मुस्लिम वोट का वीटो खत्म ।

#pradepsinghप्रदीप सिंह।
मैंने बहुत पहले कहा था- 4 मई दीदी गई। तो ममता बनर्जी के शासन की विदाई हो गई और मेरा मानना है कि उनकी राजनीतिक विदाई भी हो गई है। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड बहुमत से सरकार बन रही है। लेकिन पश्चिम बंगाल के इस जनादेश का मतलब क्या है? आप कह सकते हैं कि वहां पहली बार भाजपा सत्ता में आ रही है। पहले कांग्रेस फिर लेफ्ट फ्रंट और उसके बाद टीएमसी, तीनों के शासन की विदाई हो गई। लेकिन मेरी नजर में ये सब बातें गौण हैं। चुनावी राजनीति में कोई सत्ता से बाहर जाए या कोई सत्ता में आ जाए, यह सामान्य प्रक्रिया है। स्थाई रूप से क्या बदला है, बात इसकी होनी चाहिए।

पश्चिम बंगाल में 49 साल बाद कोई नेशनल पार्टी सत्ता में आई है। मैं सीपीएम या सीपीआई को नेशनल पार्टी नहीं मानता। भले ही चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में औपचारिक तौर पर उनको नेशनल पार्टी का दर्जा मिला हुआ हो। सीपीआई 1925 में बनी थी। 100 साल की यात्रा में भी कम्युनिस्ट तीन राज्यों पश्चिम बंगाल,त्रिपुरा और केरल से बाहर नहीं जा पाए। पश्चिम बंगाल केवल राजनीतिक दृष्टि से नहीं, देश की सुरक्षा की दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण राज्य है। वहां जिस तरह राज्य सरकार की मदद से डेमोग्राफी बदली जा रही थी। जिस तरह से बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसाया जा रहा था। लोग मजाक में बोलने लगे थे कि अगर ममता बनर्जी एक-दो बार और मुख्यमंत्री बन गईं तो भारत के लोगों को पश्चिम बंगाल वीजा लेकर जाना पड़ेगा। तो भाजपा की जीत से पहला असर यह हुआ है कि राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत हुई है। देश की सीमा मजबूत हुई है। अब घुसपैठियों का आना लगभग बंद हो जाएगा। दूसरी बात जो देश,सनातन धर्म और मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण है, वह है-पश्चिम बंगाल में राष्ट्रवादी हिंदुत्व की घर वापसी हुई है।
Newsband - City BJP workers celebrate Bengal victory
ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि पश्चिम बंगाल ऐसा राज्य है, जो पूरी तरह से राष्ट्रवादी हिंदुत्व का गढ़ रहा है। यहां बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय 1880 से राष्ट्रीय हिंदुत्व का झंडा उठाकर चल रहे थे। उनका लिखा वंदे मातरम आज भी गाया जा रहा है। दूसरा,जनसंघ की स्थापना डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की, जो कोलकाता यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर रहे। उन्होंने वीर सावरकर के नेतृत्व में हिंदू महासभा ज्वाइन की और 1946 में हिंदू महासभा के अध्यक्ष बने। हिंदू महासभा के अध्यक्ष के तौर पर उनकी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका यह रही कि पश्चिम बंगाल को उन्होंने पाकिस्तान में नहीं जाने दिया। उन्होंने कहा कि जब पंजाब का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ है तो बंगाल का क्यों नहीं? तो पश्चिम बंगाल विभाजन के समय भारतीय हिंदुओं के लिए मिला था। जिसकी डेमोग्राफी अब तेजी से बदल रही है। वहां 30% मुसलमान हो गए हैं। अक्टूबर 1951 में जनसंघ की स्थापना हुई और 1952 में पहला लोकसभा चुनाव हुआ। उस समय जनसंघ को पूरे देश में तीन लोकसभा सीटें मिलीं। इनमें से दो सीटें पश्चिम बंगाल से मिलीं। दक्षिण कोलकाता से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और झारग्राम से दुर्गा चरण बनर्जी जीते थे। दोनों भद्रलोक से आते थे। अब इस बात को समझिए कि भाजपा की जड़ें कहां थीं? हिंदू राष्ट्रवाद पर लेखन में वीर सावरकर सबसे प्रभावशाली माने जाते हैं। वीर सावरकर से भी चार दशक पहले बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय हिंदू राष्ट्रवाद की अलख जगा रहे थे। पश्चिम बंगाल से ही भारत माता की जय और जय हिंद का नारा निकला। हिंदू राष्ट्रवाद की शुरुआत ही पश्चिम बंगाल से हुई। यह अफसोस की बात है कि उसके बाद जिन दलों का शासन आया उन्होंने इसे खत्म करने की पूरी कोशिश की। आजादी के बाद पहले 30 साल कांग्रेस और फिर 34 साल लेफ्ट फ्रंट के शासन ने मुसलमानों को बढ़ाने, डेमोग्राफी बदलने, हिंदुत्व को हर स्तर पर दबाने-कुचलने का काम किया। कम्युनिस्टों से बड़ा इस्लामी जिहादियों का समर्थक दुनिया में कोई नहीं है। उसके बाद ममता बनर्जी आईं। वह लेफ्ट फ्रंट से भी आगे निकल गईं। उनको लगा कि अगर सत्ता में लगातार बने रहना है तो हिंदुओं को दुत्कारो और मुसलमानों को पुचकारो। बांग्लादेशी घुसपैठिए उनके लिए प्रिय और पश्चिम बंगाल के हिंदू बंगाली उनके दुश्मन हो गए। उनको मालूम था कि हिंदुओं का एक वर्ग सेकुलरिज्म के झांसे में आकर हमारा साथ देगा। ऐसा हुआ भी। लेकिन हिंदू धीरे-धीरे जागता है,जब उसे लगता है कि अब अस्तित्व पर खतरा आ गया है। पश्चिम बंगाल में यही हुआ और तमिलनाडु में भी यही कहानी आपको देखने को मिलेगी। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन के पुत्र उदयनिधि स्टालिन का वह बयान याद कीजिए कि सनातन धर्म बीमारी है और इसका समूल नाश होना चाहिए। तमिलनाडु में आज उस पार्टी और उस परिवार का समूल राजनीतिक नाश हो गया है। तो सनातन का नाश करने का सपना देखने वालों का क्या हश्र होता है, यह इन दो राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे बता रहे हैं।

