लाख गरीब परिवारों के लिए पक्के मकान बनाए हैं। जबकि इसके विपरीत मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और कांग्रेस के शासन में राज्य के लोगों ने बहुत दुख उठाए, कहीं भी अच्छे अस्पताल नहीं थे और न ही लोगों के पास इलाज के लिए पैसे थे। वाम दल और कांग्रेस के शासन में राज्य में बुनियादी सुविधाओं के अभाव से लोगों का जीना दूभर हो गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों ही दलों की सरकारों ने लोगों को मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित रखा। लेकिन अब भाजपा के शासन में दो लाख से ज्यादा गरीब लोगों को आयुष्मान योजना का लाभ मिल रहा है।
अब यह राज्य पिछड़ा नहीं रहा, ऐसे में फिर भाजपा की सरकार आने की उम्मीद बरकरार
प्रधानमंत्री का कहना है कि राज्य की डबल इंजन वाली भाजपा सरकार ने त्रिपुरा को एक नई पहचान दी है। अब यह राज्य पिछड़ा नहीं रह गया है। भाजपा सरकार ने राज्य के साढ़े तीन लाख परिवारों को मुफ्त बिजली और चार लाख परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराने का काम किया है। राज्य सरकार गरीबों, महिलाओं और जनजातीय लोगों का जीवन-स्तर सुधारने के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्रीय बजट में प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए 80 हजार करोड रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही त्रिपुरा में सभी जरूरतमंद लोगों के लिए पक्के मकान का आश्वासन भी दिया गया है। अब ऐसे में बहुत उम्मीद यही दिख रही है कि त्रिपुरा की जनता फिर से भाजपा को विकास के आधार पर एक मौका शासन चलाने के लिए और दे दे। (एएमएपी)



