घाटी की मस्जिदें और मदरसे रडार पर,जुटाया जा रहा डेटा।
प्रदीप सिंह।कश्मीर घाटी में देश की सुरक्षा और इंटेलिजेंस एजेंसियां इस समय एक अभियान चला रही हैं। वहां जितनी भी मस्जिदें और मदरसे हैं,उनका एक तरह का सर्वेक्षण चल रहा है। उनको एक फॉर्म दिया गया है, जिसमें उनको बताना है कि यह मस्जिद कब बनी,इसके लिए पैसा कहां से आया,मैनेजमेंट कमेटी के सदस्य कौन है,उनके सारे पर्सनल डिटेल,मोबाइल और आईएमईआई नंबर,सब लोगों के बैंक डिटेल्स और ट्रैवल हिस्ट्री। इसके अलावा उनको यह भी बताना है कि किस सेक्ट से जुड़े हुए हैं। मतलब वे बरेलवी हैं,देवबंदी है,हफी हैं या अहले हदीस को मानने वाले हैं।अब सवाल है कि यह क्यों हो रहा है? हाल ही में लालकिले के पास एक डॉक्टर ने बम ब्लास्ट कर खुद को उड़ा लिया था। वह अलफला यूनिवर्सिटी का डॉक्टर था। जांच पड़ताल में कश्मीर घाटी के नौगाम की एक मस्जिद के बारे में जानकारी मिली। पता चला कि उस मस्जिद का मौलवी आतंकवाद के लिए पढ़े लिखे लोगों खासतौर से डॉक्टर,इंजीनियर का रिक्रूटमेंट कर रहा था। गुजरात समेत देश के अन्य हिस्सों से भी कई लोगों को पकड़ा गया। उसके बाद से कश्मीर घाटी में सुरक्षा एजेंसियों ने मस्जिदों और मदरसों के सर्वेक्षण का काम शुरू किया।

दुनिया में कहीं भी आतंकवाद हो, उसकी जड़ आपको जम्मू कश्मीर और देवबंद में मिलेगी। 1947 में शेख अब्दुल्ला का जो सोचना था, कश्मीर घाटी का मुसलमान आज भी वही सोचता है। वह अपने को भारत का हिस्सा मानता ही नहीं है। कश्मीर में आप कितना भी विकास करा दीजिए उनको कोई फर्क नहीं पड़ता। उनको इन सब चीजों की जरूरत नहीं है। उनको जरूरत है पाकिस्तान के साथ और भारत से अलगाव की। मजबूरी में पासपोर्ट पर उनको भारतीय लिखना पड़ता है। इसीलिए कश्मीर में जब भी कोई आंदोलन होता है तो नारे लगते हैं-हमको चाहिए जिन्ना वाली आजादी। जिन्ना की आजादी क्या थी? भारत को तोड़कर पाकिस्तान बनाना। और अब तो इनकी विचारधारा देश के दूसरे हिस्सों में भी फैल रही है। जेएनयू में तो आए दिन ऐसा देखने को मिलता है। दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगे के दौरान शरजील इमाम और उनके साथियों ने ‘हमको चाहिए जिन्ना वाली आजादी’नारे लगाए थे।
आप देखिए पाकिस्तान की आईएसआई और वहां के आतंकी सगठनों को सबसे ज्यादा समर्थन कहां से मिलता है? घाटी के मुसलमानों से। आतंकवादी जिन निर्दोष लोगों को मारते हैं उनसे कश्मीर घाटी के लोगों को कोई सहानुभूति नहीं है। पहलगाम की घटना पर आपको जो मोमबत्ती का जुलूस दिखाई दिया,वह सिर्फ धोखा है। सिर्फ यह दिखावा करने के लिए कि हम आतंकियों के साथ नहीं है। तो यह जो मस्जिदों की प्रोफाइलिंग हो रही है,इसके बाद एक्शन भी होना चाहिए। आ रहे धन का सोर्स अगर वह डिस्क्लोज नहीं करते हैं तो मुकदमा चलना चाहिए। जेल भेजा जाना चाहिए। देश में आतंकवादी बनाने का काम मदरसों में ही होता है। अब भी अगर कड़े कदम नहीं उठाए गए तो देश के एक और विभाजन के लिए तैयार रहिए।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक और ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)