पहले उत्तर प्रदेश फिर असम और अब पश्चिम बंगाल, मुस्लिम वोट का वीटो नरेंद्र मोदी की पार्टी ने खत्म कर दिया है। मुसलमान 40% तक हों तब भी उनका वीटो नहीं चलेगा, यह करके दिखाया है। तो पश्चिम बंगाल में हिंदू राष्ट्रवाद की पुनर्स्थापना हुई है। भाजपा इस देश की सबसे बड़ी और सबसे शुद्ध बंगाली पार्टी है। दुर्भाग्य की बात है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ज्यादा समय तक नहीं रहे और पश्चिम बंगाल में जनसंघ का दूसरी कतार का नेतृत्व नहीं था इसलिए हिंदुत्व वहां कमजोर पड़ता चला गया। ममता बनर्जी ने तो सनातन धर्म से सीधी लड़ाई मोल ले ली। उनके रहते हिंदुओं का कोई ऐसा त्योहार नहीं हुआ जिस पर हमला न हुआ हो। हर जुलूस पर पथराव होता रहा। जय श्री राम बोलना एक तरह से अपराध बन गया। आपको याद है 2021 के चुनाव के दौरान जब ममता बनर्जी का काफिला गुजर रहा था तो कुछ बच्चों ने जय श्री राम का नारा लगा दिया था। ममता बनर्जी ने काफिला रोक कर पुलिस से कहा कि इनके खिलाफ कार्रवाई करो। उसका जवाब इस चुनाव में एक महिला ने दिया। कहा- अल्लाहू अकबर बोल सकते हैं और जय श्री राम नहीं बोल सकते। ऐसा कैसे? कुछ बुद्धिजीवी, जो अपने को बहुत काबिल समझते हैं, उनका तर्क है कि राम पश्चिम बंगाल में नहीं चल सकते। यह सही बात है कि पश्चिम बंगाल हो या असम, ये इलाके शक्तिपीठ हैं। यहां देवी की पूजा होती है। लेकिन राम पश्चिम बंगाल की संस्कृति में नहीं हैं, दिमागी दिवालियापन का इससे बड़ा उदाहरण क्या होगा? आपने महर्षि वाल्मीकि रचित रामायण के बारे में सुना होगा। गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना की। तमिल में जो रामायण है, उसका नाम है कुंभन रामायण और बांग्ला में भी बहुत लोकप्रिय रामायण है, जिसका नाम है कृतिवास रामायण। पश्चिम बंगाल के ज्यादातर घरों में इसकी प्रति मिलेगी। तो ये तथाकथित बुद्धिजीवी एक एजेंडे के तहत काम करते हैं। एक नैरेटिव बनाने की कोशिश करते हैं कि राम कई प्रदेशों की संस्कृति में नहीं हैं। जबकि राम सनातन धर्म की आत्मा हैं। राम हर समय में हर युग में हर जगह पर चलेंगे। यह बात हिंदुओं ने साबित करके दिखा दी कि पश्चिम बंगाल में जय श्री राम चलेगा। अल्लाहू अकबर नहीं चलेगा। तो हिंदू राष्ट्रवाद का जो स्वाभाविक घर है, वहां वह लौट कर आया है।
आप देखते रहिए पश्चिम बंगाल पूरी तरह से बदलने वाला है। एक समय था जब पश्चिम बंगाल आर्थिक क्षेत्र में देश के तीसरे नंबर का राज्य था। लेकिन आज 22वें-23वें नंबर पर खड़ा है। इंडस्ट्री को यहां आने नहीं दिया गया। ममता बनर्जी सरकार ने जो ताजा बजट पेश किया उसमें इंडस्ट्रियलाइजेशन के लिए केवल 1100 करोड़ जबकि मुसलमानों की अलग-अलग योजनाओं के लिए 5700 करोड़ से ज्यादा की व्यवस्था की गई। इससे आप अंदाजा लगा लीजिए कि सरकार का उद्देश्य क्या था? ममता बनर्जी की सरकार का उद्देश्य पश्चिम बंगाल का इस्लामीकरण करना था। उनकी हार का मतलब है कि पश्चिम बंगाल के इस्लामीकरण का प्रोजेक्ट रुक गया और वह कभी नहीं खड़ा हो पाएगा। हिंदुओं को समझ में आ गया कि अगर अब नहीं जागे तो फिर जागने का मौका भी नहीं बचेगा। इसलिए आप नतीजे देख लीजिए। 75-80% तक हिंदुओं ने भाजपा को वोट किया। यह राष्ट्रवादी हिंदुत्व के पुनर्जागरण की जीत है और यह पुनर्जागरण ऐसी जगह से हुआ है, जो इसका उद्गम है। यह जीत केवल पश्चिम बंगाल नहीं, पूरे देश के पॉलिटिकल मैप को बदल देगी।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘आपका अखबार’ के संपादक हैं)