आपका अख़बार ब्यूरो।
देश में राज्यसभा की 37 सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर तस्वीर लगभग साफ हो गई है। नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 10 मार्च 2026 के बाद सात राज्यों की 26 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए, जबकि बिहार, हरियाणा और ओडिशा की 11 सीटों पर 16 मार्च को मतदान होगा। इन सीटों पर एनडीए और विपक्षी दलों के बीच कड़ा मुकाबला होने की संभावना है।
सात राज्यों में 26 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित

इस चुनावी चरण में सात राज्यों की सीटों पर निर्विरोध चुनाव संपन्न हो चुका है। इनमें कई प्रमुख राजनीतिक चेहरे शामिल हैं। निर्विरोध चुने गए नेताओं में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के वरिष्ठ नेता शरद पवार, केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले, भाजपा नेता विनोद तावड़े और महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार भी शामिल हैं।
इसके अलावा लोकसभा के पूर्व उपाध्यक्ष एम. थंबीदुरई और कांग्रेस के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी भी राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं।
महाराष्ट्र में सभी सात सीटों पर निर्विरोध चुनाव
महाराष्ट्र की सातों सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं। इनमें सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के छह और महाविकास अघाड़ी के एक उम्मीदवार शामिल हैं। निर्विरोध निर्वाचित नेताओं में महाराष्ट्र के दिग्गज नेता एनसीपी (एसपी) के शरद पवार, केन्द्रीय मंत्री रामदास अठावले, भाजपा के वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े, भाजपा के ही रामराव वडकुटे और नागपुर की पूर्व मेयर माया इवनाते, एकनाथ शिंदे की शिवसेना से ज्योति वाघमारे और एनसीपी के पार्थ पवार शामिल हैं।
पश्चिम बंगाल में पांच सीटों पर निर्विरोध परिणाम

पश्चिम बंगाल की पांच सीटों पर भी निर्विरोध चुनाव हुआ है। इनमें तृणमूल कांग्रेस के चार उम्मीदवार—बाबुल सुप्रियो, राज्य के पूर्व डीजीपी राजीव कुमार, सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी और अभिनेत्री कोयल मल्लिक—चुने गए हैं। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा भी निर्विरोध राज्यसभा पहुंच गए हैं।
तमिलनाडु की सभी छह सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन

तमिलनाडु में राज्यसभा की सभी छह सीटों पर चुनाव बिना किसी मुकाबले के संपन्न हो गए हैं। नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी छह उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए, क्योंकि छह सीटों के लिए कुल छह उम्मीदवार ही मैदान में थे। निर्विरोध चुने गए नेताओं में अन्नाद्रमुक (AIADMK) के मौजूदा सांसद एम. थंबीदुरई, पीएमके (PMK) के प्रमुख नेता अंबुमणि रामदास, सत्तारूढ़ द्रमुक (DMK) के वरिष्ठ नेता तिरुची शिवा और जे. कॉन्स्टेंटाइन रवींद्रन, कांग्रेस के एम. क्रिस्टोफर तिलका तथा डीएमडीके (DMDK) के कोषाध्यक्ष एल.के. सुधीश शामिल हैं। इन सभी उम्मीदवारों के खिलाफ कोई अन्य प्रत्याशी मैदान में नहीं उतरा, जिसके चलते राज्यसभा की छहों सीटों पर चुनाव निर्विरोध संपन्न हो गया।
असम और तेलंगाना में भी निर्विरोध निर्वाचन
असम की तीन सीटों पर एनडीए के उम्मीदवार—जोगेन मोहन, तेरश गोवाला और यूपीपीएल के प्रमोद बोरो—निर्विरोध चुने गए हैं। वहीं तेलंगाना की दो सीटों पर कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी और वेम नरेंद्र रेड्डी निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं।
इन राज्यों में होगा चुनाव
राज्यसभा की जिन सीटों के लिए चुनाव होना है, उनमें बिहार, ओडिशा, तेलंगाना और हरियाणा शामिल हैं। हालांकि इनमें से अधिकांश राज्यों में परिणाम लगभग तय हैं, लेकिन बिहार, हरियाणा और ओडिशा में निर्धारित सीटों से अधिक उम्मीदवार मैदान में होने के कारण मुकाबला रोचक हो गया है।
ओडिशा में चौथी सीट पर टक्कर
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ओडिशा की चार सीटों के लिए पांच उम्मीदवार मैदान में हैं। भाजपा ने मनमोहन सामल और सुजीत कुमार को उम्मीदवार बनाया है और दिलीप रे को समर्थन दिया है। वहीं बीजेडी ने संतृप्त मिश्रा और कांग्रेस ने डॉ. दत्तेश्वर मिश्रा को मैदान में उतारा है। भाजपा के दो और बीजेडी के एक उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि चौथी सीट के लिए दिलीप रे और दत्तेश्वर मिश्रा के बीच मुकाबला होगा।
बिहार में पांचवीं सीट पर दिलचस्प लड़ाई

बिहार की पांच सीटों के लिए छह उम्मीदवार मैदान में हैं। भाजपा ने नितिन नवीन और शिवेश कुमार को उम्मीदवार बनाया है, जबकि जेडीयू ने नीतीश कुमार और रामनाथ ठाकुर को उतारा है। एनडीए की ओर से पांचवें उम्मीदवार के रूप में उपेंद्र कुशवाहा मैदान में हैं। वहीं आरजेडी ने अमरेंद्र धारी सिंह को उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
हरियाणा में भी बनेगा रोचक समीकरण
हरियाणा की दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। भाजपा ने संजय भाटिया को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने कर्मवीर बौद्ध को उतारा है। निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल भी चुनाव मैदान में हैं और उन्हें भाजपा का समर्थन प्राप्त है। ऐसे में एक सीट भाजपा के खाते में जाती दिख रही है, जबकि दूसरी सीट के लिए कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवार के बीच मुकाबला होने की संभावना है।
राज्यसभा चुनाव के इस दौर के बाद उच्च सदन में भाजपा की संख्या और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, जिससे वह राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकती है।



